Wet eyes - 4 in Hindi Motivational Stories by Nandini Agarwal Apne Kalam Sein books and stories PDF | नम आँखे - 4

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नम आँखे - 4

अभिनव -नैन्सी आपस में बाते करते है। देखो न देखते ही नम आँखे देखते दोनो बच्चो का इस साल इण्टर है। अगली साल से इनका कॉलेज शुरु हो जायेगा।

झ्न का केरियर बनाना है। भविष्य में कामयाब व्यक्ति बन कर खड़े होंगे तो अच्छा होगा।

फरवरी मे बच्चो के एंग्जाम शुरू है। इस बार होली का त्यौहार भी पेपरो के बीच पड़ेगा । पहले से तैयारी करा कर रखना ' बच्चे होली का भी मजा ले पायेंगे

अपने -अपने रूम में है। दोनो बच्चे अलार्म लगा कर उठ कर पढ़ते है। मोबाइल तो जीवन का एक हिस्सा बन गया है। इसके बिना सारे काम अधूरे है। अच्छा देखोगे त्रे अच्छा ज्ञान मिलेगा वरना गलत तरह पर चलना घातक ही होता है।

एक हमारा समय था। किताबो के पीछे भागते थे। बुकस्लेलर के यहां लाइन में लगते थे। कौन सा  फार्म निकल रहा है। आगे की पढ़ाई के लिय  अखवारो को टटोलते थे। कोचिंग के लिय टीचर तलाशते थे। अभिनव - माँ टीचर थी पर व्यस्त बहुत रहती थी। मै सोच रहा हूं ' अभी तो हम नौकरी पेशा वाले है। आगे रिटायरमेन्ट के बाद क्या करना है। कभी कभी विचार आता है। नैन्सी अभी इतना लम्बा मत सोचिए उससे पहले जीवन मे बहुत सी जंग लड़नी है। बच्चो का केरियर शादी विवाह जब सोचना रिटायरमेंट के बारे में पूरे फ्लोशपर हो दूर की सोचते हो।

सुबह होते ही छन पर रखे गमलो मे सजे तरह -तरह के पौधो की देखभाल शुरू कर देता है। अभिनव कितने प्यार से सींचा है । हर एक पौधे को इनको हरा भरा देखकर मेरा मन तरोताजा हो जाता है। प्रकृति ने ह्मे हर चीज ह्मे प्रेरणा देती है। किताबो पर छ्वे फूल ह्मे कितना मोह लेते है। कपड़ो पर अपनी छाप छोड़ते है। फिर ये असली तो असली है। हमारे जीवन मे प्रकृति ही हमे सीखाती है। वक्त कब बदल जाता है।

रोज की दिनचर्या की जिन्दगी में भागते - भागते क्ब समय करबट ले ले पता नही चलता है। कभी खुशी के पल कभी गम के पल जिन्दगी को जीना कहे या कर्तव्यो को पूरा करे ढग मंगाती नैया पार लगानी होती है।

नीचे से नैन्सी आवाज लगाती है। अभिनव जी जल्दी आइये आपका टिफिन तैयार है। मैं ऑफिस निकलती हूँ

धीरे-धीरे रिपोर्ट कार्ड का नम्बर भी आ जाता है।

आयुष आयुषी का समय आ जाता है। बाहर दुसरे शहर हॉस्टल मे पढ़ने का दोनो बच्चो का शहर कॉलेज अलग -अलग है। अभी तक तो दोनो एक स्कूल में थे।

नैन्सी बच्चो का सामान लगती जाती है। बैंग मे सामान रखती जाती है। कॉलेज की मिली लिस्ट के हिसाब से मन मे धुक - धुक होती रहती है। आँखो से टप ऱ्ट्प आंसू टपकते है। स्व हमारा जमाना था। अपने ही शहर मे अपने घर से पढ़ाई कर लिया कर लेते थे। ज्यादा से ज्यादा तीस चालीस किलोमीटर के रास्ते तक सीमित था।

शाम होते ही अपने घर वापस लौट लिया करते थे। अब ये नया रिवाज आया है। एक -दुसरे के शहर से पढ़ाई करनी है। जो पास मे सुविधा है। उससे कही ज्यादा बेहतर करना है। बस यही भागदौड़ मे व्यक्ति लग गया है। जाने क्या होगा इस सोच का समझ से दूर है।

तभी ऱयीछे से मम्मा - मम्मा कर आयुष -आयुषी मां दे गले लग जाते हैं। आप ऐसे उदास मत होइए ।

कैरियर बनाने के लिए भविष्य बेहतर बनाने के लिए ये त्याग तो करना पड हमारी प्यारी मम्मा जब हम  पढ़ाई पूरी कर आयेंगे आप का सर गर्व से ऊँचा होगा ।

मोबाइल है तो जो हर खबर रहेगी। हमारी जब चाहे बाते करो विडियो कॉल करो घर तो आना -जाना लगा रहेगा।

नैन्सी - बच्चो के सामने हिम्मत जुटा कर  मोबाइल मे ही दुनिया सिमिट सी गयी है।

करलो मोबाइल मुट्टी में

अभिनव - ये क्या? नैन्सी ये क्या जबाब है। ऐसे टूट जाऊंगी बच्चो का मन हमारे पास ही लगा रहेगा। उन का होसला बढ़ाओ  प्रेरित करो , ऐसे हताश नही होते है।

नैन्सी - आयुष आयुषी को गले लगाते हुए सौर मैं माँ बन रो रही थी। मैं खुद भूल गयी थी। आत्म निर्भर लेडी हूँ।

अगली सुबह दोनो बच्चो को अलग -अलग शहर कॉलेज भेजना था। धीरे-धीरे समय ऐसे ही चलता रहा। कभी होली दीवाली घर आना जाना  छूट्टी मे ऐसे ही चलता रहता है। मोबाइल की घण्टी बजते ही नैन्सी एक सैकन्ड नहीं लगाती है। बच्चो की खैर खबर लेने में आयष बेच मन लगा कर पढ़ना अपने लक्ष्य को देखते हुए मोबाइल मे फालतू बकवास चीजो से दूर रहना अपनी सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करना वेझिझव हो कर अपनी माँ से बात करना हर परेशानी का हल निकलेगा ।

अच्छा मै आयुषी को कॉल लगाती है। क्लास छूट गयी होगी। हेलो ' आयुषी बेटा राधे राधे मम्मा बस क्लास के बाद हॉस्टल पहुंचने वाली हूँ।

नैन्सी सेहत का ध्यान रखना खाने मे ज्यादा से ज्यादा घर जैसा खाना ही खाना बाहर के जंक फूड फास्ट फूड मत खाना दोस्तो के साथ स्व सीमा तक ही सीमित रहना तुम्हारा लक्ष्य पढाई है। न कि टाइम पास के लिए पढ़ाई है। तुम समझ गयी होगी मैं क्या कहना चहा रही हूँ।

रात को तुम्हारे पापा बात करेंगे दोनो भाई बहन से मुझे तैयार होना है। मन्दिर कीर्तन मे जाना है।

माँ भी न इतना सब कैसे कर लेती है। घर ऑफिस बाहर सब मैनिज कर लेती है। मेरी मम्मा महान है। बिल्कुल दादी की छवि है।

मेहनत हमारी रंग लायेगी आज नही तो कल लायेगी

बस यही असूल हैं मेरी मम्मा का ।

आज मेरा व्रत है। आप के लिए नाश्ते में क्या बना दूं । आलू परांठा दही आम का अचार लंच छोड़ देना रात को बनाना अकेले के लिए क्या परेशानी उठानी । बच्चो के सहारे चार चीजे बन जाती थी।

नैन्सी - आप ळ्ब से बच्चो को याद करने लगे।

अभिनव - पिता हूँ तो क्या मेरे अन्दर भावनाये नहीं है।

माँ की तरह पिता अपने बच्चो से कम प्यार थोड़ी करता है। आज शाम मूवी देखने चलते है। जल्दी व्रत खोल लेना रविवार भी इन्जॉय हो जायेगा ' रविवार का व्रत कैसा ?

अभिनव नैन्सी रविवा का नही पूर्णिमा है।

नौ बजे का शो है। लौटते समय काफी अच्छी पिक्चर थी। बरना आज कल ऐसी फिल्म देखने को कहाँ मिलती है।

स्च मे क्या स्टोरी थी। फेमिली के साथ देखने वाली शिक्षा संस्कार प्रेम परेशानी को कैसे ह्ल करना है।

अभिनव - चलो अब थोड़ी देर के लिए मेरे पास आ जाओ नैन्सी तुम्हारे पास तो हूं। जनाब अभिनव प्यार भरी नजरो से और पास और पास तुम भी न मन बना देते हो लाइट बंद कर के मुझे शर्म आती है। अभिनव लाइट खोल कर अच्छा चलो दोनो की बात हल्की रोशनी मे होंठ वाली किश दो न ' आह आह मिठास के साथ थोड़ा और थोड़ा और ' सुबह का . अलार्म बजते ही फिर वही भागदौड़ , आज लंच मत बनाना आज ऑफिस में ही लंच है। नैन्सी फिर अकेले के लिए क्या बनाऊंगी मैं भी कुछ बाहर ही खा लूंगी । बस नाश के लिए पोहा बना कर लाती हूं । गर्म दूध ' चाय कॉफी । बस दो मिनट लगेंगे ऑफिस साथ में निकलते है।

तभी अभिनव का मोबाइल रिंग बजती है। नैन्सी - किस का फोन है। अभिनव - गिर्राज नगर पहुँचना होगा जस्ट नैन्सी मेरे घर मायके का फोन था सब सही तो है। तु - बस बिना सवाल किये चलो मै गाड़ी निकलता हूँ। । नैन्सी मेरा दिल बैठा जा रहा है। तरह - तरह के विचार आ रहे है । प्लीज बताओ न ।

अभिनव तुम्हारे पापा को हार्ट अटैक आया है। अब वो इस दुनिया मे नही रहे।

नैन्शी - जैसे पूरी दुनिया ही हिल गयी हो- मैं कैसे इस हाल में पापा को देखूंगी। रो रो कर कह रही थी।

मेरे पास शब्द बहुत कष्टमय समय होता है। नैन्शी को गले सहारना देता है । '

नैन्सी - देखो न पापा को गये पन्द्रह दिन हो गये। अभी भी मुझे ऐसा लगता है। जैसे मेरे आस पास है। समय चलते सब जख्म भर जायेंगे । दुनिया रुकने वाली नहीं है। हमे चलना होगा ' यही जीवन है। नैन्सी अभिनव से कहती है । कितने प्यार से संभालते हो , बस यही अदा मार डालती है। मुस्कान के साथ ।

नैन्सी अभिनव से पापा की चाहत थी मैं सरकारी अफसर बनू बत्तियों वाली गाड़ीयों मे घूमू मेडम मेड़म कहकर सम्मान मिले ह्य को किसी की कामयाबी देखकर कितना गर्व महसूस होता है। सर ऊँचा हो जाता है। अपने देश को आगे बढ़ते देख कर।

अभिनव - कितनी भोली हो जीवन मे इतना सत्यता नही होती है। जितना ह्म सोचते है। देखो न मेरी किस्मत बचपन में पिता का साया उठ गया । माँ की बदोलत हूँ जो भी हूँ पिता होते शायद किस्मत जब कुछ और होती।

अभिनव नैन्सी दोनो एकसाथ जैसे भी है हम खुश है। अपने परिवार के साथ जो मुझे तुम मिले हो हां हां हां दोनो ने एक साथ एक ही स्वर में एक ही शब्द बोले

कल दोनो बच्चे घरआयेगे हॉस्टल खाली हो रहे है।

गर्मियों की छुटि्टयों के लिए दोनो का लास्ट साल भी है। हमारे जीवन की फिर से एक नयी शुरुआत होगी।

_ बस ऐसे ही जीवन पीढी - दर पीढी चलता रहता है।

नैन्सी देखो आयुष आयुषी दोनो की शरारत नही गयी भाई बहन की नौक झौक फिर शुरु हो गयी। दोनो की पसंद का खाना बनाया है। मैने भी ऑफिस से छुट्टी ले ल है। दोनो के साथ समय बीताने के लिय ।