💓हम फिर से मिले मगर इस तरह💓
🌹ऐपीसोड़ -16🌹
इधर अरुण वुडन हाऊस पहुंच जाता है, फिर वह स्क्रिप्ट पर थोड़ा काम करता है,,, फिर बाकी के काम निपटा सोने की तैय्यारी करने लगता है,,, तब वह आज के दिन के बारे मे सोचता है,,, उसने किस तरह अपना वक्त रूपाली की साथ बिताया जो कितना खुबसुरत और यादगार था, वह सोचता है,, ना चाहते हुए भी वह रुपाली के कितना करीब आ चूका है, और अब तो वह रुपाली को किस भी कर चूका है वो भी दो बार, पता नही रुपाली क्या सोचती होगी उसके बारे मगर उसका दिल जानता है रुपाली आज भी उसे उतना ही प्यार करती है .
वह रुपाली और खुद के बारे मे सभी अच्छा ही सोच रहा होता है, तभी उसके दिमाग मे वह सभी इंसीडंट भी आ जाते है, जो शायद अच्छे नही थे बल्कि एक पहली बन चूके थे, पहले तो वह सपने जो हर रात को उसे सोने नही देते फिर आज दिन मे जो हुआ और फिर रूपाली के घर की ओर जाते हुए जितने लोगो को उसने देखा और वहा की सभी चीजे जो अब एक उलझन मे डाल रहे थे, और एक ऐसी गुत्थी बनकर सामने आ रही थी जिसका जवाब अब उसे ढूढ़ना था, मगर कैसे ये एक सवाल था, जो उसे यहा रहेकर ही पता चल पायेगा, और इस गुत्थी की एक कड़ी शायद रुपाली भी थी,
रूपाली अपने आप मे एक मिस्टरी थी वैसे तो वह अपने ज्यादा बोलने के अन्दाज मे सब बयां कर देती है, मगर कुछ बाते है जो उसे दुख और तकलीफ भी पहुंचाये तो भी किसी को भनक नही लगने देती, रूपाली उससे जरूर कुछ छिपा रही थी जो शायद उसे तकलीफ दे रहा था, शायद कुछ ऐसा जैसा अरुण फैस कर रहा है या फिर कुछ और जो शायद और मुश्किल भरा हो .
आज सुबह जब अरुण सोकर उठा तो उसे वह भयानक सपना नही आया बल्कि उसके साथ सुबह सुबह-सुबह कुछ अजीब होने लगा, उसका सर भारी होने लगता है और उसे इस बार फिर से वह झलकिया दिखाई देने लगी , जिस तरह की उसे उस पहाड़ी पर दिखाई ही थी, जो डरावनी तो नही थी मगर हैरान करने वाली बात ये थी कि उन झलकियो मे वह रूपाली को देखता है, जो उस जंगल के रास्ते से गुजर रही थी, उसके होठो पर एक मुस्कान थी, वह उसे वहा देखकर आश्चर्यचकित हो जाता है और वह उसको आवाज न देखकर उसका पिछा करने लगता है, और पिछा करते करते वह जंगल से बाहर आ जाता है उसी रास्ते पर जहा रूपाली के घर का रास्ता था, और उस रास्ते पर वह सभी लोग अभी भी वहा मजूद थे वैसे ही जैसे उसने देखा था, अब रुपाली उसके आंखो के सामने से ओझल हो गई .
वह इधर उधर नजर दोड़ाता है उसे वह कुछ नजर नही आता, फिर उसे किसी के गुन गुनाने की आवाज सुनाई देती है, जो उसे पहले भी सुन चूका था,
फिर उसके कदम उस आवाज की ओर आगे बढ़ते जाते है
और वह उस आवाज के करीब पहुंच जाता है, वहा पहुंच कर उसे गिले बालो मे कपड़े सुखाती हुए रूपाली नजर आती है, जो शायद कुछ गुन गुन रही थी, या कोई गाना अपनी मीठी सी आवाज में गा रही थी, वह उसको देख अपने बड़ते कदम रोक लेता है और उसको कुछ वक्त देखता है, वह उस वक्त इतनी खुबसुरत और दिलकश लग रही थी, मानो कोई अप्सरा साक्षात उसके सामने खड़ी हो,
फिर वह धीरे से उसकी तरफ कदम बढ़ाता है,,, उसके करीब पहुंचकर उसका नाम पुकारता है,,,रूपाली,, जिसे सुन वह पिछे मोड़ती है,,, वह अरुण को वहा देख हैरान होती है,,, अगले ही पल उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है,,, जिसे देखकर अरुण खुदको रोक नही पाता,,वह भाग कर रुपाली के पास जाता है उसे गले से लगा लेता है, वह उससे कहे पाये उससे पहले ही एक बड़ा सा हवा का झोका आता है,,, और फिर एक दम से सब गायब हो जाता है, वहा पर ना रूपाली थी ना वह घर और नहीं उस गांव के रास्ते में मोजूद घर, वह एक झटके के साथ उन झलकियो से बाहर आता है तो वह अपने आप को उस रास्ते पर पाता है जो इस जंगल से बाहर रूपाली के घर की ओर जाता है, वह बहुत आश्चर्य मे पढ़ जाता है कि वह यहा कैसे आ गया वह वहा वुडन हाऊस में था तो यहा कैसे, तभी उसके कंधे पर हाथ रख कर उसका नाम कोई पुकरता है, तो पिछे मुड़कर देखता है तो वहा रूपाली खड़ी थी जो बेहद गुस्सा नजर आ रही थी .
रुपाली गुस्से से... “तुम्हारी प्रोब्लम क्या है अरुण” तुम्हे मैंने कल रात भी मना किया था, मेरे घर पर आने के लिए और तुम हो की सुबह हुई नही कि तुम पहुंच गए, कोई फिक्र नही है तुम्हे मेरी बात की, तुम आखिर चाहते क्या हो अरुण ?क्यू खुदको और मुझे मुस्किल मे डालना चाहते हो .
अरुण हैरानी से... मै, मै कब गया रूपाली तुम्हारे घर तक मुझे तो ये भी नही पता मै यहा कैसे आया ?
रूपाली... झूठ मत बोलो अरूण मुझे पता है मै तुम्हे वहा से कैसे छिपते छिपाते लाई हूं, और तुम पूरे रस्ते मुझे गले लगाये मेरा नाम ही बोले जा रहे थे, क्या तुम सुबह सुबह भी शराब मे डूबकी लगा लेते हो क्या ?
अरुण कंफ्यूजन मे था उसे समझ नही आ रहा था कि रुपाली उसे अपने घर से यहा कैसे लायी, वह उन फ्लेशबेक गुम होता चला गया था वो भी वुडन हाऊस मे, फिर उसके बाद वह यहा कैसे उसे कुछ नही पता,अब ये बहुत ज्यादा हो रहा था उसके लिए, इन सब को उसे जल्द ही सुलझाना था वह अपने ख्यालो मे उलझा सा रूपली की ओर देखता है तो वह उसे इस तरह देखकर हंस रही थी वह रुपाली को इस तरह हंसता देखकर हैरान होता है .
अरूण हैरानी से... रूपाली तुम हंस रही हो, मै यहा परेशान हूँ और तुम हंस रही हो .
रुपाली... अब तुम पर हंसू ना तो क्या करू, चेहरा देखा है अपना कितना कंफ्यूज उलझा हुआ जैसे कोई जुर्म कर दिया हो, ना ना इस नादान से चेहरे पर ये उलझन अच्छी नही लगती, तुमने सच मे समझ लिया मै तुम्हे यहा ले आऊंगी, अरे मै तो मजाक कर रही थी मै तुम्हे अपने घर से यहा नही लायी और लाती भी कैसे अब मेरा वह पहलवालो
शरीर भी तो नही है, अच्छा गुस्से दिखाने के लिए सोरी,
रूपाली की बात सुन कर वह थोड़ा तो उलझन से बाहर था मगर फिर भी वह उसके घर तक नही गया मगर वह सब जो उसने उन झलकियो मे देखा क्या वह सच था या उसका भ्रम और फिर भी वह उस वुडन हाऊस से यहा कैसे ये सवाल अभी तक उसके लिए पहली बन चूके थे .
कहानी जारी है......✍️