TERE MERE DARMIYAAN in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 109

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तेरे मेरे दरमियान - 109

अशोक उसे कहना तो बहुत कुछ चाहता था , अशोक अपनी बेटी की हालत कहना चाहता था पर आदित्य अब और कुछ सुनने को तैयार नही था और वो वहां से चला जाता है ।

अशोक घर जाकर जानवी के पास चुपचाप खड़ा था , जानवी अशोक की चुप्पी से समझ चुका था के आदित्य अब वापस नही आएगा । जानवी अंदर से एकदम टुट गई । अब वो आदित्य को हमेशा के लिए खो चुकी थी । जानवी को अब वो सारी बातें याद आने लगी थी जो उसने आदित्य के साथ बिताए थे । 

उन दोनो के बिताए पल , आदित्य को गलत समझना और फिर दानवी से दिल मे आदित्य के लिए प्यार और फिर उस दिन वाला पल जब जानवी अपने पापा अशोक से दिल की बात बताकर आदित्य को प्रपोज करने जाना और फिर एक्सीडेंट. ....! जानवी को अब सबकुछ साफ - साफ याद आने लगा था । 

जानवी के आंखो मे अब सिर्फ आंशु थे । जानवी अपने आप से कहती है --

जानवी :- ये सब मेरे ही साथ क्यो हो रहा है , जिसे मैं प्यार करती हूँ वो ही मेरे से दुर चला गया । आदित्य ... कहा हो तुम ? क्यों मुझे छोड़कर चले गए । जैसे तुमने मुझे पहले संभाला था , मोरी हर गलती हो माफ करते आए थे तो फिर अब क्यों नही माफ किया । क्यों मुझे अकेला छोड़कर चले गए । मैं तुम्हारे बिना कैसे रह पाउगीं ....

जानवी एक दम से टुट जाती है । ये दैखकर अशोक को बहुत दुख होता है , अपनी बोटी को इस तरह से टुटते दैखना ... उसके लिए बहुत ही कष्टप्रद था । पर अब वो कुछ कर भी तो नही सकता था ।

तभी जानवी ....वह अपने आँसू पोंछती है…और एकदम से खड़ी हो जाती है। उसकी आँखों में अब दर्द के साथ-साथ एक जिद भी थी।

जानवी: - “नहीं… मैं उसे ऐसे नहीं जाने दूँगी। 

अशोक हैरान होकर उसे देखते हैं। 

जानवी (दृढ़ आवाज़ में): - इस बार मैं हार नहीं मानूँगी ... मैं उसे ढूँढूँगी…और उसे बता कर रहूँगी कि मैं उससे कितना प्यार करती हूँ। मैं उसका इंतजार करुगीं । वो चाहे कही भी रहे पर मैं उन्हें ढुंड निकालूगी ।

उसकी आँखों में आँसू थे…पर अब उनमें एक हिम्मत भी थी।

जानवी: - अगर वो मुझसे दूर गया है…तो मैं उसके पास जाऊँगी। इस बार… मैं उसे खोने नहीं दूँगी।

अशोक की आँखों में पहली बार उम्मीद दिखाई देती है और उसी पल…जानवी का दर्द उसकी ताकत बन जाता है तभी जानवी फिर कहती है --

जानवी :- पर मैं उन्हें कहां ढुंडुगी वो तो अब रागिनी से प्यार करने लगा है ना । अब तो आदित्य रागिनी से शादी कर लेगा , हमारा तो डिवोर्स हो चुका है अब मेरा उस पर कोई अधिकार नही रहेगा ।

जानवी मायुस हो जाती है और कहती है --

जानवी :- मैं आदित्य से बहोत प्यार करती हूँ , अगर वो रागिनी के साथ खुश है तो ठिक है , मैं आदित्य की खुशी चाहती हूँ , मैने उसे बहुत दुख पहूँचाया है अब रागिनी से आदित्य को अलग करके उसे फिर दुखी नही करना चाहती , मैं अब आदित्य से दुर ही रहूँगी और फिर कभी उनके पास नही जाउगीं ।

जानवी इसे अपना गलती और भाग्य समझकर अपना लेती है और अपने बिजनेस पर ध्यान देने लगती है ।

दौ साल बाद .......

जानवी अपने बिजनेस को नई उचांई तक ले जाती है और उसका नाम अब एक नामी बिजनेसमैन के रुप मे पहचाना जाने लगा ।

समय ने बहुत कुछ बदल दिया था…पर कुछ एहसास ऐसे होते हैं… जो समय के साथ और गहरे हो जाते हैं।

जानवी की दुनिया एक भव्य ऑडिटोरियम…लाइट्स… कैमरा… मीडिया…और स्टेज पर खड़ी थी जानवी। आज वो सिर्फ एक लड़की नहीं थी…बल्कि एक सफल बिजनेस वुमन बन चुकी थी।

लोग उसकी तारीफ कर रहे थे…उसकी मेहनत, उसकी कामयाबी, उसकी पहचान… तभी होस्ट की आवाज आती है --

होस्ट: - आज हम स्वागत करते हैं उस शख्सियत का… जिसने अपनी मेहनत से बिजनेस की दुनिया में एक नई पहचान बनाई है और वो है .... मिस जानवी!”

पूरा हॉल तालियों से गूंज उठता है , अशोक और जानवी बहुत खुश थे , जानवी मुस्कुराते हुए माइक पकड़ती है…पर उसकी आँखों में एक अधूरापन साफ झलक रहा था।

जानवी (भाषण देते हुए): - आज मैं जहाँ भी हूँ… अपनी मेहनत और अपने पापा के आशीर्वाद की वजह से हूँ…

वह थोड़ा रुकती है…और फिर आदित्य को याद करते हूए कहती है --

जानवी (धीरे): - और… एक ऐसे इंसान की वजह से…जिसने मुझे बिना कुछ माँगे… सब कुछ दे दिया…

जानवी को आदित्य की वजह से बहुत बड़े - बड़े कंट्रेक्ट मिले थे जिसे जानवी ने बहुत ही मेहनत से पुरा किया था । आदित्य यहां से जाने से पहले ये कह गया था , जानवी बहुत अच्छी लड़की है और एक अच्छी बिजनेस वुमन भी है , इसिलिए सभी इसे सपोर्ट करे । जिस कारण से जानवी को बहुत फायदा भी हूआ ।

जानवी की आँखें हल्की नम हो जाती हैं।

जानवी: - उसने मुझे सिखाया… कि सच्चा प्यार क्या होता है…और कैसे किसी को बिना शर्त चाहा जाता है… उसने मुझे प्यार करना सिखाया और सबको लेकर कैसे चलना है ये सिखाया , आज मैं जो कुछ भी हूँ उसी के कारण हूँ । धन्यवाद. ..!

जानवी के इतना कहते ही पूरा हॉल शांत हो जाता है। और जानवी एक मुस्कान लिये वहां से चली जाती है ।

जानवी के केबिन में हमेशा एक फोटो फ्रेम रहता था —जिसमें आदित्य की तस्वीर थी। हर दिन काम शुरू करने से पहले…
वह एक बार उसे जरूर देखती थी।

जानवी (मन ही मन): - पता नहीं तुम कहाँ हो आदित्य…
शायद… तुम अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके हो… तुम और रागिनी जहां पर भी हो हमेशा खुश रहो ।

उसकी आँखों में हल्की उदासी आ जाती है।

उधर – विदेश में आदित्य विदेश का एक बड़ा ऑफिस…कांच की ऊँची इमारत…और मीटिंग रूम… इंटरनेशनल क्लाइंट्स…और बीच में बैठा था — आदित्य।

अब वह एक इंटरनेशनल बिजनेस टायकून बन चुका था तभी टीवी स्क्रीन पर अचानक एक खबर चलती है —

“भारत की उभरती हुई बिजनेस वुमन जानवी ने फिर रचा इतिहास…”
आदित्य की नज़र स्क्रीन पर टिक जाती है। वह जानवी को देखता है…और उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ जाती है।

आदित्य (धीरे): - मुझे पता था तुम हमेशा से खास थी जानवी…मुझे पता था… तुम बहुत आगे जाओगी…”

उसकी आँखों में गर्व था…पर साथ ही एक खालीपन भी।

आदित्य (मन ही मन): - शायद… अब तक तुम्हारी शादी हो चुकी होगी…तुम हमेशा खुश रहना ।

वह हल्की सी मुस्कान देता है…पर दिल के अंदर एक दर्द छुपा हुआ था।

दूसरी तरफ – जानवी

रात का समय…जानवी अपने कमरे में बैठी थी। उसके हाथ में वही आदित्य की फोटो थी।

जानवी (धीरे): - “शायद… अब तक तुमने भी शादी कर ली होगी…”

उसकी आँखों से आँसू गिरने लगते हैं।

जानवी: - “पर मैं आज भी… वहीं खड़ी हूँ आदित्य…जहाँ तुम मुझे छोड़कर गए थे…”

एक अधूरी कहानी…दोनों ने बहुत कुछ हासिल किया…नाम… पैसा… पहचान…पर जो सबसे जरूरी था…वो एक-दूसरे को ही खो चुके थे।
और सबसे बड़ी बात —दोनों आज भी एक-दूसरे से उतना ही प्यार करते थे…पर दोनों को लगता था कि दूसरा आगे बढ़ चुका है।

शाम का समय था…जानवी अपने ऑफिस में बैठी थी और टेबल पर फाइल्स थीं… सामने लैपटॉप खुला था…पर उसका ध्यान कहीं और था।

आदत के अनुसार… उसने एक बार फिर आदित्य की फोटो को देखा…और हल्का सा मुस्कुरा दी… फिर वही उदासी।

तभी उसकी असिस्टेंट अंदर आती है —

असिस्टेंट: - मैम, ये इन्विटेशन कार्ड आया है… आपको पर्सनली दिया गया है।”

जानवी बिना देखे ही कहती है —

जानवी: - “ठीक है… रख दो।”

असिस्टेंट कार्ड टेबल पर रखकर चली जाती है।

कुछ देर बाद…

जानवी यूँ ही कार्ड उठाती है। जैसे ही वो कार्ड खोलती है…उसकी नज़र एक नाम पर जाकर ठहर जाती है —

“रागिनी & आर्यन – Wedding Reception”
जानवी की आँखें एकदम से फैल जाती हैं। वो दोबारा नाम पढ़ती है… जानवी रागिनी का नाम किसी और के साथ दैखकर चोंक जाती है और हैरानी से कहती है --
 
रागिनी… शादी…?”

उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगता है।

जानवी (धीरे): - “मतलब… रागिनी की शादी हो गई…?”

वो कुछ पल के लिए चुप हो जाती है…

फिर अचानक उसके चेहरे पर एक अजीब सा एहसास आता है —
राहत… और दर्द… दोनों।

जानवी (मन ही मन): - तो… आदित्य और रागिनी… सच में साथ नहीं थे… तो फिर कोर्ट के बाहर वो दोनो ...!

जानवी अपने सर पर हाथ रखती है और कहती है --

जानवी :- मैं कितनी बेवकुफ हूँ , मैं इस बार भी आदित्य को गलत समझा और उसे अपने से दुर कर दिया । हे भगवान ये तु कैसे खेल रहा है मेरे साथ । मैं ये कैसे भूल गयी के आदित्य मुझसे प्यार करती है और इतनी जल्दी वो किसी और का नही हो सकता । 

उसकी आँखों में हल्की चमक आ जाती है…पर अगले ही पल वो उदास हो जाती है —

जानवी: - तो फिर… क्या वो अब भी अकेला है…?”

उसका दिल फिर से आदित्य के लिए धड़क उठता है।

उसी समय…

जानवी को रागिनी की कही हुई बात याद आती है —

“आदित्य की जिंदगी में अगर किसी के लिए जगह है…
तो वो सिर्फ तुम हो…”

अब हर चीज़ साफ होने लगती है। जानवी धीरे से कुर्सी पर बैठ जाती है…

जानवी (आँखों में आँसू): - तो तुमने… सच में कभी मुझे छोड़ा ही नहीं आदित्य… सब मेरी गलती है , मैने तुम्हें कभी समझी ही नही ।
उसका दिल अब और बेचैन हो जाता है।

To be continue....1037