Ishq ka Ittefaq - 4 in Hindi Love Stories by Alok books and stories PDF | Ishq ka Ittefaq - 4

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Ishq ka Ittefaq - 4

रात की वो खौफनाक आंधी तो थम चुकी थी, पर कबीर के स्पर्श की जो थरथराहट सिया के बदन में उतरी थी, वो सुबह होने तक उसके जहन से गायब नहीं हुई थी. गेस्ट- हाउस के उस छोटे से कमरे में सुबह की ताजी धूप खिडकी से छनकर सीधे सिया के चेहरे पर पड रही थी.

उसने अपनी भारी आँखें खोलीं और सबसे पहले सामने टेबल पर रखे लैपटॉप की तरफ देखा. स्क्रीन पर हॉस्पिटल सारा पुराना रिकॉर्ड एक्सेल शीट में एकदम सलीके से दर्ज था. रात भर बिना सोए, आँखों में चुभन और पीठ के दर्द को झेलते हुए उसने आखिरकार वो पूरा काम ठीक सुबह सात बजे तक निपटा ही लिया था.

सिया ने एक गहरी सांस ली, अपनी हथेलियों को आपस में रगडा और मुस्कुराई. हार मानना तो मेरी डिक्शनरी में है ही नहीं, Mister खडूस मेहरा.

आपने मुझे कमजोर समझने की जो भूल की थी, आज उसका जवाब आपको डाइनिंग टेबल पर ही मिलेगा.
इधर मेहरा मेंशन के मुख्य हॉल में हमेशा की तरह कडक चाय और नाश्ते की महक फैल चुकी थी. डाइनिंग टेबल पर आज का नजारा थोडा ज्यादा गंभीर था. दादाजी बलराज मेहरा अखबार पढने में व्यस्त थे,


जबकि काम्या मेहरा अपने सोने के कंगन को कलाई पर घुमाते हुए बार- बार घडी देख रही थीं. उनके बगल में बैठा विक्रम अपने फोन में कुछ स्क्रॉल कर रहा था, पर उसकी नजरें बार- बार सीढियों की तरफ जा रही थीं। कबीर, चाय ठंडी हो रही है बेटा, काम्या ने बेहद मीठी पर बनावटी आवाज में कहा, जब उन्होंने देखा कि कबीर सीढियों से नीचे उतर रहा है.

कबीर ने आज गहरे नीले रंग की शर्ट पहनी थी, पर उसके चेहरे का रंग उडा हुआ था. रात की उस घटना के बाद, जब उसने अंधेरे कमरे में सिया के चेहरे की उस आवारा जुल्फ को छुआ था, उसका अपना दिल तब से उसके काबू में नहीं था.

वह रात भर अपने कमरे की बालकनी में सिगरेट फुंकता रहा, पर सिया की वो निडर आँखें उसके दिमाग से हट ही नहीं रही थीं। जी छोटी बुआ, बस आ गया, कबीर ने अपनी कुर्सी खींचते हुए कहा.

उसकी आवाज में हमेशा जैसी कडवाहट तो थी, पर आज उसमें एक अजीब सी थकावट भी घुली हुई थी। वैसे कबीर, आज सुबह के नौ बजने वाले हैं. उस कल की आई लडकी को तुमने जो Hospital का पांच साल का रिकॉर्ड डिजिटल करने का काम सौंपा था. मुझे तो नहीं लगता कि वो टिक पाएगी.

अब तक तो अपना बोरिया- बिस्तर समेटकर पिछले दरवाजे से भाग भी चुकी होगी, काम्या ने चाय की चुस्की लेते हुए तंज कसा. विक्रम ने भी तुरंत मौका देखकर आग में घी डाला, हाँ भाई, बुआ बिल्कुल सही कह रही हैं. वो कोई मामूली काम नहीं था.

बडे- बडे डेटा ऑपरेटर तीन दिन लगा देते हैं उस काम में. आपने उस बेचारी को डराने के लिए वो काम दिया था, और वो डरकर भाग गई होगी. आखिर एक मामूली फिजियोथैरेपिस्ट की औकात ही क्या होती है मेहरा खानदान के सामने!

कबीर ने विक्रम की बात सुनकर अपनी चाय का कप टेबल पर इतने जोर से पटका कि प्लेट में रखी चम्मच खनखना उठी. बलराज जी ने अखबार के ऊपर से कबीर की तरफ देखा, पर कुछ बोले नहीं. कबीर जैसे ही विक्रम को डांटने के लिए मुंह खोलने वाला था, ठीक उसी वक्त हॉल के मुख्य दरवाजे पर सधे हुए कदमों की आहट हुई.

सबकी नजरें घूम गईं. सामने सिया खडी थी.
वही साधारण सा लुक, बालों का जूडा और चेहरे पर एक अजीब सा आत्मविश्वास. लेकिन इस बार उसके हाथों में वो पुरानी, धूल भरी फाइलें नहीं थीं, बल्कि उसके हाथ में एक पेनड्राइव थी जिसे वो उंगलियों के बीच घुमा रही थी। गुड मॉर्निंग, मेहरा जी.

और वैरी Good Morning Mister विक्रम, सिया ने टेबल के पास आकर मुस्कुराते हुए कहा. उसकी आवाज में एक अजीब सी खनक थी जिसने कबीर के दिल की धडकन को एक पल के लिए रोक दिया। तुम. तुम अभी तक यहीं हो? काम का क्या हुआ? भागने की तैयारी कर ली?

विक्रम ने अपनी खीझ छुपाते हुए पूछा. सिया ने बिना कुछ बोले वो पेनड्राइव सीधे कबीर की प्लेट के पास रख दी. मिस्टर कबीर मेहरा, आपके चैरिटी Hospital के पिछले पांच सालों का पूरा मेडिकल डेटा, बिना किसी एक सिंगल स्पेलिंग मिस्टेक के, इस पेनड्राइव में डिजिटल फॉर्मेट में मौजूद है.

आप चाहें तो अभी अपने लैपटॉप पर Check करवा सकते हैं. ठीक सुबह के पौने नौ बजे हैं, यानी आपके दिए हुए टाइम से पंद्रह मिनट पहले। कबीर ने उस छोटी सी पेनड्राइव को देखा और फिर सिया की आँखों में झांका. उसकी आँखों के नीचे हल्के काले घेरे साफ बता रहे थे कि वो रात भर जागती रही है.

कबीर के सीने में एक अजीब सी टीस उठी. यह जीत का घमंड नहीं था, बल्कि सिया की इस लगन ने उसके दिल में सम्मान की एक नई जगह बना दी थी. कबीर के चेहरे का वो सख्त मुखौटा एक पल के लिए पिघलाकर रख दिया था.

मैनेजर! कबीर ने आवाज दी.

मैनेजर तुरंत दौडता हुआ आया. इस पेनड्राइव को ले जाओ और सारे डेटा को तुरंत मेन सर्वर पर क्रॉस- चेक करो. अगर एक भी एंट्री गलत हुई. एक भी एंट्री गलत नहीं होगी, Mister मेहरा, सिया ने कबीर की बात बीच में ही काटते हुए कहा, मैंने अपना वादा पूरा किया.
अब आप अपना वादा निभाइए. मुझे दादी के थेरेपी सेशन के लिए जाना है,

क्योंकि मेरा असली काम उनका इलाज करना है, आपकी फाइलों का बोझ उठाना नहीं। सिया पलटकर जैसे ही दादी के कमरे की तरफ बढी, काम्या और विक्रम के चेहरों पर हवाइयां उड रही थीं.

काम्या ने गुस्से में विक्रम की तरफ देखा, जिसका मतलब साफ था—यह लडकी हमारे रास्ते का कांटा बनती जा रही है, इसे यहाँ से हटाना ही होगा। सिया के जाने के बाद डाइनिंग टेबल पर सन्नाटा पसर गया था. विक्रम का खून खौल रहा था.

उसने मन ही मन सोच लिया था, इतनी अकड! इस मामूली सी लडकी की इतनी हिम्मत कि मेहरा खानदान के लडकों को आँखें दिखाए? ठहर तू, आज ही तेरा पत्ता साफ करता हूँ।

दोपहर के करीब दो बजे थे.
कबीर अपने ऑफिस के केबिन में किसी जरूरी Meeting की तैयारी कर रहा था. ठीक उसी वक्त विक्रम दबे पांव कबीर के पर्सनल केबिन में घुसा. कबीर उस समय वहां नहीं था.

विक्रम की नजर सीधे मेज की दराज पर पडी, जहाँ मेहरा एम्पायर के सबसे बडे और गुप्त' ड्रीम प्रोजेक्ट' के ओरिजिनल टेंडर पेपर्स रखे थे. यह फाइल लीक होने का मतलब था अरबों का नुकसान.

विक्रम ने शातिर मुस्कान के साथ वो लाल रंग की फाइल निकाली और सीधे गेस्ट- हाउस की तरफ भाग गया. दोपहर के वक्त सिया गायत्री दादी को सुलाकर रसोई में उनके लिए काढा बना रही थी. पूरा गेस्ट- हाउस खाली था.

विक्रम ने बिना देर किए सिया के कमरे में रखे उसके साधारण से Collage बैग की चेन खोली और वो सरकारी टेंडर वाली फाइल उसके कपडों के बीच में ठूंस दी। अब देखूंगा तेरी अकड, जब कबीर भाई तुझे लात मारकर इस घर से बाहर फेंकेंगे,

विक्रम ने अपने बाल ठीक किए और बाहर निकल आया. शाम के चार बजे मेहरा मेंशन में अचानक भूचाल आ गया. कबीर अपने केबिन से बाहर निकला, उसका चेहरा गुस्से से तमतमाया हुआ था.
" मैनेजर! मेरी मेज से वो टेंडर वाली लाल फाइल कहाँ गई? किसने छुआ मेरे केबिन को?

कबीर की दहाड सुनकर सारे नौकर सहम गए. तभी काम्या बुआ अपने हाथ में चाय का कप लिए वहां आईं और कूटनीतिक अंदाज में बोलीं, अरे कबीर,

इतना गुस्सा क्यों कर रहा है बेटा?

फाइल कोई हवा में तो उडेगी नहीं. वैसे. आज दोपहर को मैंने उस डॉक्टर लडकी, क्या नाम है उसका. हाँ, सिया! उसे तुम्हारे केबिन की तरफ जाते देखा था. वो कह रही थी कि उसे कुछ मेडिकल बिल्स Sign करवाने हैं.

क्या? सिया वहां गई थी?,,,,,

" कबीर के पैर तले जमीन खिसक गई. एक पल के लिए उसे लगा कि उसका दिल टूट गया हो. रात को जिस लडकी की आँखों में उसने एक अजीब सी सच्चाई देखी थी, क्या वो सिर्फ एक चोर थी? विक्रम ने तुरंत कबीर के कंधे पर हाथ रखा,

भाई, शक करने से अच्छा है कि दूध का दूध और पानी का पानी कर लिया जाए. उसके कमरे की तलाशी लो. अगर वो बेकसूर होगी, तो मना नहीं करेगी। कबीर बिना सोचे- समझे,

गुस्से और नफरत के एक नए बवंडर में बहता हुआ सीधे गेस्ट- हाउस की तरफ बढा.
उसके पीछे काम्या बुआ, विक्रम और घर के दो नौकर भी थे. सिया उस वक्त अपने कमरे में बैठकर डायरी लिख रही थी. अचानक कबीर ने बिना दरवाजा खटखटाए जोर से धक्का दिया। मिस्टर मेहरा? यह क्या बदतमीजी है? सिया अपनी सीट से खडी हो गई.
बदतमीजी क्या होती है, यह मैं तुम्हें अब बताऊंगा सिया. मेरा टेंडर पेपर कहाँ है?


कबीर ने सीधे उसके बैग की तरफ झपट्टा मारा। आप मेरे सामान को हाथ नहीं लगा सकते! सिया चिल्लाई, पर कबीर ने उसकी एक न सुनी. उसने बैग को उल्टा कर दिया. किताबें, पेन, कुछ दवाइयाँ नीचे गिरीं और उनके साथ ही.

खट से वो लाल रंग की सरकारी टेंडर फाइल भी फर्श पर आ गिरी. कमरे में जैसे सन्नाटा जम गया. सिया की आँखें फटी की फटी रह गईं. यह. यह फाइल यहाँ कैसे आई? भगवान की कसम, मुझे नहीं पता यह किसने रखी!

कबीर ने नीचे झुककर वो फाइल उठाई. उसकी आँखों में खून उतर आया था, पर उस गुस्से के पीछे एक गहरा दर्द था कि उसने फिर से किसी पर भरोसा करने की गलती की थी.
उसने फाइल को हवा में लहराया, तो ये है तुम्हारी असलियत ? ? ? ?

रात को बडी- बडी बातें कर रही थी कि आंधियां इरादे नहीं बुझातीं! तुम्हारी बर्दाश्त की कीमत तो बहुत सस्ती निकली सिया. तुम सिर्फ एक मामूली चोर हो जो हमारे घर के सीक्रेट्स बेचने आई हो! कबीर भाई!
इसे अभी इसी वक्त पुलिस के हवाले करो. मेहरा खानदान की साख का सवाल है,

विक्रम ने पीछे से चिल्लाकर अपनी चाल पर मन ही मन ताली बजाई. काम्या बुआ ने अपनी जीभ पर नमक छिडकते हुए कहा, देखा बलराज भाई साहब, मैंने पहले ही कहा था.
ऐसी लडकियाँ सिर्फ अमीर शिकार और बडे हाथ मारने आती हैं।

सिया की आँखों से आंसू बहने लगे, पर वो आंसू कमजोरी के नहीं, बल्कि इस झूठे इल्जाम के थे. उसने सीधे कबीर के कॉलर को अपनी उंगलियों से पकडा और उसे अपनी तरफ खींचा. दोनों की नजरें फिर से एक- दूसरे के बेहद करीब थीं.

" मिस्टर कबीर मेहरा!

आपकी आँखों पर नफरत की पट्टी बंधी है, इसलिए आपको सच नहीं दिख रहा. मैंने चोरी नहीं की है. और अगर आपको लगता है कि मैं चोर हूँ, तो बुलाइए पुलिस को. पर याद रखिएगा, जिस दिन सच सामने आएगा, आप मुझसे नजरें मिलाने के काबिल नहीं रहेंगे.

कबीर ने सिया का हाथ अपने कॉलर से झटका, पर उसका दिल अंदर से कांप रहा था. सिया की आँखों का वो गुस्सा और सच्चाई कबीर को अंदर तक झकझोर रही थी।

क्या कबीर गुस्से में अंधा होकर सिया को सचमुच पुलिस के हवाले कर देगा ? ? ? ? ?

क्या काम्या बुआ और विक्रम की यह घिनौनी चाल कबीर और सिया के बीच पनपते इस अनजाने प्यार को हमेशा के लिए दफन कर देगी ? ? ? ? ?

या फिर गायत्री दादी ऐन वक्त पर आकर इस गहरी साजिश का पर्दाफाश करेंगी ? ? ? ? ?

और कबीर को अपनी गलती का वो एहसास होगा जो उनके बीच की इस नफरत की दरार को हमेशा के लिए मिटा देगा ? ? ? ??

क्या होगा इस इत्तेफाक की दास्तान का अगला मोड ? ? ? ? ?

जानने के लिए देखिए अगला अध्याय !,,,,,,,