Dil ki Bhool - 1 in Hindi Love Stories by Bikash parajuli books and stories PDF | दिल की भूल - 1

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दिल की भूल - 1

Episode 1 – पहली मुलाकात


शाम का समय था। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और हल्की-हल्की बारिश पूरे शहर को भिगो रही थी। रेलवे स्टेशन की पुरानी छत से पानी की बूंदें लगातार टपक रही थीं। प्लेटफॉर्म पर लोगों की भीड़ थी, लेकिन हर कोई अपनी दुनिया में खोया हुआ था। कोई फोन पर बात कर रहा था, कोई जल्दी-जल्दी ट्रेन पकड़ने के लिए भाग रहा था, तो कोई चुपचाप बेंच पर बैठा अपने सफर का इंतज़ार कर रहा था।
उसी भीड़ के बीच एक लड़का अकेला खड़ा था — आरव।
उसके हाथ में एक पुरानी डायरी थी और कंधे पर बैग टंगा हुआ था। चेहरे पर हल्की दाढ़ी, आँखों में थकान और दिल में अनगिनत अधूरे सपने। ऐसा लग रहा था जैसे जिंदगी ने उससे बहुत कुछ छीन लिया हो। वह बार-बार अपनी ट्रेन की तरफ देख रहा था, जो अभी तक प्लेटफॉर्म पर नहीं आई थी।
आरव इस शहर को छोड़कर जा रहा था।
हमेशा के लिए।
इस शहर ने उसे सिर्फ दर्द दिया था।
एक टूटा हुआ सपना… अधूरी मोहब्बत… और कुछ ऐसी यादें जिन्हें भूलना आसान नहीं था।
उसने गहरी सांस ली और अपनी डायरी खोली। उसके पहले पन्ने पर लिखा था —
"कुछ लोग जिंदगी में आते तो हैं, लेकिन हमेशा के लिए नहीं रहते…"
आरव उन शब्दों को देख ही रहा था कि तभी तेज हवा चली। हवा के साथ एक किताब उड़ती हुई उसके पैरों के पास आकर गिरी।
“ओह… सॉरी!”
एक मीठी सी आवाज उसके कानों में पड़ी।
आरव ने नीचे झुककर किताब उठाई और जैसे ही पीछे मुड़ा, उसकी नजर एक लड़की पर जाकर ठहर गई।
वो लड़की बारिश में हल्की भीगी हुई थी। लंबे बाल उसके चेहरे से चिपके हुए थे और बड़ी-बड़ी आँखों में अजीब सी मासूमियत थी। उसने हल्के नीले रंग का सूट पहना हुआ था और हाथों में कुछ किताबें थीं।
“वो… मेरी किताब है,” लड़की ने मुस्कुराते हुए कहा।
कुछ पल के लिए आरव उसे बस देखता ही रह गया।
उसे ऐसा लगा जैसे स्टेशन की सारी आवाजें अचानक शांत हो गई हों।
“जी…”
उसने धीरे से किताब उसकी तरफ बढ़ाई।
लड़की मुस्कुराई।
“थैंक यू। वैसे मेरा नाम सिया है।”
“आरव…”
दोनों कुछ पल चुप रहे। लेकिन उस खामोशी में भी एक अजीब सा अपनापन था।
तभी स्टेशन पर अनाउंसमेंट हुई —
“यात्रियों कृपया ध्यान दें… प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर आने वाली ट्रेन लगभग तीस मिनट देरी से आएगी…”
सिया ने हल्का सा चेहरा बनाया।
“ओह नो… अब आधा घंटा यहीं बिताना पड़ेगा।”
आरव पहली बार हल्का सा मुस्कुराया।
“शायद बारिश नहीं चाहती कि लोग इतनी जल्दी जाएं।”
सिया उसकी बात सुनकर हंस पड़ी।
“या शायद कुछ लोगों को मिलाना चाहती है।”
ये सुनकर दोनों फिर चुप हो गए।
सिया पास वाली बेंच पर जाकर बैठ गई। कुछ सेकंड बाद उसने आरव की तरफ देखा।
“आप बैठ सकते हैं… अगर चाहें तो।”
आरव धीरे से जाकर उसके पास बैठ गया।
बारिश अब थोड़ी तेज हो चुकी थी। ठंडी हवा चल रही थी और प्लेटफॉर्म पर बैठे लोग अपने-अपने सामान संभालने में लगे थे।
“आप कहीं जा रहे हैं?” सिया ने पूछा।
“हां… शायद हमेशा के लिए,” आरव ने खिड़की की तरफ देखते हुए कहा।
“मतलब?”
“बस… कभी-कभी इंसान कुछ जगहों से थक जाता है।”
सिया ने उसकी आँखों में देखा।
उसे महसूस हुआ कि इस लड़के के अंदर बहुत दर्द छुपा हुआ है।
“और आप?” आरव ने पूछा।
सिया हल्का सा मुस्कुराई।
“मैं अपने पापा से मिलने जा रही हूं। उनकी तबीयत कुछ दिनों से ठीक नहीं है।”
“ओह… अब कैसे हैं वो?”
“ठीक हो जाएंगे,” उसने खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश करते हुए कहा, “मम्मी कहती हैं कि उम्मीद कभी नहीं छोड़नी चाहिए।”
आरव पहली बार किसी की बात ध्यान से सुन रहा था।
धीरे-धीरे दोनों की बातें बढ़ने लगीं।
सपनों की… बचपन की… पसंदीदा किताबों की… और जिंदगी की उन बातों की जो अक्सर लोग किसी अजनबी से नहीं कहते।
सिया बहुत अलग थी।
उसकी बातों में सच्चाई थी, मासूमियत थी।
आरव को पता ही नहीं चला कि कब उसके चेहरे की उदासी थोड़ी कम होने लगी।
“आप हमेशा इतने चुप रहते हैं?” सिया ने मुस्कुराकर पूछा।
आरव हंस पड़ा।
“नहीं… बस जिंदगी ने थोड़ा शांत बना दिया है।”
“तो जिंदगी को इतना सीरियस मत लिया कीजिए,” सिया ने कहा, “कभी-कभी मुस्कुराना भी जरूरी होता है।”
आरव उसकी तरफ देखता रह गया।
कई महीनों बाद किसी ने उससे इतनी अपनापन से बात की थी।
तभी अचानक सिया का फोन बजा।
उसने फोन उठाया और अगले ही पल उसके चेहरे का रंग बदल गया।
“क्या…? पापा की तबीयत फिर खराब हो गई?”
उसकी आँखों में आँसू आ गए।
“मैं अभी आती हूं…”
उसने जल्दी से फोन रखा।
“सब ठीक है?” आरव ने घबराकर पूछा।
सिया ने खुद को संभालने की कोशिश की।
“मुझे अभी जाना होगा…”
वो जल्दी-जल्दी अपने बैग उठाने लगी।
“लेकिन आपकी ट्रेन तो
“मुझे दूसरी ट्रेन लेनी होगी…”
उसकी आवाज कांप रही थी।
आरव कुछ कहना चाहता था, लेकिन शब्द नहीं मिले।
सिया जाने लगी, फिर अचानक मुड़ी।
“आरव…”
“हां?”
“अगर किस्मत ने चाहा… तो हम फिर मिलेंगे।”
और फिर वो भीड़ में कहीं खो गई।
आरव काफी देर तक उसे जाते हुए देखता रहा।
बारिश अब और तेज हो चुकी थी।
वो वापस बेंच पर बैठा ही था कि उसकी नजर पास में पड़ी एक किताब पर गई।
वो सिया की किताब थी।
आरव ने जल्दी से किताब उठाई।
उसने किताब खोली तो पहले पन्ने पर लिखा था 
"कभी-कभी दिल जिनसे मिलता है… किस्मत उन्हें बहुत जल्दी दूर कर देती है…"
नीचे छोटे अक्षरों में लिखा था 
– सिया
आरव काफी देर तक उन शब्दों को देखता रहा।
उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी, लेकिन आँखों में अजीब सी बेचैनी।
उसे नहीं पता था कि ये सिर्फ एक छोटी सी मुलाकात थी…
या उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी शुरुआत।
उस रात पहली बार आरव शहर छोड़ना नहीं चाहता था।
क्योंकि जाते-जाते कोई अनजान लड़की उसके दिल में अपनी जगह बना चुकी थी