लोग कहते हैं कि प्यार दोनों तरफ से हो तभी मुकम्मल होता है, लेकिन मेरे लिए तो मेरी एकतरफा मोहब्बत ही मेरी पूरी दुनिया है। मेरा नाम तुषार है, और यह कहानी मेरी जिंदगी के उस सबसे खूबसूरत हिस्से की है, जो शुरू तो हुआ पर कभी खत्म नहीं हो सका।मेरी कहानी में जो लड़की है, उसे सब प्यार से 'चकुली' कहते हैं। वो जितनी सीधी है, उतनी ही चुलबुली भी। चकुली मेरे ही गाँव की रहने वाली है। हम दोनों ने एक ही मिट्टी में खेलकर बचपन बिताया है। वो बचपन की नादानियों से लेकर आज तक, कब मेरे दिल की धड़कन बन गई, मुझे खुद भी पता नहीं चला। मैं उसे तब से पसंद करता हूँ जब हमें 'प्यार' शब्द का मतलब भी ठीक से नहीं पता था।वो जब भी गाँव की गलियों से गुजरती है, तो मेरी आँखें बस उसे ही ढूंढती हैं। उसकी वो बचपन की मासूमियत आज भी वैसी ही है। उसे शायद इस बात का अंदाजा भी नहीं है कि कोई रोज सिर्फ उसकी एक झलक पाने के लिए भगवान से दुआएं मांगता है। मेरा यह प्यार एकतरफा ही सही, पर बहुत सच्चा है... मैं स्वभाव से बहुत शांत था, ज्यादा किसी से बोलता नहीं था। लेकिन जब बात चकुली की आती थी, तो न जाने मेरे अंदर का एक अलग ही इंसान बाहर आ जाता था। हम दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे और स्कूल में हमारी खूब लड़ाइयाँ होती थीं। हर चीज़ में हमारा एक-दूसरे से कॉम्पिटिशन (प्रतियोगिता) रहता था—चाहे पढ़ाई हो या कोई खेल, हमें बस एक-दूसरे से आगे निकलना होता था।उन लड़ाइयों के पीछे का सच सिर्फ मेरा दिल जानता था। मैं लड़ता तो उससे था, पर असल में मेरा मन सिर्फ उसका वो मासूम चेहरा देखते रहने का करता था। जब वो बोलते-बोलते अपने बालों को पीछे करती, तो मैं बस खो सा जाता था। उसके कानों में हिलते वो छोटे से झुमके मुझे बेहद पसंद थे। वो झुमके जब उसकी मुस्कान के साथ हिलते, तो मेरे दिल की धड़कनें तेज हो जाती थीं।लेकिन जिंदगी हमेशा एक जैसी नहीं रहती। जब हम ७वीं क्लास में आए, तो वो आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे स्कूल में चली गई। वो पल मेरे लिए किसी झटके से कम नहीं था। स्कूल की वो गलियां अब उसके बिना बिल्कुल सूनी लगने लगी थीं।अब मेरे पास सिर्फ छुट्टियों का इंतजार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था, क्योंकि छुट्टियां होने पर ही वो वापस गाँव आती थी। जब भी गाँव में उसकी याद मुझे बहुत तड़पाती, तो मैं चुपके से उसका फोटो निकाल कर घंटों देखता रहता। उस तस्वीर को देखकर ही मेरे इस एकतरफा दिल को तसल्ली मिलती थी कि मेरी चकुली आज भी मेरे ख्यालों में मेरे बेहद पास है...७वीं क्लास के बाद से हमारी किस्मत के रास्ते अलग-अलग हो चुके थे। फिर कभी मेरी और उसकी करीब से मुलाकात नहीं हुई। छुट्टियों में जब वो गाँव आती भी, तो मैं बस उसे दूर से ही देखता रहता था। हिम्मत ही नहीं होती थी कि सामने जाकर बात करूँ। देखते ही देखते वो कुछ दिन बीत जाते और वो वापस अपने हॉस्टल चली जाती। उसके जाने के बाद, मैं भी अपने हॉस्टल लौट जाता। हम दोनों एक ही आसमान के नीचे थे, लेकिन बहुत दूर थे।ऐसे ही करते-करते पूरे ३ साल बीत गए। ३ साल... जिसमें मैंने हर रोज़ उसे याद किया था। और फिर अचानक किस्मत ने एक ऐसा मोड़ लिया जिसकी मैंने सपने में भी उम्मीद नहीं की थी।एक दिन हमारे पापा ने मुझसे कहा कि तुम्हें कंप्यूटर सीखने के लिए MS-CIT क्लास जॉइन करनी है। मुझे उस वक्त बिल्कुल भी मालूम नहीं था कि मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सरप्राइज (Surprise) वहाँ मेरा इंतजार कर रहा है। जब मैं क्लास के अंदर गया, तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं।सामने वही चुलबुला चेहरा, वही मासूमियत और वही मेरी चकुली बैठी हुई थी! हमारे पापा लोगों ने हम दोनों को साथ में ही कंप्यूटर क्लास में लगवाया था। ३ साल के लंबे इंतजार के बाद, आज वो मेरे इतने करीब बैठने वाली थी। मेरा दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि मुझे डर था कहीं उसे आवाज़ न आ जाए। मेरी एकतरफा मोहब्बत का एक नया चैप्टर अब उसी कंप्यूटर क्लास से शुरू होने वाला था...