What was his mistake? - 2 in Hindi Motivational Stories by blue sky and purple ocean books and stories PDF | उसकी गलती क्या थी? - 2

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उसकी गलती क्या थी? - 2

Elena ने अपनी आँखों से वो सब देखा…
जो उसके पिता उसकी माँ के साथ करते थे।
उसकी माँ बार-बार रोते हुए कह रही थी—
“मत मारो…”
लेकिन उसके पिता ने उसकी एक नहीं सुनी।
डरी हुई Elena भागकर अपनी दादी के पास गई और उन्हें बुलाकर लाई।
लेकिन फिर भी उसके पिता नहीं रुके।
आस-पास के कुछ लोगों ने बीच-बचाव किया…
जबकि कुछ लोग बस खड़े होकर तमाशा देखते रहे।
उस वक्त Elena को उन लोगों पर बहुत गुस्सा आया।
लेकिन वो कर भी क्या सकती थी?
वो सिर्फ एक छोटी बच्ची थी।
लेकिन अपनी माँ की वो सिसकियाँ सुनकर…
Elena अंदर तक टूट गई थी।
धीरे-धीरे ये सब देखते हुए
अब Elena दस साल की हो चुकी थी।
            उसके exams भी खत्म हो चुके थे,
और Elena अच्छे marks से पास हुई थी।
अब स्कूल की छुट्टियाँ पड़ गई थीं।
तीनों भाई-बहन अब पूरा दिन घर में साथ रहते, खेलते और छोटी-छोटी बातों पर हँसते रहते।
उसके दोनों छोटे भाई —
एक छह साल का और सबसे छोटा चार साल का —
ज़्यादातर उसी के साथ रहते थे।
हर शाम Elena अपनी दादी के साथ बागों में घूमने जाया करती थी।
बहुत दूर तक…
क्योंकि Elena को बचपन से ही हरियाली, पेड़-पौधों और पक्षियों से बहुत प्यार था।
उन्हें देखकर उसके चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान आ जाती।
एक सुकून भरी मुस्कान…
जैसे कुछ पलों के लिए वो अपनी सारी परेशानियाँ भूल जाती हो।
और शायद उन्हीं पलों में
Elena सबसे ज़्यादा जीती थी।
उसे सबसे ज़्यादा मोर पसंद थे।
दूर किसी बाग में जब वो मोर को अपने पंख फैलाकर नाचते हुए देखती…
तो खुद भी खिलखिलाकर हँस पड़ती।
उस पल उसकी आँखों में डर नहीं…
बस बचपन दिखता था।  आम के पेड़ों की नीचे झुकी डालियों पर वो झूलती रहती।
कभी पत्तों को छूती, कभी हवा के साथ हँस पड़ती।
और जब भी उसे कहीं मोर के टूटे हुए पंख मिलते,
वो उन्हें बड़े संभालकर अपने साथ घर ले आती।
उन रंग-बिरंगे पंखों को देखकर Elena की आँखें चमक उठती थीं…
जैसे उसने कोई बहुत कीमती चीज़ पा ली हो।
             

अब तक सब कुछ धीरे-धीरे ठीक चल रहा था।
दिन गुजर रहे थे…
और Elena भी अपने छोटे-छोटे सुकून वाले पलों में खुश रहना सीख रही थी।
फिर एक दिन उसके मामा का phone आया।
उसकी माँ को कुछ दिनों के लिए अपने मायके जाना था,
क्योंकि उसके मामा के घर एक छोटी बच्ची हुई थी और उसकी मामी की देखभाल के लिए किसी का होना ज़रूरी था।
इसलिए उसके मामा उसकी माँ और सबसे छोटे चार साल के भाई को अपने साथ ले गए।
जाने से पहले उसकी माँ ने Elena को प्यार से समझाया—
“अच्छे से रहना…
दादी, दादा और सबकी बात मानना।”
Elena ने मुस्कुराकर हाँ में सिर हिला दिया।
लेकिन उस वक्त
ना Elena जानती थी…
और ना ही उसकी माँ…
कि उनके जाने के बाद उसकी जिंदगी में कुछ ऐसा होने वाला था,
जो उसके बचपन को हमेशा के लिए बदल देगा।
और शायद इस बार…
डर पहले से कहीं ज़्यादा भयानक होने वाला था।

     क्योंकि उस रात के बाद Elena की दुनिया पहले जेसी नहीं रहने वाली थी अब धीरे धीरे बदलने वाली थी जेसा उसने सोचा भी नहीं था...  की डर की असली शुरुआत तो उसकी माँ के जाने के बाद हुई जो उसने सोचा भी नहीं था..ऐसा कुछ बड़ा होने वाला था...

Next part coming soon...🦚🦚