Tere Mere Darmiyaan - 113 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 113

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तेरे मेरे दरमियान - 113

जानवी आदित्य की और एक टक नजरो से दैखती रहती है आदित्य जानवी से पूछता है --

आदित्य :- क्या दैख रही हो जानवी ?

जानवी :- उस इंसान को जो मेरा हमेशा साथ दिया । मेरे इतने सारे गलती करने के बावजूद भी तुमने मेरा साथ नही छोड़ा । तुमने मेरे और विकास की शादी को इसिलिए तोड़ा , ताकि मैं गलत आदमी के साथ शादी ना कर लू । फिर मुझे अपने साथ अपने घर रहने के लिए मजबूर करना ताकी मैं हर वक्त तुम्हारी नजरो के सामने रहूँ । इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी तुमने मेरा साथ कभी नही छोड़ा । हमेशा एक अच्छे हसबेंड की तरह मेरी दैख भाल किया । क्यों आदित्य , मैने तो तुम्हारी जिंदगी को नर्क बना दिया था पर फिर भी तुम । मैं इतनी अच्छी तो नही हूँ ।

आदित्य :- बात अच्छी हो या नही वो नही है । बात है शादी का , पता है जब पंडित जी शादी के सात फेरे लगवा रहे थे तो उन्होने क्या कहा था । बस वही वचन और कसम को निभा रहा था मैं । 

आदित्य के इतना कहने पर जानवी आदित्य के गले लग जाती है और रोने लगती है । 

जानवी :- I am sorry आदित्य , मैने तुम्हें बहोत दुख दिया । मैं तुम्हें कभी समझ ही नही पाया । तुम बहोत अच्छे हो आदित्य और मैं बहोत बुरी , I don't deserve you . ( रोने लगती है ) आदित्य । पर तुम्हारे बिना रह भी नही सकती ।

जानवी आदित्य के बाहो मे थी और रो रही थी , आदित्य को जानवी के आखो पर आंशु अच्छा नही लग रहा था । क्योकी आदित्य भी जानवी से बहोत प्यार करने लगा था ।

आदित्य जानवी के आखो से आंशु पोछता है और कहता है --

आदित्य :- बस अब मत रो , तुम्हारे आंखो मे आंशु अच्छे नही लगते । अब मैं आ गया हूँ ना ।

जानवी और आदित्य अपने सारे पुराने गिले सिकवे दुर करने लगे थे । 

जानवी :- मुझे सब याद आ गया है आदित्य ....

आदित्य जानवी के दोनो गालो पर प्यार से हाथ रखकर कहता है --

आदित्य :- और फिर भी तुम यहां से मुझे छोड़कर जा रही थी ।

जानवी :- मैने तो कभी तुम्हें छोड़ा ही नही था । बस मेरी किस्मत मे तुमसे कुछ दिनो की दुरी थी ।
 और जानवी की आँखों से आँसू बहते हैं…

जानवी (धीरे): - मैं थक गई हूँ आदित्य…हर बार तुम्हें खोकर…”

आदित्य धीरे से उसका चेहरा पकड़ता है…

आदित्य: - तो इस बार…खुद को मुझे खोने मत देना…

दोनो ही अब चुप थे और एक दुसरे के आंखो मे दैख रहे थे ।

जानवी (धीरे): - तो… अब क्या इरादा है आदित्य?”

आदित्य मुस्कुराता है —

आदित्य: - अब… वही करूँगा…

जो दो साल पहले करना चाहता था…”

जानवी (हल्की मुस्कान): - क्या…?

आदित्य धीरे से उसका हाथ पकड़ता है…

आदित्य: - तुम्हें… फिर से अपनी जिंदगी में लाना…”

जानवी मुस्कुरा देती है…

जानवी: - फिर से नहीं…इस बार हमेशा के लिए…

और बिना कुछ सोचे…वो जानवी को अपनी बाहों में खींच लेता है।
जानवी भी उसे कसकर पकड़ लेती है…जैसे अब कभी छोड़ना नहीं चाहती…बारिश तेज़ हो जाती है…पर अब उन्हें फर्क नहीं पड़ता…

❤️ उस पल का एहसास दो साल का दर्द… सारी गलतफहमियाँ…
सारी दूरी…सब उसी पल में खत्म हो जाती हैं…

जानवी आदित्य से कहती है --

जानवी :- आदित्य ....

आदित्य: - हम्म ...!

जानवी :- तुम्हें याद है वो दिन जब मेरा एक्सीडेंट हूआ था ?

आदित्य :- हां .... 
जानवी :- मैं वहां पर पता है क्यों गई थी ?

आदित्य :- पता है ।

जानवी :- जब मैं तुम्हारे बाहों मे थी तब तुम मुझसे कुछ कहना चाहते थे और मैं तुम्हारे होटों पर हाथ रखकर कहा था के अभी नही ...

आदित्य :- हां .... याद है ।

जानवी :- तो अब मुझे वो सुनना है । शायद इसी पल के लिए वो बाकी था ...

आदित्य जानवी के चेहरे पर हाथ रखकर प्यार से कहता है --

आदित्य :- जानवी ......

आदित्य के इतना कहते ही जानवी का दिल जौर से धड़कने लगता है ...
उस पल का एहसास दो साल का दर्द…सारी गलतफहमियाँ…
सारी दूरी…सब उसी पल में खत्म हो जाती हैं… हवा जैसे थम सा गया हो ।
बारिश अब भी लगातार हो रही थी…पर इस बार हर बूंद जैसे उनके प्यार की गवाही दे रही थी। आदित्य अभी भी जानवी को अपने पास थामे हुए था…जैसे उसे फिर कभी खोना नहीं चाहता।

कुछ पल दोनों चुप रहते हैं…सिर्फ दिल की धड़कनें… और बारिश की आवाज़… फिर आदित्य धीरे-धीरे जानवी को अपने से थोड़ा अलग करता है…

उसकी आँखों में देखता है…

आदित्य (गहरी सांस लेकर): - जानवी…”

जानवी उसकी तरफ देखती है…उसकी आँखों में हल्की सी घबराहट… और ढेर सारा प्यार था।

आदित्य हल्का सा मुस्कुराता है…और धीरे से कहता है —

❤️ “आई लव यू… जानवी।”

बस…ये तीन शब्द…जानवी के लिए जैसे पूरी दुनिया थे। एक पल के लिए वो बिल्कुल शांत हो जाती है…फिर उसकी आँखों से आँसू निकल पड़ते हैं…
पर इस बार ये आँसू दर्द के नहीं… खुशी के थे।

जानवी (हल्की हँसी और आँसू के साथ): - इतना टाइम लगा दिया ये बोलने में…?”

आदित्य मुस्कुराता है —

आदित्य: - “डर था…कहीं फिर से तुम्हें खो ना दूँ…”

जानवी धीरे से उसका हाथ पकड़ लेती है…

जानवी: - अब नहीं खोओगे…क्योंकि इस बार… मैं खुद को तुम्हारे पास छोड़ रही हूँ…”

वो भी मुस्कुराते हुए कहती है —

❤️ “आई लव यू टू… आदित्य।”

आदित्य की आँखों में चमक आ जाती है…वो जानवी को फिर से अपने पास खींच लेता है…और इस बार…दोनों के चेहरे पर सिर्फ सुकून था। बारिश अब भी गिर रही थी…पर अब वो ठंडी नहीं लग रही थी…
क्योंकि… आज उनका प्यार… पूरा हो चुका था। ❤️

आदित्य अपने घुटने पर आकर जानवी से कहता है --

आदित्य :- जानवी , Will you marry me again ...?

जानवी खुश होकर जवाब देती है --

जानवी :- हां ... आदित्य ।

दोनो एक दुसरे को गले लगा लेता है और दो सालो का लंबा इंतजार अब खत्म हो चुका था । तभी वहां पर रमेश , कृतिका, रश्मी और रागिनी भी आ जाती है और दोनो को एक दुसरे के साथ दैखकर सभी खुश हो जाता है ।

कुछ दिन बाद पूरा माहौल रोशनी से जगमगा रहा था…शहनाई की मधुर आवाज़… फूलों की खुशबू…और हर चेहरे पर खुशी। मंडप में आदित्य और जानवी बैठे थे…सभी बहुत खुश थे दोनो को साथ दैखकर अशोक के चेहरे पर एक अलग ही सुकुन था । जानवी अपने पापा अशोक के चेहरे पर खुशी को दैखकर जानवी समझ जाती है के उसके पापा क्यों आदित्य को उसके लिए चुना था । जानवी को आंखो मे अपने पापा के लिए आंशु थे और एक खुशी थी , क्योंकी इसको साथ उसको पापा अशोक भी खुश थे । विकास और मोनिका भी थे अपने तो साल के बेटे के साथ , साथ मे मोनिका के मां और पापा भी , शमिका, आदित्य के मां , पापा , भाई और रागिनी ।

 फेरे का सीन

पंडित जी मंत्र पढ़ रहे थे…

पंडित जी: - अब वर-वधू सात फेरे लेंगे…”

जैसे ही दोनों फेरे लेने उठते हैं…

रश्मी: - धीरे से कहती है :- भाई… इस बार पैर पर मत चढ़ जाना… शादी टूट जाएगी 😆”

सब हँस पड़ते हैं।

जानवी (धीरे से): - सुन लिया ना… संभलकर चलना…”

आदित्य: - “अरे अब तो जिंदगी भर साथ चलना है…पैर क्या… दिल भी संभालकर रखूँगा…”

जानवी हल्का सा शरमा जाती है ❤️

 सिंदूर और मंगलसूत्र आदित्य जब जानवी की मांग में सिंदूर भरता है…

जानवी की आँखें भर जाती हैं…

आदित्य (धीरे): - अब कहीं मत जाना…”

जानवी: - अब जाऊँगी भी तो… तुम्हारे साथ…”

पूरा मंडप तालियों से गूंज उठता है।

 शादी के बाद – मजेदार रस्मे जूता छुपाई

रश्मी और बाकी लड़कियाँ आदित्य का जूता छुपा देती हैं।

रश्मी :- “जूता चाहिए तो 50,000 दो!”

आदित्य: - इतना महंगा जूता तो मैंने खरीदा भी नहीं था ।

जानवी (हँसते हुए): - दे दो… नहीं तो जिंदगी भर नंगे पैर रहना पड़ेगा…”

आखिरकार आदित्य हार मान जाता है और पैसे दे देता है ।

️ सीन – सुहागरात (फनी मोमेंट

कमरा फूलों से सजा हुआ था…हल्की लाइट… रोमांटिक माहौल…जानवी बेड पर बैठी थी… घूंघट में… आदित्य धीरे-धीरे कमरे में आता है… दरवाज़ा बंद करता है…और धीरे से पास आता है…

आदित्य (धीरे): - “तो… मिसेज आदित्य…”

तभी…जैसे ही वो बैठने जाता है…बेड जोर से “चर्रर्र” की आवाज करता है 

दोनों एक पल के लिए चौंक जाते हैं…फिर एक-दूसरे को देखते हैं…जानवी हँस पड़ती है 

जानवी :- लगता है… बेड भी हमारी शादी से घबरा गया…”

आदित्य भी हँस देता है —

आदित्य: - या फिर… उसे पता है कि आज इसकी हालत खराब होने वाली है ।
दोनों जोर से हँस पड़ते हैं…फिर आदित्य धीरे से घूंघट उठाता है…

जानवी शरमा जाती है…

आदित्य (प्यार से): - इतना सब झेलने के बाद…अब हक है मेरा… तुम्हें बस खुश रखने का…”

जानवी मुस्कुराकर कहती है —

जानवी: - और मेरा हक है…तुम्हें रोज परेशान करने का…”

दोनों फिर से हँस पड़ते हैं और आदित्य जानवी के होटों पर किस करने लगता है ।

 एंड फीलिंग....

जहाँ प्यार सच्चा होता है…वहाँ रिश्ते सिर्फ इमोशनल नहीं…बल्कि हँसी और खुशी से भी भरे होते हैं।


The End....

दोस्तो ये कहानी यही पर समाप्त होती है , सपोर्ट और इतना  प्यार के लिए धन्यवाद । ❤️ 

इसके  बाद  मरी दुसरी कहानी  आएगी उसे भी ऐसे ही प्यार देना ।


अपने प्यार को सभी खोने मत दो , किसी बाहर वालो की बात पर या किसी और की बातो पर भरोसा मत करो , कोई किसीका भला नही चाहता । कोई किसी का सगा नही । अपने आंखो दैखा और कानो पर सुना पर ही भरोसा करो । सभी हमेशा खुश रहो प्यार करो बहुत करो इतना के कभी प्यार की कमी महसुस ही ना हो । Thank you .....आपके सपोर्ट और प्यार के लिए ।
Wtiter :- Chiranjit Tewary vidyut ..