तुम भी - 1 in Hindi Love Stories by wang pang books and stories PDF | तुम भी - 1

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तुम भी - 1

नवंबर का महीना था। ठंड से भरी सुबह में ऊपर वाले कमरे की खिड़की खोलते हुए नैना बोली,
“उठो बच्चों! स्कूल नहीं जाना तुम्हें? देर हो जाएगी और छुट्टी के कोई बहाने नहीं चलेंगे...”
यह सब कहकर वह नीचे आई और रसोई में नाश्ता बनाने लगी। सभी बच्चे — प्रिया, खुशी, रूही और शैतान आरव — धीरे-धीरे तैयार होकर आ गए।
सबको नाश्ता कराने के बाद नैना खुद तैयार हुई और बच्चों को स्कूल छोड़ने चली गई। वहाँ से वह अपने स्कूल के लिए निकली, जहाँ वह अध्यापिका थी। आज उसकी नई नौकरी का पहला दिन था। वह बहुत खुश थी, लेकिन उतनी ही घबराई हुई भी। उसे डर था कि कहीं पिछली बार की तरह उसे फिर से नौकरी से निकाल न दिया जाए।
इन्हीं विचारों में खोई हुई वह चल रही थी। तभी एक मैदान में कुछ बच्चे वॉलीबॉल खेल रहे थे। अचानक गेंद आकर नैना से टकरा गई। उसका बैग, रजिस्टर और चश्मा सब नीचे गिर गए। उसके चश्मे के दोनों किनारों पर रबर लगी हुई थी, ताकि वह बार-बार नीचे न गिरे।
नैना घबराकर ज़मीन पर अपना चश्मा ढूँढ़ने लगी। तभी उसी स्कूल के एक अध्यापक वहाँ आकर खड़े हो गए। उन्होंने नैना का चश्मा उठाकर उसे पहनाया, लेकिन तभी उनकी नज़र उसके चश्मे में लगी रबर, बैग पर हाथ से की गई सिलाई और टूटे हुए फोन पर गई।
नैना जल्दी-जल्दी अपना सामान समेटकर खड़ी हुई और सिर झुकाकर घबराई हुई आवाज़ में बोली,
“थैंक यू... थैंक यू...”
तभी एक बच्चा दौड़ता हुआ आया और बोला,
“सॉरी राज सर! सॉरी मैम! हमारा ध्यान नहीं रहा। हमें माफ कर दीजिए।”
वह अपनी वॉलीबॉल उठाकर वहाँ से चला गया।
तब नैना ने पहली बार उनकी ओर देखा और धीरे से पूछा,
“आप यहाँ सर हैं?”
राज ने हल्का सा मुस्कुराकर सिर हिलाया और कहा,
“हाँ... कह सकते हैं।”
फिर राज ने पूछा,
“और आप यहाँ...?”
नैना बोली,
“जी, आज मेरा पहला दिन है। मैं यहाँ विज्ञान पढ़ाने आई हूँ। मुझे ऑफिस जाना था, लेकिन कुछ सोचते-सोचते मैदान की तरफ आ गई।”
राज ने कहा,
“चलिए, मैं भी ऑफिस ही जा रहा हूँ।”
नैना ने हल्के से “जी” कहा और आगे चलने लगी। राज उसके पीछे-पीछे चल रहा था। वह उसे इस तरह देख रहा था, जैसे उसने नैना को कहीं पहले देखा हो, लेकिन उसे याद नहीं आ रहा था।
थोड़ी देर बाद दोनों ऑफिस पहुँचे। वहाँ सभी अध्यापक और अध्यापिकाएँ नैना से बड़े प्यार से मिले और फिर अपनी-अपनी कक्षाओं में चले गए।
नैना ने भी अपनी पहली कक्षा बहुत अच्छे से ली। बच्चे उसे पसंद करने लगे थे।
कुछ समय बाद दोपहर की घंटी बजी और सभी भोजन करने के लिए स्टाफ रूम में जाने लगे। नैना भी अपना बैग लेकर स्टाफ रूम पहुँची। वह अपना टिफिन निकालने लगी, लेकिन तभी उसकी नज़र बाकी शिक्षकों के सुंदर और अलग-अलग खाने के डिब्बों पर गई।
उसका टिफिन साधारण स्टील का था, जिस पर कई जगह डेंट पड़े हुए थे।
यह देखकर वह थोड़ा झिझकी और शर्माते हुए अपना टिफिन वापस बैग में रख दिया। फिर केवल पानी पीकर चुपचाप बैठ गई।
यह सब राज काफी देर से देख रहा था। वह अब भी यही सोच रहा था कि उसने नैना को आखिर पहले कहाँ देखा है। तभी ....