?️बारिश की वो पहली मुलाक़ात☂️ - पार्ट 1 in Hindi Love Stories by July Writes books and stories PDF | बारिश की वो पहली मुलाक़ात - पार्ट 1

Featured Books
Categories
Share

बारिश की वो पहली मुलाक़ात - पार्ट 1

जुलाई का महीना था। आसमान कई दिनों से बादलों को थामे बैठा था, जैसे किसी इकरार का इंतज़ार कर रहा हो। और फिर उस दिन… पहली बारिश शुरू हुई।

कॉलेज की छुट्टी के बाद आईशा बस स्टॉप पर खड़ी बस का इंतजार कर रही थी और तभी बारिश शुरू हो गई। बारिश के कारण हवा में मिट्टी की भीगी खुशबू घुली हुई थी। उसने दुपट्टा जैसे ही सिर पर रखा ही था कि  बारिश और तेज़ शुरू हो गई।

लोग बारिश से छुपने के लिए इधर-उधर भागने लगे। और तभी उसके सिर पर किसी ने छाता ला कर उपर कर दिया।

“आप भीग जाएँगी…” एक धीमी सी मगर जानि पहचानी आवाज़ आई।

आईशा ने पलटकर देखा तो सामने आरिफ़ खड़ा था — वही लड़का जो क्लास में हमेशा पीछे बैठता था, लेकिन हर सवाल का जवाब सबसे पहले देता था। उसकी आँखों में बारिश से भी ज़्यादा गहराई थी। और आईशा की भीग जाने की चिंता भी...।

“थैंक यू…” आईशा ने हल्की मुस्कान के साथ उसे देख कर कहा।
दोनों एक ही छाते के नीचे खड़े एक दूसरे को देख रहे थें। और बारिश की बूंदें छाते के उपर पड़ पड़ कर जैसे कोई धुन बना रही थीं।

सड़क पर पानी की धार बह रही थी, और दिलों में कोई अनकही सी बात जैसे जुबां तक आना चाहती हो ।
“आपको बारिश पसंद है?” आरिफ़ ने हिम्मत करके  आख़िर पूछ ही लिया। उसने बात करने की शुरुआत हल्की सी मुस्कान के साथ कर दी।

“बहुत… क्योंकि इसमें सब कुछ साफ़ लगने लगता है,” आईशा ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
“फिर तो आज का दिन बहुत खास है… क्योंकि आज बहुत कुछ साफ़ हो जाएगा,” आरिफ़ ने भी मुस्कुराते हुए कहा।

आईशा ने हैरानी से उसकी तरफ देखा। बारिश और तेज़ हो गई थी, लेकिन उस पल जैसे दुनिया ठहर गई थी।

बस अभी तक आई नहीं थी। दोनों धीरे-धीरे सड़क के किनारे चलने लगे। हवा उसके बालों को छूकर जा रही थी, और आरिफ़ बार-बार नज़रें चुराकर उसे देख रहा था।

“मैं… काफी दिनों से आपसे बात करना चाहता था,” उसने आखिर अपने मन की बात कह ही दिया।
आईशा का दिल जैसे एक पल को रुक गया। “तो फिर कीजिए ना बात…” इतने दिनों से कहा क्यों नहीं..."

“डर लगता था… कहीं आप मना न कर दें,” उसने सच्चाई से कहा।
आईशा हँस पड़ी। “बारिश में डर कैसा? यहाँ तो सब भीग ही रहे हैं…”

उसकी हँसी में इतनी सादगी थी कि आरिफ़ का सारा डर बह गया। उसने धीरे से कहा, “मुझे आप अच्छी लगती हैं… शायद बहुत ज़्यादा।”
बारिश की बूंदें अब हल्की हो चुकी थीं। आसमान भी जैसे मुस्कुरा रहा था।

आईशा ने कुछ पल चुप रहकर उसकी आँखों में देखा। “मुझे भी बारिश पसंद है… और वो लोग भी, जो बिना वजह मुस्कुराते हैं।”

आरिफ़ समझ गया। जवाब हाँ था।
बस आ गई। आईशा चढ़ने लगी तो उसने मुड़कर कहा, “शायद हर कहानी की शुरुआत बारिश से ही होनी चाहिए…”

आरिफ़ ने भीगती सड़क को देखते हुए सोचा —
कभी-कभी पहली मुलाक़ात ही ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत दास्तान बन जाती है।

और उस दिन की बारिश…
सिर्फ़ मौसम नहीं बदल कर गई थी,
दो दिलों की तक़दीर भी लिख गई थी। ☔✨