Episode - 19 (दोस्त बना दुश्मन)
स्टोर रूम की उस धूल भरी रोशनी में रिया के हाथ कांप रहे थे । तस्वीर में दिख रहे उस मासूम बच्चे की मुस्कान उसकी आंखों में उम्मीद का दिया जला रही थी।
"गौरव..." उसके होठों से धीमे से ये नाम निकला ।
रिया के हाथ में वह तस्वीर थी लेकिन उसकी आंखों के सामने उसके बचपन की खूबसूरत यादें ... अचानक उसको चिड़ियों की चहचहाहट और छोटे बच्चों के खिलखिलाने की आवाजें आने लगी । वह यादों के उस स्थान पर पहुंच गई जहां सब कुछ सफेद और सुनहरा था .....
कुछ साल पहले...... बचपन
छोटा सा गौरव, जो रिया के पीछे हाथ में मिट्टी लेकर भाग रहा था । "रिया रुक जाओ , आज तो तुम्हारी नई फ्रॉक पर कीचड़ लगा कर ही दम लूंगा" वह शरारत से चिल्लाया । रिया अपनी छोटी सी चोटियों को झटकते हुए भागी, " पकड़ के तो दिखाओ !"
वह दोनों साथ में बैठ के खाना खाते थे । रिया को याद आया कि जब उसको खाने का मन नहीं होता था तो , वह चुपके से गौरव की थाली में अपना खाना रख देती थी फिर दोनों में ऐसा झगड़ा होता था जैसे पूरी दुनिया का युद्ध हो रहा हो , खिलौने के लिए गुत्थमगुत्था होना , एक - दूसरे की शिकायत करना , बात - बात पर कट्टी करना और फिर अगले ही पल मान जाना ।
फिर वो दिन रिया को याद आया जब , उसके कट्टी करने पर गौरव उसे बिना बताए विदेश पढ़ने के लिए चला गया था ।
तभी अचानक से उसके पति के आने की आहट होती है। और वह अपनी यादों से बाहर आ जाती है उसकी आंखों में आसूं है, लेकिन उम्मीद की एक किरण भी है गौरव के रूप में, वह ये सोच के बहुत खुश होती है कि अगर गौरव यहां है तो वह मुझे इस नर्क से बाहर निकाल लेगा ।
वह तस्वीर लेकर भागती हुई अपनी सास के कमरे में पहुंची । उसकी सास आराम से कुर्सी पर बैठी ये सोच रही थी "कि रिया के पापा से कैसे पैसे निकाले जाए "? रिया ने बेताबी से तस्वीर उनके सामने रखी और लड़खड़ाती आवाज में पूछा, " मां जी ... यह ... यह बच्चा कौन है? क्या यह गौरव है ? और अगर ये गौरव है तो ये कहा है?"
रिया की सास, रिया को बीच में टोकते हुए " पागल है क्या पति का नाम लेती है । तेरी मां ने तुझे संस्कार नहीं सिखाया कि पति का नाम अपने मुंह से नहीं लेते ।"
रिया हैरान होते हुए - " नहीं ! मां जी मैं अपने पति का नाम नहीं ले रही । मै तो अपने बचपन के दोस्त के बारे में पूछ रही .... रिया की सास गुस्से से रिया की तरफ देखती है ।
"तो और क्या मै कह रही हूं ! तेरा पति ही गौरव यानी कि मेरा बेटा और तेरे बचपन का दोस्त है ।
यह बात सुनकर रिया के पैरों के नीचे से जैसे जमीन ही खिशक गई । वह पीछे की तरफ लड़खाई , उसके हाथ - पैर सुन्न पड़ गए । उसके चेहरे का रंग उड़ गया और उसकी सारी उम्मीदें चकना - चूर हो गई । उसकी आंखों की चमक फिर से आसुओं में बदल गई , वह जिसे अपना दोस्त मानती थी वह अब दुश्मन बन चुका था ।
रिया के हाथ में वह बचपन वाली तस्वीर कांप रही थी । जब उसे सास से पता चला कि उसका हैवान पति ही उसका बचपन का दोस्त गौरव है , तो वह भागती हुई गौरव के कमरे में गई । गौरव वहां अपनी शर्ट के बटन खोल रहा था , उसकी आंखों में वहीं क्रूरता थी ।
रिया ने तस्वीर उसके सामने कर दी । उसकी आंखों से अविरल आसू बह रहे थे , आवाज कांप रही थीं , " गौरव ... देखो इसे ! क्या तुम्हे याद नहीं ? हम वहीं दोस्त है जो एक साथ खेले , एक साथ खाना खाए , जो छोटी - छोटी बातों पर लड़ते थे । गलती मेरी ही क्यों न हो, तुम माफी मांग के सब ठीक के देते थे । फिर आज तुम इतने पत्थर दिल कैसे हो गए ? तुम मुझ पर हाथ कैसे उठा सकते हो गौरव? क्या तुम अपनी दोस्ती भूल गए ? अरे गौरव मैं वही रिया हूं जिसकी हजार गलतियां भी तुम्हारे लिए कुछ नहीं होती थी , फिर आज बिना किसी गलती के तुम मेरे साथ ..."
गौरव रुका । उसने उस तस्वीर को देखा , फिर रिया की आंखों में अपनी सर्द निगाहे डाली । उसने एक गहरी और ठंडी सांस ली , उसके चेहरे की मांसपेशियां तन गई । उसने एक डरावनी मुस्कान के साथ रिया के करीब आकर उसके चेहरे को कसकर अपने हाथ में दबोच लिया ।
"दोस्ती ? प्यार ? " गौरव की आवाज किसी मरते हुए इंसान की कराह जैसी थी । " रिया , वो गौरव उसी दिन मर गया था जिस दिन तुमने मंडप की वेदी को छोड़कर अपने उस आशिक ' आर्यन ' की बाहों को चुना था । तुमने उस दिन सिर्फ घर नहीं छोड़ा था , तुमने भरी महफिल में मेरा और मेरे खानदान के सम्मान की धज्जियां उड़ाई थी ।"
उसने अपनी पकड़ और मजबूज कर ली, रिया का चेहरा दर्द से फटने लगा । गौरव चिल्लाया, " मेहमान फुसफुसा रहे थे ... ' दूल्हे में ही खोट होगा तभी दुल्हन भाग गई '। सुना है तुमने कभी वो ताने ? मेरे प्यार की इज्जत नहीं की तुमने , और आज तुम मुझे उस दोस्ती की याद दिला रही हो जिसे तुमने अपने हाथों से कत्ल किया है ? रिया मै वहीं गौरव बन के आया था तुमसे शादी करने लेकिन तुमने तो शादी करने से भी मना कर दिया ... मेरे इस बदलाव और मेरी इस नफरत का कारण सिर्फ तुम हो...
रिया ने सिसकते हुए अपना हाथ उसके हाथ पर रखा , "नहीं! गौरव... मै ... मै किसी से मिलने नहीं गई थी । वो एक गलतफहमी थी । हा, मै आर्यन से प्यार करती हूं , लेकिन वो तो अब इस दुनिया में भी नहीं है । पापा उसकी तलाश में गए थे , तब उन्होंने ने मुझे बताया कि वो अब नहीं रहा । क्या हम सब कुछ भूलकर, एक नई शुरुवात नहीं कर सकते ? हम पहले जैसे दोस्त बनकर नहीं रह सकते गौरव? मुझे इस नफरत से बचा लो ... मुझे मेरी सारी गलतियों की माफी देकर उस दोस्ती को वापस ले आओ ..."
गौरव ने झटके से उसका हाथ हटा दिया और पीछे मुड़कर हंसा - एक ऐसी हसी जो रूह कंपा दे । उसने रिया को पीछे मुड़ कर घृणा से देखा , उसकी आंखों में नफरत की एक गहरी परत थी ।
"दोस्त ? अब तुम मेरे लिए सिर्फ और सिर्फ मेरी नफरत का जरिया हो रिया । तुमने मेरे दिल को शमशान बनाया है , अब मैं तुम्हारी जिंदगी को नर्क बनाऊंगा । जिस आर्यन का नाम तुम सोते - जागते लेती हो , वो तो मर कर सुकून पा गया , लेकिन तुम्हे तड़पाने के लिए मै अभी जिंदा हूं।"
उसने कमरे का दरवाजा धड़ाम से बंद किया और रिया वही फर्श पर ढह गई , यह समझकर की बचपन का वो मासूम गौरव अब कभी वापस नहीं आयेगा ।
क्या रिया गौरव को पहले जैसा कर पाएगी या गौरव की नफरत बढ़ जाएगी? जानने के लिए बने रहे । अपनी राय कॉमेंट में जरूर बताएं। कहानी पसंद आए तो रेटिंग जरूर करें।