Forgotten Bollywood Dancers 3 in Hindi Anything by S Sinha books and stories PDF | बॉलीवुड की गुमनाम डांसर - 3

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बॉलीवुड की गुमनाम डांसर - 3

                                                                  बॉलीवुड की गुमनाम डांसर  3    

 


भाग 3     

नोट - इस श्रृंखला के पिछले भाग में आपने बॉलीवुड फिल्मों में कल और आज के डांस पर चर्चा की गयी थी , अब आगे कुछ पुरानी गुमनाम डांसर पर चर्चा की गयी है  …  

अक्सर पुरानी बॉलीवुड या अन्य भारतीय फिल्मों में डांसर को उचित  श्रेय नहीं दिया जाता था  . इसका मुख्य कारण तत्कालीन सामाजिक धारणा और पूर्वाग्रह थे  .  उन दिनों फिल्मों में काम करना और उसमें भी डांस करना निम्न  स्तर का माना जाता था और नाचने वाली को ख़ास कर वेश्या के समान समझा जाता था  . दर्शक डांसर के नाम से शायद परिचित भी नहीं थे क्योंकि डांसर के नाम फिल्म के क्रेडिट में नहीं होते थे  . 

 कालांतर में समय के साथ भारतीय फिल्मों पर पश्चिमी शैली की छाप पड़ने लगी और फिर वैश्वीकरण के साथ परिस्थित में काफी बदलाव हुआ है  . आज डांसर और कोरियोग्राफर को पेशेवर कलाकार की तरह मान्यता प्राप्त है और उन्हें भी राष्ट्रीय  और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है  . 


कुछ गुमनाम डांसर - 

एडविना वॉलेट - एडु नाम से मशहूर एडविना ने बॉलीवुड में बैकग्राउंड डांसर के रूप में 1952 में ही प्रवेश किया था  . 1966 की  सुपरहिट फिल्म ‘ तीसरी मंजिल ‘ में “ ऐ हसीना ज़ुल्फ़ोंवाली जाने जहाँ .. “ गाने में वे क्लोज अप में लाइम लाइट में आयीं हालांकि शुरू में उन्हें क्लोज अप में नहीं दिखाया जाता था  . 1959 की ‘ दिल देके देखो ‘ और ‘ ब्लैक कैट ‘ , 1963 की ‘ तेरे घर के सामने ‘ , 1964 की ‘ चा चा चा ‘ से लेकर 1967 की ‘ शागिर्द ‘ और 1968 की ‘ ब्रम्हचारी ‘ तक लगभग 125 फिल्मों में एडु ने डांस किया है  . इसके बाद वह भारत छोड़ कर इंग्लैंड चली गयीं  . एडविना को  1961 की फिल्म ‘ वज़ीर ए आज़म ‘ में एक सोलो डांस करने का भी अवसर मिला था  . 

कुक्कू मोरे - कुक्कू का जन्म ब्रिटिश इंडिया में 1928 में हुआ था  .  कुक्कू डांसर के साथ एक अभिनेत्री भी थीं  . वे बॉलीवुड की पहली कैबरे डांसर थीं और हेलेन के आने के पहले उन्हें बॉलीवुड ‘ कैबरे क्वीन ‘ कहा जाता था  . हिंदी फिल्मों में कैबरे डांस लाने का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है  . अपनी लचीली नृत्य शैली के चलते उन्हें ‘ रबर गर्ल ‘ भी कहा जाता था  . 1940 - 50 के दशक में बॉलीवुड डांस में उनकी तूती  बोलती थी  . अपने दिनों में वे सबसे महंगी डांसर थीं  .  1946 की डेब्यू फिल्म ‘ अरब का सितारा ‘, अनोखी अदा ( 1948 )  ,अंदाज़ और बरसात ( 1949 ) , आवारा ( 1951 ) , आन ( 1952 ) ,  Mr and Mrs 55 ( 1955 ) , चलती का नाम गाड़ी  और यहूदी ( 1958 ) ,  1959 की फिल्म ‘ गेस्ट हाउस ‘ में  शील वाज़ के साथ  - निकला है गोरा गोरा चाँद  , मुझे जीने दो ( 1963 ) सहित लगभग 30 फिल्मों में उन्होंने डांस और एक्टिंग किया था  . उन दिनों फिल्मों में उनकी मौजूदगी दर्शकों को सिनेमा हाल तक खींच लाती थी  . 

हेलेन को फिल्मों में लाने का श्रेय भी कुक्कू का ही है  .  उन्होंने 1951 की फ़िल्में ‘ शबिस्तां ‘ और ‘ आवारा ‘ में कोरस डांसर के रूप में पहली बार पर्दे पर इंट्रोड्यूस किया था  . कुक्कू को लग्जरी लाइफ पसंद थी  . कहा जाता है कि उनके पास तीन कार थीं - एक खुद के लिए , एक उनके पेट डॉग के लिए और एक हेलेन आदि गेस्ट के लिए  . 

30 सितंबर 1981 को उनका निधन हो गया  . 

शीला वाज़  - शीला वाज़ एक गोअन परिवार से थी  ‘ उनका जन्म 1934 में बॉम्बे ( अब मुंबई ) में हुआ था  . शीला 1950 - 60 के दशक के आरंभ तक बॉलीवुड की मशहूर डांसर और अभिनेत्री थीं  . उन्होंने लगभग 45  से ज्यादा फिल्मों में काम किया था  . उनकी एक कमजोरी थी कि उन्हें हिंदी नहीं आती थी इसलिए उन्हें रोमन स्क्रिप्ट में लिख कर दिया जाता था  . सूत्रों के अनुसार 1951 की फिल्म ‘ शोखियाँ ‘ में उन्होंने एक बैकग्राउंड डांसर के रूप में बॉलीवुड में कदम रखा था , इसके बाद 1952 की फिल्म ‘ माँ ‘ में मुख्य डांसर का रोल मिला था  .

शीला ने अपने समकालीन मशहूर एक्टर राज कपूर , देव आनंद , शम्मी कपूर , गुरु दत्त , अशोक कुमार आदि की फिल्मों में सुपरहिट डांस का प्रदर्शन किया है जो आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं  . अशोक कुमार और मीना कुमारी की फिल्म सबेरा  का - ओ परदेसी छोरा छबीला गोरा गोरा  …  , विजय आनंद की फिल्म ‘ आगरा रोड ‘ का गाना - गजब हुआ राम  … ,  मधुबाला की फिल्म ‘ एक साल ‘ का - तुम जियो हज़ारों साल  … ,  राज कपूर की  फिल्म श्री 420 का  - रमैया वस्ता वैय्या  … , देव आनंद की फिल्म CID का - ले के पहला पहला प्यार  … , ,  देव की ही फिल्म ‘ सोलवां साल ‘ का - देखो जी मोहे लगा सोलवा साल  … और देव की ही फिल्म हाउस नं 44 का दम है बाकी तो गम नहीं  … , .महमूद की  फिल्म ‘ छोटे नवाब ‘ का - घर आजा  घिर आये बदरा  …. , शम्मी की फिल्म तुमसे नहीं देखा का - छुपने वाले सामने आ .. , फिल्म ‘ माँ ‘ का - सच कहते हैं बुरा न मानो  .. , राज कपूर की फिल्म ‘ परवरिश ‘ का - जाने कैसा जादू किया  … ,, फिल्म मदारी में कंचनमाला के साथ डांस - अकेले मोहे छोड़ न देना  … , प्रेमनाथ की फिल्म ‘ 24 घंटे ‘ का - जवानी जला बेदर्दी  .. .. , शेखर की पुरानी फिल्म अभिमान का गाना - चली जवानी ठोकर खाने   … , जॉनी वॉकर की फिल्म  ‘ जॉनी वॉकर ‘ का गाना - ठंडी ठंडी हवा पूछे उनका पता  … , 1959 की फिल्म ‘ गेस्ट हाउस ‘ में  कक्कू  के साथ  आदि गाने आज भी सुने जाते हैं  . 

1961 में निर्देशक रमेश लखनपाल से शादी के बाद शीला ने फिल्मों से संन्यास ले लिया  था  . 

29 जून 2022 को मुंबई में उनका निधन हो गया  . 

 


क्रमशः