कोई प्रोग्राम था शायद उन लड़कियों को डांस टीचर की जरूरत थी श्री को क्लासिकल डांस आता था इसलिए जबतक प्रोग्राम नहीं होता तब तक उनकी डांस प्रैक्टिस श्री ही करा रही थी इससे उसे कुछ अर्निंग भी हो रही थी।
मगर एक शाम ....
आगे ...
कुछ दिनों से श्री ने डांस को ही अपना प्रोफेशन बना लिया था। अब बहुत सारे बच्चे उससे क्लासिकल डांस सीखने मंदिर आते थे। वाकेई उसकी डांस स्किल "काबिल–ए–तारीफ" थी।
कनिष्का भी श्री के लिए खुश थी उसे तो सच में यकीन ही नहीं हो रहा था मासूम सी दिखने वाली श्री के पास ऐसा हुनर भी है। फिलहाल जो भी था वो उसके लिए खुश थी
इन दिनों दोनों ही अपनी–अपनी लाइफ में बिजी थी जहां श्री डांस प्रैक्टिस के लिए दिन में ज्यादातर मंदिर में ही रहती थी वहीं कनिष्का आपने ऑफिस में...।
इधर वेदांश आज ही लंदन से लौटा था अक्सर वह बिजनेस के सिलसिले में आउट ऑफ कंट्री ही रहता था।
शाम का वक्त,,,,,
शहर की हलचल से दूर एक ब्लैक SUV रोड पर फैले उस सन्नाटे को चीरते हुए दौड़ रही थी। आज के मौसम में एक अजीब-सी शांति घुली हुई थी।
अचानक कार में डैशबोर्ड पर रखा फोन रिंग करता है वह शख्स जो कार चला रहा था कुछ पल उस फोन को घूरता है एक गहरी सांस लेकर कॉल पिक करता है ।
"वेद कहां हो तुम? और कितना वक्त लगेगा आने में..." फोन की दूरी साइड से एक औरत की धीमी आवाज आती है
"आप टेंशन न लें मोम में टाइम से घर पहुंच जाऊंगा।" इधर से वेदांश अपनी शांत मगर गहरी आवाज में कहता है
"हम्म... ठीक है" कुछ देर रुककर "हमने 4 दिन बाद तुम्हारी एंगेजमेंट की डेट fix कर दी है ... " विधि जी अपनी शांत आवाज में वेदांश से कहती है जिसे सुनने के बाद वेदांश जो स्पीड में कार चला रहा था अचानक एक्सलेटर दबा देता है और कार एक झटके के साथ वहीं रुक जाती है
"हेलो.. वेदांश क्या तुम सुन रहे हो" विधि जी को जब कुछ देर तक वेदांश का जवाब नहीं आता तो थोड़ी फिक्र भरे लहजे में बोलती है..
"हम्म.. सुन रहा हूं..." वेदांश विधि जी की फिक्र भरी आवाज सुन बोलता है। " वेदांश में ये.. " अभी विधि जी कुछ बोल पाती उससे पहले ही दूसरी साइड से फोन कट जाता है ।
वो अपना फोन कान से हटाकर देखती है तो थोड़ा झुंझलाते हुए बोलती है.. "पता नहीं क्या करता रहता है ये लड़का... " वापस आपने काम में लग जाती है।
दूसरी तरफ फोन डिस्कनेक्ट करने के बाद वेदांश कार से बाहर आता है रोड के दोनों तरफ हरे भरे पेड़ लगे थे। आस–पास दो चार घर बने थे। ये एरिया शहर की आबादी से थोड़ा दूर था ।
ठंडी–ठंडी हवाएं चल रही थी जिस कारण पत्ते आवाज कर रहे थे कुछ पक्षी आपस चहचहा रहे थे। उस शांति में किसी मधुर संगीत की तरह ...
वो अपनी कार के बोनट से कमर टिकाए खड़ा हो जाता है अपनी जेब से लाइटर निकाल सिगरेट के लंबे–लंबे कश लेने लगता है। उसकी नज़रे आपने चारों ओर चल रही थी।
एक तेज हवा का झोंका आता है उसके माथे पर बिखरे सारे बाल पीछे हो जाते है, सिगरेट का धुआं चारों तरफ फैल जाता है। वेदांश की आंखे कुछ पल के लिए अलग एहसास से बंद हो गई थी एक अजीब सा सुकून था उस हवा के झोंके में..।
अचानक ही उसकी आंख किसी के घुंघरुओं की आवाज से खुलती उस शांति भरे ठंडे इलाके में उन घुंघरुओं की आवाज उसके कानों में गूंज रही थी।
वेदांश आपने चारों तरफ नजर घुमाता है कि तभी सामने उसे एक पुराना मंदिर नजर आता है भले ही मंदिर पुराना था मगर लाल ओर सफेद पत्थर से बना बेहद ही मनमोहक लग रहा था। न चाहते हुए भी उसके कदम अपने आप उस तरफ बढ़ जाते है
थोड़ी दूर जाकर मंदिर की सीढ़ियों को पार कर सामने देखता है वहां एक बड़ा शिवलिंग रखा था अनायास उसकी नजर मंदिर में बने उस बड़े से कॉरिडोर में जाती है जो चारों तरफ से खुला था। कुछ दूरी पर वहां कुछ लड़कियां सफेद फ्रॉक में घेरा बनाए हुए खड़ी थी उनकी कमर पर ऑरेंज दुपट्टे बंधे थे और घुंघरु की वो आवाज उन्हीं के बीच से आ रही थी ।
वेदांश थोड़ा आगे बढ़ता है उसे एक लड़की की पीठ नजर आती है उसके काले घने लंबे बाल उसके कमर पर बिखरे हुए थे उस लड़की ने एक ऑफ व्हाइट कलर में जॉर्जेट की लांग कुर्ती के साथ एंकल से ऊपर तक जार्जेट का सरारा पहना था
नेट का लाल दुपट्टा उसकी पतली कमर पर बंधा था न जाने क्यों वेदांश को उस लड़की का चेहरा देखने की तलब होती है वो थोड़ा ओर आगे बढ़ता है
अचानक ही सारी लड़कियां सामने से हट जाती है और वो लड़की घूमती है उसका उसका एक पैर हल्का सा आगे की तरफ था उसके हाथ मुद्रा स्थिति में एक कमर के पीछे और एक सिर के ऊपर... उसकी आंखे बंद थी हवा के साथ उसके बाल लहरा रहे थे कुछ उसके आंखों से होते हुए होठों को छू रहे थे।
उस लड़की के उन गुलाबी होठों पर वेदांश की आंखे कुछ इस प्रकार ठहरी.. जैसे प्यासे को पानी और बेचैन मंडराते भंवरे को कली मिल गई हो।
उन होठों पर खेलती उस मुस्कुराहट को देख अनायास ही वेदांश को अपना गला सूखता हुआ महसूस हुआ मगर उसके चेहरे का रंग तो तब उड़ा जब कुछ जुल्फे उन होठों को छूती है... न... जाने.... कैसी आग लगाई थी उन जुल्फों ने वेदांश के अंदर... कि उसके हाथों की मुट्ठी कुछ इस कदर भींची जैसे आज उन जुल्फों का आज नामोनिशान ही मिटाकर मानेगा...।
कौन है ये लड़की? क्या सच में कर लेगा वेदांश अक्षिता से एंगेजमेंट....क्या होगा आगे जाने के लिए पढ़िए... Mafia's Obsessed Love 💕 😘
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