जिंदगी की दूसरा किनारा पार्ट 19
और वही तभी अचानक शीशे में चलतो वाले प्रतिबिंब
धुंधली से ग्लिच के साथ चल रही है
जल्दबाजी में
उसी में सीन अचानक एक 13 साल की बच्ची
एक अपार्टमेंट के अंदर खड़ी है
और वह आदमी बिना शर्ट पहने हुए हैं
और वो अपने बिस्तर से उठते ही
बिस्तर पर बैठते हुए
अचानक से पीछे पलट कर उसे 13 साल की बच्ची की तरफ देखा है
और फिर अचानक उसके साथ लेटी हुई
वह लेडी भी उठकर बैठ जाती है
उस लेडी ने भी आधी अधूरी कपड़े पहने हुए हैं
और अचानक से सर घूमते हुए
साइड में देखते हैं
और अपने हाथ अपनी
अपने साइड में रखे हुए
एक सफेद चादर को पढ़ते हुए खींचती है
और खींचते
ही जल्दबाजी में अपने दोनों हाथ बढ़ाते हुए
वो चादर अपनी बॉडी से लपेट देता है
और तभी वह आदमी उस बच्ची से नजर हटते ही
नजर घुमा कर उस लेडी की तरफ देखते हुए
जल्दबाजी और भरी आवाज में कहती है
तुम अंदर जाओ
और तही वह लेडी अचानक से
उस बच्ची और उस आदमी की तरफ देखते हुए
हल्के चेहरे सीकोड़ कर हैरानी के साथ कहती है
पर
और वही वह आदमी अचानक से गुस्से में आकर
भोओ को चढ़ाते हुए उसे लेडी पर चिल्लाते हुए कहती है
कहा ना तुम अंदर जाओ
और वही वह बच्ची उन दोनों के पीछे लंबी गहरी सांस लेते हुए और शिशक शिशक कर रोते हुए
उन दोनों की तरफ गहरी
आंखों से देख रही है
और
तभी वह लेडी अचानक से कपड़े को अपनी बॉडी पर सही से लेते हुए उठती है
और खुद के गुस्से को कंट्रोल करते हुए
हल्की तीखी की आवाज में कहती है
ठीक है
और
बिस्तर से उतरते हुए बिस्तर के पीछे की तरह चार-पांच कदम चलते हुए जाती है
और बाथरूम के दरवाजा अपने हाथ बरा कर खोलते हुए बाथरूम के अंदर कदम बढ़ते हुए चली जाती है
और उधर से पलटते हुए बाथरूम की दरवाजा लगाते हुए
गुस्से में तना मारते हुए भारी आवाज में कहती है
क्या बकवास है
और वही वो आदमी पीछे पलते हुए
उस बच्ची को देखते हैं
और हैरानी से भरी घबराते हुए आवाज में कहता है
मेघना
और
तभी अचानक से आईने के सामने खड़ी मेघना
जोर-जोर से गहरी सांस लेते हुए
हफ्ते हुए
और दर्द और पैनिक की वजह से
शिशक शिशक के रोते हुए
अचानक से उसकी हाथ अपने आप बालों को खींचते हुए नीचे हो जाती है
और वह तिरछे होते हुए
वही अपने रूम में आईने के पास गिरने लगती है
और तभी अचानक गिरते हुए
उसकी हाथ हल्की आगे बढ़जाती है
और
उसके हाथ बुक सेल से टकराती है
और बुक सेल और वह दोनों अचानक से साथ में
धारण से जमीन पर गिर पड़ती है
और वही बुक सेल्स हां पूरी तरह से बिखर जाती है
और वही तभी अचानक धीरे-धीरे वह दृश्य साफ
होने लगते हैं
और वही उस दृश्य में समय धीरे-धीरे बीता गया
कुछ देर के बाद
और उस बच्ची के पिता
उस बच्ची के दूसरी साइट
मुंह करते हुए
अपने नाइट सूट की डोरिया बढ़ रहे हैं
हल्के सर झुकाते हुए
और
तभी अचानक वो 13 साल के बच्ची
गुस्से में रोते और
तिखे शब्द में
कपकपाते हुए होठों से चिल्लाते हुए कहती है
आपके जैसे घटिया इंसान मैंने कभी नहीं देखा
और फिर अचानक हाथ उठाते हुए
और हल्की हाथ पीछे की तरफ करते हुए
और उंगलियां बराकर
उंगलियां अपने पिता पर पॉइंट करते हुए
शिशक शिशक कर रोते और रिएक्ट करते हुए
और चिल्लाते हुए तीखी लेहजे में कहती है
वहां मेरी मां मर रही है
और आप यहां
अपने से भी कम उम्र की लड़की के साथ सो रही है
और तभी अचानक उसके पिता अपनी नाइट सूट की डोरी बनते हुए
और यह बात सुनते ही
अपने हाथों को नीचे करते हुए
पलट कर
नजर उठाते हुए
उस लड़की की तरफ देखती हुई
गुस्से में
चिल्लाकर कहता है
मेघना
और वही मेघना
अपने पिता की चिल्लाहट सुनते ही
अचानक से डर जाती है
और जोर से सीसकते हुए सांसे लेती है
और उसके हाथ अपने आप
नीचे हो जाती है
वह घबराते हुए
और अचानक से सिसकते हुए और रोने लगती है
और उसकी आंखों से तेज आंसू जाने लगती है
और वह जोरो जोरो से शिसक शिसक सांस लेते हुए
अपने हाथ उठाते हुए
आंखों के बहते हुए आंसू पोछने लगती है
और फिर से सिसक सिसक के रोते हुए
लड़खरते हुए आवाज में कहती है
आप घटिया हैं
आई हेट यू डैड
आप एक घटिया इंसान हैं
और मेघना यह कहते हुऐ
शिसक शिसक कर रोते हुए
और अपने पिता को देखते हुए
और वह अपने कदम पीछे लेते हुए
यहां से वापस जाने के लिए उल्टी कदम जा रही है
और वही वह आदमी हल्के हाथ अपनी बेटी की तरह बड़ाते हुए और उसे पीछे जाते देखा
उस चुप करने की और रोकने की कोशिश करते हुए
भारी आवाज में कहता है
मेघना
और
वही वह लेडी बाथरूम के दरवाजे के पास अपनी
बॉडी में चादर लपेटे हुए
बैठी हुई है
उन दोनों की बात सुनते हुए
और वही मेघना अपने पीछे कदम लेते हुए
और अपनी आंसू पूछते हुए
अपने दोनों हाथ नीचे करती है
और गुस्से में शिसक शिसक कर रोते हुए
फिर से अपने पिता की तरफ हल्की हाथ बढ़ती है
और
लड़खते हुए आवाज में कहती है
देखना अगर वह मर गई तो
आईऐ गा मत
उसके साथ में भी मर जाऊंगी फिर भी मत आईए गा
और वह आदमी अपनी बेटी को गुस्से
और नफरत में देख
हल्के कदम बढ़ाते हुए
और उसे से गंभीरता से देखते हैं
और अपने हाथ उसके तरफ बढ़ते हुए
घबराकर हल्की आवाज में
फिर से कहने की कोशिश करता है
मेघना
और तभी अचानक मेघना रोते हुए
और फिर से अपने दोनो हाथ उठाकर
अपने आंखों के पास रखते हुए
और आंखों को मलते हुए
और आंसू अपने हाथों से पूछते हुए
और वैसे ही शिशक शिशक कर रोते हुए
और अपनी कदम पीछे लेते हुए
अचानक से वो ठेहर जाती है
और आंखों से आंसू पूछते हुए अपने पिताके साथ देखी
और वही मेघना के पिता हल्के अपने हाथ को मोड़ते हुए
अपने कदम बढ़ाते हुए
अपनी गहरी आंखों से देखते हुए
अचानक से ठहर जाते हैं
और उसे इन सब से तकलीफ हो रहे हैं
और वही मेघना अपनी आंखों के पास से
अपने हाथ हटते ही
नीचे करती है
और वह अपने पिता को देखते हुए ही
अचानक से एक कदम पीछे लेती है
और पलट कर दरवाजे की तरफ दौड़ पड़ती है
और वही धीरे-धीरे समय बित्ता गया
कुछ देर बाद
अचानक मेघना सिसकते हुए
गहरी ठेहराऊ भरी सांस लेती है
वैसे ही उसके सांस अटजाती है
और उसकी आंखें खुलती है
वह जमीन पर गिरी हुई है
तिरछी साइड होकर
कमर हाथ और सर कि बल
उसके सर से खून बह रहा है
और अचानक से वो
धीरे-धीरे गहरी सांस लेने लगती है
आगे की तरफ देखते हुए
और उनके आंखों में भरी हुई आंसू है
और उसे नहीं समझ में आ रही है
कि यह सब क्या है
और तभी उसके अंदर से हंसते हुए
एक तीखी आवाज आती है
क्या मजा आया यह देखकर
उसके अंदर की आवाज
जब वह यह कहती है तो
उसके साथी अचानक से उसके सामने लगे हुए
वो आईना अचानक से एक झटके में टूटा है
और वही मेघना अचानक से
और तभी अचानक मेघना
वो डरावनी आवाज
और शीशे की टूटने की आवाज सुनते ही
डरते हुए पलके चिपकाते हुए
शिसकयां भर कर गहरी सांस लेती है
और अचानक
वही टूटे हुए शीशे दिखाते हुए
एक-एक करके जमीन पर गिरते हुए
और
दो चार शीशे के टुकड़े एक-एक करके
मेघना को भी आकर लगती है
हाथों पर
तभी अचानक
मेघना चेहरा सिकोड़ते हुए चिखने वाली होती है
तभी अचानक और
कुछ और टुकड़े
हाथों में पैरों में और पीठ पे
आकर गिरते हुए
उसके बॉडी में छुप जाती है
और तभी अचानक से वह पलके बंद करते हुए
रोते हुए
एकदम से चेहरे को सिकोड़ कर
शिसकते भरी सांस अंदर लेते हुए
जोरों से चिल्ला होती है
आ
पर उसके मुंह से ठीक से चिक भी नहीं निकलती
और साथ में उसकी डर के मारे
पूरी बॉडी भी थरथर उठाती है
और फिर अचानक से वो धीरे-धीरे पलके खोलते हुए
गहरी लंबी सांस लेते हुए
आगे की तरफ देखती है
किताब सेल्ड गिरा हुआ
किताब बिखरे हुए
और अभी-अभी गिरते हुए शीशे
देखती है
उसे कुछ नहीं समझ में आ रहा
बस वह डर और दर्द के कारण लंबी-लंबी सांस ले रही है
उसके अंदर से अभी भी हंसने की आवाज आ रही है
हा। हा। हा। हा। हा
और वह घबराहट में
पैनिक होते हुए
और अचानक बाहर कि तरफ देखते हुए
धीरे-धीरे डर से अपनी आंखें बंद कर लेती है
शिशक से शिशक रोते हुए
और लंबी गहरी सांस लेते हुए
और वहीं दूसरी तरफ असल दुनिया में
लगभग सुबह 10:00 बजे
बहुत बड़ी बिल्डिंग में बहुत ही ऊपर
15वीं मंजिल पर
एक अपार्टमेंट में एक 50 साल की व्यक्ति जो
देखने में अभी आधी उम्र के लग रहे हैं
वह सूट बूट में खड़े होते हुए
बालकनी से बाहर देख रहे हैं
उसके चेहरे गंभीर है
और उसके आंखें शांत
और
तभी अचानक पीछे से एक नाइटी ड्रेस में चलते हुए
एक लेडी जिसकी उम्र 35 साल होंगे
जो देखने में एक मॉडल की तरह लग रही है
वह चलते हुए
उस आदमी के पास आ रही है
और वही वह आदमी कुछ सोचते हुए
बस बिल्डिंग के बाहर देख रहा है
और वही वह लेडी उसे आदमी के करीब
पीछे आते हुए
और उन्हें गौर से देखते हैं
मुस्कुरा कर हल्की आवाज में कहता है
क्या कर रहे हो
अभिराज
और वही उस आदमी का नाम अभिराज राठौर है
और वही उस लेडी का नाम मालिका
और तभी अचानक अभिराज
उसकी बातें सुनते ही नजरे घूमा कर उसके तरफ देखा है
और
तभी मालिका अपने तेज कदम बढ़ाते हुए
और अपनी दोनों हाथ फ्लेट हुए
पीछे से
आकर अभिराज की कमर
जोरो से पकढ़ते हुए
उसके सीने पर हाथ रखती है
और मुस्कुराकर कहता है
आप यहां है मैंने सोचा
आप चले तो नहीं गए
और वही अभिराज कुछ नहीं बोलना
वह शांत है
और तभी अचानक वो
हल्के पीछे सर सर करतेहुए
और हल्की नजरे झुका कर दामिनी को देखता है
पर उसके दिमाग अभी कहीं और है
वह इस कहानी की विलन तो नहीं
पर इस कहानी के मेंन किरदार के लिए
विलन से काम भी नहीं है
वह उस अस्पताल में कोमा में पड़ी हुई
लड़की की पिता है
अभिराज राठौर
उसके पास सब कुछ है दौलत शोहरत नाम
पर उसकी बेटी कोमा में है
वह बेटी जिसे वह जान से ज्यादा प्यार करता है
पर वह बेटी उसे प्यार ही नहीं करता
उससे करता है तो बस नफरत
और वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर देव अपनी पेशेंट के कमरे से बाहर निकलते हुए
अपने दोनों हाथ कोट के जेब में डालते हुए
और अस्पताल की गलियों में चलते हुए
दक्षिण से उत्तर के और आगे बढ़ते हुए आ रहा है
नजर झुकाए
और
वही अस्पताल हेड
ऑफिस से बाहर पूरब से
निकलते हुए
और साथ में जूनियर स्टूडेंट
के साथ चलकर आते हुए
और वही जूनियर स्टूडेंट के हाथों में
एक फाइल है
जिससे वह हल्के नजर डालते हुए
और अस्पताल हैड की बात सुनते हुए
आगे बढ़ रहा है
और वहीं अस्पताल हैड
उस जूनियर स्टूडेंट से बात करते हुए
हल्की हवा में हाथ लहराते हुए
और रिएक्ट करते हुए
हल्की ऊंची आवाज में कहता है
नो नो इस वेरी डिफिकल्ट
बीमारी को जानने के लिए
पहले तुम्हें
पेशेंट को समझना चाहिए
और उसके साथ चलते आते हुए
वो जूनियर स्टूडेंट
हॉस्पिटल हेड की तरफ देखते हुए
धीरे-धीरे अपनी कदम बढ़ा रहा है
और वही हॉस्पिटल हैड
उस स्टूडेंट को देखते हुए
और दोनों हाथ हल्के हवा में लहरा कर
बात करते हुए कहने की कोशिश करता है
डॉक्टर को संवेदनशील होना चाहिए
अपनी पेशेंट की तकलीफों को समझने
और यह कहते हुए
वह अचानक अपना सर उठना है
और थोड़ी नजरे घूमता है
और देखा है
डॉक्टर देव सर झुकते हुए
और सोचते हुए
धीरे-धीरे चलते हुए
आगे बढ़रहा है
और डॉक्टर हेड उसे देखते ही
अचानक ठहर जाता है
धीरे-धीरे अपने हाथ नीचे करते हुए
और
अपनी बात बंद करते हुए
और वही तभी जूनिय रस्टूडेंट
अचानक हाथ में फाइल लिए
हुए फाइल को
हल्के नजर झुकते हुए दोनों हाथों से फाइल को बंद करता है
और
हॉस्पिटल हेड की बातों को ठहरते हुए देखा
वह अपनी नजर उठाकर
हॉस्पिटल हेड की तरफ देखा है
और उसे देखते हुए
वो हल्के नजरे घूम कर
दक्षिण की तरफ देखा है
और देखता है
देव को सर झुकाए आगे धीरे-धीरे कदम बढ़ाते आते हुए
और उसे देखते हुए
फिर अपने नजर घूमर
अस्पताल हेड की तरफ देखा है
और उसे देखते हुए
और हल्की मुस्कुराते हुए हल्की आवाज में कहता है
ठीक है सर मैं चलता हूं
और
तभी अचानक अस्पताल हेड हल्के नजर नजरे घूम कर
हल्के झुकते हुए
उस स्टूडेंट की तरफ देखता है
और उसे देखते हुए हल्के सर हिलाते हुए
मुस्कुरा के हल्की भरी आवाज में कहता है
अच्छा ठीक है
अगर तुमे कुछ और समझ में ना आए
तो फिर से आकर मुझे बात कर सकते हो
और
वही वह लड़का हमें सर हिलाते हुए
हल्की आवाज में कहता है
ठीक है सर
और वो फिर अचानक वहां से अपनी कदम पीछे लेते हुए
पलट कर दूसरी गलियारों उत्तर की तरफ चलकर जाने लगते हैं फाइल को देखते हुए
और वहीं दूसरी तरफ से डॉक्टर देव
वैसे ही सोचते हुए
आगे बढ़ बढ़ते हुए आ रहा है
बिना किसी के ध्यान दिए
और
तभी अचानक हॉस्पिटल हेड
सर घूमर
उस देखते हुए मुस्कुराता है
और फिर कुछ सेकंड ठहरते हुए
और फिर हल्के मुस्कुराता है
और हल्के हाथों ऊपर करते हुए
और अपनी तरफ बुलाने की इशारा करते हुए
हल्की ऊंची आवाज में कहता है
देव
और तभी अचानक देव नजर उठाकर हॉस्पिटल हेड की तरफ देखा है
और देखते हुए मुस्कुराता है
और मुस्कुराते हुए ही
हल्के अपने हाथ उठाता है हाय का इशारा करते हुए
और अचानक से अपनी कदम आगे बढ़ता है
और हल्की ऊंची आवाज में कहता है
डैड
और अचानक से अपनी हल्के कदम बढ़ाते हुए
और अपने हाथ नीचे करते हुए
देव
डॉक्टर हेट की तरफ दौड़ पड़ता है
और वही अस्पताल हेड अपने बेटे को देखकर मुस्कुराते हुए अपने ऊपर करते हुए हाथों को
धीरे-धीरे नीचे करता है
और अपने हल्के कदम बढ़ाते हुए
देव की तरफ बढ़ता है
उन्हें देखते हुए
और तभी डॉक्टर देव
दौड़ते हुए हल्के कदम धीमा करते हुए
अपने पिता को देखते हुए
धीरे-धीरे उनके करीब आते हुए
अपने कदम धीमा करते हुए
ठहर जाता है
और वही अस्पताल हेड देव को देखते हुए
हल्के कदम बढ़ाते हुए
और ठहरते हुए
उसके उदास चेहरे को देखते हुए
मुस्कुरा कर उसके चिंता करते हुए
हल्की आवाज में कहता है
क्या हुआ फैशन ठीक तो है ना
और वही देव अपने पिता को देखते हुए
हल्की हामी में सर हिलता है
और तभी अस्पताल हेड देव को देखते हुए
हल्के अपनी बाएं हाथ उठाकर
अपने बेटे कंधे की तरह बढ़ते हुए
हल्की आवाज में कहता है
चल फिर कैफेट एरीया में चलते हैं
वहीं चलकर बात करते हैं
और यह कहते हुए वो देव की कंधे पर हाथ रखता है
और वह देव अपने पिता की बातों पर
हामी भरते हूए सर हिलता है
हुं
और वही डॉक्टर हेड अपने बेटे के देखते हुए
उसके कंधे पर से अपने हाथ नीचे करता है
और फिर हल्के कर हिलाते हुए कहता है
चल फिर चलते हैं
और वही डॉक्टर देव मुस्कुराते हुए
और हामी भरते हुए
फिर से अपने सर हिलाता है
हा
और डॉक्टर हेड हल्के मोड़ते हुए
उत्तर की तरफ
आगे बढ़ने लगते हैं
और उसके साथ-साथ चलते हुए
देव भी जाने लगता है
अगर यह कहानी आप सबको अच्छी लगे तो
आगे पढ़ते रहिए
मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯