Khamosh agni pariksha in Hindi Thriller by vishnupriya pandit books and stories PDF | हैरानी - Ateet ki Yaadein - 22

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हैरानी - Ateet ki Yaadein - 22

Episode - 22 (खामोश अग्नि परीक्षा)


गौरव दबे पांव रसोई में दाखिल हुआ । वह उसे परखना चाहता था कि क्या रिया सच में बदल गई हैं या यह कोई चाल है ।


बिना कुछ बोले , गौरव ने पीछे से अपनी मजबूत और ठंडी बाहें रिया की कमर के गिर्द कस दी । रिया का शरीर बिजली के झटके की तरह कांप उठा , पर उसने अपनी आँखें कसकर बंद कर ली और अपनी साड़ी को जोर से पकड़ लिया । गौरव ने अपना चेहरा उसकी नंगी गर्दन पर टिका दिया , उसकी गर्म सांसे रिया के कान के पास गूंज रही थी ।
"आज बहुत शांत हो रिया ... कल की चीखे कहा गई?" गौरव ने फुसफुसाते हुए कहा ।

उसने अपने खुरदरे हाथ रिया के पेट पर रखे और उन्हें धीरे - धीरे ऊपर की ओर सरकाने लगा । उसके नाखून रिया की कोमल त्वचा को खुरच रहे थे । गौरव ने अपनी पकड़ इतनी सख्त कर दी कि रिया की पसलियों में दर्द की लहर दौड़ गई । वह उसे इतनी जोर से अपनी ओर भींच रहा था कि रिया का दम घुटने लगा , वह दर्द से उचक पड़ी , उसकी पीठ गौरव के सीने से बुरी तरह रगड़ खा रही थी ।

गौरव ने उसे झटके से घुमा कर अपनी ओर किया और उसे स्लैब से सटा दिया स्लैब का ठंडा पत्थर रिया की कमर में चुभ रहा था उसने रिया के चेहरे को अपनी उंगलियों में जकड़ा, गौरव रुका नहीं । उसने रिया को अपनी तरफ खींचा और अपने हाथों को रिया की पीठ पर ले जाकर उसे सहलाना शुरू किया, पर वह सहलाना नहीं , बल्कि दबाना था । उसने उन जगहों पर अपनी उंगलियों का दबाव बनाया जहां कल रात के नीले निशान अभी ताजा थे । रिया के मुंह से सिसकी निकलने ही वाली थी , पर उसने अपने निचले होठ को इतनी जोर से दांतों तले दबाया कि वहां से फिर से खून रिसने लगा ।

उसने अपनी खामोशी नहीं तोड़ी ।
गौरव ने उसके होठों को अपने अंगूठे से बर्बरता से मसला । " देखू तो सही , कल का जहर उतरा या नहीं ," कहते हुए उसने रिया के होठों को क्रूरता से चूमा , वह चूम नहीं रहा था , वह जैसे उसके वजूद को निगल जाना चाहता था ।

रिया पत्थर की मूरत बनी रही । उसकी आँखें खुली थी , पर वो गौरव को नहीं , बल्कि सामने की दीवार पर लगे उस कलंक को देख रही थी जो उसकी तकदीर बन चुका था । गौरव अपने होठों से रिया के होठों को बेहरमी से खींच रहा था उन्हें दबा रहा था । फिर उसने रिया की गर्दन को चूमते हुए उसके कंधे पर अपने दांत गड़ा दिए , दर्द इतना था कि रिया के पैर जमीन छोड़ रहे थे , पर वह एक शब्द नहीं बोली । 

गौरव पीछे हटा , उसकी आंखों में एक अजीब सी संतुष्टि थी । " लगता है तुम पालतू होना सीख रही हो । अच्छा है .... वरना कल तो सिर्फ शुरुवात थी ।" 

वह हंसता हुआ रसोई से बाहर निकल गया । गौरव के जाते ही रिया के हाथ कांपने लगे , उसने दीवार का सहारा लिया और नीचे बैठ गई । उसके शरीर पर गौरव की उंगलियों के लाल निशान उभर आए थे, पर उसकी आंखों में जो ' आग' थी , वह बता रही थी कि उसने गौरव को नहीं , बल्कि अपने वक्त को रास्ता दिया है ।
रसोई वाले हादसे के बाद रिया का शरीर टूट चुका था , पर उसका मन पत्थर का हो गया था । दोपहर के वक्त जब रिया कपड़े सूखा रही थी , उसकी सास की नजर उस पर पड़ी । रिया का पल्लू कंधे से थोड़ा सरक गया था और उसकी सफेद गर्दन और पीठ पर गौरव की उंगलियों के वो काले - नीले निशान और दांतों के घाव साफ झलक रहे थे ।

सास के हाथ में पानी का गिलास था जो उनके हाथ में कांप गया । उन्होंने अपनी कोख से जन्मे बेटे की हैवानियत के वो निशान देख लिए थे । उनकी रूह कांप गई , पर उन्होंने चेहरे पर शिकन तक नहीं आने दी । उन्हें पता था कि अगर उन्होंने ममता दिखाई तो गौरव और भी ज्यादा सक करेगा जो रिया के लिए घातक साबित हो सकता है ।

शाम को जब गौरव ने देखा रिया अकेली है रसोई में तो वह उसे फिर से दबोचने पहुंचा और रिया की कमर को दोनों हाथो से पकड़ लिया और जोर से दबाया रिया की दिल की धड़कने बढ़ गई । वह अपने हाथों को रिया के कमर से सरकाते हुए पेट तक ले गया , उसने अपनी पकड़ और मजबूत कर दी । उसने रिया को इतना जोर से पीछे खींचा कि रिया की पीठ गौरव के सीने से बुरी तरह सट गई । 
गौरव का एक हाथ रिया के पेट पर रेंगने लगा और दूसरे हाथ से वह रिया की कमर को कस कर भींच रहा था उसने अपने नाखून रिया के पेट की नरम त्वचा में गड़ा दिए । रिया ने दर्द से अपने होठ काट लिए , पर वह चिल्लाई नहीं ।

" छोड़ो.... चाय गिर जाएगी," रिया की आवाज किसी मरे हुए इंसान जैसे सपाट थी । 
गौरव हंसा, एक ऐसी हसी जिसने रिया की रूह कपा दी । " चाय गिरती है तो गिर जाने दो । मुझे तो यह देखना है कि तुम कितनी देर तक ये नाटक कर सकती हो ।" 

गौरव ने उसे अपनी ओर घुमाया । रिया के सामने गौरव की गर्म और वहशी सांसे थी । उसने रिया के दोनों हाथो को ऊपर उठा कर एक साथ जकड़ लिया और उन्हें स्लैब पर दबा दिया ।
" तुम्हे क्या लगा रिया ? तुम खामोश रहोगी और मैं मान लूंगा कि तुमने हार मान ली ?" उसने अपने दूसरे हाथ से रिया के चेहरे को दबोचा उसके अंगूठे ने रिया के जख्मी होठ को इतनी जोर से दबाया कि ताजा खून रिसने लगा । गौरव ने उस खून को अपनी उंगली से चखा । 

रिया की आंखों में आसूं थे , पर वह उन्हें गिरने नहीं दे रही थी । वह पत्थर बनी गौरव के इस वहशी पन को सह रही थी । गौरव ने अपनी गर्दन झुकाई और रिया की गर्दन को अपने होठों से जोर से खींचा । वह चूम नहीं रहा था , वह उसे काट रहा था । 

गौरव ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा " जितना तुम खुद को पत्थर बनाओगी, उतना ही मैं तुम्हे तोड़ने का मजा लूंगा ।" 

रिया को अपनी बेबसी का अहसास हर पल हो रहा था । उसे महसूस हो रहा था कि गौरव की मदान्धता उसे निगल जाना चाहती है । 

तभी बाहर से सास की आवाज आई ," रिया ! चाय बनी की नहीं ? कितनी देर लगाएगी? " 

गौरव ने झटके से रिया को छोड़ा । उसके चेहरे पर एक अधूरी हवस की तड़प थी । उसने रिया की आंखों में झांका और अपनी उंगली से उसके गाल पर बहते हुए आसू को पोछा ।" अभी तो बहुत समय है रिया । बच सको तो बच लो ।" 

गौरव बाहर चला गया । रिया वही जमीन पर ढह गई । उसकी सांसे उखड़ रही थी उसे लगा कि वह अभी मर जाएगी । लेकिन तभी उसने अपनी साड़ी ठीक करते हुए मन ही मन कहा - ' तुम मेरा जिस्म कुचल सकते हो गौरव , पर मेरी रूह को नहीं छू सकते । तुम जितना जुल्म करोगे , मेरी भागने की आजादी उतनी ही मजबूत होगी ।'

उसने चाय का कप उठाया और बाहर की तरफ चल पड़ी ....

क्या रिया गौरव के वहशी पन को सह के भागने में कामयाब हो जाएगी? जानने के लिए बने रहे । अपनी राय कॉमेंट में जरूर दें । कहानी पसंद आए तो रेटिंग जरूर करें।