Mafia's Obsessed Love - 16 in Hindi Love Stories by Priyanka Saini books and stories PDF | Mafia's Obsessed Love - 16

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Mafia's Obsessed Love - 16

"जो तुमने क्या है मिस आर्या इसका हर्जाना तुम्हे भुगतना पड़ेगा..."  कहते हुए वह अंदर आ जाता है ।

ऐसे ही ये दो दिन भी निकल जाते है। और आ ही गया वो दिन... सुबह  सुबह चारों तरफ चहल पहल थी क्योंकि आज थी शिवरात्रि... 

"अरे यार तुम्हे और कितना टाइम लगने वाला है plz जल्दी करो न... वैसे भी आज बहुत भीड़ होगी मंदिर में.."

एक लड़की जो मिरर के सामने खड़ी होकर अपने बालों का बन बना रही थी। एक कमरे के दरवाजे की तरफ देख उसने तेज आवाज में कहा... 

उसकी नजर बार बार उस दरवाजे पर आकर रुक रही थी। जैसे उसे किसी का बेसब्री से इंतजार हो... वह अपना काम फिनिश कर वहीं इधर उधर टहलने लगती है उसके दोनों हाथ आपस में उलझे हुए थे। व्हाइट सरारा कुर्ती के साथ रेड नेट की चुन्नी जिसे उसने साइड से अपने कंधे पर pinup किया हुआ था। देखने पर वह कमाल की हसीना लग रही थी। मगर चेहरे पर एक उलझन थी... 

वह बड़बड़ाते हुए खुद से ही बोल रही थी... " अरे यार इस लड़की को इतना टाइम कहां लग रहा है.. रेडी होने गई है..  या शॉपिंग करने ... आह.. इसकी शादी में थोड़ी न हम जा रहे है... जो इतना टाइम.... वो अभी बोल ही रही थी.. तभी उस कमरे का दरवाज़ा खुलता है... वह लड़की जो खुद से बोल रही थी। उसकी शब्द उसके गले में ही अटक जाते है।

बस वो बिना पलक झपकाए अपने सामने खड़ी दूसरी लड़की को देख रही थी। दूसरी लड़की जिसने हल्की पीले कलर में साड़ी पहनी थी। उस साड़ी पर साइड से जेरी बॉर्डर वर्क था उसके साथ प्लेन व्हाइट ब्लाउज जो उसे और भी क्लासी लुक दे रहा था। उसके बाल हाफ pinup थे। जिसमें एक शानदार छोटा सा क्लिप लगा था। दोनों हाथों में लाल रंग की चूड़ियां थी।

वह  हाथ में पूजा की थाली लिए कमरे से बाहर आती है  बिना किसी पर ध्यान दिए जल्दबाजी में कहती है ... " सॉरी यार कनु हम लोग मेरी वजह से लेट हो गए..  पर में क्या करती मेरी ये साड़ी रुक ही नहीं रही देखो अब फिर से.. " वह अपने कंधे पर पड़े पल्लू को देखकर रोनी सी सूरत बना लेती है। क्योंकि वो बार बार सरक कर उसकी हाथ पर आ रहा था।

श्री अपना सिर उठाकर सामने कनु को देखती है। जो अपने होश गँवा कर उसे ही देख रही थी। देखे भी क्यों न वो लग ही ऐसी रही थी। अगर कोई एक बार उसे देख ले तो न चाहते हुए भी उसे बार बार देखने पर मजबूर हो जाए। कनु को इस तरह अपनेआप को देखता पाकर श्री खुद को ऊपर से नीचे देखने लगती है उसे अब खुद पर डाउट होने लगा था कि वह इस साड़ी में ठीक भी लग रही है या ऐसे ही... 

कनु आगे बढ़कर उसके दोनों कंधों को पकड़ मुस्कुराते हुए शरारत से बोलती है ..." उम्ह... देवी जी आप दर्शन करने जा रही है या करवाने.. " श्री उसे नासमझी से देखने लगती है जैसे पूछ रही हो क्या मतलब?... ये देख कनु उसे अपनी आंखे छोटी कर कुछ पल घूरती है ... फिर अपने दोनों हाथों को सीने पर बांध उसके सामने खड़े होते हुए बोली...

मतलब ये कि.. "मुझे ऐसा क्यों लग रहा है आज कुछ तो होने वाला है कुछ बड़ा".. "क्या बड़ा " श्री उसे असमंजस से देख बोलती है .."मतलब आप कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रही है.. कोई कैसे इतना प्यारा लग सकता है..कहीं ऐसा न हो आज आपको भी आपके शिव मिल जाए और..."  आंखे मटकाते हुए ..  उसकी साड़ी के पल्लू को सेट कर सेफ्टी पिन से पिनअप कर देती है वहीं श्री उसके और का मतलब समझ हल्का शर्मा जाती है.. उफ्फ उसका शर्माना भी.. 

उसे इस तरह शर्माते देख कनु श्री को देख आंख मार देती है और आगे बढ़कर पूजा की थाली को उठा लेती है। कनु श्री को देखती है जो उसे हैरानी से देख रही थी। उसे तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कनु उसे ऐसा भी कुछ कहेगी। 

कनु अपना गला साफ करने की एक्टिंग करते हुए श्री से बोलती है .. " अरे मैने आपके पिया जी के मिलन की बात कही थी... आप तो रस ही लेनी लगी दीदी जी ..."  

श्री उसे देख शर्माते हुए घर से बाहर निकलते हुए बोली.. " पागल हो तुम कुछ भी... " पागल और मैं कितनी तो इंटेलिजेंट हूं... ऐसा भी क्या कह दिया मैने.. वैसे भी शादी के बाद बच्चों की ही प्रॉसेस होती है... कंपलसरी ब्रांड जो होते है... कहते हुए अपने कंधे उचका श्री के पीछे वो भी घर से बाहर निकल जाती है ।

इधर राठौर विला .... 

यहां का माहौल कुछ बदला बदला नजर आ रहा था चारों तरफ चहल पहल मची थी सर्वेंट इधर से उधर दौड़ते हुए सामान लाइन से खड़ी कारों में रख रहे थे।

सारा सामान मंदिर पहुंचा दिया है रमेश भैया आपने... हम बिल्कुल भी किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं चाहते पूजा में.. "कहते हुए विधि जी अपने सामने खड़े एक अधेड़ उमर के शख्स से कह रही थी। " लाल रंग की प्रिंटिड बनारसी साड़ी में वो बहुत खूबसूरत लग रही थी ।

अरे बस भी करो भाग्यवान सुबह से दस बार ये बात तुम बोल चुकी हो अब तो चलने का टाइम भी हो गया है वहीं चलकर देख लेना सब.."  कहते हुए मनीष जी उनकी तरफ बढ़ते हुए उनका हाथ पकड़ कार में बैठने का इशारा करते है। वो पिछले एक आधे घंटे से उन्हें ये सब करते देख रहे थे। 

" अरे बस एक मिनट आप रुकिए तो सही..." कहते हुए वो मनीष जी को शांत रहने का इशारा करती है। विधि जी रमेश को आवाज देते हुए पूछती है.." भैया वो महापंडित जी से आपने बात तो कर ली थी न .. " रमेश जो इस घर में सालों से काम कर रहे थे। उनके वफादार और ज्यादातर घर की चीजों को ये ही मैनेज करते है। पूरे विला का सारा स्टाफ इनके अंडर काम करता है। वह बोलते है...

"हां आप टेंशन न ले... भाभी जी मैने महापंडित जी से बात कर ली थी। वहां सबकुछ तैयार है आपको बस पूजा में शामिल होना है "  अब मिल गई आपको तसल्ली मनीष जी उन्हें देख बोलते है ...

"हां मिल गई.. आखिर मेरे बेटे के नाम ये पूजा है मैं कोई कमी नहीं चाहती इसमें.. " विधि जी मुस्कुराकर मनीष जी की तरफ देख बोलती है उनकी बात सुन मनीष जी बस हां में सिर हिला देते है.. 

"अरे यार ये मोम भी न कितनी टेंशन लेती है इन सब की.. घर पर इतने सारे सर्वेंट होने के बाबजूद ..."  मिहिर जो उन्हीं कारों  में से एक में बैठा अपनी मां को देख रहा था  अपने सिर को न में हिलाते हुए कहता है ... "हां सच में कितना सोचती है बड़ी मोम " शायना भी मिहिर की बात में हामी भरते हुए विधि और  मनीष जी की कार की तरफ देखते हुए बोली... 

" हां वो सब तो ठीक है मगर... हमारे महाराज्य के चक्रवर्ती सम्राट नजर नहीं आ रहे.." जीवन जो पैसेंजर  शीट पर बैठा था खुद भी पीछे देखते हुए कहता है..।

" ओहो... वैसे तुझे पता भी है चक्रवर्ती सम्राट किसे कहते है?" मिहिर जीवन का चेहरा आगे पैसेंजर शीट पर करते हुए बोलता है... "हां पता है "  मगर अपनी आदत से मजबूर जीवन फिर से वापस पीछे देखते हुए बोला..

शायना जो मिहिर के पास पीछे वाली शीट पर बैठी थी उसे देख घूरते हुए कहती.." चल फिर पहले बता और भाई कैसे हुए चक्रवर्ती सम्राट"

जीवन उसके सिर पर हल्का सा मारते हुए मिहिर और शायना को घूरते हुए कहता है... " मंद बुद्धियों चक्रवर्ती सम्राट उसे कहते है जो सम्राट पूरे देश को जीतता है। मतलब उसे कोई भी युद्ध में हरा नहीं पाता... और रही बात वेदांश भाई की तो... बिज़नेस वर्ल्ड में अपने भाई का ही सिक्का चलता है । शायना जो गुस्से में उसे ही देख रही थी क्योंकि उसने बिना किसी वजह के उसके सिर मारा था। कुछ पल सोच में पड़ जाती है ...  वैसे इसमें कोई हर्ज नहीं कि बिजनेस ही क्या उसका सिक्का पूरी मुंबई में चलता था। 

कौन नहीं जानता वेदांश राठौर को जो मुंबई की सरकार भी अपने अकॉर्डिंग चलाता था। वह एक नाम महज नहीं दहशत था जो लोगों के दिमाग में नहीं सीधे दिल में उतरता था ।

अजीत जो उस कार की पैसेंजर शीट पर बैठा अब तक एक शब्द नहीं बोला था। अचानक चीख पड़ता है 

उसकी चीख सुन वो तीनों जल्दी से उसकी तरफ देखते है जिसके चेहरे की हवाइयां उड़ी पड़ी थी। जैसे उसने कुछ ऐसा देखा जिसकी वो कल्पना भी नहीं कर सकता... 

हेलो दोस्तो कैसे है आप सभी ... उम्मीद करती हूं.. अच्छे ही होंगे i know कि आज का चैप्टर छोटा है एंड बहुत लेट है ... क्या बोल रहे हो ... वैसे भी जल्दी आता ही कब है। चलो छोड़ो ये बातें अब कोशिश करूंगी डेली चैप्टर देने की ... पर उसके लिए आप मुझे सपोर्ट भी करो  रेटिंग दो स्टोरी को आपकी समीक्षायें बहुत जरूरी है ।


 बतायेगा श्री का लुक कैसा लगा। जल्द ही वेदांश का लुक भी देखने को मिलेगा। ..

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