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LoveVersn - 1

LoveVersn – अध्याय 1

एक अनजान सफर

दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा यात्रियों की भीड़ से भरा हुआ था। कोई अपने परिवार से विदा ले रहा था, तो कोई अपनी नई मंज़िल की ओर बढ़ रहा था। उसी भीड़ के बीच सिओन खड़ी थी। उसके हाथ में बोर्डिंग पास था और आँखों में अनगिनत यादें।

वह भारत छोड़कर दक्षिण कोरिया के सियोल जा रही थी। उसके लिए यह सिर्फ एक यात्रा नहीं थी, बल्कि एक नई शुरुआत थी। उसने अपने जीवन में बहुत कुछ खोया था। कुछ ऐसे दर्द थे जिन्हें वह पीछे छोड़ देना चाहती थी। शायद नया शहर उसे नई खुशियाँ दे सके।

फ्लाइट में प्रवेश करने के बाद वह अपनी सीट 12A पर जाकर बैठ गई। खिड़की से बाहर देखते हुए उसने एक गहरी साँस ली। रनवे पर खड़े विमान और दूर चमकती रोशनियाँ उसे एक अलग ही दुनिया का एहसास करा रही थीं।

उसने आँखें बंद कर लीं।

"अब सब कुछ बदल जाएगा," उसने मन ही मन कहा।

तभी किसी के आने की आहट हुई। एक लंबा, आकर्षक और गंभीर व्यक्तित्व वाला युवक उसकी बगल वाली सीट 12B पर आकर बैठ गया। उसने काले रंग का ओवरकोट पहन रखा था और उसके चेहरे पर एक अलग ही आत्मविश्वास दिखाई दे रहा था।

सिओन ने शिष्टता से उसकी ओर देखकर हल्की मुस्कान दी।

लेकिन युवक ने केवल सिर हिलाया और अपने ईयरफोन लगा लिए।

सिओन ने मन ही मन सोचा, "कितना रूखा इंसान है!"

कुछ देर बाद विमान ने उड़ान भर ली। बादलों के ऊपर पहुँचते ही बाहर का दृश्य बेहद सुंदर हो गया। लेकिन सिओन का ध्यान कहीं और था। वह अपने अतीत की यादों में खोई हुई थी।

करीब दो घंटे बाद अचानक मौसम खराब हो गया।

विमान तेज़ी से हिलने लगा।

"सभी यात्री कृपया अपनी सीट बेल्ट बाँध लें। खराब मौसम के कारण तेज़ टर्बुलेंस की संभावना है।"

कैप्टन की आवाज़ पूरे विमान में गूँज उठी।

अचानक विमान को एक ज़ोरदार झटका लगा।

सिओन डर के मारे काँप उठी। बचपन से ही उसे हवाई यात्रा से डर लगता था। उसने घबराकर अपनी आँखें बंद कर लीं।

दूसरा झटका पहले से भी ज़्यादा तेज़ था।

डर के कारण उसने बिना सोचे-समझे अपना हाथ बगल में बढ़ा दिया। लेकिन उसका हाथ सीधे उस युवक के हाथ पर जा पड़ा।

घबराहट में उसने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया।

युवक ने आश्चर्य से उसकी ओर देखा।

उसने देखा कि सिओन का चेहरा डर से सफेद पड़ चुका था और उसकी आँखों में आँसू आ गए थे।

उसने धीरे से अपने ईयरफोन उतार दिए।

"क्या तुम ठीक हो?" उसने शांत आवाज़ में पूछा।

सिओन ने आँखें खोलीं और तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिया।

"मुझे माफ़ कर दीजिए... मैं बहुत डर गई थी," उसने शर्माते हुए कहा।

युवक कुछ क्षण उसे देखता रहा। फिर उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।

"कोई बात नहीं। कभी-कभी डर लगना स्वाभाविक है।"

उसकी आवाज़ में एक अजीब सा सुकून था।

सिओन का डर थोड़ा कम हो गया।

पहली बार उसने उस युवक को ध्यान से देखा।

"वैसे, मेरा नाम सिओन है," उसने कहा।

युवक ने उसकी ओर हाथ बढ़ाया।

"किम जिओन।"

दोनों ने हाथ मिलाया।

उन्हें नहीं पता था कि यह साधारण सी मुलाकात आगे चलकर उनकी ज़िंदगी की सबसे खास कहानी बनने वाली थी।

विमान बादलों के बीच आगे बढ़ता रहा और उनके जीवन की कहानी भी एक नए अध्याय की ओर बढ़ने लगी...