Hui me Teri Diwani - 1 in Hindi Love Stories by Pihu Patel books and stories PDF | हुई मैं तेरी दीवानी - 1

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हुई मैं तेरी दीवानी - 1

भाग 1: एक अजीब मुलाक़ात**

रात के करीब बारह बज रहे थे। आसमान में काले घने बादल छाए हुए थे और मूसलाधार बारिश हो रही थी। पूरा शहर मानो गहरी नींद में सो चुका था, लेकिन सड़कों पर सन्नाटा चीरती हुई एक महँगी काले रंग की गाड़ी तेज़ी से दौड़ रही थी।
गाड़ी की पिछली सीट पर बैठा था अथर्व सिंघानिया। शहर का सबसे बड़ा, रसूखदार और बेहद गुस्सैल बिजनेसमैन। अथर्व के चेहरे पर हमेशा एक कड़कपन रहता था। वह अपनी ज़िंदगी में सिर्फ दो ही चीज़ें जानता था — अनुशासन और हर हाल में जीत।
बारिश की बूंदें गाड़ी के शीशे पर तेज़ी से टकरा रही थीं। अथर्व अपने लैपटॉप पर कुछ ज़रूरी बिजनेस फाइल्स देख रहा था। अचानक, गाड़ी के हेडलाइट की तेज़ रोशनी में सड़क के बीचों-बीच एक लड़की दौड़ती हुई दिखाई दी।
"सर! सामने कोई है!" ड्राइवर ने घबराकर चिल्लाते हुए तेज़ी से ब्रेक मारा।
सड़क पर टायरों के घिसटने की एक भयानक आवाज़ गूंजी। गाड़ी ठीक उस लड़की से महज़ एक इंच की दूरी पर जाकर रुकी। अगर एक सेकंड की भी देरी होती, तो बहुत बड़ा अनर्थ हो जाता।
अथर्व का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया। वह गुस्से से लाल-पीला होता हुआ गाड़ी का दरवाज़ा खोलकर बाहर निकला। बारिश की बौछारें सीधे उसके चेहरे पर पड़ीं, लेकिन उसका गुस्सा कम नहीं हुआ।
वह चिल्लाया, "दिखाई नहीं देता क्या? जान देने का शौक चढ़ा है तो कहीं और जाकर मरो! मेरी गाड़ी के सामने आने की हिम्मत कैसे हुई?"
लेकिन जैसे ही अथर्व की नज़र उस लड़की पर पड़ी, उसके शब्द उसके गले में ही अटक गए। वह लड़की कोई और नहीं, अनाया थी। अनाया पूरी तरह से भीगी हुई थी। उसके बिखरे हुए बाल उसके चेहरे पर चिपके थे और ठंड के मारे उसके होंठ काँप रहे थे।
अनाया की आँखों में गहरा खौफ था, लेकिन फिर भी उसके चेहरे पर एक अजीब सी ज़िद और हिम्मत साफ़ दिख रही थी। उसने बिना डरे आगे बढ़कर अथर्व का कीमती कोट अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया।
वह हाँफते हुए रोने लगी और बोली, "प्लीज़... मुझे छुपा लो! मेरी मदद करो... कुछ लोग हाथ में हथियार लिए मेरे पीछे पड़े हैं। अगर आज मुझे कुछ हो गया, तो मेरे अनाथालय के उन मासूम बच्चों का क्या होगा? वो लोग अनाथ हो जाएंगे... प्लीज मुझे बचा लो!"
अथर्व ने झटके से उसका हाथ अपने कोट से हटाना चाहा। वह कभी किसी अजनबी के झमेले में नहीं पड़ता था। लेकिन ठीक उसी पल, अनाया की बेबस आँखों ने अथर्व के उस पत्थर जैसे दिल को अंदर तक झकझोर दिया, जिसने आज तक कभी किसी के लिए दर्द महसूस नहीं किया था।
इससे पहले कि अथर्व कुछ बोल पाता या कोई फैसला ले पाता, अनाया के पैर लड़खड़ाए। चक्कर खाकर वह सीधे अथर्व की मज़बूत बाहों में बेहोश हो गई।
तभी अचानक दूर से कुछ गुंडों की गाड़ियों के हॉर्न की आवाज़ सुनाई दी और उनकी गाड़ियों की हेडलाइट्स सीधे इसी तरफ आ रही थीं। ख़तरा बिल्कुल करीब था।
अथर्व सिंघानिया ने अपनी ज़िंदगी में कभी किसी कानून को नहीं तोड़ा था और न ही कभी बिना फायदे के कोई काम किया था। लेकिन आज, उसने बिना एक पल गंवाए अनाया को अपनी बाहों में उठाया, गाड़ी की पिछली सीट पर सुलाया और ड्राइवर से कहा, "गाड़ी सीधे सिंघानिया मेंशन की तरफ भगाओ! स्पीड कम नहीं होनी चाहिए।"
गाड़ी रात के अंधेरे में ओझल हो गई। अथर्व सीट पर बैठकर बेहोश अनाया के मासूम चेहरे को एकटक देखता रहा। वह अभी इस बात से बिल्कुल अनजान था कि यह अजनबी लड़की, उसकी सुव्यवस्थित ज़िंदगी को पूरी तरह बदलने वाली है और बहुत जल्द उसकी सबसे बड़ी 'दीवानगी' बनने वाली है।
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