Mafia's Obsessed Love - 19 in Hindi Love Stories by Priyanka Saini books and stories PDF | Mafia's Obsessed Love - 19

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Mafia's Obsessed Love - 19

मंदिर के मेन एरिया में एक बड़ा सा शिवलिंग रखा था।सभी उससे कुछ दूरी पर बैठे थे। जहां पूजा की सभी तैयारी हो चुकी थी। श्री पंडित जी के कहने पर एक बार खुद से सारे सामान को देख रही थी... ऐसा नहीं था कि पूजा राठौर फैमिली करा रही है.. तो वो बहुत अमीर है और ये सब नहीं कर सकते....

ऐसा कुछ नहीं था पंडित जी ने खुद ये काम श्री को सौंपा था, और विधि जी को भी इससे कोई प्रॉब्लम नहीं थी वो तो बस श्री का मासूम चहरा देखने में बिज़ी थी। उन्हें श्री की सादगी अत्यंत भा रही थी। खासकर उसका भोलापन..


और इकलौती वो ही नहीं थी... जिन्हें श्री की मासूमियत इतनी भा रही थी.. थे ऐसे चार लोग जिन्हें श्री पहली नजर में ही पसंद आ गई... वो तो बस दुनिया भर का प्यार लिए उसे ही देख रहे थे... न जाने कैसे कैसे अब तक उन्होंने ख्वाब सजा लिए थे.. श्री को लेकर ..

और उन्हीं चारों में से एक था ... जीवन जो श्री को देखकर ये कैलकुलेशन करने में लगा था ... कि उसके खड़ूस भाई के बच्चे श्री जैसे क्यूट–क्यूट होंगे या वेदांश जैसे.. अकडू...

वहीं विधि जी श्री को देख सोच रही थी..अगर उसकी जगह कोई और लड़की होती तो... अब तक सो बहाने करके उनसे या सिखा जी, या किसी भी राठौर फैमिली के मेंबर्स से बात कर चुकी होती... लेकिन हमारी श्री तो बस अपने काम में लीन थी। 

उसे कोई मतलब नहीं कोई आ रहा है, जा रहा है, देख रहा है, या नहीं देख रहा... 

खैर जिसका इंतजार था..  वो भी आ गया.. सभी सीढ़ियों की तरफ देखते है जहां से चलता हुआ.. वेदांश आ रहा था.. उसकी मसकुलर बॉडी से चिपकी वो शर्ट और नीचे धोती के साथ माथे पर बिखरे उसके बाल उसे और भी ज्यादा डोमेटिंग बना रहे थे। उसके पीछे ही अनव आ रहा था.. वो भी कोई कम नहीं लग रहा था।

वो दोनों सीधा पूजा स्थल पर आते है उसे देख अक्षिता अपने चेहरे पर ढेर सारी चमक लिए उसकी तरफ बढ़ने लगती है.. कहीं न कहीं उसे पूरी उम्मीद थी.. कि  आज वेदांश शायद ही उसे इग्नोर करें..  वह जबरदस्ती की मासूमियत अपने चेहरे पर लाकर वेदांश का हाथ पकड़ बोली .. " वेदांश "

मगर वो वेदांश का हाथ छू भी पाती उससे पहले.. ही वो बिना उसे देखे आगे बढ़ जाता है.. जैसे वो लड़की इस दुनिया में एग्जिट ही न करती हो... अक्षिता उसे देखने लगती है वह अपने आस पास देखती है जहां सभी उसे देख रहे थे।

वह सभी को इग्नोर कर अपने पापा के पास आकर खड़ी हो जाती है.. और उनकी तरफ देख बोली.. "पापा अपने देखा न..." विकास चारों तरफ नजर डाल .. उसे शांत रहने का इशारा करते है। वो नहीं चाहते थे, यहां कोई बात बिगड़े.. खासकर वेदांश..

वेदांश जाकर महापंडित जी के सामने खड़ा हो जाता है और सिखा जी उनसे कहती है .. पूजा शुरू की जाए.. सभी हां में सिर हिला देते है..  महापंडित जी वेदांश को देखते है.. फिर एक नजर श्री को .. 

श्री जिसका ध्यान अपने सिवा किसी पर नहीं था.. उसे नहीं पता था कि वेदांश यहां आ गया या नहीं.. वह वहां से उठते हुए बोली ... "हो गया पंडित जी सब कुछ सही है "

उसकी मीठी सी आवाज से वेदांश का ध्यान उस तरफ जाता है.. श्री अपनी जगह से जैसे ही उठती है वह अपने पीछे खड़े वेदांश से टकरा जाती है .. मगर गिरती नहीं क्योंकि.. वेदांश श्री को पकड़ लेता है...

वेदांश ठीक श्री के पीछे आकर खड़ा हुआ था, वह केवल महापंडित जी को देख रहा था उसने श्री पर ध्यान ही नहीं दिया था।

श्री की आंखे बंद थी और वेदांश बस उसकी बंद आंखों और चेहरे को निहारने मे इतना बिजी था कि उसे आस पास कुछ नजर ही नहीं आ रह था।

सभी शॉक से वेदांश को देख रहे थे...ये उनकी जिंदगी में आज पहली बार था... वेदांश ने किसी लड़की को अपनी बाहों में थाम रखा है क्योंकि वेदांश के अंदर की इंसानियत कभी किसी के लिए नहीं जागती.. चाहे उसके सामने किसी की हड्डी टूटे या सिर फूटे , सिवाय अपने परिवार और दोस्त के.. 

" भाईसाहब आज पता चला ये सच में लड़के ही है... जीवन बड़बड़ाते हुए बोला ... अजीत ने उसके पेट में कोहनी मारते हुए कहा .."  नहीं तो तुझे पहले क्या लगते थे " 

" गे" जीवन ने बिना सोचे समझे तपाक सी बोल दिया..

मिहिर और अजीत उसे बुरी तरह घूरने लगते है.. जीवन उन दोनों को जबरदस्ती की स्माइल देते हुए बोला..

" वो भाई की कोई महिला मित्र भी नहीं  है और न ही.. "

" अरे.. वो सब छोड़ो और देखो क्या सीन है ..  सच में मुझे तो आज ही पता चला भाई इतने रोमेंटिक भी है.." 

सनाया ने उनकी लड़ाई का दी एंड करते हुए कहा.. उसकी बात सुन वो तीनों ध्यान से उस तरफ देखने लगते है फिर हां में सिर हिलाते हुए साथ में बोले.. " बात तो पते की है " 

वो चारों अपनी बेख्याली में जो उनके मुंह में आ रहा था बके जा रहे थे.. मगर इस बात से अंजान की उनकी बात से किसी के अंदर जलन की चिंगारी लग गई है ..

अक्षिता बहुत ही गुस्से श्री को देख रही थी.. उसकी नजर में गुनाहगार वेदांश नहीं बल्कि श्री थी..

"ये लड़की.. आंधी है क्या देखकर नहीं चल सकती" उसने गुस्से में दांत पीसकर मगर हल्के से कहा.. पास ही में खड़ी उसकी मोम उसे शांत करती हुई बोली.. " शाहह.. "

वह एक नजर अपनी मां को देखती है जो आंखों ही आंखों से उसे शांत रहने का इशारा कर रही थी.. गुस्सा तो उन्हें भी बहुत आ रहा था.. मगर क्या ही कर सकती थी।

वहीं सिखा जी तो एक टक बस वेदांश को देख रही थी जिसके चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन तो नहीं थे.. मगर आंखों में वो सख्ती की जगह नरमी बहुत थी .. जो अक्सर हर किसी के लिए नहीं होती ..

विधि जी एक नजर सभी को देख फिर अपना गला साफ करते हुए बोली.." उम्ह... वेदांश हमें लगता है पूजा शुरू करनी चाहिए " वेदांश उन्हें देखता है फिर श्री को जो अभी भी डर से आंखे बंद किए उसके आगोश में खड़ी थी। जिसकी आंखे फड़फड़ाते हुए विधि जी की आवाज से खुली.. 

"वेदांश उसे देखते हुए ही बोला शुरू करो.." श्री वेदांश को एक बार और अपने पास देख घबरा जाती है उसने खुद से मन में कहा.. "ये कैसी बीमारी मेरी पीछे लग गई आज भगवान मुझे इनसे बचा लो "

वेदांश की पकड़ श्री की बाजू पर जरा कस जाती है क्योंकि.. उसने अभी तक श्री को छोड़ा नहीं था।

श्री को अपनी बाजू में दर्द महसूस होता है... उसे ये समझ नहीं आया.. वेदांश को अचानक इतना गुस्सा क्यों आया.. 

वह हवन कुंड के सामने बैठ जाता है और साथ ही श्री का हाथ खींचकर उसे भी अपने साथ बैठा लेता है। सभी उसे ऐसा करते देख हैरान हो जाते है.. 

अक्षिता जिसने अपना गुस्सा अब तक संभाल रखा था फूट पड़ता है.. वह वेदांश के पास आकर हल्के गुस्से से कहती है .. वेदांश ये क्या मजाक है.. "किसी भी पूजा में कोई भी लड़की यूं ही.. एक लड़के के साथ नहीं बैठती.. " 

उसे कहीं न कहीं ये जगह खुद की नजर आ रही थी। वेदांश के पास इतने हक से बैठने का राइट उसका था सिर्फ उसका...   अक्षिता की बात सुनकर उसकी मोम नीना सावंत भी जल्दी से अपनी बेटी को सपोर्ट करती है 

"वेदांश बेटा अक्षू बिल्कुल सही कह रही है ... ऐसी पूजा में सिर्फ पत्नियां ही बैठती है.. और आप" वो आगे कुछ बोल पाती उससे पहले एक कड़क मगर गुस्से से भरी आवाज सभी के कानो में गूंजी..

"पूजा शुरू करो पंडित जी मुहूर्त निकल रहा है वरना... सभी वेदांश को देखते है जिसकी हाथों की मुट्ठियां बुरी तरह कसी हुई थी उसकी पकड़ जो श्री की कलाई पर कुछ इस कदर कसी हुई थी.. श्री की आंखे नम हो जाती.. उसे दर्द हो रहा था। अपनी कलाई में..

मगर वो पहले से ही सभी को देखकर डर से सहमी बैठी थी।
अब उसका शरीर भी कांपने लगता क्योंकि वेदांश के पास से वाइब ही ऐसी आ रही थी जो किसी को भी कांपने के लिए मजबूर कर दे ..

वेदांश के पास खड़ी अक्षिता और नीना भी कुछ कदम पीछे हो जाती है.. उनका शरीर तो मानो बर्फ की तरह जम गया था क्योंकि अब उनकी हिम्मत नहीं थी आगे कुछ बोलने की..

वहीं मनीष जी को अपने बेटे का ऐसा बिहेवियर कुछ रास नहीं आया ..  हां मगर वो अभी तक जो गुस्से से उबल रहे थे। अब बिल्कुल खामोश खड़े हो गए..  

उनका एक हाथ विधि जी ने कसकर पकड़ रखा था। मगर उन सभी के बीच खड़े अजय जी बिल्कुल शांत थे... बस वो एक टक श्री को देख रहे थे.. जो डर से अभी भी कांप रही थी।

खैर पंडित जी पूजा शुरू करते है और श्री को इस तरह डरते देखकर बोले... श्री क्या हुआ तुम इतना डर क्यों रही हो शांत हो जाओ.. "वैसे भी अब तुम इस पूजा को करने वाली हो"

श्री एक नजर वेदांश को देखती है जो हवनकुंड में जल रही अग्नि को देख रहा था.. ठीक वैसे ही अग्नि उसकी आंखों में जल रही थी ।

श्री उससे अपनी नज़रे हटा लेती है। विधि जी श्री को देखकर कुछ सोचती है..  फिर एक गहरी सांस लेती है।

ऐसे ही शांति से पूजा समाप्त हो जाती  है जहां श्री ने वेदांश के साथ मिलकर शिवलिंग पर जलाभिषेक से लेकर हवन में भी बैठी थी। हां वो बात अलग थी.. की इस पूजा से पहले शांति तो बिल्कुल नहीं थी।

लेकिन इस बीच अक्षिता ने श्री से एक बार भी अपनी खुन्नस भरी नजर नहीं हटाई थी.. और न ही बिकास जी ने .. 

इधर अनव और आकाश का ध्यान पूजा से हटकर अब वेदांश पर जाता है जो .. फोन पर बात करते हुए सीढ़ियों से उतरते हुए.. अपनी कार की तरफ बढ़ रहा था  वो दोनों भी उसी के साथ बाहर चले जाते है.. 

श्री ने अपनी नम आंखों से वेदांश को देख जिसने एक नजर भी उसे भी देखा था। न जलाभिषेक के समय और न ही अब पलटकर.. 

वहीं मंदिर में मौजूद सभी की नज़रे सब श्री पर थी।

" हे तुझे आज वेदांश कुछ अलग नही लग रहा था .. मतलब आज उसने जबरदस्ती एक लड़की की अपनी इतने करीब बैठाया कुछ है जो हमसे छिपा है"

आकाश सीढ़ियों से उतरते हुए बोला.. उसकी बात पर अनव जो कुछ सोच रहा था.. उसकी बात पर ज्यादा ध्यान न देते हुए उसने धीरे से कहा...

"हो न हो ये वही कॉरिडोर वाली लड़की है जो अभी थोड़ी देर पहले वेदांश के साथ थी" 

तूने कुछ कहा किया आकाश ने  उसे खुद से बड़बड़ाते हुए देखकर बोला ..

अनव उसके हाथ पकड़ने से सेंस में आता है और उसे देखकर कहता .. " नहीं "

इधर तभी कार स्टार्ट होने की आवाज आती है वह जल्दी से उस कार की तरफ दौड़ते है 

दोनों जल्दी से वेदांश की गाड़ी में बैठ जाते है क्योंकि अगर वो दोनों पांच सेकंड भी लेट होते तो ..  वह उन्हें छोड़कर निकल जाता .. और इसमें कोई शक भी नहीं था। 

इधर अक्षिता वेदांश के वहां से जाते ही सीधा श्री के पास आती है.... वह खुन्नस श्री की वही बाजू जिस पर पहले ही वेदांश अपनी पकड़ का असर छोड़ चुका था…”..उसे पकड़कर अपनी तरफ घूमती है और गुस्से से तमतमाते हुए ... 

Plz apne comments mei btayega ..aapko aaj ka chapter kaisa lga .. or plz raiting bhi dijiyega ..



“Next part jaldi aayega… follow aur rating zaroor dein 💞