Oyy Mr. Vampire - 5 in Hindi Fiction Stories by kusum kumari books and stories PDF | Oyy Mr. Vampire - 5

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Oyy Mr. Vampire - 5

स्नोसिटी :
रात का वक़्त : 

धरुविका जैसे ही पीछे हटी उसका हाथ सामने रखी किसी चीज़ से लग गया ! आआ धरुविका ने अपना हाथ पकड़ लिया ! और पीछे जैसे पैर रखा वो किसी चीज़ से बुरी तरह से टकरा गई ! आह्ह्ह धरुविका चीख पड़ी ! और आगे की ओर गिरने लगी उसकी आँखें बड़ी हो गई नो, नो, नो उसने खुदको संभालने की ! कोशिश कुछ पकड़ना चाहा पर सब नाकामयाब रहा ! 

धड़ाम ! 

वो सीधे खुले हुए ताबुक में उस लड़के के ऊपर जा गिरी ! आह्ह्ह धरुविका ने अपनी आँखें बंद कर ली ! तभी उसको अपने हाथों में कोई सॉफ़्ट चीज़ महसूस हुई उसने अपना चेहरा ऊपर करके देखा तो उसकी आँखें बड़ी हो गई उसकी कटी हुई उंगली उस लड़के के होठों पर थी ! खून जैसे ही उस लड़के के होठों पर लगा ! उसने अपनी आँखें खोल दी ! 

उसकी खुल्ली हुवि लाल आँखें देखकर धरुविका अपनी जगह पर जड़ हो गई ! वो हिल भी नहीं पा रही थी ! उसका दिमाग सुन्न हो गया था ! लड़के ने  लाल आँखों से घूर कर धरुविका को देखा ! और उसकी कटी हुई उंगली पकड़ कर अपने मुँह में डाल ली ! और उसको चूसने लगा ! उसके होठों का स्पर्श महसूस करके धरुविका जैसे होश में आई ! उसकी धड़कने जैसे रुक गई  !  और उसने अपनी उंगली पीछे खींचने की कोशिश की !  हेय्य लीव माय हैंड यू बास्टर्ड ! क्या कर रहे हो तुम पागल हो गए हो क्या ? धरुविका चीख पड़ी ! उसकी सासे तेज हो गई थी ! और आखो मैं गुस्सा उतर आया था ! उस लड़के की ऐसी हरकत से उसका सटक गया था ! 

उसके चीखने पर लड़के ने घूर कर धरुविका को देखा ! और उसकी उंगली छोड़ दी !  और अपने हाथ से उसकी कमर को पकड़ लिया ! तुम… ध्रुविका उसका स्पर्श महसूस करके काप गई थी ! धरुविका को एक तेज़ झटका लगा ! 

धड़ाम ! और अगले पल दर्द से उसकी आंखें बंद हो गई ! और वो औंदे मुंह फर्श पर जा गिरी थी ! उस लड़के ने उसे उठाकर फ़र्श पर फेंक दिया था ! 

आह्ह्ह धरुविका दर्द से चीख पड़ी ! अबे यार इस लड़के की प्रॉब्लम क्या है बे ! और इसने मुझे उठाकर फेंक दिया? इसकी तो… धरुविका ने अपने कमर पर हाथ रख लिया और उठ बैठी ! और घूर कर गस्से से ताबुक की ओर देखा ! जहाँ वो लड़का खड़ा था ! 

हेय्य तुम बेवकूफ़ लड़के तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे फेंकने की ! धरुविका बोल ही रही थी जब अचानक से उसकी आँखें बड़ी हो गई वो लड़का उसकी ओर ही आ रहा था पर उसकी स्पीड… धरुविका ने पलकें एक बार झपकाईं और पलक झपकाते ही उसको किसी की गर्म साँसें महसूस हुईं फिर किसी की पकड़ और…

धड़ाम ! 

वो दीवार से बुरी तरह से टकरा गई। और उसको एक ठंडक अपनी पूरी पीठ पर महसूस हुई ! एक पल के लिए उसकी आंखे बंद हो गई ! और अगले ही पल वो चीख पड़ी ! 

“आआआआ… अबे पागल हो गए हो क्या? क्या कर रहे हो, लग रही है मुझे!” धरुविका ने आँखें खोल कर गुस्से से उस लड़के को घूरा। लड़के ने उसकी दोनों बाजुओं को पकड़ा हुआ था और उसको दीवार से लगा कर खड़ा कर दिया। 

दोनों मैं जयादा फासला नहीं था ! धारुविका ने जब उसका चेहरा अपने चेहरे के इतने करीब देखा तो थोड़ी देर के लिए उसके चेहरे मैं ही खो गई ! पर जैसे उसकी नजरें लड़के की आंखो पर गई ! उसने एक घुट भरा ! उसके पुरे शरीर मैं एक झुरझुरी दौड गई ! लड़का उसको बुरी तरह से अपनी लाल आँखों से घूर रहा था।

लड़का उसके थोड़ा और करीब आया ! और उसकी आंखें मैं देखता हुवे ठंडी आवाज़ में कहा “ तुम यहाँ क्या कर रही हो?”

लड़के की आवाज़ बहुत गहरी और धीमी थी ! हल्की खराश लिए ! और इतनी नशीली कि उसकी एक-एक बात जैसे दिल पर फिसलती चली जाए। 

धरुविका तो कुछ पल बस उसको देखती रही। और धीरे से बुदबुदाई की आवाज है भई ! लड़के के पीछे चाँद चमक रहा था ! और पूरे कमरे में धरुविका के फोन की फ़्लैशलाइट और चाँद की रोशनी फैली हुई थी।

“बताओ, तुम यहाँ क्या कर रही हो?”
लड़के ने फिर से अपनी सर्द आवाज़ में पूछा।

उसकी सर्द आवाज़ कानों में पड़ी तो उसकी रीढ़ की हड्डियों में तेज़ सिहरन दौड़ गई। वाह भाई डरावना भी और हॉट भी एक साथ केसे ! धारुविका ने सोचा और अगले ही पल धरुविका ने अपना सिर झटका ! और घूर कर लड़के को देखा और चिडते हुवे कहा “क्यों बताऊँ मैं तुम्हें? हाँ, कि मैं यहाँ क्या कर रही हूँ? ये सवाल मैं तुमसे भी तो पूछ सकती हूँ! कि क्यों लेटे थे उस तबुक में लाश की तरह? पूछ तो ऐसे रहे हो जैसे ये जगह तुम्हारे बाप की हो।” धरुविका ने मुँह बनाया।

“ये जगह मेरे बाप की ही है,” लड़के ने उसको घूरते हुवे सर्द आवाज़ में कहा” …।

धारुविका की आँखें बड़ी हो गईं ! और उसने घूरकर लड़के को देखा उसने बुरा सा मुँह बनाया “पिछले कई सालों से मैं इस जगह पर आ रही हूँ !  मैंने तुम्हें यहाँ पहले कभी नहीं देखा। मैं कैसे मान लूँ कि ये जगह तुम्हारे पापा की है? हाँ? बताओ, तुम्हारे पास कोई प्रूफ़ है?” धारुविका ने लड़के को घूरते हुए कहा” ….। और आँखे छोटी - छोटी करके उसको घुरने लगी ! 

लड़के ने भी उसको घूरकर देखा, “ये जगह राठोड़्स की है।”

“हाँ, मैं जानती हूँ,” धरुविका ने झल्लाते हुए कहा “ ..! 
“इससे ये तुम्हारे बाप की नहीं हो गई! और पहले तुम मुझसे दूर हटो, तुम बहुत अजीब स्मेल कर रहे हो।”

“मेरा नाम रुद्राक्ष राठोड़ है। और ये जगह मेरी है। और रही बात स्मेल की, तो वो तुम कर रही हो, पियंकड़ कहीं की। अब जाओ यहाँ से इससे पहले कि मैं तुम्हारे बॉडी का सारा खून पी जाऊँ। समझी, मिस पियंकड़?” लड़के ने उसकी खुली गर्दन को घूरा ! एक घुट भरा ! और अगले पल अपना सर झटक  कर परे देखने लगा ! 

“हेय! तुम्हारी तो… तुमने मुझे पियंकड़ कहा? How dare you! और अगर ये जगह तुम्हारे बाप की ही है, तो तुम यहाँ ताबुक में काहे सो रहे थे बे? और बाहर ताला क्यों लगा था? बोलो! कहीं तुम झूठ तो नहीं बोल रहे हो न?
और तुम्हारे कहने का क्या मतलब है कि तुम मेरा खून पी जाओगे? मज़ाक चल रहा है क्या यहाँ? क्या तुम खून पीने वाले कोई पिशाच हो?और मुझे पियंकड़ कहा! मुझे लगता है चढ़ी तो तुझे है कमीने, तूने मेरी उंगली का सारा खून चूसा bloody psycho!”

धारुविका फट पड़ी और एक ही सास में सब कह दिया !  फिर एक गहरी सास छोड़ी ! 

धारुविका की बात सुनकर लड़के के होंठों पर एक टेढ़ी स्माइल आ गई। वो झुक कर अपना चेहरा धारुविका के चेहरे के बराबर ले आया।

और उसकी आँखों में देखते हुए ठंडी आवाज़ में बोला “ 
“सही कहा… मैं एक खून पीने वाला पिशाच हूँ।
और अगर तुमने अपना मुँह बंद नहीं किया… तो सच में तुम्हारा खून पी जाऊँगा।”

और उसने अपना मुँह खोल दिया ! और उसके साइड के दोनों दाँत लंबे हो गए, और आँखें सुर्ख लाल।