Conspiracy - Part 15 in Hindi Crime Stories by Ratna Pandey books and stories PDF | षड्यंत्र - भाग 15

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षड्यंत्र - भाग 15

अभी तक आपने पढ़ा कि रितु ने किशन और उसके दोस्तों की बातचीत सुन ली और गुस्से में आकर किशन को तमाचे मारते हुए समझाया कि बदला लेने के लिए वही घिनौना काम करना पापियों जैसा होगा। उसने उसे याद दिलाया कि हर स्त्री किसी की बहन-बेटी होती है और किसी और परिवार को बर्बादी में धकेलना गलत है। रितु ने अपने भाई और उसके दोस्तों को रोकते हुए इंसानियत और संस्कारों की राह दिखा दी। अब इसके आगे पढ़ें-

रितु को इतना परेशान देखकर राहुल ने एक बार फिर कहा, "अरे जीजी, प्लीज़, मुझे बोलने तो दीजिए।"

"हाँ, बोल ... क्या बोलना है तुझे?"

"जीजी, आप ग़लत समझ रही हैं। किशन ऐसी नीच हरकत करेगा, या हम सब भी करेंगे ... आप ऐसा सोच भी कैसे सकती हो?"

"तो फिर यह सब क्या है राहुल?"

"जीजी, किशन और हम सब उसके घर जाकर केवल उसे डराने वाले थे, धमकाने वाले थे; थोड़े बहुत कपड़े ज़रूर फाड़कर उसे उसकी औक़ात दिखाते, लेकिन बलात्कार ...? नहीं, जीजी, कभी नहीं। ऐसी घटिया सोच तुम्हारे इन भाइयों की कभी नहीं हो सकती। हम उसे तड़पा कर छोड़ देते, उसे यह एहसास दिलाते कि आज तेरे साथ कुछ भी हो सकता है। उसे नीचा दिखाकर हम लौट आने वाले थे, जीजी।"

यह सुनकर रितु धम्म से वहीं ज़मीन पर बैठ गई।

अपने आंसू पोंछते हुए रितु ने कहा, "कुछ करने की ज़रूरत नहीं है; उसके कर्मों का फल उसे ऊपर वाला देगा, हम नहीं। उसके कर्म उसके साथ रहेंगे। तुम क्यों अपने कर्मों को बिगाड़ना चाहते हो? जब कभी वह आईने में ख़ुद की छवि देखेगी, उसे एक खल नायिका ही नज़र आएगी ... इससे बड़ी सजा और क्या हो सकती है?"

"बीना के पापा–मम्मी बहुत अच्छे हैं; मेरे साथ बिल्कुल बेटी की तरह व्यवहार करते थे। उसके कर्मों की सजा उसके पापा–मम्मी को नहीं मिलनी चाहिए। रहा सवाल बीना का, तो उसे तो उसका ख़ुद का मन ही धिक्कारेगा। जिस प्यार के लिए उसने यह सब किया, वही प्यार उसे कभी नहीं मिलेगा। यदि मैं पंकज को मना भी कर दूँ, तो भी वह कभी उसका नहीं होगा। इससे बड़ी सजा और क्या हो सकती है किशन, जिससे वह प्यार करती है और वह भी पागलों की तरह वही उससे नफ़रत करता है। उसे उसके हाल पर ही छोड़ दो।"

किशन भी नीचे बैठ गया और उसने कहा, "जीजी, मुझे माफ़ कर दो।" यह कहते हुए वह रितु से लिपट गया। दोनों भाई-बहनों की आँखों से आँसू बनकर दुख की बारिश लगातार हो रही थी।

किशन ने कहा, "जीजी, नफ़रत में मेरे ऊपर बदले का भूत सवार था। मुझे उससे बदला लेना था। लेकिन जिसकी बहन इतनी सुलझी हुई इंसान हो, वह अपने भाई को ग़लत रास्ते पर कैसे जाने दे सकती है?"

रितु ने किशन का माथा चूम लिया। तभी उसकी नज़र जैसे ही उठी, सामने उसके अम्मा-बाबूजी खड़े थे, जिन्होंने यह पूरा दृश्य देख लिया था। रात के अंधेरे में अपनी रौशनी को मद्धम-मद्धम फैलाता चाँद यह सब देख रहा था। बादल उमड़-घुमड़ कर रहे थे, मानो बेचैन हो रहे हों ... एक बलात्कार से पीड़ित परिवार किस दुख और दर्द से गुजरता है, यह महसूस कर रहे थे।

उसी समय रितु ने कहा, "अम्मा, बाबूजी ... आप लोग?"

तब वे भी आकर उसके पास बैठ गए। उमड़-घुमड़ करते बादलों ने हल्की-हल्की बारिश शुरू कर दी। ऐसा लग रहा था मानो वे भी रो रहे हों। खैर, उस रात ने किशन और उसके दोस्तों को एक जुर्म करने से बचा लिया। भले ही उनका इरादा उतना खतरनाक नहीं था, लेकिन जो भी था वह भी रितु ने उन्हें करने से रोक लिया था। वह रात ऐसी थी, जिसे वे सब कभी नहीं भूल पाएंगे।

दूसरे दिन सुबह-सुबह, जब किशन सो रहा था, उसके मोबाइल की घंटी बजी। उसने मोबाइल उठाया और देखा, तो पंकज का फ़ोन था।

किशन ने फ़ोन उठाया, "हेलो पंकज!"

"हेलो किशन, मुझे तुझसे कुछ ज़रूरी बात करनी है।"

पंकज के मुँह से यह सुनते ही किशन के हाथ काँपने लगे कि पंकज क्या कहने वाला है।

तभी उधर से आवाज़ आई। पंकज ने पूछा, "हेलो किशन, क्या तुम्हें मेरी आवाज़ सुनाई दे रही है?"

किशन ने कहा, "हाँ पंकज, बोलो ना। "

पंकज ने कहा, "किशन, यह थोड़ा जल्दी होगा, पर मुझे लगता है कि यही समय सही है। मुझे यह कहने में देर नहीं करनी चाहिए। मैं रितु से बहुत प्यार करता हूँ और उससे शादी करना चाहता हूँ। अभी यह बात मैं रितु से नहीं कह सकता, इसलिए तुम्हें कह रहा हूँ।"

यह सुनते ही किशन के आँसुओं ने फिर से आँखों बहना शुरू कर दिया।

✍️ रत्ना पांडे, वडोदरा (गुजरात)
स्वरचित और मौलिक
क्रमशः