इतना सुनते ही सुभश्री मैम एक पल के लिए आरी की ओर मुड़ीं, और अगले ही पल अपनी स्कूटी स्टार्ट करते हुए बोलीं...
"हाँ बोलो आरी , क्या कहना है तुम्हें?"
मगर यहाँ आरी की जान हलक में आ चुकी थी। उसके हाथ हल्के से काँपने लगे थे और वह गुस्से में वैड को घूर रहा था...
"क्या हुआ आरी? तुम्हें कुछ पूछना था मुझसे?"
सुभश्री मैम ने फिर पूछा। इस बार आरी हड़बड़ाते हुए जवाब देता है...
"वो... वो... मैम... मुझे केमिस्ट्री के... एक... आ...फोर्मूला में डाउट है, बस वही क्लियर करना था..."
आरी के इतना कहते ही, वैड उसे बड़ी-बड़ी आँखें निकाल कर घूरने लगा। इतने में ही सुभश्री मैम बोलीं...
"तुम ये अभी क्यों पूछ रहे हो आरी, डाउट है तो क्लास में पूछना चाहिये ना- कोई बात नहीं- कल पूछना मैं क्लियर कर दूंगी..."
"ठीक है मैम, कोई बात नहीं मैं कल ही पूछूंगा..."
आरी के इतना कहते ही, सुभश्री मैम वहाँ से जाने लगीं। लेकिन उनके जाने के तुरंत बाद, वहाँ वैड आरी पर चिल्लाया...
"तेरी दिक्कत क्या है आरी, तुझे बस इतना कहना था कि... वैड केमिस्ट्री में थोड़ा वीक है, तो क्या आप कुछ दिन के लिये उसे ट्यूशन देंगी...देंगी.....तू उनका फेवरेट स्टूडेंट है, वो तेरी बात नहीं टालतीं... लेकिन नहीं..."
"रहने दे वैड ... मुझे पता है ट्यूशन के बहाने उन्हें घर बुलाना तो बस एक बहाना है... मुझे सब पता है कि कितनी घटिया सोच है तेरी..."
आरी ने भी उसी लहज़े में जवाब दिया। वैड अभी गुस्से में तो था, लेकिन अगले ही पल वह अपना रवैया बदलते हुए बोला...
"भला मैं उनके लिये घटिया सोच क्यों रखने लगा... मैं तो उनसे प्यार करता हूँ पगले..... और चाहता हूँ कि मैं, ज्यादा से ज्यादा वक्त उनके साथ बिताऊँ... जिससे हम एक दूसरे को और भी जान पायें..."
वैड ने कहा; उसकी आवाज़ में एक अजीब सी नरमी थी। अचानक से उसके जज़्बात बदल गए थे, यहाँ तक कि उसकी आँखें हल्की सी नम हो गयी थीं। यह ड्रामा देख वहाँ खड़ा कोरबीन बड़ा ही अजीब सा मुँह बना रहा था, और आरी का भी वही हाल था।
"सुभश्री मैम शादीशुदा हैं वैड , क्या तू ये बात भूल चुका है..."
आरी ने कड़क लहज़े में उसे याद दिलाया।
"लेकिन प्यार तो अंधा होता है ना, वो ना तो उम्र में भेदभाव करता है और ना ही खूबसूरती में... और हाँ, ना तो वो ये देखता है कि सामने वाला मैरिड है या अनमैरिड..."
वैड ने अपनी बात पर अड़ते हुए कहा। उसके हिसाब से उसकी हर एक बात में बड़ी गहराई थी, लेकिन इन दलीलों से आरी के दिमाग को जंग लग रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह लड़का आखिर किस तरह की मानसिकता रखता है।
इन दोनों से अलग, कोरबीन के ज़हन में कुछ और ही खिचड़ी पक रही थी। वह आरी की ओर देखकर लगातार मुस्कुराए जा रहा था। इतने में ही वह उनके करीब आते हुए वैड से बोला—
“ यार आरी कितने दिन हो गए है ना? हम तीनो को ओडिन की टपरी पे सुट्टा मारे हुए। "
कोरबीन की बात सुन वैड थोड़ा चिढ़ते हुए बोला—
“ हा, लेकिन ये आरी थोड़ी पिता है। "
“लेकिन चाय तो पिता है ना ये। "
यह कहते वक्त कोरबीन वैड को आँख मार रहा था, जिससे वैड समझ गया कि वह आरी को अपने साथ चलने के लिए राजी करने की कोशिश कर रहा है।
“ ठीक है तो, चलते है..... तू आरहा हैना आरी। "
वैड ने पूछा।
“ मै नहीं आपाऊंगा, वो आज मेरे कुछ और平लान्स है। "
आरी ने मना करना चाहा, जिसे सुनकर कोरबीन हँसते हुए बोला—
“ क्या बे साले .... और प्लान्स है, भाई कितने दिन हो गए हम तीनो को साथ बैठे हुए, देख मुझे कुछ नहीं पता तुझे आना ही होगा। "
इतना कहकर कोरबीन ने आरी का हाथ पकड़ा और जबरदस्ती कार की ओर ले जाने लगा। आरी का मन उन दोनों के साथ जाने का कतई नहीं था, मगर कोरबीन की ताकत के आगे उसकी एक न चली। उसे कार में बैठना ही पड़ा। अगले ही पल वैड ने कार स्टार्ट की और आरी की तरफ देखकर बोला—
“ घबरा क्यू रहा है साले? हमे तेरी बजाने मे कोई इटंरेस्ट नहीं है, दस बीस मिनट वहा रुकेंगे फिर तुझे छोड़ आएंगे। "
आरी बहुत असहज महसूस कर रहा था। वह इन दोनों के साथ कभी नहीं आना चाहता था। कार में कोरबीन ने आरी के कंधे पर हाथ रखा हुआ था; उसके इस दोस्ताना मगर रहस्यमयी बर्ताव को देख आरी भांप गया कि वह किसी बड़ी मुसीबत में पड़ने वाला है।
तभी कोरबीन ने वैड की ओर देखा और एक शातिर मुस्कान के साथ पूछा—
“ और भाई.... कल शाम उस नीली तितली के साथ क्या किया तूने? "
“ कुछ भी तो नहीं..... लेकिन हो सकता है, सोच रहा हु उससे सादी करलु... या फिर कल परसो उसे रेड पैलेस ले जाऊ। "
वैड ने बेपरवाही से जवाब दिया। आरी इन तमाम दोहरे अर्थों वाली बातों से पूरी तरह अनजान था। वह बेचैनी में अपनी नज़रें बस यहाँ-वहाँ घुमा रहा था। कोरबीन ने उसकी यह हालत देखी और ठहाका लगाते हुए बोला—
“ वैड .... साले कितना मतलबी दोस्त है तू, सिर्फ खुदके बारे मे सोचता है तू.... कभी आरी का भी खयाल कर, मुझे तो यकीन है इस साले ने आजतक वो भी नही कोयन होगा। "
“ एक मिनट हा... मै करिन को फ़ोन करता हु, हर टाइप की तितलियाँ होती है उसके पास। "
इतना कहकर कोरबीन ने अपना फ़ोन निकाला और किसी का नंबर डायल करने लगा। यह देख आरी ने घबराकर उसे रोकते हुए कहा—
“ क्या कर रहा है कोरबीन? मुझे इन सब का शौक नहीं है, वैसे भी मै अपना दिल किसीको पहले ही दे चूका हु... उसके अलावा मै किसी और के बारे मे सोच भी नही सकता। "
आरी का लहजा इस वक्त बेहद गंभीर था, मगर उसकी बात सुनते ही वैड और कोरबीन दोनों इस तरह हँसने लगे मानो आरी ने कोई बहुत बड़ा जोक क्रैक किया हो। हँसते हुए इस बार वैड बोला—
“ यार... कितना भोला है तू साले, बेटा देख... जिसको तूने दिल दिया है ना , वो हर किसीको देती है.. "
वैड के मुँह से अपनी मोहब्बत के लिए यह बात सुनते ही आरी का सब्र का बांध टूट गया। उसका बस चलता तो वह इसी वक्त वैड का मुँह तोड़ देता, लेकिन फिर भी उसने अपने सुलगते गुस्से पर काबू पाया और कहा—
“ वैड कार रोकदे, मुझे अभी उतरना है। "
“ अरे तुतो बुरा मान गया भाई। चील कर बे मै तो मज़ाक कर रहा हु। "
वैड ने बात को टालना चाहा, मगर इस बार आरी पूरे आक्रोश में आ गया—
“ सुनाई नहीं दिया तुझे वैड ... मैंने कहा ना मुझे यही उतरना है, तू बस कार रोक। "
आरी की आँखों में वैड के लिए बेइंतहा नफ़रत और गुस्सा साफ दिख रहा था। बात और आगे बढ़ती, इससे पहले ही कोरबीन ने आरी के कंधे पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए मोर्चा संभाला—
“ अरे छोड़ ना आरी, ये बहन का भाई तो कुछ भी बोलता रहता है... लेकिन अगर तूने इसकी बातो को सीरियसली लिया तो तुझसे बड़ा बेवकूफ कोई नहीं... "
कोरबीन ने अपने चेहरे पर एक झूठी सी हमदर्दी भरी मुस्कान लाई और अपनी बात आगे बढ़ाई—
“ मुझे पता है आरी तू गरिमा को चाहता है, लेकिन यकीन कर तू जितना उसे पाने की कोशिस करेगा वो तुझसे और दूर जाएगी.... इनफैक्ट वो तुझसे नफरत करने लगेगी, मै तेरा दर्द समझ सकता हु आरी। क्युकी इस समय हम दोनो एक ही कस्ती पर सवार है। "
इतना कहकर कोरबीन जैसे किसी गहरी सोच में डूब गया। वह खामोशी से आरी की आँखों में झांक रहा था। उन दोनों की आँखों में इस वक्त एक अजीब सी बेचैनी तैर रही थी। आरी भी समझ गया था कि कोरबीन का इशारा किस तरफ है, जिससे उसका गुस्सा थोड़ा शांत हुआ। तभी कोरबीन ने बहुत ही धीमी और रहस्यमयी आवाज़ में कहा—
“ मै वादा करता हु तुझसे चाहें मुझे मेरा प्यार मिले या ना मिले, लेकिन मै तुझे गरिमा जरूर दिलाके रहूँगा..... और ये कोरबीन डेविस का वादा है, हलके मे मत लेना... और बदले मे तुझे सिर्फ मेरा एक काम करना होगा... "
कोरबीन का यह सौदा सुनकर आरी गहरी सोच में पड़ गया। तनाव के कारण उसके चेहरे पर हल्का सा पसीना छलक आया था। उसने बिना कुछ कहे धीरे से ना में अपना सर हिलाया। लेकिन तभी वैड ने माहौल को भांपते हुए बेवजह गाड़ी का हॉर्न बजा दिया। मानो यह कोई तयशुदा इशारा था, जिसे पाते ही कोरबीन तुरंत पलटा—
“ हा,.. वो तुझे दो काम करने होंगे... "
“हरगिस नहीं... मुझे पता है तुम दोनो का काम यानी, कुछ बहोत ही घिनौना... और वैसे भी मै नहीं चाहता की गरिमा जबरदस्ती मेरे साथ रहे, अगर किस्मत मे लिखा होगा तो वो मेरी होकर ही रहेगी... "
आरी ने कोरबीन की बात को सिरे से खारिज कर दिया। यह सुनते ही कोरबीन का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा और वह तीखे स्वर में बोला—
“ ये वेतनगरी है... यहा हर किसीकी किस्मत लिखी जाती है,开लैक ऑफ़ वेट्स.... "
इतना कहकर वह अचानक से रुक गया, मानो उत्तेजना में आकर वह कुछ ऐसा बोल गया हो जो उसे छिपाकर रखना था। उसने तुरंत खुद को संभाला और बात बदलते हुए कहा—
“ नहीं... कुछ नहीं, हम कोई गरिमा को फ़ोर्स नहीं करेंगे... वो अपने मन से तुझे अपना येगी,... और ये सब मै कैसे करूँगा वो सब तू मुझपे छोड़ दे... "
कोरबीन के इस नए पासे ने आरी को फिर से कशमकश में डाल दिया। कोरबीन के शब्द उसके दिमाग को लगातार बहला रहे थे, लेकिन अंतरात्मा कह रही थी कि चाहे कुछ भी हो जाए, इन दोनों के इरादों में हाँ नहीं मिलानी है। उसने खुद को मजबूत किया और पूछा—
“ और इसके बदले तुम दोनो मुझसे कराना क्या चाहते हो? "
आरी के पूछते ही वैड ने तुरंत मौका भुनाया—
“तुझे शुभश्री मैम को मुझे टूशन देने के लिए मनाना होगा। "
“ गाड़ी रोक वैड मुझे उतरना है। "
आरी ने बिना पल गंवाए कहा। उसे पहले ही अंदेशा था कि ये दोनों ऐसी ही किसी घिनौनी साजिश का हिस्सा बनाने की बात करेंगे। फिर भी बात गरिमा की थी, इसलिए उसने पूछना ज़रूरी समझा था। वैड के इस सीधे और बेवकूफाना ढंग से बात रखने पर कोरबीन भड़क गया और तिरछी नज़रों से उसे घूरने लगा। आरी कार से उतरने की जिद पर अड़ा था, तभी कोरबीन ने बात बिगड़ने से रोकने के लिए एक नया पैंतरा फेंका—
“ आरी तुझे पता है... शुभश्री मैम का हस्बैंड, नमन। एक नंबर का बेवड़ा है साला । आये दिन पीकर घर आता है और शुभश्री मैम को जानवरो की तरह मारता है। यहा तक की वो हैवान तो कोई काम भी नहीं करता, शुभश्री मैम के पैसो सेही अय्यासी भी करता है... मेरी बात मान आरी, मैम की हालात बहोत ख़राब है.. इट्स फील के वो एक नरक मे अपनी जिंदगी गुज़ार रही है। "
कोरबीन ने पूरी सहानुभूति बटोरने वाले अंदाज़ में कहा। यह सब सुनकर वैड अंदर ही अंदर अजीब सा मुँह बना रहा था, लेकिन अगले ही पल उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गई; वह समझ चुका था कि कोरबीन आरी की कमज़ोरी का फायदा उठाने के लिए क्या चाल चल रहा है।
कोरबीन ने अपनी बात जारी रखते हुए आगे कहा—
“ देख तू वो सब भूलजा जो हमने कहा, जैसे नीली तितली वगैरा... वो सब तो एक मज़ाक था, तुझे तो पता हैना.... कितने मजाकिया है हम दोनो.... क्यू वैड ? "
“ हा,... बिल्कुल हम दोनो तो बस तिलती की बात कर रहे थे.... बटरफ्लाय । "
वैड ने लड़खड़ाते हुए हामी भरी, जिसे देखकर कोरबीन ने उसे फिर से घूरा; मानो वह कह रहा हो कि इतना ओवर-एक्टिंग करने की ज़रूरत नहीं है। फिर कोरबीन ने आरी की तरफ मुड़कर कहा—
“ माना की वैड दिखने मे थोड़ा ठरकी किसम का है, और इसकी हरकते भी कहिना कही ठीक नहीं है। लेकिन ये दिल का बहोत अच्छा है, यकीन कर मै... मैंने इसका दिल देखा है, कमाल का है ये अंदर से। अगर इसकी शादी शुभश्री मैम से हुई तो उनकी जिंदगी संभल जाएगी। जिसका कारण होगा तू, आरी कुशवाहा, तुझे ये करना ही होगा।"
वैड के चेहरे पर अब एक अजीब सी जीत की मुस्कान थी क्योंकि कोरबीन ने अपना सबसे बड़ा पासा फेंक दिया था। लेकिन तभी आरी ने एक तार्किक सवाल करके पासा उल्टा घुमा दिया—
“ लेकिन तुम्हे कैसे पता की शुभश्री मैम के पति इतने बुरे है, उन्होंने कभी मुझे तो इस बारे मे नहीं बताया। "
आरी के इस तीखे सवाल से वैड पूरी तरह बौखला गया। उसके चेहरे पर साफ चिढ़ दिखाई दे रही थी—
“ तू क्या उनका बॉयफ्रेंड है क्या साले? जो तुझे वो अपनी हर बात बताएगी, ये सारी बाते पर्सनल होती है आरी। ओर मै उनसे प्यार करता हु, तो मुझे उनके बारे मे इतना तो पता ही होगा ना की, उनकी लाइफ कैसी है? "
वैड की बात सुनकर आरी कुछ देर के लिए बिल्कुल खामोश हो गया। इन दोनों पर भरोसा करना उसके लिए नामुमकिन था, मगर दिल के किसी कोने में छिपी गरिमा को पाने की तीव्र चाहत ने उसे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या पता इनकी बात सच हो। उसने झिझकते हुए पूछा—
“ और दूसरा काम क्या है? "
यह सुनते ही कोरबीन के चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान तैर गई। उसने एक पल के लिए वैड की ओर देखा और बोला—
“ कल शाम ठीक 6 बजे... तुझे सूती को कही लेजाना होगा, उसे बोलना की अर्जेंट काम है। और ध्यान रहे एनी तुम दोनो के साथ नाम आपाए, वरना पुरे किये कराये पर पानी छिड़ जाएगा। बस तुझे इतना ही करना है, उसके बाद सब मुझपे छोड़ दे... "
कोरबीन की यह बात सुनते ही वैड ने झटके से गाड़ी रोक दी।
“ क्या कर रहा है चूतये गाड़ी क्यू रोकदी? "
कोरबीन ने बेहद गंभीर और कड़क स्वर में पूछा। वैड मुड़कर कुछ सफ़ाई देता, इससे पहले ही आरी गुस्से में तमतमाकर चीखा—
“ ये नहीं होगा मुझसे... मै सूती को कभी धोका नहीं दूंगा, और सूती ही क्या मै ये.... तू पागल हो गया है क्या कोरबीन? "
“ नहीं... बिल्कुल नहीं... तू गलत समझ रहा है, तुझे तो पता हैना मै एनी से प्यार करता हु। मै उसे यु मरते हुए नहीं देख सकता, मैंने दुनिया के बेस्ट डॉक्टर से बात की है। उन्होंने कहा की एनी बिल्कुल ठीक हो सकती है, अगर उसका इलाज सही समय पर किया जाये। "
आरी इस विकट परिस्थिति में भी कोरबीन की बातों को ध्यान से सुन रहा था। न जाने इस बार वह कौन सा नया दांव खेल रहा था। इसी बीच वैड ने टोकना चाहा—
“ कोरबीन। "
मगर कोरबीन ने वैड को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया और अपनी भावनात्मक चाल जारी रखी—
“ तुझे तो पता ही है सूती और एनी मुझे देखना भी पसंद नहीं करते। वो मुझपे भरोसा नहीं करेंगे, इसलिये तू कल सूती को बहाना बनाके कही लेजाना। "
कोरबीन के मुँह से निकलती हर बात के साथ वैड के चेहरे पर डर का पसीना आ रहा था; मानो वह अच्छी तरह जानता था कि कोरबीन का असली और खौफनाक इरादा क्या है। अगले ही पल उसने फिर से कार स्टार्ट कर दी, और यहाँ कोरबीन अपनी बात को अंतिम रूप देते हुए बोला—
“ बस इतना ही करना है तुझे.... इसके बाद मै सब संभाल लूंगा, लेकिन यकीन मान आरी। तू जो अभी फैसला लेगा, उसपर डिपेंड करता है की गरिमा तुझे अपनायेगी या नहीं। या शुभश्री मैम को अच्छी जिंदगी और एनी को जिंदगी मिलेगी या नहीं।"
“ अगर ये बात है तो तू सूती से बात करना, मुझे यकीन है वो पक्का मान जाएगा। एनी के लिए तो वो कुछ भी कर सकता है। "
आरी ने सीधा रास्ता सुझाया, जिसे सुनकर इस बार कोरबीन का सब्र जवाब दे गया और वह भड़कते हुए बोला—
“ सूती कभी नहीं मानेगा, ये तू जानता है आरी क्युकी मेरा कहना भला वो क्यू मानेगा? उसे तो लगता है मेरी एनी पर गन्दी नजरें है, जो बिल्कुल नहीं है। "
आरी इस समय धर्मसंकट में था। उसे कुछ सूझ नहीं रहा था कि वह क्या करे और क्या न करे। इसी बीच, कार की पिछली सीट पर बैठे कोरबीन ने चुपके से अपना फ़ोन निकाला और एसएमएस ऐप ओपन करके किसी को एक गुप्त संदेश भेज दिया।
इस टेक्स्ट के महज़ आधे मिनट बाद ही अचानक आरी का फ़ोन बज उठा। जैसे ही उसने स्क्रीन पर नाम देखा, उसके चेहरे पर एक हल्की सी राहत भरी मुस्कान दौड़ गई। फ़ोन उठाते ही दूसरी तरफ से एक सुरीली लड़की की आवाज़ आई—
“ आरी मैंने इसलिये फ़ोन किया है.... क्युकी। क्युकी मुझे लगा तुम्हे मै कुछ ज्यादा ही इग्नोर कर रही हु, मुझे इस बात का बहोत बुरा लगा... तो अगर तुम चाहो तो क्या हम आज मूवी देखने जा सकते है? "
फ़ोन से आती यह आवाज़ किसी और की नहीं, बल्कि खुद गरिमा की थी। यह सुनकर आरी को एक ज़ोरदार झटका लगा। उसे अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था कि जो गरिमा उसे भाव नहीं देती थी, वह खुद सामने से कॉल करके मूवी का प्लान बना रही है। उसने हड़बड़ाहट में जवाब दिया—
“ हा, हा गरिमा... क्यू नहीं? "
“ठीक है तो जब शो लगेगा उसके एक आथ घंटे पहले मुझे लेने आजाना। "
इतना कहकर दूसरी तरफ से कॉल कट हो गया। आरी का खिला हुआ चेहरा देखकर कोरबीन ने तुरंत अपनी कुटिल आँखों को सिकोड़ते हुए पूछा—
“ क्या हुआ मेरे शेर? काफ़ी ख़ुश लग रहा है आखिर बात क्या है? "
“ वो गरिमा का कॉल था, नजाने उसे क्या हुआ है? वो मुझे मूवी देखने साथ चलने कह रही है। "
आरी ने उत्साह में कहा, जिसे सुनते ही वैड तुरंत मौके पर चौका मारते हुए बोला—
“ येतो बहोत अच्छी बात है यार, देख तूने अभी कोरबीन का कुछ काम किया भी नहीं... ओर उसने तेरा काम करना शुरू भी कर दिया। "
वैड के इतना कहते ही, आरी फिर कुछ देर के लिए गहरी सोच में डूब गया। लेकिन इस बार असमंजस की जगह उसके चेहरे पर एक जीत की मुस्कान थी। उसने कोरबीन की ओर देखा और कहा—
“ ठीक है मै तैयार हु। "