zindagi ki dusra kinara - 27 in Hindi Thriller by AbhiNisha books and stories PDF | जिंदगी की दूसरे किनारा - 27

Featured Books
Categories
Share

जिंदगी की दूसरे किनारा - 27

जिंदगी की दूसरा किनारा पार्ट 27





और वहीं कुछ समय बाद तकरीबन तकरीबन 7:30 बजे 


और डॉक्टर देव अपने पेशेंट की दूसरी साइड पेशेंट की तरफ झुकता हुए 
अपनी पेशेंट के बॉडी में लगे हुए 
मॉनिटर तारों को अपने हाथों से पकढ़ते हुए देखते देख रहे हैं 







और वही अभिराज भी अपनी बेटी को देखते हुए
वही उसे रूम मे अपने बेटी से 5 6 कदम दूर खड़ा है खामोशी के साथ 





और वही हॉस्पिटल हेड़ भी
 उस पेशेंट को देखते हुए
अभिराज के दो कदम पीछे खड़े हैं 






और वही डॉक्टर देव
 उन तारों को अपने हाथों से छोड़ते हुए 
नजर घुमा कर दूसरी दीवार के पास लगी हुई लाइफ मॉनिटर की तरह देखा है 
और उसे देखते हुए सीधा होकर उठ खड़े होता है 
और फिर मुड़कर सलाइन बोतल की तरफ देखा है 
और फिर अपने कदम बढ़ाते हुए 
चलते हुए सलाइन बोतल की तरफ बढ़ता है 




और वही अभिराज को देखते हुए
 हॉस्पिटल हेड 
अपनी कदम हल्के आगे बढ़ते हुए 
अभिराज से हल्की आवाज में कहता है 



वो जब से कोमा में गई है 
बार-बार ऐसाही हो रही है 
कभी सांस एकदम से थम सी जाती है
 तो कभी धड़कनें बढ़ जाती है 




और वही अभिराज अपनी बेटी की तरफ देखते हुए 
यह सुनते हुए अचानक हल्की नजरे घूम कर
 हॉस्पिटल हेड की तरफ देखा है 




और वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर देव 
सलाइन बोतल को पास चल के जाते हुए 
 
और उस बोतल को देखते हुए
अपने हाथ बढ़कर कुछ टंगे हुए बोतल को 
 हाथों से उसे उतारते हुए
हल्के पेशेंट की हाथों कि तरफ देखते हुए
 दूसरी सलाइन बोतल लगाने की सोच रहे हैं






और वही डॉक्टर हेड 
अभिराज को देखते हुए अपनी कदम ठहरा लेता है 
और हल्की आवाज में आगे कहता है 

हमें नहीं समझ में आ रहा अभिराज कि 
आखिर हो क्या रहा है 


लगता है अगर ऐसे ही चला रहा तो
 यह जल्दी ही होश में आ सकते हैं
 या तो जल्दी ही मार सकती है





और वही अभिराज वैसे ही हल्के नजरे करते हुए  
हॉस्पिटल हेड की तरह देख रहे 
और उनके बातें सुन रहे हैं






और 
वही डॉक्टर देव सलाइन बॉटल को अपने हाथ में लेते हुए
 और दूसरी लाइन बोतल वहां तंगते हुए 
धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 
अपने पेशेंट की तरफ आ रहा है 






और वही हॉस्पिटल हेड 
अभिराज से बातें करते हुए 
 अचानक अपने नजर उठा कर 
 अपने बेटे की तरफ देखते हुए 
अभिराज से कहता है 


कभी-कभी मेडिकल साइंस में
 ऐसा होना यह तय करता है
 कि शायद पेशंट एक ऐसे सपनों में है
 जहां वह सब महसूस कर पा रही है
 और उसकी साइन उसकी बॉडी में दिखता है 


और जो हो रहा है
 तुम्हारी बेटी के साथ वह ऐसा ही लगता है 
कहते हैं
 होश में आने की संभावना बढ़ जाती है 










और वहीं दूसरी तरफ 
वैदेही अब भी छत पर खड़ी है
छत की साइट की दीवार को पकढ़ते हुए 
 दूर शहर की तरफ गहरी आंखों से देखते हुए 
सच में डूबी हुई है 




और तभी अचानक 
रिया चलकर छत के दरवाजे के पास आते हुए 
ठहर जाती है 
और अपनी मां को आवाज लगाते हुए 
हल्की ऊंची आवाज में कहती है 


मोम



और तभी यह सुनते ही 
अचानक वैदेही अपना हाथ दीवार से हटाते हुए 
 पलट कर रिया की तरह दिखती है 





और 
तभी रिया वहीं खड़ी रहते हुए 
अपनी बातों को आगे बढ़ते हुए कहती है 


लोगों की मां अपने बच्चों को खाना खिलाने के लिए 
आवाज लगती है 

पर आप है की छत पर घूम रही है 
और खाना खाने के लिए मुझे 
आपको बुलाने आना पड़ रहा है 
 





और वही वैदेही बस उसे देखी जा रही है 
उसके बातें सुनते हुए 




और रिया अपने बातों को आगे बढ़ते हुए कहती है 

खाना बन गया है 
आ जाइए अब 



और वही वैदेही रिया की सारी बातें सुनते हुए 
  हल्की सी जॉलाइन फ्लेट हुए मुस्कुराती है 





और वही अचानक रिया यह कहते हुए
अपनी मां की तरह देखते हुए
 पलट कर वापस जाने के लिए की
अपनी कदम सीडीओ की तरफ बढ़ाती है









वही अब धीरे-धीरे समय बिता गया
लगभग 9:00 

डॉक्टर हेड अस्पताल के पार्किंग एरिया में अपने कार के पास खड़े हैं
 हल्के सर झुकाकर 
अपने हाथों की घड़ी देखते हुए 






और तभी अचानक पीछे से आते हुए 
देव अपने पिता को आवाज लगाते हुए कहता है 

डैड





और तभी अचानक यह सुनते ही डॉक्टर हेड
 अपने घड़ी से नजर हटाकर
 नजर उठाते हुए 
अपने बेटे की तरफ देखा है
 और उन्हें देखते हुए मुस्कुराता है 





और वही देव अपने पिता को आवाज लगाते हुए 
 अपनी कदम आगे बढ़ते हुए 
अपने पिता की तरफ बढ़ता है 




और 
वही डॉक्टर हेड अपने बेटे की तरफ देखते हुए
 और मुस्कुराते हुए 
अपने हाथ उठाकर हल्के हाथ हिलाते हुए 
अपनी तरह बुलाते हुए कहता है 

हे आ जाओ कब से वेट कर रहा हूं 




और वही डॉक्टर देव चलते हुए
हल्के मुस्कुराते हुए
 अपने पिता कि नजदीक आ रहा है 





और वही डॉक्टर हेड अपने बेटे को देखते हुए 
अपने हाथ हल्के नीचे करते हुए 
और अचानक हल्के हाथ अपने बेटे की तरह बड़ाते हुए 
अपने कदम अपने बेटे की तरह बढ़ाता है





और वही डॉक्टर देव चलते हुए 
 अपने पिता के नजदीक आता है 





और वही डॉक्टर हेड 
अचानक से अपने बेटे के पास आते ही
 अपने हाथ बढ़ा कर 
उसके कंधे पर रखते हुए 
मुस्कुराते हुए कहता है 


तूने कितना देर लगा दिया 
तुम्हारे मां ने डिनर के लिए बुलाया है 



और यह कहते हुए अपने बेटे के कंधे पर हाथ रखकर थपथपाते हुए
 दूसरे हाथ हल्के उठा कर 
हाथों में लगी हुई घड़ी की तरफ नजर झुकते हुए देखा है 
और अपने बेटे के साथ पलटते हुए 
 अपने कदम कार की तरफ बढ़ते हुए 
हॉकी आवाज में कहता है 


और हम यही लेट हो गए 
वह गुस्सा करेगी 


और यह कहते हुए
 अपने बेटे की कंधे पर फिर से तप तपाते हुए कहता है 

चलो जो गाड़ी में बैठो 




और वही डॉक्टर देव हल्की नजर घुमा कर अपने पिता की तरफ देखा है 
और देखते हुए हल्की सर हिलाकर हामी भरता है 



और वही डॉक्टर हेड हल्की नजर घुमा कर 
अपने बेटे के तरफ देखते हुए मुस्कुराता है 
और उसके कंधे से अपने हाथ नीचे करता है 




और वही डॉक्टर देव अपने पिता पे से नजर हटाते हुए 
आगे कार की तरफ देखते हुए
हल्के अपने हाथ बराकर
 कार के दरवाजा खोलते हुए 
एक कदम और आगे बढ़ता कार में बैठने के लिए

 




और वही डॉक्टर हेड अपने बेटे को बैठने के लिए कहते हुए 
पलटे हुए
 घूम कर कार की दूसरी तरफ चलते हुए जाता है 





और वही डॉक्टर देव अपने कदम कार में रखते हुए 
हल्के झुकते हुए 
 कार के अंदर जाते हुए 
कार के दरवाजा बंद करता है 





और वही डॉक्टर हेड कर की दूसरी साइड जाते हुए
कर की तरह मुरते हुए 
अपने हाथ बढ़ाकर कार के दरवाजा खोलते हुए
अपने कदम बड़ा कर 
 कार में झुकते बैठने की कोशिश करते हुए
अपने बेटे से कहता है 

चलो कर में चलता हूं 



और यह कहते हुए
 डॉक्टर हेड कार में बैठता है 
और अपने हाथ आगे लाते हुए
 दरवाजे को बंद करने 





और तभी डॉक्टर देवी 
कर के दरवाजा छोड़ते हुए 
अपने हाथ आगे के तरफ लेते हुए
कार में सही से बैठते हुए 
नजरे घूम कर अपने पिता की तरफ देखते हुए
 मुस्कुरा कर ठेहराऊ भरी हल्की आवाज में कहता है


क्या डैड
 आपने यह सुबह ही कहा है
 की 
कर आप ड्राइव करने वाले हैं 





और क्या सुनते ही अचानक से डॉक्टर हेड
अपने हाथ कार के दरवाजे से हटाते हुए
नजरघूम कर अपने बेटे की चेहरा देखते हुए
मुस्कुरा कर हल्की रिएक्ट करते हुए कहता है 


क्या अच्छा 

और यह कहते हुए हंसने लगते हैं




और तभी अचानक देव भी अपने पिता की तरफ देखते हुए 
मुस्कुराती हुई 
 हल्की की आवाज में कहता है 

क्या डैड

यह कहते हुए वह भी हंसने लगते हैं 









और वहीं दूसरी तरफ अभिराज अस्पताल में 
आईसीयू रूम में 
  अपनी बेटी के सर के पास उस चेयर पर बैठा हुआ है
 उन्हें देखते हुए 


और फिर कुछ सेकेंड बाद 
 ठेहराऊ भरी भारी आवाज में कहता है 


तुम सब कुछ छोड़कर 
राजकुमारी जी तरह की सकती थी 

पर तुम ने कभी मेरी बात नहीं मनी 
तुम भी अपनी मां की तरह हो जिद्दी हों
जिसे संभालना बहुत ही मुश्किल है 

और समझना भी 



और अभिराज अपनी बेटी को देखते हुए
 अपनी बाएं हाथ हल्के उसके सर की तरफ बढ़ते हुए
 ठहराऊ भरी भारी आवाज में कहता है 



अगर तुमने यह सब छोड़ दिया होता 
 और मेरे साथ रहती 
तो कभी इस हाल में नहीं होती 




और फिर अपनी बेटी के सर पर हाथ रखते हुए 
और धीरे-धीरे उसके सर को सहलाते हुए
 भारी आवाज में कहता है 


मुझे समझ में नहीं आता
 तुम दोनों मां बेटी एक जैसे क्यों हो 
बस अपनी करती हो
 किसी की नहीं सुनती 



और यह कहते हुए 
उनकी आंखों मे आंसू आ जाता है 
और वह अपनी बेटी को देखते हुए 
और उसके सर सहलाते हुए 
अपराध विरोध महसूस करते हुए 
भारी आवाज में कहता है 



एम सॉरी बेटा 
मुझे माफ कर दो 
मैं चाह कर भी तुम्हें होश में नहीं ला पा रहा

नाहीं कुछ ऐसा है 
जो तुम्हारे लिए मैं कर पा रहा हूं





और वहीं दूसरी तरफ शहर के सड़कों पर
डॉक्टर हेड अपनी कार को दोहराते हुए
और अपने बेटे से बात करते हुए
और दोनों बाप बेटे हंसते हुए
और बात करते हुए
घर वापस जा रहे हैं
















और वही मेघना की दुनिया में मेघना की
आंखें बंद है 
बाहर गाड़ी और बरसात की आवाज आ रहे हैं 
पर वह कहां है उसे नहीं पता 
सायद वो सो चुकी है 




और वही रिया भारी बरसात  में अपने कार को ड्राइव करते हुए हल्के सर घूमर पिछले वाले सीट पर अपनी बहन को सोते हुए
अपनी उदास चेहरेक साथ दखती है



और वही वह दोनों हाथों को अपने चेहरे के पास बंदते हुए
और परी बोडी को सिकोड़ते  हुए सीट पर लेटी हुई है 













और वहीं दूसरी असल दुनिया से बाहर 
 दूसरी दुनिया में

वीर अपने कमरे में टेबल के सामने 
चेयर पर बैठ कर 
लैपटॉप पर अपने दोनों हाथ से
 लैपटॉप की कीबोर्ड दबाते हुए 
कुछ सर्च कर रहा है
 उसके लैपटॉप के बगल में रखा हुओ
 वही कागज है 
जो मेघनि के हाथों से गिरा हुआ था

वह इंटरनेट पे माधवी हॉस्पिटल सर्च कर रहा है 
इस नाम की 
कोई भी हॉस्पिटल नहीं मिल रहा है 
उसकी दुनिया में

वीर हैरान और परेशान होते हुए 
की वोट पर टाइप करते हुए 
ढूंढ रहा है

उसके दिमाग में चल रहा है 
 वह लड़की जो होटल में अस्पताल के पहने हुए दिखी
और आज शाम को एक कार में 
उसके दिमाग में बार-बार यह तोड़ रिवाइज हो रहा है 
और वह कुछ समझ में नहीं पा रहा 

सबसे हैरानी के बाद थी उसके टेबल पर रखी हुई
वह हॉस्पिटल की कागज
जिसमें हॉस्पिटल के नाम लड़की और 
 बिल के नाम दोनों लिखा था 


वह सर्च कर चुका है 
उसे नाम की लड़की को सोशल मीडिया पे 
बहुत सारे लड़कियों में 
उसे वह उस चेहरे वाली लड़की को नहीं ढूंढ पाया 
और वह बार-बार अस्पताल को भी सर्च कर रहा है 
पर अब तलाक उसे कुछ नहीं मिल रहा 



 अचानक टाइप करते हुए वह 
और परेशान होते हुए 
जोर से लैपटॉप की कीबोर्ड पर हाथ मारते हुए
 पीछे हट जाता है 
अपने दोनों हाथों कीबोर्ड से हटते हुए
और हैरानी के साथ सोच में पर पढ़ते हुए 



वह सोचता है
 आखिर यह हॉस्पिटल है कहां 
मैं इसका नाम तो कभी नहीं सुना 
और इंटरनेट पर भी नहीं मिल रहा है 
ना उस लड़की की 
 पहचान ना हॉस्पिटल


वीर यह सोचते हुए
परेशान और डिप्रैस होकर मुंह खोलते हुए आह भरता है 

आह 



 आ भरते हुए अपने चेयर से बॉडी लगाकर 
 चेहरे को सीकोड़ते हुए आंखें बंद करता है 





और तभी अचानक बाहर से तेज
 चिल्लाहट भारी आवाज आती है 


वीर। वीर 


और तभी अचानक वीर अपनी आंखें ठीक से बंद कर पाते की 
आवाजसुनकर अचानक वह अपनी आंखें खोल लेता है




और वही वह तेज आवाज दामिनी देवराय की है 
दामिनी अपने तेज कदम बढ़ाते हुए 
अपने घरकी उपरी फ्लोर की गलियों से चलते हुए 
अपने बेटे की कमरे की तरह बढ़ रही है
 उसके नाम लेकर पुकारते हुए कहती है

वीर क्या कर रहे हो






और वही नीचे नीचे फ्लोर पर आंगन में 

नौकर खाने की मेज सज रहे हैं 
 


और वही हाथ बंदते हुए 
खाने की मेज के बगल में सोफे पर बैठा हुआ है 
दामिनी देव रायकी पति 
रुद्रानाथ देवराय 

जो सिमिलर डॉक्टर हैट की तरह दिख रहे हैं


वह दोनों हाथ बनते हुए ऊपर की तरफ देख रहा है
 शायद 
अपने बेटे की इंतजार कर रहा है 



और वही दोनों कर जल्दबाजी में अपने हाथ चलते हुए 
 खान की मेज को अलग-अलग खाने से सजा रहे हैं 





और वही दूसरी तरफ ऑफर फ्लोर पर 
अपने कमरे में बैठे हुए
विर के कानों में फिर एक आवाज आता है 
 वीर

तभी वीर अपनी आंखें खोलते हुए 
अजीब से मुंह बनाकर रिएक्ट करते हुए
 जल्दबाजी भरी आवाज में कहता है 

या औरत ठीक से सांस भी नहीं लेने देता





और वही दामिनी देवराय चलते हुए 
अपने बेटे की कमरे के दरवाजे के पास आ रहे हैं 




और वही वीर अचानक से दोनों हाथ हल्के ऊपर करते हुए और लहराते हूए वैसे ही रिएक्ट करते हुए 
आगे जल्दबाजी भारी लहजे में कहता है 

पापा को परेशान करते हुए
 घर से निकाल दिया 
फिर भी जी नहीं भरा इस बुढ़िया का 

अब हमारे पीछे 


वह अपनी बातें खत्म करती कि 
तभी अचानक दामिनी देवराय 
वीर के दरवाजे के पास खड़े होते हुए
 आवाज लगाते हुए कहता है


 वीर



और तभी अचानक वीर अपनी बातों को खत्म करते हुए 
कहते हुए 
परे हैं 

अचानक घबराते हुए 
पीछे पलट कर लड़खराते हुए आवाज में कहता है 


हा हा मां





और तभी दामिनी देवराय 
अचानक हल्के अपनी के बेटे के कमरे की तरफ झाकते हुए हल्की ऊंची आवाज में कहता है 


बाहर नीचे आओ 



 और वही यह सुनते ही अचानक से वीर 
पलटते हुए घबराते हुए
मूड़ कर झुके हुए चेयर से झट से खरा होता है 
अचानक घूम कर अपनी मां की तरफ देखा है 




और 
वही दामिनी देवराय अपने बेटे की तरफ देखते हुए 
और हल्की हाथ अपने बेटे की तरफ बढ़ते हुए
शांत हाल्की आवाज में कहती है 

तुम्हारे पिता आए हैं 





और तभी 
यह सुनते ही अचानक से वीर की चेहरा खिल उठता है
 और वह मुस्कुराते हुए लड़खरते हुए
 आवाज में अपनी मां से कहता है 


हम अभी आए


और वहां फर्स्ट के परी चप्पल पैरो मे बिना घुस आए झट से अपनी कदम आगे बढ़ता है
 


और वही दामिनी भी अपने हाथ को नीचे करते हुए 
शांत और गंभीर चेहरे के साथ 
 अपने बेटे को देखते हुए 
पलटी है बापस जाने के लिए








और वही नीचे अचानक से तृषा सीडीओ से उतरते हुए 
अपने पिता की तरफ देखा है 
और अचानक हल्की मुड़कर उसे देखते हुए 
 ठहर जाता है खुश होते हुए 




और 
तभी अचानक रुद्रनाथ देवराय की नजर उसकी बेटी पर जाता है 
और वह अपनी बेटी के देखते हुए मुस्कुराता है
 और अचानक हल्के मुर कर 
हल्की कर चलते हुए स्माइल देते हुए
अपने बेटी को पास आने के लिए कहते हुए 
अपने दोनो वाहे फैला देता है 







और यह देखते ही अचानक तृषा खुश होते हुए
 मुस्कुराते हुए सीडीओ की तरफ मुड़ कर
  दौड़ते हुए अपने पिता की तरह भागती है 



और रुद्रनाथ अपने बाहें फैला कर 
अपनी बेटी के वेट करते हुए मुस्कुरा रहा है 



और वहीं पास में खाने के मैच के बगल में दोनों कर 
अपने दोनों हाथ बनते हुए 
 आगे की तरह देखते हुए खड़े हैं 





और वही तृषा दौड़ते हुए सीडीओ से नीचे उतारते हुए
 कुछ सैकड़ो में
 अपने पिता की तरफ आते हुए
 झुकते हुए 
आ कर अपने पिता के गले लग जाती है 
खुश होकर चिल्लाते हुए कहती है


डैड 

फाइनली अप आ गऐ



और वही अचानक रुद्रनाथ अपने बेटी को गले लगते ही 
 अपने दोनों हाथों से बेटी का बाहों मे भरते हुए 
 खुश होकर स्माइल करता है






और वही तृषा अपने पिता के गले लगाते हुए 
और खुश होकर रिएक्ट करते हुए 
 अपनी बातों को आगे बढ़ते हुए 
ऊंची आवाज मे कहता है 

  इस ऐ मेडिकल 
डैड 

आज आज हम 
और वही यह कहते हुए 
तृषा
वह अपनी पिता को अपने हाथों से छोड़ते हुए 
और हल्के सर पीछे लेते हुए 
अपने पिता के ही चेहरे को देखते हुए 
अपने दोनों हाथों को हिलाकर रिएक्ट करते हुए 
आगे कहती है 



हम आज बातें कर रहे थे 
कि  
आप अगर हमसे मिलने आए तो 
ऐ कोई मेडिकल से काम नहीं 




और वही रुद्रनाथ अपनी बेटी की चेहरा और रिएक्शन को देखते हुए 
और उसकी आवाज को सुनते हुए 
 मुस्कुराते हुए बस उसे देखे जा रहा है 
 अजीब से दिल में शगुन लिए 
और शांत भारी सांसों के साथ







अगर यह कहानी आप सबको अच्छी लगे तो
आगे पढ़ते रहिए

मिलते हैं नेक्स्ट एपिसोड में 

मैं आपके प्रिया राइटर  अभिनिशा,🦋❤️💯