जिंदगी की दूसरा किनारा पार्ट 28
और वही दूसरी मंजिले पर
दामिनी अपनी बेटी के कमरे से मूरते हुए
चलकर वापस गलियारों की तरफ बढ़ती है
और वही वीर
अचानक अपने कमरे से निकलते हुए
मूरते हुए गलियारों में दौड़ते हुए
सीडीओ की तरह भागता है
अपनी मां से आगे निकलते हुए
और
तभी अचानक दामिनी अपने बेटे को खुद से आगे जाते हुए
देख सीरियस चेहरे के साथ
उसके सेफ्टी के लिए हल्की ऊंची आवाज में कहता है
संभाल कर जाना
और वही वीर
अपनी मां की बातों को इग्नोर करते हुए
सीड़ीयों की तरफ आते हुए
अचानक अपने हाथ बरा कर
सीड़ीं के बगल में लगी हुई रोड को पकड़ लेता है
और अचानक सर उठाकर अपने पिता की तरफ देखा है
और उन्हें देखते हुए
खुश होते हुए हल्के रिएक्ट करते हुए चिल्ला कर कहता है
डैड
और वही
नीचे रुद्रनाथ और तृषा दोनों बाप बेटी आपस में
सोफे पर बैठते हुए बातें कर रहे हैं
और
तभी अचानक अपनी बेटे की आवाज सुनते ही
अचानक रुद्रनाथ नजर उठा कर
अपने बेटे की तरह देखा है मुस्कुराते हुए
और वही साथ में तृषा भी अपनी बात को वही रोकते हुए
नजर उठा कर ऊपर की तरफ
अपने भाई को मुस्कुराते हुए देखती है
और तभी अचानक वीर सीड़ीयों की रोड को अपने हाथों से छोड़ते हुए अचानक मुड़कर
अपने पिता से मिलने के लिए सीडीओ की तरह भाग पड़ता है
और वह दूसरी तरफ असल दुनिया में
कुछ देर बाद
हॉस्पिटल हेड और डॉक्टर देव दोनों घर पहुंचते हैं
और घर की गलियों में दोनों बाप बेटा एक दूसरे से बातें
करते हुए आगे बढ़ रहे हैं
और वही डॉक्टर हेड अपने बेटे की कंधे पर हाथ रखकर
आगे चलते हुए ठेहराऊ भरी हल्की ऊंची आवाज में कहता है
तुम चिंता मत करो जितना हो सके उतना ही करो
और अपने सर पर ज्यादा वोट लेने की जरूरत नहीं
और वही अचानक देव पलट कर
अपने पिता की तरह देखा है
अचानक ठहर जाता है
और उदास होकर हल्की आवाज में कहता है
पर डैड
और
वही उसके साथ ही उसके पिता
हल्के नजरे घूम कर अपने बेटा की तरफ देखते हुए
हल्की स्माइल करते हुए
हल्की आवाज में कहता है
तुम याद रखो कि तुम एक डॉक्ट रहो
नही की
भगवान जो सब ठीक कर सकता है
और वही डॉक्टर देव
अपनी उतरी हुई चेहरे के साथ
अपने पिता की तरफ देखते हुए
और उसकी बातें सुन रहा है
और वह उसके पिता हल्के हाथ उठाते हुए
और उसके शोल्डर को थपथपाते हुए
अपने बातों को आगे बढ़कर
हल्के मुस्कुराते हुए ठेहराऊ भारी आवाज में कहता है
तुम इतना ही कर सकते हो
जितना तुम्हारे हाथ में है
उससे ज्यादा नही
और यह कहते हुए डॉक्टर हेड
अपने बेटे की तरफ देखते हुए
और उनके शोल्डर से हाथ रखते हुए
कुछ सेकंड ठहर जाता है
और वही डॉक्टर देवे भी अपने पिता की तरफ हल्के होंठ खोलते हुए देख रहा है
और वही डॉक्टर हेड कुछ सेकेंड बाद
और फिर मुस्कुराते हुए कहता हे
समझे
और वही डॉक्टर देव कुछ सोचते हुए
और अपने पिता की बात सुनते हुए
उनके तरफ देखते हुए
हल्की हामी में सर हिलाते हुए हां भरता है
हुं
और
तभी अचानक डॉक्टर हेड मुस्कुराते हुए
और अपने बेटे को देखते हुए
आहा भरता है
आ
और फिर अचानक अपने बेटे पर से नजर हटाते हुए
नजर उठा कर गलियारों से आंगन की तरफ देखते हुए जल्दबाजी भारी लहजे में कहता है
औ नही
जल्दी चलो तुम्हारी मां
और फिर अपना कदम आगे बढ़ता है
और अपने बेटे की शोल्डर पर अपने हल्के हाथ रखते हुए ही
हल्की खींचते हुए
और तभी
डॉक्टर देव अपने पिता की आवाज सुनते ही
अचानक
अपने पिता से नजर हटाकर
आगे की तरफ देखते हुए
अपने पिता के साथी
गलियारों
से तेज कदम चलाते हुए आगे बढ़ता है
और वहीं दूसरी तरफ आंगन में खाने की इमेज सजी हुई है
और वही डॉक्टर हेड की वाइफ खड़ी दरवाजे की तरफ देख रही है
अपनी बेटी और पति के इंतजार करते हुए
और वहीं दूसरी तरफ वीर की दुनिया में
वीर और उसकी पूरी फैमिली खान की मैच के सामने टेबल पर बैठी हुई है दोनों साइड
और वही
वीर चौपटिस जल्दी-जल्दी खाना खाते हुए
अचानक अपने हाथ चौपटीस कि साथ नीचे करते हुए
और
अचानक नजर उठा कर अपने पिता के तरफ देखते हुए
खाना चबाते हुए हल्की भरी आवाज में कहता है
डैड आपके बिना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता
और तभी
यह सुनते ही अचानक रुद्रनाथ देवराय
खाने की प्लेट में चौपटीस रखते हुए ही
झुकते हुए पलके उठा कर अपनी बेटी की तरफ देखा है
और वही दामिनी देववर्मा
अपने हाथों को नीचे चौपटीस के साथ प्लेट में ही रखते हुए
अचानक से अपनी शख्त चेहरे के साथ
सर उठाते हुए हल्के नजरे घूम कर
अपने बेटे की तरफ देखती है
और वही वीर यह कहते हुए
अचानक से अपने दोनों हाथ साथ में हल्के उठाते हुए
और अपने पिता के तरफ देखते हुए
दोनों हाथों को हल्की साइड राउण करते हुए
हल्के हवा में लहराते हुए रिएक्ट करते हुए कहता
जैसे कि लगता है कि
यह घर कोई जेल हो
वह अपनी मां की गंभीर चेहरे पर ध्यान ही नहीं देता
वह लीडर होकर
अपने पिता से अपने मन की बातें कर रहा है
और वही तृषा भी जल्दबाजी में खाना खाते हुए
हल्के सर नीचे करके खाने की तरह देखते हुए
ही
और खाने को चबाते हुए
भारी आवाज में कहती है
हां डैड भाई सच कहते हैं
और वही यह सुनते ही
अचानक से दामिनी देववर्मा
की सख्त नजर
अपने बेटे से हटते हुए
अपनी बेटी की तरफ देखते हुए
हटकर रुद्रनाथ पर टिक जाता है
और वही रुद्रनाथ देवराय अपने बेटे की तरफ देखते हुए अचानक से उसकी नजर दामिनी पर पड़ता है
और दामिनी के तरफ नजर देखते हुए
वह कुछ सेकंड ठेहर जाती है
और वही तृषा जल्दी-जल्दी खाना चौपटीस से उठाकर
मुंह में लेते हुए
और जब चौपटीस वाले हाथ हाल्के नीचे करते हुए
और खाना चबाते हुए
हल्के नजरे उठा कर घूमते हैं अपने पिता के साथ देखते हुए
हल्के चौपटीस वाले हाथ को हिलाते हुए रिएक्ट करते हुए
भारी आवाज में कहती है
यह सब बहुत ही बोरिंग है
और यह कहते हुए
फिर से नजर नीचे करते हुए
खान की तरफ अपने हाथ बढ़ती है
और
तभी वीर अपने हाथों को हाल्के नीचे करते हुए
और अपने चेहरे को सिकोड़ते हुए
अजीत से रिएक्ट करते हुए
मासूमियत भरी आवाज से कहता है
हां डैड
और वही दामिनी देववर्मा की नजर रुद्रनाथ देवराय पर टिका हुआ है
और तभी रुद्रनाथ देवराय
दामिनी को देखते हुए
हल्की सी चौपटीस वाले हाथों को
खाने की प्लेट से उठाकर पीछे लेते हुए
और साथ में ही धीरे से पीठ को पीछे लेते हुए
सिद्ध होते हुए हल्की आवाज में मुस्कुराते हुए कहता है
क्या सच में
और कहते हुए रुद्रनाथ देवराय
हल्की नजर घुमा कर अपने बेटे की तरफ देखा है
और
तभी अचानक तृषा चुप किसके साथ अपनी हल्के हाथ उठाते हुए
और साथ में नजर उठाकर
अपने पिता की तरफ देखते हुए
आवाज में कहने की कोशिश करती है
और वीर भी अपने पिता की तरफ देखते हुए
भारी आवाज में खाने की कोशिश करता है
और वही दामिनी सख्त नजरों के साथ
अपने रुद्रनाथ देवराय तरफ देख रही है
और वही रुद्रनाथ देवराय
अपने बेटे पर से नजर हटाते हुए
सर घूम कर अपनी बेटी की तरफ देखा है मुस्कुराते हैं
तभी अचानक तृषा और वीर
दोनों एक साथ हल्के सर हीलाकर रिएक्ट करते हुए
तेज आवाज में कहते हैं
हां सच में डैड
और वही दामिनी चुपचाप अपने बच्चे और रुद्रनाथ के
तरफ देखते हुए साइलेंट है
और वहीं दूसरी तरफ असल दुनिया में
डॉक्टर हेड अपने घर के आंगन में आते ही
अचानक से अपने बेटे कंधों को छोड़ते हुए
अपने तेज कदम बढ़ाते हुए
अपने बेटे से आगे निकलते हुए
अपने दोनों हाथ उठाकर
अपने वाइफ के पास जाते हुए
अचानक उसके गले के रखते हुए
मुस्कुराते हुए हल्के आवाज में कहता है
सॉरी भाग्यवान
और वही उसकी वाइफ गहरी उदास भरी आंखों से उसे देख रही है
और वही पीछे से वीर धीरे धीरे चलते हुए आ रहा है
और वही उसकी वाइफ दामिनी देववर्मा की तरह दिख रही है
वीर की दुनिया और असली दुनिया थोड़ी बहुत समांतर है
जैसे कि वीर की घर के आंगन
देव की घर की तरह आंगनक एक जैसे प्रतीतहोताहै
और वही साथ में
वही वीर का घर के आगन बड़ा दिख रहा है
और देव की घर छोटा प्रतीत होता है
अंदर से थोड़ी बहुत अलग भी
और उसके माता-पिता भी
एक जैसे प्रतीतहोते हैं चेहरेसे
वीर और देव की दुनिया के लोग भी लगभग एक जैसे
प्रतीत होते हैं पर सभी नहीं
जो एक जैसे लोग हैं उनमें बदलाव है
सबकी व्यक्तित्व अलग है प्रोफेशन अलग है
और
तभी अचानक डॉक्टर हेड की वाइफ ज्योति
गहरी नजर से अपने पति की तरफ देखते हुए
गुस्से से उसकी चेहरा उतरा हुआ है
और वही देव चलते हुए
अपने माता-पिता की तरफ मुस्कुराते हुए आगे बढ़ रहा है
और वही डॉक्टर हैड अपनी वाइफ की गुस्से वाले चेहरे को देखते हुए
अचानक से अपनी वाइफ को देखते हुए
हॉठ को और चेहरे को सिकोड़ हुए अजीब सी मुंह बनता है
और वही ज्योति वैसे ही उतरे हुए चेहरे के साथ
गहरी आंखों से गुस्से में उसे देखा जा रहा है
और तभी अचानक डॉक्टर हेड
मुंह बनाते हुए अचानक हॉठ कल आते हुए मुस्कुराता है
और फिर अपनी वाइफ की चेहरे पर से
अपना हाथ हटाते हुए
धीरे-धीरे नीचे करते हुए
उसे गुस्से में देख कर मुस्कुराना बंद कर देता है
सीरियस होते हुए
हल्की आवाज में कहता है
सॉरी जान
और
वही उसकी वाइफ गुस्से से देख रहा है
और
तभी अचानक देव अपनी मां की तरफ देखते हुए
और चलकर आगे बढ़ते हुए
और उसकी मां और उसके पिता पर गुस्सा ना करें
यह सोचते हुए
मुस्कुराते हुए हाल्की आवाज में कहता है
मोम भूख लगा है
और
तभी अचानक ज्योति अपने पति से नजर हटाते हुए
हल्के सर तिरछे करते हुए
अचानक मुस्कुरा कर अपनी बेटे की तरफ देखते हुए
हल्की आवाज में कहती है
और क्या सच में
और यह कहते हुए
अचानक हल्के नजर झुका कर
अपने सामने खड़े अपने पति की तरफ देखते हुए
हल्के रिएक्ट करते हुए
हल्की ऊंची आवाज में कहती है
हटो यहां से
और
तभी अचानक डॉक्टर हेड
अपने वाइफ की तरफ देखते हुए
पलट कर अपनी बेटे की तरह देखा है
और अचानक मुड़ कर अपने वाइफ की तरफ देखते हुए
और थोड़ी सी पीछे घसककर हाल्की मोड़ते हुए
साइट हो जाती है
और तभी डॉक्टर हेट के आगे से हटते ही
ज्योति अचानक से
उससे अपनी नजर हटाते हुए
अपने कदम आगे बढ़ते हुए
अपनी बेटी की तरफ चलते हुए बढ़ती है
और साथ में अचानक
हल्की हाथ उठा कर आगे बड़ाते हुए
और अपने हलके सर उठा कर अपने बेटे को देखते हुए
मुस्कुरा कर हल्के रिएक्ट करते हुए कहता है
फिर जल्दी आजा मैं नें तुम्हारी पसंद के खाना बनाई है
और वही वीर मुस्कुराते हुए
अपनी मां की तरफ बढ़ता है
और वही डॉक्टर हैड अचानक
सीधी पलते हुए अपने वाइपर
और बेटे की तरफ मुस्कुराते हुए देख रहा है
और वही ज्योति अपने बेटे की नजदीक आते हुए
अपने दोनों हाथ बढ़ाकर
अपने बेटे के दोनों गाल पर रखते हुए
हल्की मुस्कुराते हुए
और हल्के चेहरा को सीकोड़ कर शिकायत में
हल्की रिएक्ट करते हुए
जल्दबाजी भरी हल्की ऊंची आवाज में कहती है
कब से इंतजार कर रहा हूं
तुम दोनों बाप बेटी का
और यह कहते हुए अचानक अपने बेटे की गाल पर हाथ रखते हुए ही
हल्के सर घूमर अपने पति की तरफ देखते हुए
मुस्कुराना छोड़ गुस्से में हल्की होठों को सिकोड़ते हुए
और डॉक्टर हेड को ताना मारते हुए
रुखा सुखा आवाज में कहती है
तुम दोनों के लिए मैं जरूरी हूं ही नहीं
और वही डॉक्टर हैड अपनी वाइफ के मुंह से यह सुनते ही
वह मुस्कुराना छोड़
अपने वाइफ की तरफ देखते हुए
उसकी आंखें गहरी हो जाती है
और वही अचानक देव अपने दोनों हाथ उठाकर
अपनी मां की कलाई को पकड़ते हुए
हल्के मुस्कुराते हुए हाल्की आवाज में कहता है
सॉरी मॉम
और
तभी अचानक ज्योति अपने पति से नजर हटाकर
पलट कर अपने बेटे की तरफ देखते हुए
उसकी चिंता करते हुए
हल्के रिएक्ट करते हुए हल्की ऊंची आवाज में कहता है
औ मेरे बेटे
और वही लगभग 10:0बजे
वैदेही एक हाथ में पर्स लेते हुए
और दूसरे हाथ उठाकर
अपनी ओरी हुई सब सोल को पकढ़ते हुए सही करते हुए
अपने घर की गलियारों से चलते हुए
दरवाजे के तरफ आ रही है
और
तभी अचानक रिया अपने कमरे के पास दीवार से लगते हुऐ खड़ी अपनी मां की तरफ देखते हुए
हल्की ऊंची आवाज में कहती है
क्या आप हॉस्पिटल जा रही हैं
और
तभी अचानक वैदेही सोल को सही करते हुए
अचानक धीरे-धीरे अपने हाथों को हल्के नीचे करते हुए
और साथ में हल्के मुड कर रिया की तरह देखते हुए
हल्की हामी में सर हिलाती है
और
तभी रिया अपनी मां को देखते हुए
उदास चेहरे के साथ ठेहराऊ भरी हल्की लेहजे में कहती है
तो
ठीक है
आप जाइए
अगर वह भी वही होगा तो
मैं नहीं चाहती कि आप उसे आदमी से कोई बात करें
और वही वैदेही उसे गहरी आंखों से देखते हुए
2 सेकंड ठहर जाती है
और फिर 2 सेकंड बाद
हल्के से मुस्कुराती है
और हल्की आवाज में कहती है
तुम चिंता मत करो
और वही रिया
दीवार से लगाते हुए
उदास चेहरों के साथ गहरी आंखों से अपनी मां की तरफ देख रही है
और वही वैदेही यह कहते ही
रिया की तरह मुस्कुराते हुए देखते हुए
अचानक पलट कर अपने कदम बढ़ाते हुए
दरवाजे की तरह बड़ती है
अस्पताल जाने के लिए
और वहीं दूसरी तरफ अस्पताल में अभिराज अब भी है
वो अब अपनी बेटी के वेट के पास खड़ा है
उसे देखते हुए
और वहीं दूसरी तरफ एक नर्स दीवाल के पास बनी हुई
कैबिने की पास खड़ी होकर झुकते हुए
अपने हाथ बड़ाते हुए मैच पर कुछ चीज रख रही है
और वही अभिराज लगातार अपनी बेटी को देखे जा रहा है
अपने साथ और गंभीर चेहरे के साथ
तभी अचानक उसका फोन रिंग होता है
और तभी वह अचानक अपनी बेटी से नजर हटाते हुए
नजर झुका कर
अपने हाथ बढ़ते हुए पेंट के पॉकेट में डालते हुए
फोन को निकलते हुए
उठाकर अपने सामने लेते हुए
फोन की तरफ देखा है
और हल्की हाथों की उंगलियों से टच करते हुए
फोन को उठाकर हल्के कान के पास लगता है
और
तभी उधर से एक आवाज आती है
अब आप कब आ रहे हैं अभिराज
और तभी यह सुनते हुए
अचानक अभिराज नजर उठा कर
अपनी बेटी की तरफ देखते हुए
कुछ सेकंड ठहर जाती है
और वही उधर से फोन में बोलने वाली मालिका है
उधर से मालिका हल्की आवाज में कहती है
मैं आपकी कब से वेट कर रही हूं
और वही क्यासुनते ही अभीराज
अपनी बेटी के तर देखते हुए
कुछ सेकेंड बाद हल्की आवाज में कहता है
ठीक है मैं कुछ देर में आता हूं
और वहीं कुछ देर बाद
दूसरी तरफ वैदेही
एक रिक्शा पर बैठते हुए
अस्पताल आ रही है
उसके चेहरा खामोश है
और वह दोनों हाथों से अपनी
पर्स को पड़ी हुई है
सोच में डूबते हुए
उसकी नजर आगे की तरफ है
अगर यह कहानी आपको अच्छी लगे तो
आगे पढ़ते रहिए
मिलते हैं नेक्स्ट एपिसोड में
मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा 🦋❤️💯