The Mistryriyas Krin - 1 in Hindi Thriller by kanta books and stories PDF | द मिस्टीरियस क्वीन - Chapter 1 - भाग 1

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द मिस्टीरियस क्वीन - Chapter 1 - भाग 1

द मिस्टीरियस क्वीन (The Mysterious Queen)

अध्याय 1: अनाथ आश्रम की रहस्यमयी लड़की

भाग 1

शहर की चकाचौंध से दूर, पुराने पहाड़ों के बीच एक छोटा सा अनाथ आश्रम था — "नई उम्मीद आश्रम"।

यह आश्रम बाहर से साधारण दिखाई देता था, लेकिन इसके अंदर एक ऐसा रहस्य छुपा था, जिसका सच आने वाले समय में पूरी दुनिया को हिला देने वाला था।

बारिश की एक अंधेरी रात थी। आसमान में बिजली चमक रही थी और तेज हवाएं चल रही थीं। उसी रात आश्रम के दरवाजे पर एक छोटी बच्ची मिली थी। उसके पास सिर्फ एक पुराना लॉकेट था, जिस पर एक अजीब सा निशान बना हुआ था।

आश्रम की संचालिका माधवी माँ ने उस बच्ची को अपनी गोद में उठाया और कहा—

"जिसे दुनिया ने छोड़ दिया है, उसे हम अपनाएंगे।"

उस बच्ची का नाम रखा गया — आरुषि।

लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह छोटी सी बच्ची एक बहुत बड़े परिवार के खून से जुड़ी हुई है।


---

समय बीत गया।

20 साल बाद...

नई उम्मीद आश्रम अब पहले जैसा नहीं था। वहां रहने वाली लड़कियों में एक लड़की सबसे अलग थी।

वह थी — आरुषि।

लंबे काले बाल, शांत आंखें और चेहरे पर हमेशा एक गंभीर भाव। वह कम बोलती थी, लेकिन उसकी आंखें हर चीज को बहुत ध्यान से देखती थीं।

आश्रम की बाकी लड़कियां उसे पसंद करती थीं, लेकिन कोई भी उसके बारे में ज्यादा नहीं जानता था।

क्योंकि आरुषि ने अपने आसपास एक अदृश्य दीवार बना रखी थी।

माधवी माँ अक्सर उससे कहतीं—

"आरुषि बेटा, तुम बाकी बच्चों जैसी नहीं हो। तुम्हारी आंखों में हमेशा कोई छुपा हुआ सवाल दिखाई देता है।"

आरुषि हल्की मुस्कान के साथ जवाब देती—

"शायद कुछ सवालों के जवाब समय आने पर ही मिलते हैं, माँ।"

लेकिन उसके मन में हमेशा एक सवाल रहता था—

"मैं कौन हूं?"


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रात के समय आश्रम की छत पर बैठी आरुषि आसमान को देख रही थी।

उसके हाथ में वही पुराना लॉकेट था, जो उसे बचपन में मिला था।

वह धीरे से बोली—

"20 साल हो गए... फिर भी इस लॉकेट का रहस्य नहीं खुला। आखिर मेरा अतीत क्या है?"

तभी उसके फोन पर एक अज्ञात संदेश आया।

स्क्रीन पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी—

"तुम्हें लगता है तुम अनाथ हो? लेकिन तुम्हारा खून एक ऐसे परिवार से जुड़ा है, जिसका नाम सुनकर लोग डरते हैं।"

आरुषि की आंखें सिकुड़ गईं।

वह तुरंत सतर्क हो गई।

"कौन है?"

कुछ सेकंड बाद दूसरा संदेश आया—

"अपने अतीत को जानना है तो कल रात पुराने शहर के ब्लैक ब्रिज पर आना। अकेले।"

आरुषि ने फोन बंद किया।

उसके चेहरे पर डर नहीं था, बल्कि एक अजीब सी शांति थी।

क्योंकि वह जानती थी—

कोई उसके अतीत का दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहा है।


---

दूसरी तरफ शहर के सबसे ऊंचे टावर में...

एक आदमी शीशे की खिड़की के पास खड़ा था।

काला सूट, शांत चेहरा और आंखों में गहराई।

वह था — आरव राठौर।

शहर के सबसे बड़े बिजनेस साम्राज्य का मालिक।

लोग उसे एक सफल व्यापारी मानते थे, लेकिन उसकी असली जिंदगी कई रहस्यों से भरी थी।

उसका सहायक कमरे में आया।

"सर, वह लड़की मिल गई है।"

आरव ने धीरे से पूछा—

"यकीन है?"

"जी सर। उसका नाम आरुषि है। वही लड़की, जिसे 20 साल पहले आश्रम में छोड़ा गया था।"

आरव कुछ पल चुप रहा।

उसकी आंखों में पहली बार कोई भावना दिखाई दी।

"तो आखिरकार... वह वापस आ गई।"

सहायक हैरान होकर बोला—

"सर, क्या आप उसे पहले से जानते हैं?"

आरव ने कोई जवाब नहीं दिया।

क्योंकि आरुषि से जुड़ा एक ऐसा राज था, जिसे वह दुनिया से छुपा रहा था।


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अगली रात...

पुराने शहर का ब्लैक ब्रिज सुनसान था।

आरुषि वहां पहुंची।

उसने चारों तरफ नजर दौड़ाई।

"जिसने मुझे बुलाया है, सामने आओ।"

कुछ पल तक सिर्फ हवा की आवाज आई।

फिर पीछे से एक आवाज आई—

"तुम हमेशा से इतनी सतर्क थी या हालात ने तुम्हें ऐसा बना दिया?"

आरुषि तुरंत पीछे मुड़ी।

वहां एक आदमी खड़ा था।

काले कपड़े, आत्मविश्वास से भरी चाल और रहस्यमयी मुस्कान।

यह आरव राठौर था।

दोनों की पहली मुलाकात हो चुकी थी।

लेकिन दोनों में से कोई नहीं जानता था कि यह मुलाकात उनकी पूरी जिंदगी बदलने वाली है।

आरव ने आरुषि के हाथ में मौजूद लॉकेट को देखा।

उसकी आंखों में एक पल के लिए हैरानी आई।

आरुषि ने उसे देख लिया।

"तुम इस लॉकेट को जानते हो?"

आरव कुछ बोलने ही वाला था...

तभी दूर से एक गाड़ी की आवाज आई।

दोनों ने एक साथ उस तरफ देखा।

किसी तीसरे इंसान को भी आरुषि के अतीत की तलाश थी।

और वह इंसान नहीं चाहता था कि आरुषि सच तक पहुंचे।

(अध्याय 1 जारी रहेगा... भाग 2 में आरुषि और आरव के सामने आएगा पहला बड़ा रहस्य।)