माई डियर प्रोफेसर in Hindi Love Stories by Vartika reena books and stories PDF | माई डियर प्रोफेसर - भाग 31

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माई डियर प्रोफेसर - भाग 31

















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चारू भोचक्की सी खडी थी। उसके सामने अमर खडा था जो इस समय गुस्से से लाल हो गया था। 

अमर आगे बडा और हर एक शब्द चबाते हुए बोला, " फालतू कामो मे ध्यान लगाना बंद करो चारू। मेरे पास बकवास चीजो के लिए समय नही। मेरे कुछ गोल्स है, एम्बिशन है। बर्बाद करने के लिए समय नही.मेरे पास। "

उसने गहरी सांस भर खुद को शांत करने की कोशिश करी ।
" खेर तुम नही समझोगी। "


चारू अमर का मुंह तकती रह गई।  उसने रिएक्शन की उम्मीद करी थी। डांट की उम्मीद करी थी। मगर ये..ये.अपमान ! इसकी उसे उम्मीद नही.थी।

चारू की आंखे नम हो गई।  उसके मुंह से.बोल नही.फुटे । चारू ने अमर की बात पर सर हिलाया और...चली.गई। 

प्यार करना गलत है ? क्या मै प्यार करती हूं तो मेरे कोई सपने नही हो.सकते। या जिनके कुछ ऐम होते है वो प्यार नही करते । हां..मै अमर को रिझाने के लिए सजती सवंरती हूं ! हां..मुझे नही आता समझदारी के चोले मे मन छुपाना। कैसे..कैसै वो कह सकते है मै नही समझ सकती । मेरी भी गोल्स है., ऐमस् है। पर इसका मतलब ये नही मुझे प्यार करने का अधिकार नही। 

इतना तिरस्कार...वो सहन नही कर पा रही थी। स्कूटी चलाते हुए चारू की आंखे धुंधला गई।  


वो हॉस्टल पहुंची । अपने डोर्म मे जाकर बैग एक तरफ फेंका और खुद बिस्तर मे.चेहरा छुपा रो पडी । 

उसने खिडकी से बाहर देखा । सूर्यास्त हो रहा था। जैसे सूर्य अस्त हो रहा था चारू की मासूमियत भी अस्त हो रही थी। ठेस पहुंच चुकी थी। दिल पर चोट लग चुकी थी । 



" अब कभी उनकी तरफ देखेंगे भी नही। नही करना आपसे प्रेम। वादा है खुदसे एक दिन आपसे बहतर बनकर दिखाएंगे।  और ये दिल जो हर धडकन मे केवल आपका नाम लेता था अमर..वो अब किसी के लिए नही तडपेगा। " , चारू सिसक उठी। 



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एक महीना बाद 

कल्चरल प्रोग्राम शुरू हो चुका था। फोर्थ इयर का फर्स्ट सेमेस्टर खत्म हो गया था। और सब सब बच्चे कल्चरल प्रोग्राम के खत्म होने के बाद छुट्टियो मे अपने घर जाने वाले थे। 

चारू हडबडाई सी थिएटर क्लब के रूम मे इधर से उधर भाग रही थी। शशांक ने आर्मी युनिफोर्म पहनी थी। वो मिरर के सामने खडा खुद को निहार रहा था। उसने वर्दी पर हाथ फेरा। शशांक की आंखो मे चाहत तडप उठी।

" आई विल बी ओनर बाई वियरिंग रियल युनिफोर्म वन डे। अभी के लिए प्ले मे ही आर्मी ऑफिसर बनने का सुख ले लूं। ", शशांक ने दृढता से खुद से कहा।.

तभी उसकी बगल मे नव्या आकर खडी हो गई । उसने लाल अनारकली सूट पहना था। नकली चोटी उसके बालो मे जोड एक लंबी चोटी कर ली थी। चेहरे पर हल्का सा मेक अप जो उसके नेचुरल फीचर्स को निखार.रहा था। 

उसने कान मे बडे झुमके पहने थे। कंधे पर एक भारी दुपट्टा । दुपट्टे पर सुनहरी तारो से गरूड बना था । बोर्डर पर सुनहरा गोटा लगा दा। अनारकली कुर्ते के घेर पर छोटे छोटे मोती लगे थे। उसने पैरो मे घुँघरू और पहन रखे थे। 

शशांक ने एक नजर नव्या को मिरर से देखा और देखता ही रह गया। उसकी धडकने रफ्तार पकडने लगी थी। कान लाल पड गए थे। 

" नव्या ! ", वो हल्की आवाज मे बोला। 

नव्या ने शीशे मे ही शशांक के प्रतिबिंब को देखा। शशांक कुछ नही बोल पाया। वो नव्या की तरफ मुडा और उसे क्धो से थाम खुद ओर मोड दिया। 

" नव्या..क्या गले लगा सकता हूं तुम्हे ? ", शशांक ने उहकी आंखो मे झांककर सवाल किया। 

नव्या अपलक शशांक को निहारती रही। इस एक महीने मे दोने करीब आए थे मन से। पर दिल के एक कोने मे अशांति , झिझक अब भी विराजमान थी। वो.समझ नही पाती थी की क्यो शशांक का आस पास होना उसे इतना आंदोलित कर देता है। क्यो वो उसके ख्यालो मे खोए रहती है। क्यो वो शशांक के लिए तड़पती है। 

नव्या ने ना मे सर हिला दिया तो शशांक ने गहरी सांस खिंची । उसने एक कदम पीछे ले लिया।

" एक दिन पुरे अधिकार के साथ तुम्हे सीने हे लगाउंगा। तुम.खुद गले लगोगी। " शशांक ने हल्की मुस्कान के साथ कहा तो नव्या हडबडा गई । 

वो जल्दी से दूसरी तरफ भाग गई।  शशांक हँस पडा । 


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चारू स्क्रिप्ट पढ रही थी। साथ ही सबको निर्देश दे रही थी कि क्या करना है क्या नही। 

" नव्या ,शशांक अब हमारी बारी है। तैयार हो जाओ। ", चारू ने तेज आवाज मे कहा।

नव्या कुर्सी पर बैठ कर घुँघरू ठीक कर रही थी..उसने आंखे गोल घुमा दी। 

तभी उसके हाथ से घुँघरू छूट गए।  वो जमीन पर गिरते की एक हाथ आया और उसने घुँघरू पकड लिए।  शशांक एक घुटने के बल नव्या के सामने बैठ गया।

" मे आई? ", शशांक ने सवाल किया। 

नव्या ने हां मे सर हिला दिया। शशांक ने नव्या के पांव अपने घुटने पर रखा और उसे घुँघरू पहनाने लगा। नव्या के आलता लगे पैर जो अब घुँघरू से सज चुके थे बहुत सुंदर लग रहे थे। 

शशांक का दिल किया की बस वो नव्या के पैरो को निहारता रहे । तभी नव्या ने पांव पीछे खींच लिया। शशांक होश.मे आया। 
उसने सर उठाकर नव्या को देखा।

" चलो ! प्ले शुरू करना है। हमारी बारी है। "


कहकर नव्या उठकर चली गई।  शशांक ने अपने सीने पर हाथ रखा और आंखे बंद कर ली। 


मेरी साधना ..अपने साधक पर दया कर । और स्वंय को साधने का अधिकार दे। 




क्रमशः