My Dear Professor - Part 33 in Hindi Love Stories by Vartika reena books and stories PDF | माई डियर प्रोफेसर - भाग 33

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माई डियर प्रोफेसर - भाग 33





















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प्ले खत्म होते ही नव्या और शशांक बैक स्टेज आ गए।  उनके आते ही चारू दोनो को गले से लगा ली। 


" इट वाज फैब! यू बोथ डिड अमेजिंग। ", चारू खुशी से उच्छलते हुए बोली। 


नव्या हांफते हुए मुस्कुरा दी और शशांक हँस दिया। 


" कॉग्रेंस गाइज।  " नैना वहा आती हुई बोली। उसके चेहरे पर बढी सी मुस्कान थी । उसके पीछे पीछे अमोघ एक मैडल और एक चैक लिए आ रहा था। 



नैना को देखते ही चारू कूदतु हुए उसकु पास पहुंच गई।  


" नैना...देख प्ले इतना अच्छा हुआ।  सब नवया और शश्क की महनत का कमाल है। " , चारू बोली।


" तुम्हारी स्टोरी और निर्देश का रिजल्ट है ये। हमे थोडी पता था क्या करना है क्या नही। तुमने सब सिखाया है । ", नव्या चारू को क्रेडिट देती बोली।


" सही मे ! चिढको माई बन गई थी ये । पूरा एक महिना क्लेश मचा रखा था इसने । शशांक..ऐसे एक्ट कर , नव्या ऐसे भाव दिखा । ये वो , अब शांती मिलेगी। " शशांक एक जगह बैठ गया मानो चारू के अत्याचार से थक गया हो।


चारू ने घूरकर उसे देखा। वो उसे मारने को आगे बडी ही थी कि शशांक जाकर नव्या के पीछे खडा हो गया। 


चारू ने मुंह बना लिया। सब हँस दिए। 

तभी चारू की नजर अमोघ के हाथ मे लटके मैडल पर गई। 


" ये ? ", चकरू उत्सुकता से मैडल की तरफ इशारा.कर.दी।


नैना मुस्कुरा दी। 


वहा.अमोघ.गर्व से.बोला, " नैना ने डिबेट जीत लिया । वी वोन फ्रोम राइवल युनिवर्सिटी । " 


नव्या.की आंखे बडी हो गई।  वही.शशांक आगे आ गया।


" रियली ! ", वो अविश्वास से.बोला।


जवाब मे.अमोघ ने अपने हाथ मे पकडा चैक लहरा दिया।


" यू गोट द प्राइज मनी टू। कॉग्रेंचुलेशन नैना! ", नव्या खुशी से बौली।


नैना ने हां मे.सर हिला दिया। 


" नोओ अमोघ यू डोंट हैव टू पे फोर माई ट्रीटमेंट। दिस मनी इज इनफ । और तुम्हारा जितना खर्च हुआ है वो..डिडक्ट कर लो । " नव्या झिझक के साथ बोली।


अमोघ ने आंखे सिकोड़कर उसे देखा । 


" तुम क्या राजवंशीज को गरीब समझती हो ? ", रानी अमृत राजवंशी वहा आती हुई बोली।


नव्या., शशांक , चारू , अमोघ और.नैना , सबने एक साद सम्मान मु.सर झुका लिया। 

अमृत जी मुह्कुरा दी।


" तुम.बच्चो को नॉर्मस फॉलो करने की आवश्यकता नही। अभ किया अपने बच्चो के लिए भी मां ना बन सकी तो लानत है। ", अमृत जी अंत मे हँस दी।


चारू थोडी कसमसा गई।  बाकि सब का तो समझ आता था। पर वो..वो.कब रानी सा.के करीबी लोग मे शामिल.हुई। उसने एक बार फिर सर झुका लिया।


रानी अमृत नु ना मे.सर हिला दिया। वो.समझती थी चारू की हिचक । लेकिन इस समय कुछ बाते साफ करना जरूरी थी पहले । वो नैना की तरफ मुड गई। 


" हां तो नैना ! क्या दिक्कत है अमोघ के तुम्हारे ट्रीटमेंट पर खर्च करने से ? "


नैना शांती से बोली," दिक्कत कुछ नही है। लेकिन मै हमेशा.ही.आत्मनिर्भर रही हूं। मुझे आपलोग से पैसे लेना ठीक नही लगता । "


अमृत जी ने हां मे सर हिला दिया। उनकी आंखो मे गर्व और सम्मान से भरी चमक आ गई। 


" स्वाभिमानी हो ! ", वो प्रभावित होकर बोली। " लेकिन तुम्हे पैसे के लिए परेशान होने की जरूरत नही। बच्ची हो अभी तुम। " 


" नही रानी सा ! " 


अमृत जी एक दम से सख्त आवाज मे बोली , " तुम.मेघराज की महारानी को मना कर.रही हो लडकी । "


नैना एकदम से.चुप पड गई।  उसने अमोघ की तरफ देख तो उसने कंधे उचका दिए। 


थक हार कर नैना ने हां मे हर हिला दिया। 




थोडी देर बाद सब ऑडियंस मे बैठे अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे। इसी प्रोग्राम मे टॉप एकेडमिक परफॉर्मेंस स्टुडेंट के नाम अनाउंस होने थे। सब ध्यान से बैठे थे। तभी एंकर आया और उसने टॉप फाइव नेम बताने शुरू कर दिए। 


पहले फर्स्ट सेमेस्टर के नेम्स अनाउंस हुए।  फिर सेकेंड दैन थर्ड । थर्ड ईयर मे टॉप स्टुडेंट के रूप मे अमोघ का नाम अनाउंस हुआ। 


पुरी जगह तालियो की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अमोघ उठकर अपना ऑवर्ड लेने चला गया।


अब फोर्थ ईयर बी ए हिस्ट्री ओनर्स की बारी थी। 


एंकर , " वी हैव चारू श्रीवास्तव एज टॉप बेस्ट स्टुडेंट इन एकेडमिकस् दिस ईयर । " 


चारू खडी हो गई। वो अपना ऑवर्ड लेने के लिए  स्टेज पर चली गई।  इस पूरे समय उसे एहसास हुआ की एक जोडी आंखे उसी पर टिकी है।


अमृत जी से पुरूस्कार लेती चारू के बदन मे.सिहरन दौड गई।  उसने आंखे घुमाकर इधर उधर देखा तो उसकी नजर अमर पर गई।  जो एकटक उसे निहार रहा था। 


चारू को लगा मानो उहका दिल बाहर आ जाएगा। अमर की निगाहो की तपिश वो अपने गर्म होते गालो मे महसूस कर सकती थी। उसका दिल जोरो से धडक उठा। 

तभी उसके दिमाग मे अमर के शब्द कौंध गए ' खैर..तुम नही समझोगी' 


चारू की आंखे नम पड गई और उसने मुंह फेर लिया।


उसे निहारता अमर थोडा कसमसा गया। ना जाने क्यो उसे पसंद नही आया था चारू का यू उससे मुंह मोड लेना। इस पुरे एक महीने मे चारू ने उससे ठीक से बात तक नही करी थी। घर पर भी बस पढाई करती और कोई इधर उधर की हरकते नही जो वो फैले करती थी। 


उसे भाने लगा था चारू का बचपना । 





क्रमशः 



इस भाग मे इतना ही । कमेंट कर दो यार !