Tom is alive - 21 in Hindi Thriller by Neeraj Sharma books and stories PDF | टाम ज़िंदा हैं - 21

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टाम ज़िंदा हैं - 21

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                                       टूटे हुए तारे कितने आकाश मे जा चुके होंगे जमी पर, पर आकाश को कोई फर्क नहीं पड़ता। महताब चमकते चमकते कब बादल आ जाये उसको भी कोई फर्क नहीं पड़ता। बस एक फर्क पड़ता है मुफलिस इंसान को..... जो मिला छीन गया, मुकदर का। 

चाचा मंजूर साहब एक लम्बी सड़क से चलते जा रहे थे। पर चुप। एक दम चुप। कौन कहता है कोई बोले बिना उसके इशारे से इधर उधर हो जाये.... आखिर कौन था मंजूर??

पुलिस डिपार्टमेंट का एक लम्मी दौड़ वाला घोड़ा। जो बम्बे मे S. S. P था। गरीबो की गुहार का मसीहा, अमीरों संगलरों का कफ़न। उम्र बहुत त्जर्बे देती है... बस सीखो, सीखते रहो। जोर, जुल्म और बद चलन औरतों की बद नीति कया कया नहीं सीखा देती... उम्र मे कौन कहते हो तुम अकेले हो। वहम है कोई भी यहां पर अकेला नहीं है। परछावा साथ होता है न.....इस लिए तुम अकेले कैसे।

मंजूर सहाब बैंक की चौखट से परे बैठे थे कोई एक घंटे से। मुश्किल से घंटा भी कम होगा पोलिस उठाने आ गयी... ऊपर वाला जानता है ज़ब किसी का पर्दा खुलना है। वो उच्ची से बोला आज "इका "खुल जायेगा!! कुछ जानते थे कि ये खबर है कि बैंक मे अपराध होगा... जानी डकैती।" चल... पुलिस बोखलाट मे यहां कया कर रहा है, चल थाने... " बैठ गया थाने जाने को ----" पता है तुम यहां भी जाते हो वो चीज गायब हो जाती है। " मंजूर साहब बोले ---" करे कोई भरे कोई... हाहाहा " मंजूर हसा!! खबर और किसी की कब्र कब खुदे अपुन को पता है.... " तभी पुलिस स्टेशन मे एक दम सनाटा था... सब चुप एक दम चुप। " जानते हो किसे ले आये हो... " रेहा हो रहे विक्रम जीत "गेंगवार ने कहा वो भी बहुत उच्ची। भवानी ने उसे सलूट आदर्श आदमी की तरा किया।" सर आप जहाँ इस वक़्त " सबकी तरफ कोड़ी निगाह से देखा। मंजूर साहब को चेयर पर बिठा दिया। " सब ने सोरी मांगी " 

भवानी ने कहा " सर आप शवर ले, नए सिवल कपड़े पहने। 

"---भवानी एकटिंग कैसी लगी.. और जिस बैंक मेंजर का फोन था, वही रात को चोरी बड़ी होंगी... मेरी बात धयान से सुनो... इस बैंक मे आज शाम तक अमरीश और बलवत की दोनों बेटियां पहले बोचर भरने आएगी...." भवानी ने बीच मे स्वर काट कर बोला, " सर बलवत की बेटी है... पर आपको ये अंदाजे कैसे होते है। " पहले तो जोर से हसा मंजूर..... फिर एक टक भवानी और देखा ----" मेरी बात काटने का जुर्माना बहुत खतरनाक होता है... भावनी सिंह।" फिर रुक कर " पहली दफा सब माफ होता है। " भवानी ने कहा " थैंक्स सर... "  एक बात और सुनो... " दोनों को बाहर के गुंडो से बेटियां किडनेप करो.... मुझे जेल मे रखो और खबर अख़बार मे लगा दो.... हाँ दो आदमी मेरे है,एक डेन दूसरा जैक.... वो तुम्हे चौक की हरी "बिल्डिंग स्ट्राइक विजन " के पास मिलेंगे.... ये काम होशयारी से काम करना। किसी को पता नहीं चलना चाहिए.... " अब मुझे जेल मे रखो और पेज पर फोटो चिपका दो... अख़बार मे। " 👎

नीरज शर्मा 

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