Hateful Love - 1 in Hindi Love Stories by princi Saini books and stories PDF | नफरत वाला इश्क - 1

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नफरत वाला इश्क - 1

             Ep-1 दो दुनिया एक किस्मत

दिल्ली.

सुबह के ठीक आठ बजे.
सर, नौ बजे लंदन बोर्ड के साथ आपकी Meeting है. ग्यारह बजे दुबई project की फाइल Sign करनी है. और शाम को सिंगापुर से वीडियो कॉन्फ्रेंस भी है.
एक के बाद एक मीटिंग्स की जानकारी देते हुए रोहन मेहता, आर्यन के पर्सनल असिस्टेंट, तेजी से उसके पीछे चल रहे थे.
लेकिन जिस शख्स के लिए ये सब कहा जा रहा था, उसके चेहरे पर जरा भी घबराहट नहीं थी.
करीब छह फुट दो इंच लंबा, दमदार पर्सनैलिटी, आत्मविश्वास से भरी चाल, तीखी नजरें और ऐसा रौब कि उसके सामने बडे- बडे बिजनेसमैन भी अपनी आवाज धीमी कर लेते थे.
आर्यन सिंघानिया.
उम्र छब्बीस साल.
सिंघानिया ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज का मालिक.
भारत ही नहीं, बल्कि कई देशों में फैला हुआ उसका अरबों का बिजनेस था.
उसके एक फैसले से शेयर मार्केट तक हिल जाया करता था.
ऑफिस के हर कर्मचारी की नजर सम्मान से झुक जाती थी.
Good मॉर्निंग, सर.
Good मॉर्निंग, Mister सिंघानिया.
हर तरफ बस उसी का नाम और उसी का रुतबा था.
आर्यन ने बिना किसी की तरफ देखे अपनी केबिन का दरवाजा खोला.
केबिन के अंदर पहले से एक शख्स बैठा उसका इंतजार कर रहा था.
आ गए बेटा.
आर्यन के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई.
चाचा जी. आप कब आए?
महेंद्र सिंघानिया (बावन वर्ष)
(आर्यन के सगे चाचा और स्वर्गीय राजवीर सिंघानिया के छोटे भाई. लगभग छह फुट लंबा कद, गेहुँआ रंग, हल्की सफेद होती दाढी, घने बाल और गहरी, शांत आँखें. अक्सर सफेद कुर्ता- पायजामा या हल्के रंग का बंदगला सूट पहनते थे. चेहरे पर हमेशा स्नेहभरी मुस्कान रहती थी और बात करने का अंदाज इतना अपनापन भरा था कि हर कोई उन पर आँख बंद करके भरोसा कर ले. परिवार के लिए वे एक आदर्श इंसान थे, और आर्यन उन्हें अपने पिता के समान सम्मान देता था। )
अभी कुछ देर पहले. सोचा अपने बेटे से मिले बिना चला जाऊँ, ये कैसे हो सकता है?
आर्यन ने बिना सोचे उनके पैर छुए.
चाचा ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा.
भगवान तुम्हें हमेशा खुश रखे, बेटा. तुम्हारे पापा को तुम पर बहुत गर्व होता.
आर्यन की आँखों में अपने पिता की याद उतर आई.
जो कुछ भी हूँ. आप सबके आशीर्वाद की वजह से हूँ, चाचा जी.
चाचा मुस्कुरा दिए.
चलो, अब काम पर ध्यान दो. शाम को जल्दी घर आना. सब तुम्हारा इंतजार करेंगे.
जी, चाचा जी.
दूसरी तरफ.
देहरादून के एक छोटे से मोहल्ले में.
सिया. बेटा जल्दी नीचे आ! Collage के लिए देर हो जाएगी.
रसोई से माँ की आवाज आई.
सुमन शर्मा (पैंतालीस वर्ष)
(सिया की माँ. हल्के रंग की सूती साडी, चेहरे पर सादगी और आँखों में ममता. वह एक गृहिणी थीं और अपने छोटे- से परिवार की खुशियों में ही अपनी दुनिया देखती थीं. सिया के लिए वह सिर्फ माँ ही नहीं, उसकी सबसे अच्छी दोस्त भी थीं. ).
बस माँ. दो मिनट!
कमरे का दरवाजा खुला.
सफेद कॉटन का सूट, कंधे पर बैग, बिना मेकअप का मासूम चेहरा, बडी- बडी आँखें और होंठों पर हल्की- सी मुस्कान.
सिया शर्मा.
उम्र बीस साल.
एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार की बेटी.
बी. ए. के दूसरे वर्ष की छात्रा.
इतनी खूबसूरत कि लोग मुडकर उसे देखे बिना न रह सकें.
लेकिन उसे अपनी खूबसूरती पर कभी घमंड नहीं था.
वह जितनी सुंदर थी.
उससे कहीं ज्यादा सुंदर उसका दिल था.
नीचे आते ही उसने सबसे पहले अपने पापा के पैर छुए.
रमेश शर्मा (अड़तालीस वर्ष)
(सिया के पिता. मध्यम कद, सादा पहनावा, चेहरे पर ईमानदारी और आत्मसम्मान साफ झलकता था. वह एक सरकारी स्कूल में शिक्षक थे और अपनी मेहनत व सच्चाई से परिवार का पालन- पोषण करते थे. उनकी दुनिया उनके बच्चे थे, और सिया उनकी आँखों का तारा थी। ).
जीते रहो, मेरी गुडिया.
उसकी माँ मुस्कुराते हुए बोलीं, पहले नाश्ता कर लो. खाली पेट Collage मत जाया करो.
माँ. आज टेस्ट है. देर हो जाएगी.
दो मिनट में दुनिया नहीं बदल जाएगी. पहले खाना.
सिया हँस पडी.
घर छोटा था.
लेकिन उस घर में प्यार बहुत बडा था.
उसे नहीं पता था.
कि आने वाले दिनों में उसकी जिंदगी एक ऐसे मोड पर पहुँचने वाली है.
जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी.
एक शहर.
जहाँ दौलत की कोई कमी नहीं थी.
दूसरा शहर.
जहाँ प्यार सबसे बडी दौलत था.
दो अलग दुनिया.
दो अलग जिंदगियाँ.
और किस्मत.
जो बहुत जल्द इन्हें एक ऐसे मोड पर मिलाने वाली थी.
जहाँ से उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाएगी.


Guys first time story likh rhi hu koi bhi galti hui ho to i am really sorry
Jo aap sbko accha lage jo galat Lage wo sb aap comment box mei jrur btana
Thanku so much.