dreams are very precious in Hindi Fiction Stories by miss k books and stories PDF | कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 5

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कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 5

अगले भाग में हमने देखा कि कैसे कजरी अपनी बेटी को बचाने की कोशिश कर रही है। अब आगे जब सभी गांव वाले दोनों मां बेटी को ढूंढने लगे । कहते हैं ना जब भाग्य खेल खेलता है तो किसी की नहीं चलती। कजरी और उसकी बेटी दोनों आखिरी में पकड़े ही गए। 
इन सब घटनाओं के बाद मोहनलाल बहुत गुस्से में था की कही इन मां बेटी को मार ही न डालें पर उसके दोस्तो और सब गांव वालों की बात मानकर वह शांत हो गया और सब लोग शादी करवाने के लिए दृष्टि को घर ले
 गये । अब तो कुछ नहीं हो सकता था क्योंकि कजरी मोहनलाल ने कमरे में बंद कर दिया था। आखिर जबरदस्ती शादी तो हो गई और सभी गांव वालों ने दृष्टि को विदा भी कर दिया। अभी तक कजरी वही कमरे में बंद ही थी । मोहनलाल इतने गुस्से में था की वो क्या करेगा कजरी के साथ किसी को पता नहीं था। अब तो कजरी की जिंदगी पहले से भी बत्तर होने वाली थी। थोड़े दिनों में दृष्टि की शादी के कारण वह उससे अच्छा बर्ताव करने लगा था पर क्या करेगा पर क्या अब फिर से दोनों मां बेटी की जिंदगी बत से बत्तर हो जाएगी।
दुसरी ओर कजरी अपने ससुराल पहुंच गई है। उसके लिए अभी सबकुछ नया था और उसे समझने वाला कोई नहीं था। उसका पति भी जबरदस्ती शादी करने के लिए मजबूर था पर वो उससे बात नहीं करता था । पर दृष्टि को इन सब का जिम्मेदार मानता था । 
ससुराल में दृष्टि की सांस रोज उसे ताने मारती और पुरे दिन उससे काम करवाती । उसके पास ये सबकुछ करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। अब तो उसने इन सब को अपनी किस्मत मान लिया था ।
उसका पति पुरे दिन बाहर ही रहता था इसलिए उसे इस बारे में कुछ भी पता नहीं था। भले ही दिपक उससे बात नहीं करता था पर वो एक पढ़ा लिखा और उसके आदर्शों को मानने वाला लड़का था। अब तो दृष्टि को काम करते दो तीन माह हो ही गए थे पर अब तक कुछ भी नहीं बदला था ।
एक दिन
दृष्टि की सांस ने उससे पूरे दिन काम कराया पुरे दिन काम करने के बाद भी उसे एक वक्त का खाना भी 
नसीब नहीं हुआ। पुरा दिन काम करने के और उपर खाना भी नहीं खाया था तो उसकी तबियत बिगड़ गई पर किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता था कि उसे क्या हुआ है। दो तीन दिन तक ऐसे ही काम करने की वजह वो काफी कमजोर हो गई थी। इस के कारण वह बेहोश हो गई अस्पताल जाने के बाद डॉक्टर ने बताया कि खाना सही से न खाने वजह वह कमजोर हो गई है। दिपक को मालुम था कि उसके घर वाले पुराने खयालात के है । 
दुसरी तरफ कजरी का भी यही हाल था मोहन रोज उसे मारता - पीटता और उसके साथ जबरदस्ती करता । पुरे दिन वह उसे खेत और घर दोनो का काम करवाता फिर रात को भी उसे सोने नहीं देता ।
क्या होगा आगे अब मां बेटी के साथ क्या दोनों की जिंदगी में खुशियां आ पाएगी ? क्या वे एक-दूसरे से मिल पाएगी कब होगा इनके दुःखोंका अंत ?