मोहनलाल के मित्रों ने कुछ दिन का समय मांगा था। तो फिर कुछ दिन सभी मित्र निर्धारित समय और स्थान पर जमा हुए।
दुसरी तरफ मोहनलाल के मित्रों ने बहुत सोचने के बाद ये सुझाव दिया की या तो उसकी शादी करवा दिजिए या फिर नाता कर दिजिए ऐसे आपको पैसे भी मिल जाएगे और आपकी मुश्किल भी हल हो जाएगी।
अब घर आ कर वो यही सोच रहा था कि कोई ऐसा लड़का ढूंढा जाए जो उसी की तरह उसे घर में बांधे रखे । मोहनलाल ने लड़के की तलाश शुरू कर दी। बहुत सारे लड़के देखने के बाद कई दिनों के बाद उन्हें एक लड़का उनकी इच्छा के अनुरूप मिला। उनका परिवार भी रूढ़ीवादी विचारों को बढ़ावा देता था।
दुसरी तरफ कजरी भी यही चिंता में थी कि कहीं उसकी बेटी की जिंदगी भी उसी की तरह ना हो जाए। उसने तो कैसे भी ये सबकुछ सह लिया पर वो अपनी बेटी को ये सब कुछ नहीं सहने देना चाहती इसलिए उसे किसी भी तरह अपनी बेटी को इस दलदल से बाहर निकलना ही था।
मोहनलाल ने लड़के का परिवार और घर-बार की जानकारी ले ली थी । लड़का बाहर से पढ़ लिख कर आया था और उसे गांव की लड़कियां बिल्कुल भी पसंद नहीं थी पर मां बाप की जींद की वजह से शादी के लिए मजबूरी में हां करनी पड़ी ।
कहते हैं ना जब जीवन में आफत आती है तो चारों तरफ़ से आती है। अब दृष्टि जो की एक गांव के कुरिवाजो में पली बड़ी सपनों की उड़ान लिए क्या शादी कर पाएगी ।
अब कुछ ही दिनों में शादी की रस्मे शुरू होने वाली थी। कजरी यही सोच रही थी कैसे दृष्टि को यहां से भगाऊ पर करें भी तो क्या इस पुरुष प्रधान समाज में स्त्री कहा अपने लिए कुछ कर सकती हैं।
बहुत दिन बीत गए अब शादी का दिन आने ही वाला था। कजरी ने ये सोचा की शादी में बहुत सारे लोगों के बीच में बहार निकालना मुश्किल होगा इसलिए एक दिन पहले की रात को कुछ भी कर के दोनों को यहां से भागना ही पड़ेगा।
सब कुछ नक्की ही था पर मोहनलाल को इस का अंदेशा हो गया था कि कजरी कुछ न कुछ करके शादी में रुकावट पैदा करेगी इसलिए उसने शादी से पहले ही कजरी एक कमरे में बंद कर दिया। उसे लगा कि अब वो कुछ भी नहीं कर पाएगी पर आज कजरी को किसी भी तरह से अपनी बेटी को बचाना ही था ।
कुछ भी कर के वह कमरे से बाहर निकली और अभी शादी में थोडी देर बाकी थी । उसने किसी भी तरह दृष्टि को घर से बाहर तो निकाल लिया । उसे पता तो ही की सबको पता तो चल ही जाएगा।
बस वह गांव की सीमा तक पहुंच ने वाले थे की तभी उन्हे पता चला कि उनके पीछे गांव के लोग भी आ रहे है । ये तो गांव था यहां पर कोई बस कोई गाड़ी नहीं थी जाए भी तो कहा भाग भाग कर कितना ही भागेंगे ।
क्या होगा अब क्या वो इस पिंजरे से आजाद हो पाएंगे या फिर कैद हो जाएगे ? क्या दृष्टि की जिंदगी भी उसकी मां की तरह ही हो जाएगी ?
कौन देगा उसके सपनों को उड़ान ?