Your love has drowned me. - 2 in Hindi Classic Stories by Radha books and stories PDF | ले डूबा इश्क़ तेरा। - 2

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ले डूबा इश्क़ तेरा। - 2

आज मेरे कॉलेज का पहला दिन है। ओर मुझे देर हों गई तो में तो गई काम से। वैसे भी कोलेज कब की शुरू हो चुकी है, में ही लेट हू। दो दिन पहले जब कोलेज के मैनेजमेंट से फि के बारे में मेरी बात हुई तब उन्होंने कहा था की मेडम आप बीस दिन लेट है। एडमिशन कब के बंध हो चुके है। वो तो आपकी पढ़ाई मे रैंकिंग अच्छी है और आपको सरकार की ओर से स्कॉलरशिप मिली है, इसलिए आपका एडमिशन हो रहा है। पर में उन्हें थोडी ना बता सकती थी की मुझे किन हालातो का सामना करना पड़ा है पढ़ने के लिए। माहिरा हाथ में बेग लिए ये सारी सारी बातें सोच रही थी, सड़क की बाई ओर खड़ी होकर वह ऑटो रिक्शा का इंतजार कर रही थीं। 
            
            वह रिक्शा में बैठी और बोली" भैया थोड़ी तेज चलाइए ना। में आज पहले दिन लेट नहि हो सकती। वह इतने बड़े शहर में पहली बार आई थी। बाहर शहरी भागदौड़, ऊंची बिल्डिंग को देखने लगी। इतने में कोलेज आ गया। जल्दी से उतरकर पैसे देकर वह कोलेज में दाखिल हुई। वह दंग रह गई, चारों और नज़र घुमाकर उसने देखा वाकई ये बहुत बड़ा कोलेज है।  विद्यार्थियों से कोलेज भरा पड़ा था। बहुत बड़ा कोलेज था। बिल्डिंग के बाहर कोलेज कैंपस में ही लडके लडकियां टहल रहे थे।  वह किसी को इस कोलेज में नही जानती थी। पर माहिरा आत्मविश्वास से भरपूर थी। उसने लंबी सांस ली और खुद से कहा,      "माहिरा तुम अपने सपने को पूरा करने के एक कदम और नज़दीक आ गई। यहां तुम्हें सिर्फ पढ़ाई करनी है। मिस्टर बृजमोहन और उनके जैसे कई लोगो को दिखाना है की लड़किया ठान लें तो कुछ भी कर सकती है। वे रसोईघर में भी काम कर सकती है और बाहरी दुनिया में भी अपने कौशल से योगदान दे सकती है।" उसकी आंखों में पानी था। उसने चश्मा निकलकर आंखे साफ की ओर चश्मा पहनकर आगे बढ़ी। 
              
             कोलेज कैंपस बड़ा था। बीच में छोटी सड़क, सड़क की दोनो ओर गार्डन था। जहां कोई पढ़ाई, कोई बाते तो कोई खेल रहा था। सड़क जहां पूरी होती थी वहीं सीढ़िया थी जहां से होकर कोलेज की अंदर दाखिल होना था। सीढियों पर पांच, सात लडके लडकियां का ग्रुप बैठा हुआ था। जो नए आनेवाले विद्यार्थियों को रोककर उनका नाम, पता पूछ रहे थे। उनसे उल्टी सीधी हरकतें करवा रहे थे। देखा जाए तो ये एक प्रकार की रैगिंग चल रही थी। माहिरा ने ये सब नजरअंदाज किया। उसे वैसे भी लेट हो रहा था। वह जल्दी से सीढ़िया चढ़ने लगी तभी किसी लडकी ने उसके सामने हाथ रखकर कहां,

" इतनी भी क्या जल्दी है बहनजी, थोडी हमें आपकी खातिरदारी तो करने दीजिए।"

माहिरा: शांत होकर धीरे से बोली, " देखिए मुझे आपसे कोई मतलब नहीं है। में यहां पर सिर्फ पढ़ने आई हु, मुझे लेट हों रहा है मुझे जाने दीजिए।"

" रितु, राहुल, रोकी देखो तो इस बहनजी को पढ़ाई का भूत सवार है। (माहिरा ने सलवार, कमीज ओर डुप्टा रखा हुआ था। उसकी सादगी ही उसकी खूबसूरती थी। ये लोग खासकर रिया उसका पहनावा देखकर उसका मजाक उड़ा रहे थे।) देखो देखो इसे! सब हंसने लगे।" 

रोकी: ए लडकी चुपचाप लाइन में खड़ी हो जा" 

माहिरा: क्यों भला, आप ऑर्डर देने वाले होते कोन है? में आपकी गुलाम तो नही। 
वहा पर खड़े बाकी के लोग हंसने लगे। तभी एक लडका वहा आया। उसके हाथ में किताबे थी। उसने पुछा, "क्या चल रहा है यहां?"
माहिरा अभी भी सीढियों की और देख रही थी। बार बार अपनी घड़ी देख लेती थी। उसे बिलकुल फर्क नहीं पड़ रहा था कोन आया और कौन गया। उसका ध्यान इस ओर नही था।

राहुल: अभी अभी आए लड़के से कहते हुए, " देखना यार ये लड़की से हमने उसका नाम और पता पूछा पर ये बिना बताएं जा रही है। लडके ने राहुल को चुप रहने का इशारा किया वह सीढियों की और बढ़ा और माहिरा का दाया हाथ पकड़ा। किसी आवारे लडके ने पीछे से सिटी बजाई। माहिरा की आंखे चोड़ी हो गई। पहली बार किसी लड़के ने उसका हाथ पकड़ने की हिम्मत की थी। उसका खून खोल उठा। उसने अपने बाए हाथ की कसकर मुट्ठी बंद की। श्वास छोड़कर उसने मुट्ठी खोली और कसकर एक तमाचा उसका हाथ पकड़ने वाले लडके को मार दिया। 

क्रमश: