Nili Roshani - 6 in Hindi Science-Fiction by Sapna Badh books and stories PDF | नीली रोशनी - 6

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नीली रोशनी - 6

रोजी की चीखें बंद हो गई थी जिसका मतलब था कि नीली रोशनी नफीस ने उसका मुंह बंद कर 

लिया है लेकिन तभी हॉल में भगदड़ मच गई थी और दोनों हॉल से बाहर निकलकर गली की तरफ भागने लगे ।

रोजी उसके कंधे पर लदी हुई मचल रही थी।

कार तक वे लोग सही सलामत पहुंच गए राजन ने डाइविंग संभाली। नफीस रोजी को दबोचे कार कि पिछली सीट पर बैठ गया।

ईंजन चालू करके गति देता हुआ राजन बोला अगर रोजी चीखने चिल्लाने की कोशिश करे तो गोली मार दीजिएगा।

लेकिन पूरे रास्ते कोई घटना नहीं घटी सही सलामत नफसी की घर पहुंच गए रोजी के मुख से नफीस ने हाथ हटा लिया था।

और रोजी अभी तक बिल्कुल खामोश थी जैसे उन्हीं की साथी दार हो। वे तीनों अन्दर कमरे में आ ग‌ए जहां रोशनी हो रही थी।

नफीस धम से सोफे पर बैठ गया,वो बुरी तरह से हांफ रहा था। उसकी नकली दाढ़ी मूंछ एक तरफ से उखड़ गई थी।

रोजी उसे आश्चर्य भरी निगाहों से देख रही थी।

रोजी ! राजन बोला,बैठ जाओ! 

तुम मेरा नाम कैसे जानते हो ?

मैं बहुत कुछ जानता हूं,रोजी सोफे पर बैठ गई।

वह जीप तेजी से सड़क पर भागे जा रही थी जिसे एक गुन्डे टाइप के व्यक्ति चला रहा था।

फिर एक एक घर के सामने पहुंच कर उसे जीप रोक दी और नीचे उतरकर अंदर चला गया।

क्या हुआ ?

रोजी को कुछ लोग उठाकर ले गए हैं।

नहीं।

मेरी आंखों के सामने ये घटना घटी थी। बत्ती गुल कर दी गई थी,जिसकी वजह से हम कुछ नहीं कर सके।

बहुत बुरा हुआ !

जी हां।

फ़्रेंच कट दाढ़ी वाले ने एक ही सांस में गिलास खाली किया फिर उठकर बाहर की तरफ बढ़ता हुआ बोला मेरे साथ आओ।

, फिर वे दोनों बाहर आ कर जीप में बैठ ग‌ए फिर छोटी दाढी वाले गाडी चालू की ओर आगे बढ़ा दी और फिर जीप को तेजी से आगे बढ़ने लगी थी और हवा से बातें करने लगी,वे शहर के बाहर स्थित विशाल जंगल की तरफ बढ रहे थे।

थोडी देर बाद जीप जंगल में प्रविष्ट हो रही थी,रोजी के अपहरण के छोटी दाढी वाले को बुरी तरह बौखला दिया था।

रोजी के चेहरे पर भय की एक रेखा तक नहीं थी। वह बड़े इत्मीनान से सोफे पर बैठी थी।

नफीस बिना पलक झपकाए उसे देख रहा था।

रोजी ! एकाएक राजन ने पूछा तुम्हें इस गुन्डे से भय नहीं लगता।

नहीं ।

ये तुम्हें कच्चा चबा जाएगा।

कोई बात नहीं।

अबे ! नफीस आंखें निकालता हुआ बोला मैं कोई आदमखोर हूं।

नही मैंने तो ऐसी बात नहीं कही थी।

तब ठीक है।अब शादी की बात करो।

रोजी ! ये तुमसे शादी करने चाहता है।

क्या ? उसकी आंखें आश्चर्य से फैल गई ।

तुम चाहती थी कि मैं पृथ्वीराज चौहान बनू। नफीस अपनी मूंछों को सहलाता हुआ बोला।

मैंने तुम्हारी इच्छा पूरी कर दी।

अब शादी भी हो जाए।

कही तुम पागल तो नहीं हो ग‌ए  ?

और लो, इसमें पागल होने वाली कौन सी बात है ?

तभी शम्भू ट्रे में कॉफी रखे अंदर आया,टरे मेज पर रखता हुआ बोला मियां जी मुबारक हो ?

बेगम साहिबा आ गई।

अब शादी मादी भी हो जाएगी। इसलिए लिए पहले ही मुबारक बाद दे रहा था।

शम्भु तेरी मुबारकबाद अपनी जेब में रख और यहां से फूट ले।


क्रमशः ✍️