💗💗💗 हुक्म और हसरत 💗💗💗
एपिसोड 22 —
#Arsia
"अब आगे…”
"वो... यहाँ है..."
सिया के काँपते हुए होंठों से निकले ये तीन शब्द पूरे कमरे में जैसे जम गए।
अर्जुन की नज़र तुरंत दरवाज़े पर गई।
वहाँ कोई नहीं था।
सिर्फ़ लंबा-सा गलियारा... हल्की पीली रोशनी... और हवा के साथ हिलता हुआ पर्दा। 🌙
"दरवाज़ा बंद करो!" अर्जुन की आवाज़ गूँज उठी। 😠
बाहर खड़े गार्ड्स तुरंत सतर्क हो गए।
दो गार्ड गलियारे की तरफ़ दौड़े, जबकि विवेक ने पूरे फ्लोर की सिक्योरिटी लॉक करवा दी।
अर्जुन वापस सिया की तरफ़ मुड़ा।
और उसी पल उसके चेहरे का गुस्सा डर में बदल गया।
सिया की हालत अचानक और बिगड़ गई थी।
उसका चेहरा पहले से भी ज्यादा पीला पड़ चुका था। माथे पर पसीने की बारीक बूंदें थीं और आँखों के कोनों में आँसू जमा थे। उसकी साँसें भी कुछ तेज़ हो गई थीं। 🥺💔
"डॉक्टर!" अर्जुन की आवाज़ इस बार पहले से भी ऊँची थी।
डॉक्टर तुरंत उसके पास पहुँचे।
"सर, प्लीज़ पीछे हटिए। हमें उसे स्टेबलाइज़ करना होगा।"
अर्जुन पीछे हट तो गया...
लेकिन उसकी आँखें सिया से एक पल के लिए भी नहीं हटीं।
सिया की माँ उसके एक हाथ को कसकर पकड़े हुए थीं।
दूसरा हाथ रोशनी ने थाम रखा था। 🥺
रोशनी खुद रो रही थी, लेकिन सिया के हाथ को छोड़ नहीं रही थी।
"सिया... मेरी तरफ़ देख। कुछ नहीं होगा। मैं यहीं हूँ।"
सिया ने बड़ी मुश्किल से अपनी आँखें खोलीं।
उसकी नज़र पहले अपनी माँ पर गई...
फिर रोशनी पर...
और आखिर में अर्जुन पर आकर रुक गई। ❤️
अर्जुन की साँस जैसे वहीं अटक गई।
वो आगे बढ़ना चाहता था।
बस एक बार...
उसका हाथ पकड़ना चाहता था।
उसकी उँगलियों को अपनी उँगलियों में लेना चाहता था।
लेकिन सिया की माँ और रोशनी पहले से उसके दोनों हाथ थामे हुए थीं।
अर्जुन की उँगलियाँ हवा में ही रुक गईं।
कुछ पल उसने उन दोनों को देखा...
फिर सिया के चेहरे को।
उसकी आँखों में आँसू थे।
वो चेहरा, जिसे देखकर हमेशा अर्जुन के अंदर का तूफ़ान शांत हो जाता था...
आज वही चेहरा उसके अंदर आग जला रहा था। 😠🔥
उसने धीरे से अपनी मुट्ठी बंद कर ली।
"तुम्हें इस हालत में पहुँचाने वाला..."
उसकी आवाज़ बेहद धीमी थी।
लेकिन उसमें ऐसा गुस्सा था कि विवेक तक सिहर गया।
"मैं उसे ज़िंदा नहीं छोड़ूँगा।" 😠
डॉक्टर ने दवा दी और कुछ देर बाद सिया की साँसें थोड़ी सामान्य होने लगीं।
उसकी पलकों पर फिर भारीपन उतर आया।
अर्जुन ने एक कदम आगे बढ़ाया।
लेकिन सिया की माँ ने उसका हाथ थामे हुए ही उसकी तरफ़ देखा।
उनकी आँखों में आँसू थे।
अर्जुन कुछ कह नहीं पाया।
उसने बस सिर झुका दिया।
फिर अचानक उसकी आँखों में वही कठोरता लौट आई।
वो मुड़ा।
"विवेक।"
"जी?"
"जिसने ये किया है... उसे ढूँढो। अभी।"
विवेक ने सिर हिलाया।
लेकिन अर्जुन वहीं नहीं रुका।
उसने खुद दरवाज़े की तरफ़ कदम बढ़ा दिए।
उसके चेहरे पर अब सिर्फ़ एक ही चीज़ थी—
गुस्सा। 🔥
---
अर्जुन तेज़ कदमों से कमरे से बाहर निकला।
विवेक उसके पीछे था।
"अर्जुन, हमें पहले प्लान बनाकर—"
अर्जुन अचानक रुक गया।
उसने पीछे मुड़कर विवेक को देखा।
"मेरे पास प्लान है।"
उसकी आवाज़ शांत थी...
बहुत शांत।
और यही शांति सबसे खतरनाक थी।
"उसे ढूँढना है।"
विवेक ने गहरी साँस ली।
"लेकिन हमें पक्का सबूत चाहिए।"
अर्जुन की आँखों में सिया का चेहरा घूम गया।
उसकी पीली पड़ती त्वचा...
आँखों में आँसू...
और वो हाथ जिसे वो पकड़ना चाहता था लेकिन पकड़ नहीं पाया था।
उसकी जबड़े की मांसपेशियाँ तन गईं।
"सबूत भी मिलेगा..."
उसने धीमे से कहा।
"और वो भी मिलेगा।" 😠
वो सीधे कंट्रोल रूम की तरफ़ बढ़ गया।
अंदर वीर पहले से सिस्टम के सामने बैठा था।कई स्क्रीन पर एक साथ सीसीटीवी फुटेज चल रही थी।
"मुझे उस रात का हर फुटेज चाहिए। किचन... गलियारा... सर्विस एरिया... स्टाफ एंट्री... सब।"
वीर ने तेज़ी से कीबोर्ड पर हाथ चलाए।
"बॉस, कुछ फुटेज डिलीट की गई है।"
अर्जुन की आँखें सिकुड़ गईं।
"डिलीट?"
"हाँ। किसी ने सिस्टम से एक्सेस लिया था।"
अर्जुन ने विवेक की तरफ़ देखा।
"राज को बुलाओ।"
कुछ मिनट बाद राज भी वहाँ पहुँच गया।
अर्जुन ने आदेश दिया—
"हर स्टाफ की दोबारा पूछताछ होगी। किसी को मत छोड़ना।"
राज ने सिर हिलाया।
"और आकाश?"
अर्जुन का चेहरा तुरंत कठोर हो गया।
"उस पर नज़र रखो। लेकिन उसे अभी छूना मत।"
विवेक ने हैरानी से पूछा—
"क्यों?"
अर्जुन ने स्क्रीन पर आकाश की तस्वीर देखते हुए कहा—
"क्योंकि अगर वो अकेला नहीं है... तो उसके पीछे वाला खुद हमारे पास आएगा।"
उधर...
यश पहले ही आकाश के पीछे लग चुका था।
आकाश किचन से निकला।
उसने एक बार पीछे मुड़कर देखा।
यश तुरंत एक खंभे के पीछे छिप गया।
आकाश आगे बढ़ता गया।
महल के पिछले हिस्से से निकलकर वो एक सुनसान रास्ते पर पहुँचा।
यश कुछ दूरी बनाए हुए उसके पीछे चलता रहा।
आकाश ने अपना फोन निकाला।
एक कॉल की।
"मैं पहुँच गया हूँ।"
यश की आँखें सिकुड़ गईं।
किसी से मिलने वाला था वो।
लेकिन कौन?
---
इधर...
सिया के कमरे में उसकी माँ अभी भी उसका हाथ पकड़े बैठी थीं।
रोशनी उसके दूसरे हाथ को थामे हुए थी।
काव्या कमरे के कोने में खड़ी दवाइयों और डॉक्टर की हर बात ध्यान से सुन रही थी।
सिया ने धीरे से आँखें खोलीं।
रोशनी तुरंत उसके पास झुकी।
"सिया?"
सिया ने उसे देखा।
"अर्जुन... कहाँ है?" 🥺
रोशनी कुछ पल चुप रही।
फिर मुस्कुराने की कोशिश की।
"वो... तुम्हारे लिए उस इंसान को ढूँढने गया है जिसने तुम्हारे साथ ये किया।"
सिया की आँखों में चिंता उतर आई।
"वो... गुस्से में है?"
रोशनी ने उसकी तरफ़ देखा।
"बहुत।"
सिया ने आँखें बंद कर लीं।
उसकी आँखों के कोने से एक आँसू निकलकर तकिए पर गिर गया।
"उसे... कुछ मत होने देना..." 🥺
---
महल से कुछ दूर...
आकाश एक पुराने, सुनसान गोदाम के सामने पहुँचा।
वहाँ अँधेरा था।
उसने चारों तरफ़ देखा।
फिर अंदर चला गया।
यश ने दूर से सब देखा और तुरंत अर्जुन को मैसेज किया—
"आकाश किसी से मिलने आया है। लोकेशन भेज रहा हूँ।"
उधर अर्जुन के फोन पर मैसेज आया।
उसने लोकेशन देखी।
उसकी आँखों में चमक आई।
"आखिरकार..."
वो विवेक की तरफ़ मुड़ा।
"चलो।"
दोनों तुरंत निकल पड़े।
---
गोदाम के अंदर...
आकाश के सामने एक आदमी खड़ा था।
उसका चेहरा अँधेरे में छिपा हुआ था।
आकाश ने धीमी आवाज़ में कहा—
"पहला डोज़ काम कर गया। लेकिन अब अर्जुन को शक हो चुका है।"
सामने वाले ने ठंडी आवाज़ में कहा—
"तो शक होने दो।"
आकाश घबरा गया।
"लेकिन अगर उसने मुझे पकड़ लिया तो?"
कुछ पल खामोशी रही।
फिर उस अजनबी ने कहा—
"तुम्हें सिर्फ़ आदेश मानना है। असली चेहरा जानने की कोशिश मत करना।"
आकाश ने सिर झुका दिया।
यश दूर खड़ा सब सुन रहा था।
लेकिन तभी...
उसके पीछे एक छोटी-सी आवाज़ हुई।
यश पलटा।
कोई नहीं था।
जब उसने वापस गोदाम की तरफ़ देखा...
वहाँ आकाश भी नहीं था।
और वो अजनबी भी गायब हो चुका था। 😳
यश ने तुरंत अर्जुन को फोन किया।
"बॉस... वो लोग निकल गए!"
अर्जुन की आवाज़ आई—
"तुम वहीं रहो। हम पहुँच रहे हैं।"
लेकिन उसी वक्त...
वीर का कॉल आया।
अर्जुन ने फोन उठाया।
"बोलो।"
वीर की आवाज़ इस बार बेहद गंभीर थी।
"बॉस... हमें वो नंबर मिल गया है जिससे आकाश को कॉल आ रही थीं।"
अर्जुन रुक गया।
"कहाँ का नंबर है?"
कुछ सेकंड तक दूसरी तरफ़ खामोशी रही।
फिर वीर बोला—
"बॉस... ये बाहर का नंबर नहीं है।"
अर्जुन की आँखें सिकुड़ गईं।
"तो फिर?"
वीर की आवाज़ धीमी हो गई।
"ये नंबर... महल के अंदर रजिस्टर्ड है।" 😨
अर्जुन के कदम वहीं रुक गए।
उसने धीरे-धीरे महल की तरफ़ देखा।
जिस महल को वो अब तक सुरक्षित समझ रहा था...
शायद उसी की दीवारों के भीतर कोई दुश्मन छिपा बैठा था।
विवेक ने घबराकर पूछा—
"मतलब... वो हमारे बीच है?"
अर्जुन की आँखों में एक खतरनाक चमक उभरी।
उसने फोन अपनी मुट्ठी में कस लिया।
"हाँ..."
एक पल रुककर उसने बेहद धीमी आवाज़ में कहा—
"दुश्मन बाहर नहीं है..."
उसकी नज़र महल की तरफ़ उठी।
"वो हमारे बीच है।" 😠🔥
और उसी वक्त...
सिया के कमरे के बाहर लगे कैमरे की स्क्रीन पर...
एक परछाईं धीरे-धीरे उसके कमरे की तरफ़ बढ़ती दिखाई दी।
जारी रहेगा... 💗🔥
© Diksha
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यह भाग लिखने में मुझे बहुत समय, मेहनत और प्यार लगा है। यदि आपको यह अध्याय पसंद आया हो, तो कृपया इसे रेटिंग दें और अपने रिव्यू ज़रूर साझा करें।
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Running... 🌸