Andheri Raat ka Raaz - 1 in Hindi Thriller by Mannu Gujjar books and stories PDF | अंधेरी रात का राज़ - भाग 1

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अंधेरी रात का राज़ - भाग 1



रात के करीब बारह बजे थे। पूरा गाँव गहरी नींद में सो रहा था। चारों तरफ सन्नाटा था और दूर पहाड़ों से आती हवा पेड़ों को हिला रही थी।

गाँव के आखिरी छोर पर रहने वाला अर्जुन अचानक एक अजीब आवाज़ से जाग गया।

ठक... ठक... ठक...

आवाज़ उसके घर के बाहर से आ रही थी।

अर्जुन ने खिड़की से बाहर देखा। गली बिल्कुल खाली थी।

उसने सोचा, “शायद कोई जानवर होगा।”

लेकिन तभी उसके दरवाज़े के नीचे से एक पुराना लिफाफा अंदर सरक आया।

अर्जुन का दिल तेज़ धड़कने लगा।

उसने लिफाफा उठाया। उस पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी—

“अगर अपने पिता की मौत का सच जानना है, तो कल रात पुराने कुएँ पर आना।”

अर्जुन के हाथ काँपने लगे।

उसके पिता की मौत को दस साल हो चुके थे। गाँव में सब कहते थे कि उनकी मौत एक हादसा थी।

लेकिन अर्जुन को हमेशा लगता था कि उसके पिता की मौत के पीछे कोई बड़ा राज़ है।

अगली रात वह पुराने कुएँ पर पहुँचा।

वहाँ कोई नहीं था।

अचानक पीछे से आवाज़ आई—

“तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था।”

अर्जुन ने पलटकर देखा।

सामने एक नकाबपोश आदमी खड़ा था।

उसके हाथ में वही पुरानी घड़ी थी, जो अर्जुन के पिता की मौत के बाद कभी नहीं मिली थी।

अर्जुन ने घड़ी देखते ही पूछा—

“ये घड़ी तुम्हारे पास कैसे आई?”

नकाबपोश ने धीरे से कहा—

“क्योंकि तुम्हारे पिता की मौत कोई हादसा नहीं थी...”

और तभी दूर जंगल में एक जोरदार धमाका हुआ।

नकाबपोश अंधेरे में गायब हो गया।

अर्जुन अकेला कुएँ के पास खड़ा रह गया।

उसे पता नहीं था कि अगले दिन से उसकी पूरी जिंदगी बदलने वाली थी।


अर्जुन पूरी रात सो नहीं पाया।

नकाबपोश की बात उसके कानों में बार-बार गूँज रही थी—

“तुम्हारे पिता की मौत कोई हादसा नहीं थी...”

सुबह होते ही अर्जुन ने अपने पिता का पुराना संदूक खोला। उसमें कुछ पुराने कपड़े, तस्वीरें और कागज़ रखे थे।

अचानक उसे संदूक के नीचे एक छोटी-सी चाबी मिली।

चाबी के साथ एक कागज़ भी था।

उस पर सिर्फ इतना लिखा था—

“जिसे तुम ढूँढ रहे हो, वह तुम्हारे बहुत करीब है।”

अर्जुन घबरा गया।

उसे अपने गाँव के पुराने डाकघर की याद आई। उसके पिता अक्सर वहाँ जाते थे।

वह तुरंत डाकघर पहुँचा और बूढ़े डाकिए से अपने पिता के बारे में पूछा।

बूढ़ा कुछ देर चुप रहा।

फिर उसने धीरे से कहा—

“तुम्हारे पिता ने मरने से एक दिन पहले मेरे पास एक पार्सल छोड़ा था।”

अर्जुन की आँखें फैल गईं।

“पार्सल कहाँ है?”

बूढ़े ने एक पुरानी अलमारी खोली और एक छोटा डिब्बा निकालकर अर्जुन को दे दिया।

डिब्बे पर अर्जुन के पिता का नाम लिखा था।

अर्जुन ने चाबी लगाई।

क्लिक!

डिब्बा खुल गया।

अंदर एक पुरानी तस्वीर थी।

तस्वीर में अर्जुन के पिता के साथ गाँव के तीन बड़े लोग खड़े थे।

लेकिन तस्वीर के पीछे एक तारीख लिखी थी—

23 अगस्त 2016

अर्जुन ने तारीख देखते ही तस्वीर को गौर से देखा।

उसी तस्वीर के कोने में एक आदमी खड़ा था, जिसे देखकर अर्जुन के चेहरे का रंग उड़ गया।

वह आदमी आज भी गाँव में रहता था।

और सबसे बड़ा रहस्य यह था—

वह आदमी अर्जुन के पिता की मौत के बाद सबसे पहले उनके घर पहुँचा था।

अर्जुन ने तस्वीर जेब में रखी और धीरे से कहा—

“अब सच सामने आएगा।”

लेकिन उसे नहीं पता था कि डाकघर से निकलते समय कोई उसे दूर से देख रहा था।

और उस आदमी के हाथ में वही पुरानी घड़ी थी.