ईशानी : हा मेरी मां पढ़ लेंगे।
नैना मुस्कराने लगी
ईशानी की मुलाकात नैना से कॉलेज के पहले ही दिन हो गई थी फिर क्या बातों - बातों में जान पहचान निकाल कर पक्की वाली दोस्त बन गई।
नैना मिडिल क्लास फैमिली से आती है ईशानी की तरह नैना भी बहुत खूबसूरत है लेकिन नैना के चेहरे पर मासूमियत के साथ साथ थोड़ी चंचलता भी दिखती है गोरा रंग, बदामी आँखे जिन पर हमेशा काजल की रेखा खींची रहती, लंबे काले बाल, मध्यम कद, फिट शरीर, माथे पर बिंदी चेहरे पर चार चांद लगा देती सिंपल कुर्ते पजामे में भी बहोत खूबसूरत लगती और बोलने में ईशानी से दो कदम आगे
नैना के दिमाग में हमेशा कुछ ने कुछ शरारत चलती रहती।
इधर आरव अपने रूम में बैठा ऑफिस का काम कर रहा था एक हाथ में कॉफी का मग दूसरा हाथ लैपटॉप के बटनों पर खुद - ब - खुद चलती अंगुलिया। एक हाथ में महंगी घड़ी, बालों को जेल से सेट किये थ्री पीस सूट, मेचिंग के ही जूते पहने आरव एक दम बवाल लग रहा था किसी की भी नजरें उसे इस लुक में देख कर ना हटे।
दस मिनट से किसी की नजरें आरव को देख रही थी
आरव बिना उसकी तरफ देखे लैपटॉप पर काम करते हुए कहता है।
आरव : अब घूरता ही रहेगा या कुछ बोलेगा भी
यह विवेक था जो आरव को घूरे जा रहा था जो किसी ओर ही ख्याली दुनिया में खोया हुआ था
विवेक आरव का पर्सनल असिस्टेंट है या यू कहे पर्सनल असिस्टेंट कम ओर जिगरी यार ज्यादा है जिसे आरव के चेहरे से पता चल जाता है उसका मूड कैसा है आरव की बिना परमिशन के उसके रूम में आने की परमिशन सिर्फ़ विवेक को ही है
विवेक आरव का बांया हाथ है जिसे वो अपने भाई की तरह प्यार करता है बस जताता नहीं है वो बात अलग है
विवेक के माता पिता उसके बचपन में ही कार एक्सीडेंट में गुजर गए विवेक के पापा वीरेंद्र सिंह जी के पर्सनल असिस्टेंट हुआ करते थे जब विवेक के माता पिता की दुर्घटना में मौत हुई तब विवेक बहुत छोटा था विवेक का पालन पोषण दादी ने आरव के समान ही बड़े लाड़ प्यार से किया दादी ने कभी भी महसूस नहीं होने दिया वो इस घर का बेटा नहीं है
विवेक खुद जानता था वो इस परिवार का खून नहीं है इसलिए किसी काम में ज्यादा दखल अंदाजी नहीं करता था वैसे भी इस परिवार के बहुत अहसान थे विवेक पर । दादी और आरव के इर्द गिर्द ही उसकी दुनिया बसी थी
विवेक आरव का सबसे भरोसेमंद आदमी था आखिर दोनों बचपन में साथ रहे आरव विवेक से तीन साल बड़ा था विवेक आरव को अपने बड़े भाई की तरह इज्जत करता था
विवेक दिखने में आरव की तरह ही गुड लुकिंग है लेकिन आरव के जितना नहीं विवेक का शरीर लंबा कद, चौड़ा सीना, शार्प जो लाइन, चेहरे पर हल्की दाढ़ी, जिसे सही सेट करवाया हो, मस्क्युलर बॉडी, गहरी काली आंखे, पतले होठ, चेहरे पर मासूमियत और थोड़ा चुलबुलेपन, कमाल का ड्रेसिंग सेंस। विवेक ब्लैक थ्री फीस सूट पहने रूम के दरवाजे पर अभी तक आरव को घूरे जा रहा था। विवेक मन में सोच रहा था क्या करूं मांगू या नहीं कही भाई ( विवेक आरव को भाई कहता था ) गुस्सा ना हो जाए कैसे बोलूं, बोलूं भी या नहीं। इतने में आरव की फिर आवाज विवेक के कानों पर पड़ती है
दोस्तो आपको कहानी पसंद आये तो लाइक और कमेंट करके जरूर बताएं मैं रोजाना एपिसोड लाने की पूरी कोशिश करूंगी ।