That One Meeting in Hindi Love Stories by Chetan Malade books and stories PDF | चांद तुम्हे मुबारक - 3

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चांद तुम्हे मुबारक - 3

वह एक मुलाकात

पिछले अध्याय में हमने देखा कि जब मैं कॉलेज (MCC) पहुँचा... उस दृश्य का वर्णन मैं कुछ इस तरह से करना चाहता हूँ, जिससे मुझे एक असीम शांति और खुशी मिलती है।

मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज की उस शांत संध्या में, जब अस्त होते सूर्य की सुनहरी किरणें पेड़ों की शाखाओं से छनकर धरती पर बिखर रही थीं, वह वहाँ खड़ी थी—मानो प्रकृति ने अपनी सारी कोमलता और सौंदर्य उसी एक क्षण में समेट दिया हो।

उसकी आँखें गहरी और शांत थीं, जैसे वर्षा की पहली रात में ठहरे हुए दो निर्मल सरोवर। उनमें एक ऐसी मधुर चमक थी, जो किसी को भी अनायास ही अपनी ओर खींच ले। उसके लंबे, रेशमी बाल हल्की हवा के साथ धीरे-धीरे लहरा रहे थे, मानो मंद पवन उनसे कोई अनकहा गीत गुनगुना रही हो।

उसके चेहरे पर फैली हुई मुस्कान में एक अजीब-सी सादगी थी—न अधिक, न कम—बस इतनी कि देखने वाले के मन में एक शांत आनंद भर जाए। उसकी हर अदा में एक स्वाभाविक गरिमा थी, जैसे वह किसी कहानी की नायिका नहीं, बल्कि किसी प्राचीन कविता का जीवंत रूप हो।

चारों ओर फैले हरे-भरे वृक्ष, हवा में तैरती फूलों की हल्की सुगंध और डूबते सूर्य का सुनहरा प्रकाश—सब कुछ जैसे उसी की उपस्थिति को और भी सुंदर बना रहे थे। उस क्षण उसे देखकर ऐसा लगता था, मानो संध्या स्वयं ठहर गई हो और प्रकृति ने अपने सबसे सुंदर रंग उसी एक चेहरे पर सजा दिए हों।

वह अपनी एक सहेली के साथ आ रही थी। मैं वहीं स्तब्ध खड़ा रहा और जब वह मेरे करीब से गुजरी, तो मेरी नजरें बस उसी पर टिकी रह गईं। अचानक उसकी नजर मेरी नजरों से टकराई और एक पल के लिए जैसे यह सारा जहाँ ही रुक गया। पर वह चुपचाप मेरे बगल से निकल गई और मुझे कुछ समझ नहीं आया।

मैं लगभग दस मिनट तक वहीं बुत बनकर खड़ा रहा। जब मेरे दोस्तों ने मुझे आवाज दी और चिल्लाए, तब भी मुझे कुछ होश नहीं आया। अंत में जब एक दोस्त ने मुझे झकझोरा और बोला, “क्या भाई, किन ख्यालों में खोया है?” तब मुझे यह एहसास हुआ कि जिसे मैं देख रहा था, वह तो कब की जा चुकी थी और पीछे रह गया था बस कॉलेज का वही खूबसूरत और मन मोह लेने वाला दृश्य।

उस रात मैंने किसी से ज्यादा बात नहीं की। हम सब अपने कमरे में आ गए। बाकी लड़के तो अपने-अपने बिस्तर पर लेटकर सो गए, पर उस रात मेरी आँखों से नींद पूरी तरह गायब थी। मेरे मन में बस उसे जानने की लालसा थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उस वक्त मुझे हुआ क्या था। जब भी मैं आँखें बंद करता, मेरी आँखों ने जो देखा था, वह खूबसूरत दृश्य फिर से मेरे सामने घूमने लगता।

जैसे-तैसे रात कटी। सुबह उठते ही मैं जल्दी से तैयार हुआ और सीधा कॉलेज की तरफ भागा। बाकी लड़के मुझे हैरानी से देखते ही रह गए कि मैं आज इतनी जल्दी क्यों भाग रहा हूँ। पर मैं उस लड़की को फिर से देखने के लिए इतना बेचैन था कि उसे शब्दों में बयाँ नहीं कर सकता। मुझे बस एक ही बात खाए जा रही थी—कल जो मैंने देखा, कहीं वह मेरा भ्रम तो नहीं था? उस लड़की का नाम क्या है?

इसी उधेड़बुन में मैंने अपना आधा दिन उस विशाल कॉलेज के कोने-कोने में उसे ढूँढ़ने में बिता दिया। मुझे यह भी ठीक से नहीं पता था कि वह सच में इस कॉलेज की छात्रा थी भी या नहीं, या यहाँ रहती भी थी या नहीं। दिमाग में कुछ समझ नहीं आ रहा था।

तभी मेरा दोस्त मेरे पास आया और बोला, “भाई, तुझे क्या हुआ है? तू आज सुबह से ऐसा क्यों कर रहा है?”

तभी अचानक मेरी नजरें ठिठक गईं...
मुझे एक झलक नजर आई।
वह सिर्फ एक झलक नहीं थी, मानो मेरी किस्मत मुझे पुकार रही हो। मेरे मन ने कहा—
‘अगर मैंने अभी कदम नहीं बढ़ाया, तो शायद जिंदगी भर पछताऊँगा...’
आगे क्या हुआ, यह जानने के लिए मेरे साथ बने रहें!

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