ध्रुव की तारा
भाग - २
लेखिका "अनामिका"
वक्त अपनी रफ्तार से बीतता रहा। बचपन की मासूमियत अब किशोरावस्था के संजीदा मोड़ पर आ खड़ी हुई थी। सात साल की वह छोटी तारा अब 10th क्लास में थी—गोल चश्मा, किताबों का ढेर और पढ़ाई को लेकर वही पुरानी संजीदगी। वहीं दूसरी तरफ, 12th क्लास का ध्रुव आज भी बेफिक्र था। उसकी गिनती क्लास के उन छात्रों में होती थी जो बस 'पासिंग मार्क्स' की उम्मीद रखते थे।
घरवाले हर वक्त ध्रुव को 12th बोर्ड्स का डर दिखाते और पढ़ाई के लिए टोकते रहते। लेकिन कोई नहीं जानता था कि ध्रुव का दिल किताबों में नहीं, बल्कि पानी की लहरों में धड़कता है। वह एक पेशेवर स्विमर बनना चाहता था—एक ऐसा सपना, जो उसने सिर्फ तारा के साथ साझा किया था। तारा जानती थी कि ध्रुव पढ़ाई में भले ही कमजोर दिखे, लेकिन स्विमिंग पूल में उतरते ही वह किसी राजा की तरह चमकता है।
एक सोमवार की सुबह, स्कूल के नोटिस बोर्ड पर 'मिड-टर्म टेस्ट' की तारीखें टंग गईं। पूरे स्कूल में खलबली मच गई।
तारा ने कॉरिडोर में ध्रुव को रोका, "ध्रुव, 12th के बोर्ड्स में सिर्फ छह महीने बचे हैं और अगले हफ्ते से टेस्ट हैं! इस बार तो पढ़ लो?"
ध्रुव ने अपनी बैग स्ट्रैप संभाली और हमेशा की तरह मुस्कुराते हुए कहा, "अरे चश्मिश, टेंशन क्यों लेती हो? पास तो मैं हो ही जाऊंगा। असली प्रैक्टिस तो शाम को डिस्ट्रिक्ट स्विमिंग ट्रायल में होनी है।"
तारा ने गहरी सांस ली। वह जानती थी कि ध्रुव का सपना सच्चा है, लेकिन अगर वह इस टेस्ट में फेल हुआ, तो उसके पापा का गुस्सा उसकी स्विमिंग प्रैक्टिस पर रोक लगा देगा। तारा ने तय किया कि वह खुद ध्रुव को पढ़ाएगी, ताकि उसका स्विमिंग का सपना कभी न छूटे।
मिड-टर्म टेस्ट की तारीखें आते ही तारा की धड़कनें बढ़ गईं। ध्रुव का बेफिक्र रवैया उसे और डरा रहा था। उसे अच्छे से पता था कि ध्रुव का सपना सिर्फ स्विमिंग है, लेकिन उसके घर में समीकरण थोड़े अलग थे।
ध्रुव के पापा चुपके-चुपके उसके स्विमिंग के सपने को सपोर्ट करते थे, पर शर्त सिर्फ एक थी—पढ़ाई से ध्यान नहीं भटकना चाहिए। वहीं ध्रुव की मम्मी इस सब के सख्त खिलाफ थीं। उनका मानना था कि स्विमिंग में कोई भविष्य नहीं है, उसे अच्छे से पढ़कर एक सुरक्षित नौकरी ढूंढनी चाहिए। अगर ध्रुव फेल होता, तो मम्मी उसकी स्विमिंग प्रैक्टिस हमेशा के लिए बंद करवा देतीं।
शाम को तारा सीधे ध्रुव के कमरे में दाखिल हुई। ध्रुव बेड पर लेटा फोन में गेम खेलने में मशगूल था।
"ध्रुव! बंद करो यह गेम!" तारा ने सख्त लहजे में उसका फोन छीनते हुए कहा।
ध्रुव ने चिढ़कर कहा, "अरे चश्मिश! क्या कर रही हो? लास्ट लेवल था यार!"
"मुझे कोई लेवल नहीं सुनना," तारा ने किताबें टेबल पर पटकते हुए कहा। "अगर मिड-टर्म्स में पास नहीं हुए, तो आंटी को तुम्हारी सीक्रेट स्विमिंग प्रैक्टिस के बारे में सब बता दूंगी। फिर भूल जाना अपना पूल!"
ध्रुव ने हार मानते हुए हाथ खड़े कर दिए, "अच्छा बाबा, ठीक है! डांट क्यों रही हो? पास तो मैं हो ही जाऊंगा..."
बेमन से ही सही, ध्रुव पढ़ने बैठा। अगले कुछ दिन तारा ने उसे दिन-रात एक करके पढ़ाया।
कुछ हफ्तों बाद मिड-टर्म्स का रिजल्ट आ गया।
तारा के घर में जश्न का माहौल था। हमेशा की तरह टॉप-५ में जगह बनाने पर उसके पापा ने उसे गले लगा लिया, "वाह मेरी बेटी! मुझे तुम पर पूरा भरोसा था।" मम्मी भी मुस्कुराते हुए बोलीं, "आज तो तारा की पसंद का ही खाना बनेगा!"
लेकिन तारा का दिल अपने रिजल्ट में नहीं, सामने वाले घर में अटका हुआ था।
दूसरी तरफ, ध्रुव के घर का माहौल गर्म था। ध्रुव बॉर्डर पर रहकर जैसे-तैसे पास हुआ था। उसकी मम्मी हाथ में रिपोर्ट कार्ड लिए उसे डांट रही थीं, "यह क्या मार्क्स हैं ध्रुव? बिल्कुल पढ़ाई में ध्यान नहीं है तुम्हारा! क्या करोगे जिंदगी में?"
ध्रुव के पापा भी मम्मी का साथ देते हुए थोड़ा डांट रहे थे, लेकिन ध्रुव का ध्यान अपनी मम्मी से ज्यादा पापा पर था। वह चुपके से पापा को देखकर आँख मार रहा था, जैसे कह रहा हो—'मम्मी को थोड़ा शांत कराओ न पापा, पास तो हो गया!' उसके पापा भी अपना गुस्सा छिपाकर अपनी हंसी दबाने की कोशिश कर रहे थे।
तभी तारा ने दरवाज़े पर दस्तक दी।
"अरे तारा बेटा, आओ!" ध्रुव की मम्मी ने रिपोर्ट कार्ड उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा, "देखो इसके मार्क्स! पूरे दिन बस आवारागर्दी और फोन!"
तारा ने संभलकर कहा, "कोई बात नहीं आंटी, यह बस मिड-टर्म्स हैं। बोर्ड्स में ध्रुव बहुत मेहनत करेगा और अच्छे मार्क्स लाएगा।"
"अब तुम ही सहारा हो तारा," मम्मी सख्त लहजे में बोलीं। "आज से इसका बाहर जाना, दोस्तों से मिलना और फोन पर गेम खेलना सब बंद! जब तक यह सुधर नहीं जाता, तुम रोज इसे पढ़ाओगी।"
यह सुनते ही ध्रुव का चेहरा उतर गया। उसने बेबसी से तारा की तरफ देखा, और तारा ने मन ही मन राहत की सांस ली कि कम से कम उसकी स्विमिंग अभी बची हुई थी।
शाम के ढलते सूरज की नारंगी रोशनी स्विमिंग पूल के पानी पर झिलमिला रही थी। तारा पानी में पैर लटकाए बैठी थी और उसकी नज़रें तैरते हुए ध्रुव पर थीं। ध्रुव जैसे ही पानी से बाहर निकला, उसने अपने बाल पीछे झटके।
"तुम्हें ज़रा भी फिक्र नहीं है न, ध्रुव?" तारा ने मुंह बनाते हुए कहा। "अगर मम्मी को पता चला कि तुम यहाँ हो, तो सारा खेल खत्म हो जाएगा। तुम्हें सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए!"
ध्रुव ने हँसते हुए पूल के किनारे पर हाथ रखा, "अरे यार चश्मिश! तुम बिल्कुल मम्मी की तरह बोलने लगी हो। हर वक्त बस पढ़ाई-पढ़ाई!"
"मैं तुम्हारी भलाई के लिए कह रही हूँ," तारा ने अपनी ऐनक ठीक की।
"मेरी भलाई तैरने में है," ध्रुव की आँखों में एक अलग ही चमक आ गई। "मुझे बस नेशनल स्विमिंग चैंपियनशिप में जाना है। पानी ही मेरा सपना है, तारा।"
तारा ने उसकी बात सुनी और एक हल्की मुस्कान के साथ कहा, "हाँ, और मेरा सपना इस पढ़ाई के दम पर इंग्लिश लिटरेचर की अच्छी प्रोफेसर या राइटर बनना है... ताकि तुम्हारी तरह बेफिक्र होकर न घूमना पड़े!"
"वाह! मैडम का प्लान तो एकदम सॉलिड है," ध्रुव मुस्कुराया। फिर अचानक कुछ याद आते ही बोला, "अरे हाँ! वो तुम्हारी फ्रेंड जो आज मिली थी... काफी क्यूट थी यार! क्या नाम है उसका? वो क्या कह रही थी मेरे बारे में?"
तारा का दिल पल भर के लिए अटका, पर उसने चेहरा सपाट रखते हुए कहा, "मुझे क्या पता? और वो हमेशा तुम्हारे ही बारे में क्यों पूछती रहती है, मुझे तो समझ नहीं आता!"
ध्रुव ने उसे चिढ़ाते हुए कहा, "यह सब बातें तुम्हारी समझ से बाहर हैं, चश्मिश! तुम सिर्फ अपनी किताबों में ध्यान लगाओ, वही सही है तुम्हारे लिए।"
तारा ने चिढ़कर पानी की छपाक ध्रुव पर मारी।
उस उम्र में, जहाँ ध्रुव के लिए लड़कियों की अटेंशन और फ्लर्टिंग एक आम बात थी, वहीं तारा इन सब बातों से कोसों दूर थी। उसे यह भी नहीं समझ आ रहा था कि ध्रुव की उस तारीफ से उसके दिल में एक अजीब सी टीस क्यों उठी थी। वह बस इतना जानती थी कि ध्रुव का सपना उसका अपना सपना बन चुका था।
दूसरा भाग समाप्त, कहानी जारी है....