Riya चुपचाप David की चोट पर दवा लगा रही थी। Riya का सारा ध्यान David की चोट पर था, मगर David की आँखें सिर्फ़ Riya पर ही थीं।
उसके चेहरे पर एक मुस्कुराहट थी, जैसे किसी ने पहली बार उसकी परवाह की हो।
कुछ देर तक David Riya को देखता ही रहता है। तभी अचानक David का असिस्टेंट वहाँ आ जाता है।
Assistant: “सर, मैंने उन्हें कंपनी से बाहर निकाल दिया।”
David: “हम्म।”
Riya: “सर, मैंने दवा लगा दी है। आप अपना ध्यान रखिए... अब मैं चलती हूँ।”
इतना कहकर Riya ऑफिस से चली जाती है।
David का असिस्टेंट David से कहता है—
Assistant: “सर, अचानक आपकी माँ यहाँ आ गईं और इतना बड़ा तमाशा खड़ा कर दिया...”
David गंभीर-सी मुस्कान के साथ कहता है—
David: “तुम्हें क्या लगता है, ये सब अचानक हुआ है?”
Assistant यह सुनकर बहुत हैरान हो जाता है।
Assistant: “सर, क्या आपको ये सब कुछ पता था? फिर भी आपने ये सब होने दिया?”
David: “क्योंकि मैं यही तो चाहता था।”
Assistant: “मैं समझ नहीं पा रहा हूँ, आप कहना क्या चाहते हैं?”
David: “तुम्हें क्या लगता है, एक ही समय पर Riya और माँ का आना कोई इत्तेफ़ाक है? ये सब मैंने प्लान किया था, क्योंकि मैं Riya का ध्यान अपनी तरफ खींचना चाहता था।”
Assistant: “ओह... अब मैं समझा।”
David: “अब तुम्हारा काम यह है कि तुम Riya के दिल में मेरे लिए सहानुभूति पैदा करो। तुम समझ रहे हो ना मेरा क्या मतलब है?”
Assistant: “यस सर, हो जाएगा।”
Assistant ऑफिस से बाहर चला जाता है।
तभी Riya उसके पास आती है।
Riya: “Mr. Assistant, क्या सब ठीक है?”
Assistant: “मेरा नाम Alex है, Miss Riya। प्लीज़ मुझे Assistant मत कहिए। मेरा एक नाम है। आप मुझे Alex कह सकती हैं।”
Riya: “सॉरी, मुझे पता नहीं था पहले।”
फिर Riya पूछती है—
Riya: “Mr. Alex, क्या सर ठीक हैं?”
Assistant उदास चेहरा बनाकर कहता है—
Alex: “David सर के साथ बचपन से यही होता आया है। जब वो आठ साल के थे, तब उन्हें अनाथ आश्रम से लाया गया था। उनके घर में उन्हें कोई पसंद नहीं करता। उनके साथ बचपन से यही होता आया है।”
फिर Alex कहता है—
Alex: “यह सब छोड़िए। आपको इन सब चीज़ों के बारे में सोचने की ज़रूरत नहीं है।”
Alex वहाँ से चला जाता है।
Riya भी अपने डेस्क पर वापस चली जाती है, मगर उसके चेहरे पर निराशा और उदासी साफ़ दिखाई दे रही थी।
फिर Riya अपने डेस्क पर बैठ जाती है, मगर वह पूरे समय David के बारे में सोचती रहती है।
उसके मन में बार-बार यही ख्याल आता है कि David ने बचपन से क्या-क्या सहा होगा।
उसके दिमाग में बस यही सब चल रहा होता है।
थोड़ी देर बाद David अपने ऑफिस से कॉन्फ्रेंस रूम में एक मीटिंग के लिए जाता है।
तभी सामने से Riya अपने लिए कॉफी लेकर आ रही होती है।
जैसे ही Riya की नज़र David पर पड़ती है, उसकी नज़र David पर ही टिक जाती है।
David भी Riya को देख रहा होता है।
David का असिस्टेंट Riya को देख लेता है और David से कहता है—
Alex: “सर, Miss Riya आपको ही घूरे जा रही हैं।”
मगर David कुछ नहीं कहता। वह बस मुस्कुराता हुआ वहाँ से चला जाता है।
Riya भी अपने डेस्क पर वापस जाकर बैठ जाती है।
जैसे ही शाम होती है, Riya ऑफिस से अपने घर के लिए निकलती है।
जैसे ही वह घर की डोरबेल बजाती है और दरवाज़ा खुलता है, वह अचानक चौंक जाती है।
वह अपने घर के दरवाज़े पर David के असिस्टेंट को खड़ा देखती है।
वह एकदम से कहती है—
Riya: “Mr. Alex... आप यहाँ, मेरे घर पर?”
Alex: “Miss Riya, क्या ये आपका घर है? मुझे पता नहीं था। वो... हम आपकी माँ को लेकर आए थे।”
Riya यह सुनकर घबरा जाती है।
Riya: “मेरी माँ को लेकर आए थे? मतलब... मेरी माँ ठीक तो हैं?”
Riya एकदम से दौड़कर घर के अंदर जाती है।
जैसे ही वह घर के अंदर जाती है, वह वहाँ का नज़ारा देखकर हैरान रह जाती है।