This is one-sided love - Part 9 in Hindi Love Stories by Ankit Khatri books and stories PDF | एकतरफा प्यार है ये - भाग 9

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एकतरफा प्यार है ये - भाग 9

राहुल!

अंजलि की आवाज पूरे कमरे में गूंज गई.

खिडकी खुली थी.

परदा हवा में उड रहा था.

कमरा खाली था.

अंजलि का दिल जोर- जोर से धडक रहा था.

कुछ सेकंड तक वह वहीं खडी रही.

फिर उसकी नजर कमरे के नीचे की तरफ गई.

खिडकी के पास जमीन पर एक छोटा- सा कागज पडा था.

अंजलि ने तुरंत उसे उठाया.

उस पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी—

मैं तुम्हारे लिए खतरा नहीं बनना चाहता।

अंजलि की आंखों में आंसू आ गए.

तुम फिर मुझे छोडकर नहीं जा सकते, राहुल.

वह भागती हुई नीचे आई.

मुख्य दरवाजा बंद था.

गार्ड ने बताया कि कोई बाहर नहीं गया.

अंजलि ने पूरे घर में राहुल को ढूंढना शुरू कर दिया.

आखिरकार उसे घर के पीछे बने छोटे से बगीचे में राहुल दिखाई दिया.

वह एक पेड के नीचे बैठा था.

अंजलि गुस्से और राहत के बीच उसके पास पहुंची.

तुम यहां क्या कर रहे हो?

राहुल ने उसकी तरफ देखा.

मुझे नींद नहीं आ रही थी।

तो बिना बताए कमरे से बाहर निकल गए?

मुझे लगा आप परेशान होंगी।

और तुम्हें लगा मैं तुम्हें ढूंढने नहीं आऊंगी?

राहुल चुप रहा.

अंजलि ने गहरी सांस ली.

तुमने वो कागज क्यों छोडा?

कौन सा कागज?

अंजलि ने कागज उसकी तरफ बढाया.

राहुल ने पढा.

उसने हैरानी से कहा—

मैंने ये नहीं लिखा।

अंजलि ठिठक गई.

क्या?

मैंने ये कागज नहीं रखा।

दोनों कुछ पल एक- दूसरे को देखते रहे.

अंजलि के मन में फिर वही डर पैदा हो गया.

कोई उनके घर में आया था?

कोई राहुल को डराना चाहता था?

या.

कोई चाहता था कि राहुल खुद इस घर से चला जाए?

लेकिन इससे पहले कि वह कुछ पूछती, राहुल ने कहा—

मैम, आपको मुझसे डरना चाहिए।

अंजलि ने हैरानी से पूछा—

मैम?

हां।

तुम मुझे अंजलि नहीं कह सकते?

राहुल ने कुछ पल सोचा.

मुझे अजीब लगता है।

क्यों?

पता नहीं।

अंजलि ने धीमी आवाज में कहा—

लेकिन तुम पहले मुझे अंजलि कहते थे।

राहुल ने उसकी तरफ देखा.

पहले?

अंजलि चुप हो गई.

वह अपनी भावनाओं को छिपाने लगी.

कुछ नहीं।

राहुल ने पूछा—

क्या हम पहले एक- दूसरे को जानते थे?

अंजलि के पास सच बताने का मौका था.

लेकिन उसने अभी सच नहीं बताया.

हां।

राहुल की आंखों में सवाल था.

कैसे?

बस. जानते थे।

दोस्त थे?

अंजलि ने हल्की मुस्कान दी.

उससे भी ज्यादा।

राहुल ने हैरानी से उसे देखा.

क्या?

अंजलि तुरंत वहां से उठ गई.

चलो अंदर।

राहुल भी उसके पीछे चल पडा.

लेकिन उसके दिमाग में अंजलि के शब्द घूमते रहे—

उससे भी ज्यादा।

अगली सुबह

नाश्ते की मेज पर पूरा परिवार बैठा था.

अंजलि के पिता के सामने राहुल भी बैठा था.

घर के नौकरों के लिए यह दृश्य अजीब था.

कल तक सडक पर रहने वाला एक अनजान आदमी.

आज उसी घर की मेज पर बैठा था.

राहुल असहज होकर बैठा रहा.

अंजलि ने उसकी प्लेट में खाना रखा.

खाओ।

मैम, मैं खुद ले सकता हूं।

मैम मत कहो।

तो क्या कहूं?

अंजलि कुछ पल उसे देखती रही.

अंजलि।

राहुल मुस्कुराया.

मेरे लिए आप अंजलि नहीं हैं।

अंजलि का चेहरा उतर गया.

तो?

आप मेरी मदद कर रही हैं. आप मेरे लिए बहुत सम्मान की बात हैं।

वह कुछ पल रुका.

इसलिए मैम ठीक है।

अंजलि ने नजरें झुका लीं.

उसके पिता यह सब चुपचाप देख रहे थे.

उन्होंने राहुल से पूछा—

तुम्हें इस घर में रहने में कोई परेशानी तो नहीं?

नहीं।

और अगर मैं कहूं कि तुम यहाँ ज्यादा दिन नहीं रह सकते?

राहुल ने शांत स्वर में कहा—

मैं चला जाऊंगा।

अंजलि तुरंत बोली—

नहीं!

सबकी नजर उसकी तरफ चली गई.

अंजलि कुछ पल के लिए चुप रही.

फिर बोली—

मेरा मतलब है. जब तक इसकी याददाश्त वापस नहीं आती, इसे कहीं नहीं जाना चाहिए।

उसके पिता ने उसे घूरकर देखा.

तुम्हें इसकी इतनी चिंता क्यों है?

अंजलि जवाब नहीं दे पाई.

राहुल ने पहली बार अंजलि का बचाव किया.

मैम ने मेरी मदद की है. इसमें उनका कोई गलत मतलब नहीं है।

अंजलि ने उसकी तरफ देखा.

उसे अच्छा भी लगा.

और दुख भी.

वह राहुल को अपना प्यार मानती थी.

और राहुल.

उसे सिर्फ अपनी मदद करने वाली एक महिला समझता था.

दोपहर

अंजलि ऑफिस जाने के लिए तैयार थी.

राहुल बाहर खडा उसका इंतजार कर रहा था.

आप ऑफिस जा रही हैं?

हां।

मैं भी चलूं?

अंजलि मुस्कुराई.

क्यों?

आपने कहा था कि मेरे लिए कुछ काम ढूंढेंगी।

तो आज से तुम्हारा नया सफर शुरू।

राहुल ने पूछा—

लेकिन मुझे कुछ याद नहीं।

याददाश्त चली गई है, हुनर नहीं।

राहुल पहली बार खुलकर मुस्कुराया.

अंजलि उसे देखकर कुछ पल चुप रही.

यही मुस्कान.

छह साल पहले भी उसके दिल की सबसे बडी कमजोरी थी.

राहुल ने पूछा—

क्या हुआ?

कुछ नहीं।

आप मुझे ऐसे क्यों देख रही थीं?

अंजलि ने नजरें फेर लीं.

क्योंकि तुम मुझे किसी की याद दिलाते हो।

किसकी?

अंजलि की आवाज धीमी हो गई.

जिसे मैंने खो दिया था।

राहुल कुछ नहीं बोला.

दोनों कार में बैठ गए.

रास्ते भर अंजलि खिडकी से बाहर देखती रही.

राहुल सामने की सीट पर बैठा था.

कुछ देर बाद उसने कहा—

मैम?

हां?

अगर मेरी याददाश्त वापस आ गई.

अंजलि का दिल धडकने लगा.

तो?

क्या तब भी मैं आपके घर में रह सकता हूं?

अंजलि ने उसकी तरफ देखा.

उसकी आंखों में एक हल्की मुस्कान थी.

अगर तुम चाहोगे तो।

राहुल ने धीरे से कहा—

शायद मैं चाहूंगा।

अंजलि के चेहरे पर पहली बार सुकून आया.

लेकिन राहुल ने अगला सवाल पूछकर उसे फिर चुप कर दिया.

मैम. अगर मैं आपको पहले से जानता था, तो क्या मैं भी आपसे.

वह रुक गया.

क्या?

राहुल ने खिडकी से बाहर देखते हुए कहा—

कुछ महसूस करता था?

अंजलि की आंखें नम हो गईं.

उसने सामने सडक पर नजरें टिकाईं.

हां।

क्या?

अंजलि ने बहुत धीमी आवाज में कहा—

प्यार।

राहुल ने उसकी तरफ देखा.

कुछ सेकंड तक वह उसे देखता रहा.

फिर अचानक उसके सिर में तेज दर्द उठा.

आह!

अंजलि घबरा गई.

क्या हुआ?

राहुल ने आंखें बंद कर लीं.

उसके दिमाग में एक धुंधली तस्वीर उभरी.

वही लडकी.

वही बारिश.

वही हाथ.

और राहुल की अपनी आवाज—

अंजलि, मैं तुमसे प्यार करता हूं।

तस्वीर अचानक गायब हो गई.

राहुल ने आंखें खोल दीं.

अंजलि उसकी तरफ देख रही थी.

कुछ याद आया?

राहुल ने कुछ पल उसे देखा.

फिर सिर हिलाकर कहा—

नहीं।

लेकिन वह झूठ बोल रहा था.

उसे सब याद नहीं आया था.

सिर्फ एक शब्द याद आया था—

अंजलि.

और उस एक शब्द के साथ उसके दिल में एक अनजाना दर्द पैदा हो गया था.

कार ऑफिस के सामने आकर रुकी.

अंजलि उतरने लगी.

राहुल ने उसे आवाज दी—

मैम।

अंजलि रुकी.

क्या?

राहुल कुछ पल उसे देखता रहा.

फिर बोला—

मुझे नहीं पता आप मेरे लिए कौन हैं. लेकिन जब आप दूर जाती हैं, तो मुझे अच्छा नहीं लगता।

अंजलि की आंखों में आंसू आ गए.

वह मुस्कुराई.

शायद यही रिश्ता है, राहुल. जिसे अभी कोई नाम नहीं मिला।

राहुल उसे देखता रहा.

और अंजलि ऑफिस के अंदर चली गई.

उसे क्या पता था.

उसी वक्त ऑफिस की पार्किंग में खडी एक काली कार के अंदर बैठा एक आदमी राहुल की तस्वीर देख रहा था.

उसने फोन मिलाया.

साहब. राहुल अंजलि के साथ ऑफिस पहुंच गया है।

दूसरी तरफ से आवाज आई—

तो अब अगला कदम उठाओ. इस बार उसे अंजलि से दूर करना है।