BLAST - EPISODE 4 in Hindi Fiction Stories by Muhib Khan books and stories PDF | BLAST - EPISODE 4

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BLAST - EPISODE 4

नौशाद इब्राहिम खान:
"लेकिन गद्दार कौन हो सकता है?! इस कायरो मिशन का खाका सिर्फ एजेंसी के सबसे सीक्रेट लूप में था। मेरी टीम के वो छह जांबाज, जिनकी लाशें आज उस सीमेंट फैक्ट्री में ठंडी पड़ी हैं... और उनके अलावा इस पूरे मिशन की डिटेल्स सिर्फ तुम्हें पता थीं साहिर! मेरी टीम खत्म हो चुकी है, अज़गर खुद चार गोलियां खाकर आईसीयू में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है, दावर वहां अपनी जान दांव पर लगाकर गया था... और तुम वहां ग्राउंड पर मौजूद ही नहीं थे। अगर मेरी टीम नहीं, तुम नहीं, तो फिर यह खबर हमदान तक पहुंचाई किसने यार?!"
कमरे में एक भारी और दमघोंटू सन्नाटा पसर गया। नौशाद की नजरें साहिर के चेहरे पर टिक गईं—वह साहिर जो उसका सबसे पुराना दोस्त था, लेकिन इस वक्त उसी सीक्रेट लूप का इकलौता ज़िंदा बचा हिस्सा भी था।
साहिर ने नौशाद की आँखों में तैरते उस भयानक सवाल को पढ़ लिया। उसने अपनी जैकेट की ज़िप ठीक की और कमरे के दरवाजे की तरफ देखा, जहाँ आईसीयू की मॉनिटर बीप्स के बीच बाहर कदमों की आहट तेज़ हो रही थी।


कमरे में पसरे सन्नाटे को चीरते हुए आईसीयू का भारी स्टील का दरवाज़ा झटके से खुला।
अंदर एक अनजान, काले सूट में नकाबपोश स्पेशल मैसेंजर दाखिल हुआ। उसने कमरे में किसी की तरफ देखे बिना अपने हाथ में थमा टाइटेनियम का भारी ब्रीफकेस सीधे सेंटर टेबल पर रखा और अपने बायोमेट्रिक थंब से उसे अनलॉक कर दिया।
ब्रीफकेस के खुलते ही उसके अंदर से एक हाई-टेक मिलिट्री सैटेलाइट स्क्रीन नीली रोशनी के साथ जल उठी। स्क्रीन पर सीधे इंटेलिजेंस एजेंसी के चीफ और नौशाद के बॉस—डायरेक्टर कबीर बख्शी का चेहरा लाइव आ गया। उनकी आँखों में गुस्सा, अविश्वास और मायूसी का गहरा साया था।
डायरेक्टर बख्शी की भारी और सख्त आवाज़ कमरे में गूंजी:
डायरेक्टर बख्शी:
"नौशाद... ये क्या किया तुमने?! कायरो से जो फुटेज हेडक्वार्टर पहुंची है, उसने पूरे डिफेंस और इंटेलिजेंस नेटवर्क को हिलाकर रख दिया है। अपनी ही बनाई टीम... अपने ही छह जांबाज कमांडोज़ को गोलियों से भून दिया तुमने? क्या जवाब है इस गद्दारी और दरिंदगी का?!"
नौशाद ने बेड से उतरकर सीधे कैमरे की तरफ देखा। उसकी आँखों में आंसू नहीं, बल्कि खुद पर लगे इस खौफनाक दाग को मिटाने की तड़प थी।
नौशाद इब्राहिम खान:
"सर! फुटेज एक सोची-समझी साजिश है। मेरी टीम मेरे मचान तक पहुंचने से पहले ही हमदान के मर्सिनरीज़ के हाथों मारी जा चुकी थी। हमदान को हमारे पूरे ऑपरेशन की एक-एक सेकंड की खबर थी। उसने मुझे धोखे से एक न्यूरोटॉक्सिन केमिकल इंजेक्ट किया था जिसने मेरे दिमाग का कंट्रोल छीन लिया। उस वीडियो को एआई और डीपफेक के जरिए मैनिपुलेट किया गया है सर! हमारी एजेंसी के अंदर कोई गद्दार बैठा है जिसने यह सारा जाल बुना है!"
डायरेक्टर बख्शी ने एक गहरी सांस ली। वे नौशाद के पिछले पंद्रह सालों के बेदाग रिकॉर्ड, उसकी जांबाजी और मुल्क के लिए वफादारी को बहुत अच्छी तरह जानते थे।
डायरेक्टर बख्शी:
"इंटरनेशनल प्रेशर और मिनिस्ट्री का हुक्म बहुत सख्त है नौशाद। तुम्हारे नाम पर 'शूट एट साइट' का वारंट टेबल पर रखा है। लेकिन तुम्हारी पुरानी वफादारी और देश के लिए बहाए गए खून की खातिर... मैं अपनी पूरी कुर्सी दांव पर लगा रहा हूँ।"
स्क्रीन पर एक डिजिटल टाइमर एक्टिवेट हो गया, जिस पर 240:00:00 की उल्टी गिनती शुरू हो गई।
डायरेक्टर बख्शी:
"मैं तुम्हें सिर्फ 10 दिन का वक्त दे रहा हूँ। 240 घंटे! इन दस दिनों में तुम्हें उस केमिकल का एंटीडोट, हमदान का सिर और अपनी बेगुनाही का पक्का सबूत ढूंढकर लाना होगा। अगर दसवें दिन की आखिरी सेकंड तक तुम नाकाम रहे, तो एजेंसी की पूरी ताकत तुम्हें देशद्रोही मानकर ढेर कर देगी।"
नौशाद ने तनकर कहा, "मुझे मंज़ूर है सर।"
डायरेक्टर बख्शी:
"और एक बात कान खोलकर सुन लो... ऑन-पेपर तुम अब एक 'रोग एजेंट' हो। तुम्हें एजेंसी से कोई बैकअप, कोई हथियार, कोई फंड और कोई टीम नहीं मिलेगी। इस मिशन में तुम पूरी तरह अकेले हो। यह तुम्हारी अपनी जंग है नौशाद... गुड लक।"
कॉल कटते ही स्क्रीन पर लाल अक्षरों में 'SELF-DESTRUCT IN 5 SECONDS' ब्लिंक करने लगा।
5... 4... 3...
मैसेंजर ने तुरंत पीछे हटते हुए चिल्लाकर कहा, "कवर!"
साहिर और नौशाद ने तुरंत खुद को आईसीयू की भारी मेटल कैबिनेट के पीछे छुपाया। ठीक अगली ही सेकंड, ब्रीफकेस के अंदर से तेज़ सफेद फास्फोरस की आग और साइलेंट थर्मल चार्ज फटा। कोई बड़ा धमाका नहीं हुआ, लेकिन उस खौफनाक केमिकल आग ने ब्रीफकेस की स्क्रीन, सर्किट और हार्ड ड्राइव को कुछ ही पलों में पिघलाकर काले राख के ढेर में बदल दिया—ताकि इस बातचीत का कोई डिजिटल या फिजिकल सबूत इस दुनिया में बाकी न रहे।
मैसेंजर कमरे से गायब हो चुका था।