अब आगे ,
शौर्य और सांझ से कोई जवाब ना पाकर नैना जी ने दोबारा आवाज दी , " शौर्य ! ! . . . . . सांझ बेटा तुम दोनों कब तक नीचे आओगे ? ?
शौर्य नैना जी की आवाज दोबारा सुनकर कमरे से बाहर आ गया और ऊपर से नीचे झांकते हुए बोला , " मम्मी सांझ अभी तैयार हो रही है , बस उसके तैयार होते ही हम भी तैयार हो जाएंगे । "
" ठीक है ! ! लेकिन तुम दोनों जल्दी करो ! " नैना जी फूलों की थाल मंदिर की तरफ ले जाते हुए बोली ।
शौर्य अपने कमरे में वापस आ कर बेड पे लेट कर सांझ का इंतजार करने लगा ।
कुछ देर बाद भी जब सांझ तैयार हो कर बाहर नही आई , तो शौर्य उठा और अलमारी से अपने कपड़े निकाल कर गेस्ट रूम के वॉशरूम में तैयार होने चला गया ।
कुछ देर बाद ,
जब शौर्य तैयार हो कर अपने रूम में जाने के लिए अपने रूम का दरवाज़ा खोलता है , तो सामने का नज़ारा देख कर वो एकदम शॉक्ड हो गया । सामने सांझ रेड कलर की गोल्डन जरी वाली साड़ी में शीशे के सामने बैठी हुई , अपने बालों को एक साइड कर के ड्रायर से सुखा रही थी । सांझ ने डीप नेक का ब्लाउज पहना हुआ था , जिसकी डोरी खुली हुई थी ।
उसकी नज़र तो सांझ पर जाकर ही अटक गई थी । वो तो पलक झपकाना भी जैसे भूल ही गया था । शौर्य बिना अपनी नज़रें सांझ से हटाएं उसकी ओर बढ़ गया । सांझ जब शीशे में देखती है की शौर्य उसके पीछे ही खड़ा है और उसे ही देख रहा है । तब उसे याद आया की उसने डोरी नहीं बांधी थी । इसीलिए वो उसकी तरफ ही टकटकी लगाए देख रहा है , वो तुरंत खड़ी हुई और अपना चेहरा शौर्य की तरफ कर लिया और जल्दी जल्दी अपनी डोरी बांधने लगी । लेकिन वो बांध नहीं पा रही थी , कुछ पलों बाद भी वो डोरी बांध नहीं पाई ।
शौर्य आगे बढ़ के उसके हाथों को पकड़ लेता है , और उसे रोकते हुए कहता है " हो गया ? हमें नीचे भी जाना है ! तो हमें करने दो अभी ! "
सांझ कुछ बोल पाती उससे पहले ही शौर्य ने उसे तेज़ी से पीछे की ओर पलटा , तेजी से पलटने की वजह से सांझ के बाल उसकी पीठ पर बिखर गए थे । शौर्य उसकी पीठ से उसके बालों को हटाने लगता है । उसके हाथ सांझ की पीठ को छू रहे थे। शौर्य के हाथों की छुअन से सांझ सिहर उठी । उसने अपनी आंखों को कसकर बंद कर लिया , उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी ।
शौर्य डोरी बांध के चला गया , सांझ को जब अपनी पीठ पर शौर्य के हाथों का स्पर्श महसूस नहीं हुआ तो उसने अपनी आंखें खोली और अपनी धड़कनों और अपनी सांसों को काबू करके तैयार होने लगी ।
कुछ देर बाद सांझ तैयार हो कर नीचे आ गई , नीचे हॉल में कोई नहीं था , सिर्फ मीरा बैठी हुई थी ।
" मीरा ! बाकी लोग कहां हैं ? सब लोग बाहर गए है क्या ? . . . . . . . . . . . कोई दिख नहीं रहा है ? सांझ ने मीरा से पूछा ।
" नहीं भाभी वो लोग घर के मंदिर में हैं , हम यहां आप का ही इंतज़ार कर रहे थे ! ! मम्मी ने कहा था की जब आप तैयार हो कर नीचे आ जाए तो आप को मंदिर में लेकर जाना है । बाय द वे भाभी आप इस साड़ी में बहुत सुंदर लग रही हैं । " मीरा ने मुस्कराते हुए कहा ।
मीरा सांझ को लेकर हवेली के पीछे वाले गार्डेन में बने मंदिर में लेकर आ गई ।
" सांझ बेटा आज तुम्हारा इस घर में पहला दिन है , तो आज की पूजा तुम्हे ही करनी है , और शौर्य तुम्हें भी इसके साथ ही पूजा करनी है ! ! " दादी ने सांझ के सर पे प्यार से हाथ फेरते हुए कहा ।
सांझ हा में सर हिला देती है , शौर्य और सांझ दोनों मिल के पूजा करते हैं , उसके बाद सांझ सबको प्रसाद देती है । सब लोग पूजा के बाद वापस आ गए ।
" मीरा बेटा ! वो चुनरी ले आओ जो हमने तुम्हे अभी दी थी । " दादी ने मीरा से कहा ।
" जी दादी , हम अभी लेके आते हैं । " मीरा ने कहा और वो चुनरी लेने चली गई ।
मीरा चुनरी लेके आई और दादी को दे दिया , दादी ने चुनरी सांझ को दे दी और कहा , " बेटा ये चुनरी हम तुम्हें दे रहे हैं , ये बहुत ही ख़ास है । इस चुनरी पे जो जरी हुई है वो सोने के तारों की है , और ये चुनरी जब शौर्य छोटा था , तब तुम्हारे दादा जी ने बनवाई थी । तो इसमें हमारे साथ साथ उनका भी आशीर्वाद है । " दादी ने प्यार से सांझ के सर पे हाथ फेरते हुए कहा ।
" जी दादी हम इसे संभाल कर रखेंगे " । सांझ ने दादी के पैर छू कर आशीर्वाद लेते हुए कहा ।
सांझ को घर में पहले ही दिन इतनी अटेंशन पता देखकर शौर्य को थोड़ी जलन होने लगी ।
" नाउ इफ यू गाईस हैव टाइम , सम वन विल लिसन टू मि ? " शौर्य ने फोन में देखते हुए थोड़ा तेज़ आवाज़ में कहा ।
उसकी आवाज सुनते ही सब घरवाले जो सांझ को घेरकर खड़े हुए थे , अचानक पीछे मुड़कर उसकी तरफ देखने लगे ।
" हा बोलो ना शौर्य बेटा हम सब तुम्हारी बात सुनेंगे । " नैना जी ने कहा ।
"अरे बोलो ना भाई ! हम लोगों ने आप को कहां कुछ बोलने से मना किया है ! " मीरा ने शरारती अंदाज में शौर्य से कहा ।
शौर्य ने मीरा को घूरते हुए कहा , " मिस मीरा आप चुप रहेंगी तो ही हम कुछ बोल पाएंगे ! . . . . . . तो सुनिए आज रात को जो पार्टी होने वाली है , उसमे हम चाहते है की आप सब सीनियर सिटीजन और हम यंगस्टर्स की पार्टी अलग अलग हो । और हम पीछे वाले गार्डेन में पार्टी की तैयारियां भी करवा रहे हैं , अच्छा अब हमें जो बताना था । वो हमने बता दिया तो अब हम ऑफिस जा रहे हैं । और सुनो मीरा तुम अपने जीतने फ्रेंड्स को बुलाना चाहती हो बुला लेना ठीक है ! " शौर्य अपना कोट सोफे से उठाता है और बाहर की ओर चला जाता है ।
सब लोग बस उसे जाता हुआ देखते रह जाते हैं , और गौरव जी तो शॉक में बाहर की तरफ़ ही देख रहे थे जबकि शौर्य अब दिखाई भी नहीं दे रहा था ।
नैना जी गौरव जी के कंधे पर हाथ मारते हुए बोली , " अरे कहां खो गए आप ! वो तो कब का चला भी गया । "
" नैना हमें तो इस लड़के का एक भी रंग समझ नहीं आता , पता नहीं कब क्या कर जाए । क्या जरूरत है , हम लोगों और बच्चों की अलग पार्टी करने की ? साथ में भी तो कर सकते हैं , पार्टी खैर इस लड़के ने जब डिसाइड कर ही लिया है तो ये किसकी भी नहीं सुनेगा । तुम भी जरा सबको बता दो लोगों को जो पार्टी में आयेंगे , की हमारी और बच्चों की पार्टी अलग अलग होगी । हम भी ऑफिस जा रहे हैं । " गौरव जी परेशान हो कर बोले और अपना सर झटक कर बाहर चले गए ।
जारी है !
Hidden Contract Marriage ❤️