The Father's Sacrifice in Hindi Motivational Stories by Nisha Choudhary books and stories PDF | पिता जी - भाग 2

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पिता जी - भाग 2

"पिता जी ने अपनी ज़िंदगी की आखिरी जमापूंजी भी दांव पर लगा दी थी, लेकिन क्या रोशनी उनका यह कर्ज़ कभी उतार पाएगी?

रामेश्वर जी के उस अटूट भरोसे और कुर्बानियों ने रोशनी के अंदर एक नई ऊर्जा भर दी थी। उसने खुद से वादा किया कि पिता जी के पसीने की एक-एक बूंद की कीमत वह अपनी सफलता से चुकाएगी। शहर के उस कोचिंग संस्थान में रोशनी की पढ़ाई शुरू हुई। हर दिन भोर के 4 बजे उठना, 18 घंटे की कड़ी मेहनत और किताबों के बीच खुद को झोंक देना ही अब उसकी दिनचर्या बन चुकी थी। न कोई त्योहार, न कोई शादी-समारोह, रोशनी का सिर्फ एक ही लक्ष्य था—'डॉक्टर रोशनी'।

दूसरी तरफ, पिता रामेश्वर जी की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी। दिन में नौकरी करने के बाद वे रात में एक कारखाने में चौकीदारी का काम करने लगे। शरीर थककर टूट जाता, आँखें नींद से भारी हो जातीं, लेकिन जब भी वे रोशनी के मुस्कुराते चेहरे और उसकी मेडिकल की किताबों को देखते, तो उनका सारा दर्द गायब हो जाता। उन्होंने रोशनी को कभी अपनी इस परेशानी का अहसास नहीं होने दिया। जब भी रोशनी घर फोन करती, पिता जी यही कहते, "बेटा, तू चिंता मत कर, मैं बिल्कुल ठीक हूँ। बस तू मन लगाकर पढ़।"

महीने बीतते गए और आखिर वह दिन भी आ गया जिसका सबको बेसब्री से इंतजार था—'ऑल इंडिया मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम' का दिन। परीक्षा हॉल में बैठते ही रोशनी के दिमाग में अपने पिता जी का थका हुआ चेहरा, उनकी वो पुरानी घड़ी और उनके शब्द गूँजने लगे—"जब तक मेरा साया तेरे सिर पर है, तुझे पीछे हटने की ज़रूरत नहीं है।" रोशनी ने पूरे आत्मविश्वास के साथ पर्चा हल किया।

कुछ हफ़्तों बाद जब परीक्षा का परिणाम आया, तो पूरे गाँव में सनसनी फैल गई। रोशनी ने न केवल परीक्षा पास की थी, बल्कि उसने पूरे देश में 45वीं रैंक हासिल की थी! उसे शहर के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज में मुफ्त सीट मिली थी।

जब रोशनी यह खुशखबरी लेकर घर पहुँची, तो उसने देखा कि पिता जी खाट पर लेटे हुए थे। अत्यधिक काम और थकान के कारण उनका शरीर कमज़ोर हो चुका था। रोशनी दौड़कर उनके कदमों में गिर पड़ी और अपना रिजल्ट उनके हाथों में रख दिया। रामेश्वर जी ने कांपते हाथों से उस कागज को छुआ, रोशनी का नाम 'ऑल इंडिया रैंक 45' के आगे देखा, और उनकी आँखों से खुशी के आँसू बह निकले। पिता की सालों की मेहनत और बेटी का सपना आज हकीकत बन चुका था। रोशनी ने अपने पिता के गले लगकर कहा, "पिता जी, आपने मुझे डॉक्टर बना दिया!"

क्या आप भी रोशनी की तरह अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने की हिम्मत रखते हैं?

अगर यह कहानी आपके दिल को छू गई हो, तो इसे अपने उन दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ ज़रूर शेयर करें जो अपने सपनों के लिए दिन-रात संघर्ष कर रहे हैं।

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