Part 2 — वो राज़
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अगली सुबह आरव पूरी रात सो नहीं पाया था।
काव्या का आखिरी message बार-बार उसके सामने आ रहा था—
“हमें कुछ समय के लिए एक-दूसरे से दूर रहना चाहिए।”
आरव ने आखिर तय किया कि वह काव्या से सामने मिलकर बात करेगा।
कॉलेज पहुँचते ही उसकी नजर काव्या पर पड़ी।
वह अकेली खड़ी थी।
आरव उसके पास गया।
“काव्या, मुझसे बात करो।”
काव्या ने उसकी तरफ देखा।
“आरव… बात करने से कुछ नहीं बदलेगा।”
“लेकिन मुझे जानने का हक है कि हुआ क्या है।”
काव्या चुप रही।
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आरव ने पूछा—
“क्या मेरे परिवार की वजह से तुम मुझसे दूर हो रही हो?”
काव्या ने नजरें झुका लीं।
आरव समझ गया।
“मेरे पापा और तुम्हारे परिवार के बीच क्या हुआ था?”
काव्या ने धीरे से कहा—
“मुझे नहीं पता।”
“तो फिर तुम मुझसे दूर क्यों जा रही हो?”
“क्योंकि मेरे पापा ने कहा है।”
“और तुम उनकी बात मान लोगी?”
काव्या की आँखें नम हो गईं।
“मैं अपने पापा को गलत साबित नहीं कर सकती।”
आरव ने कहा—
“लेकिन मुझे गलत साबित किए बिना मुझे छोड़ सकती हो?”
काव्या के पास कोई जवाब नहीं था।
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उसी शाम आरव घर पहुँचा।
उसने अपने पिता को अकेले कमरे में देखा।
“पापा, मुझे आपसे कुछ पूछना है।”
राजीव मेहरा ने अखबार नीचे रख दिया।
“क्या हुआ?”
“शर्मा परिवार को जानते हैं?”
राजीव का चेहरा अचानक बदल गया।
कुछ सेकंड तक कमरे में बिल्कुल शांति रही।
फिर उन्होंने पूछा—
“तुमने उनका नाम कहाँ सुना?”
आरव ने पहली बार अपने पिता की आँखों में ऐसा डर देखा था।
“काव्या शर्मा मेरी दोस्त है।”
राजीव तुरंत खड़े हो गए।
“उस लड़की से दूर रहो।”
आरव हैरान रह गया।
“लेकिन क्यों?”
राजीव ने कठोर आवाज में कहा—
“मैंने कहा ना, उससे दूर रहो!”
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आरव ने पहली बार अपने पिता से सवाल किया।
“आप मुझे सच क्यों नहीं बताते?”
राजीव चुप रहे।
आरव ने कहा—
“क्या सच में शर्मा परिवार के साथ कुछ हुआ था?”
राजीव ने खिड़की की तरफ देखा।
“कुछ बातें जितनी पुरानी होती हैं… उतनी ही खतरनाक होती हैं।”
“लेकिन वो बात मेरी जिंदगी को प्रभावित कर रही है।”
राजीव ने उसकी तरफ देखा।
“आरव, मैं तुम्हें सिर्फ इतना कह सकता हूँ…”
वह कुछ पल रुके।
“काव्या से दूर रहो।”
आरव ने पूछा—
“अगर मैं नहीं रहा तो?”
राजीव ने कोई जवाब नहीं दिया।
लेकिन उनके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था।
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दूसरी तरफ काव्या अपनी माँ के कमरे में गई।
उसने वही पुरानी तस्वीर सामने रखी।
“माँ, मुझे सच बताइए।”
उसकी माँ कुछ देर तस्वीर को देखती रही।
फिर बोली—
“तुम्हें यह सब जानने की जरूरत नहीं है।”
“लेकिन मेरी जिंदगी इससे जुड़ गई है।”
माँ की आँखों में आँसू आ गए।
“तुम्हें आरव से प्यार हो गया है?”
काव्या चुप रही।
उसकी खामोशी ही जवाब थी।
माँ ने गहरी साँस ली।
“तो फिर शायद अब तुम्हें सच जानना ही होगा।”
काव्या ने हैरानी से उनकी तरफ देखा।
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काव्या की माँ अलमारी के पास गईं।
उन्होंने एक पुराना लकड़ी का box निकाला।
Box के अंदर कई पुराने कागज और तस्वीरें थीं।
उन्होंने एक छोटी सी diary काव्या को दी।
“ये तुम्हारे दादा की diary है।”
काव्या ने diary खोली।
पहले कुछ pages पुराने घटनाओं से भरे थे।
फिर एक जगह उसकी नजर रुक गई।
एक नाम बार-बार लिखा था—
राजीव मेहरा।
काव्या की धड़कन तेज हो गई।
“मेहरा परिवार का इससे क्या संबंध है?”
माँ ने धीरे से कहा—
“तुम्हारे दादा और आरव के पिता कभी बहुत अच्छे दोस्त थे।”
काव्या चौंक गई।
“फिर दुश्मन क्यों बने?”
माँ ने सिर झुका लिया।
“क्योंकि उस रात कुछ ऐसा हुआ था… जिसने सब कुछ बदल दिया।”
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काव्या ने पूछा—
“कौन-सी रात?”
उसकी माँ ने जवाब देने से पहले दरवाजा बंद किया।
फिर धीमी आवाज में बोलीं—
“बीस साल पहले।”
“उस रात दोनों परिवार एक साथ थे।”
“और उसके बाद तुम्हारे दादा ने मेहरा परिवार से सारे रिश्ते खत्म कर दिए।”
काव्या ने पूछा—
“क्यों?”
माँ ने कहा—
“क्योंकि उन्हें लगा था कि तुम्हारे दादा के साथ धोखा हुआ है।”
“किसने धोखा दिया?”
माँ ने उसकी तरफ देखा।
“यही बात आज तक पूरी तरह साबित नहीं हुई।”
काव्या ने diary को और कसकर पकड़ लिया।
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काव्या ने diary का अगला page पलटा।
वहाँ एक पुराना नक्शा बना था।
नक्शे पर शहर से बाहर एक जगह पर लाल निशान लगा था।
नीचे सिर्फ एक तारीख लिखी थी—
17 जुलाई।
काव्या ने पूछा—
“ये जगह क्या है?”
माँ ने धीरे से कहा—
“पुराना मेहरा फार्महाउस।”
काव्या चौंक गई।
“मेहरा परिवार का?”
माँ ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
“और इस diary में ये क्यों है?”
माँ ने कहा—
“क्योंकि तुम्हारे दादा आखिरी बार वहीं गए थे।”
काव्या कुछ बोल नहीं पाई।
अब उसे समझ आ रहा था कि यह सिर्फ पुरानी family fight नहीं थी।
इसके पीछे कुछ और था।
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उसी रात आरव अपने कमरे में बैठा था।
उसे अपने पिता की बात याद आ रही थी—
“कुछ बातें जितनी पुरानी होती हैं… उतनी ही खतरनाक होती हैं।”
तभी उसे अपने पुराने सामान में एक छोटी चाबी मिली।
उसे याद आया—
यह चाबी उसे बचपन में उसके पिता ने दी थी।
चाबी के साथ एक छोटा metal tag लगा था।
उस पर लिखा था—
M-17
आरव कुछ पल उसे देखता रहा।
उसे अचानक काव्या की diary में लिखी तारीख याद आई—
17 जुलाई।
उसने तुरंत अपना फोन उठाया।
काव्या को message लिखा—
“मुझे लगता है हमारे परिवारों के बीच जो हुआ था, उसका सच हमें मिलकर ढूँढना होगा।”
इस बार…
काव्या ने तुरंत reply किया।
“कल मिलो।”
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अगले दिन दोनों शहर के एक शांत पार्क में मिले।
काव्या के हाथ में diary थी।
आरव के हाथ में वह पुरानी चाबी।
दोनों ने एक-दूसरे की चीज़ें देखीं।
काव्या ने पूछा—
“तुम्हारे पास ये कहाँ से आई?”
आरव ने कहा—
“पापा के पुराने सामान से।”
काव्या ने diary खोली।
दोनों ने एक ही बात महसूस की—
चाबी और diary एक ही रहस्य की ओर इशारा कर रहे थे।
काव्या ने धीरे से कहा—
“हमें उस फार्महाउस जाना होगा।”
आरव ने उसकी तरफ देखा।
“क्या तुम तैयार हो?”
काव्या ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
दोनों को नहीं पता था कि उस पुराने फार्महाउस में उन्हें क्या मिलेगा।
लेकिन एक बात तय थी—
उनकी मोहब्बत अब सिर्फ मोहब्बत नहीं रही थी।
अब वह एक ऐसे राज़ की तलाश बन चुकी थी…
जो उनके दोनों परिवारों की पूरी कहानी बदल सकता था।
Part 2 समाप्त।
आगे — Part 3: “पुराना फार्महाउस”