Part 5 —
अमन कौन है?
पुराने घर के अंदर अचानक खामोशी छा गई।
आरव और मीरा दरवाजे के पास खड़े उस आदमी को देख रहे थे।
आदमी की उम्र लगभग तीस साल थी।
उसके हाथ में वही पुरानी तस्वीर थी।
आरव ने पूछा,
“तुम अमन हो?”
आदमी ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
“हाँ।”
मीरा ने तुरंत पूछा,
“तुम्हें हमारे बचपन के बारे में कैसे पता?”
अमन कुछ कदम आगे आया।
“क्योंकि मैं उस दिन वहाँ था।”
आरव का चेहरा गंभीर हो गया।
“15 जुलाई 2012 को?”
अमन ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
मीरा ने पूछा,
“उस दिन हुआ क्या था?”
अमन ने जवाब देने के बजाय कमरे की टूटी हुई खिड़की की तरफ देखा।
“तुम दोनों बहुत छोटे थे।”
“और तुम?”
“मैं तुमसे थोड़ा बड़ा था।”
आरव ने कहा,
“फिर हमें अलग किसने किया?”
अमन चुप रहा।
“अमन!”
आखिरकार उसने कहा,
“तुम्हारे परिवार ने।”
आरव हैरान रह गया।
“मेरे परिवार ने?”
“हाँ।”
मीरा ने पूछा,
“क्यों?”
अमन ने उसकी तरफ देखा।
“क्योंकि उस दिन एक हादसा हुआ था।”
कमरे में फिर खामोशी छा गई।
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अमन ने अपनी जेब से एक पुरानी डायरी निकाली।
“इसमें उस दिन की पूरी बात लिखी है।”
आरव ने डायरी लेने के लिए हाथ बढ़ाया।
लेकिन अमन ने रोक दिया।
“अभी नहीं।”
“क्यों?”
“क्योंकि अगर तुमने इसे पढ़ लिया, तो तुम्हारे परिवार की पूरी कहानी बदल जाएगी।”
आरव ने गुस्से में कहा,
“मुझे फर्क नहीं पड़ता।”
अमन ने कहा,
“फर्क पड़ेगा।”
“क्यों?”
“क्योंकि तुम्हारे पिता ने तुमसे सिर्फ एक बात नहीं छिपाई।”
मीरा ने पूछा,
“तो कितनी बातें छिपाई हैं?”
अमन ने उसकी तरफ देखा।
“तुम्हारी पूरी जिंदगी।”
मीरा के चेहरे पर डर दिखाई दिया।
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अचानक बाहर कार रुकने की आवाज आई।
अमन तुरंत खिड़की की तरफ गया।
“वे यहाँ आ गए।”
आरव ने पूछा,
“कौन?”
अमन ने जवाब नहीं दिया।
उसने डायरी आरव के हाथ में दे दी।
“इसे लेकर पीछे के दरवाजे से निकलो।”
आरव ने पूछा,
“और तुम?”
“मैं उन्हें रोकूँगा।”
मीरा ने कहा,
“लेकिन—”
“जाओ!”
आरव और मीरा पीछे के दरवाजे से बाहर निकल गए।
कुछ सेकंड बाद मुख्य दरवाजा खुला।
दो आदमी अंदर आए।
उनमें से एक आरव के पिता थे।
उन्होंने अमन को देखा।
“तुमने उन्हें यहाँ बुलाया?”
अमन ने कहा,
“अब उन्हें सच जानने का अधिकार है।”
आरव के पिता ने गुस्से में कहा,
“तुम नहीं जानते कि तुम क्या कर रहे हो।”
अमन मुस्कुराया।
“बारह साल पहले भी आपने यही कहा था।”
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उधर आरव और मीरा पुराने रास्ते से भागते हुए आगे बढ़ रहे थे।
मीरा ने पूछा,
“डायरी में क्या है?”
आरव ने कहा,
“पता नहीं।”
“खोलो।”
आरव ने डायरी खोली।
पहले पन्ने पर एक तारीख लिखी थी—
15 जुलाई 2012
उसके नीचे लिखा था—
“आज आरव और मीरा ने एक वादा किया।”
मीरा ने धीरे से पूछा,
“कौन सा वादा?”
आरव ने अगला पन्ना पलटा।
लेकिन अगला पन्ना फटा हुआ था।
फिर अगला पन्ना।
वह भी फटा हुआ।
पूरी डायरी के बीच के कई पन्ने गायब थे।
सिर्फ आखिरी पन्ना बचा था।
उस पर लिखा था—
“अगर कभी दोनों दोबारा मिले, तो उन्हें यह मत बताना कि उस रात असल में किसकी गलती थी।”
आरव ने डायरी बंद कर दी।
मीरा ने पूछा,
“किसकी गलती?”
आरव के पास कोई जवाब नहीं था।
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रात में दोनों अपने-अपने घर लौटे।
आरव कमरे में बैठा डायरी को देख रहा था।
तभी उसके फोन पर एक मैसेज आया।
“डायरी तुम्हारे पास है, लेकिन उसका आखिरी पन्ना तुम्हारे पास नहीं है।”
आरव चौंक गया।
उसने तुरंत नंबर पर फोन किया।
फोन बंद था।
उसी समय मीरा के फोन पर भी मैसेज आया।
“तुम्हें अपने बचपन की सिर्फ आधी याद वापस आई है।”
मीरा ने जवाब लिखा—
“तुम कौन हो?”
कुछ सेकंड बाद जवाब आया—
“वही इंसान, जिसने तुम्हें उस रात बचाया था।”
मीरा की आँखें फैल गईं।
उसने पूछा—
“अमन?”
जवाब आया—
“नहीं।”
और फिर एक दूसरा मैसेज आया—
“अमन भी तुम्हें पूरी सच्चाई नहीं बता रहा।”
मीरा के हाथ से फोन लगभग गिर गया।
उसी समय आरव के फोन पर भी एक मैसेज आया।
“अगर तुम सच जानना चाहते हो, तो कल सुबह 8 बजे पुराने रेलवे स्टेशन पर अकेले आना।”
नीचे सिर्फ एक नाम लिखा था—
“तुम्हारा पहला प्यार।”
आरव स्क्रीन को देखता रह गया।
क्योंकि उसे पता था—
वह मैसेज मीरा ने नहीं भेजा था।
जारी रहेगा…