letter from a friend in Hindi Love Stories by महेश रौतेला books and stories PDF | दोस्त का पत्र

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दोस्त का पत्र

दोस्त का पत्र:

जब पहली बार नैनीताल पहुँचा तो तब नैनी झील प्रसन्न थी,लबालब भरी। भीड़भाड़ कम थी। वातावरण को मनुष्य अनुशासित न रहे तो प्रदुषित करता है। सौन्दर्य भी गढ़ता है, यदि सृष्टा हो। पहले दिन बारिश हो रही थी। सभी दिशायें खुली थीं। दाँत दर्द ने चुनौती पेश कर दी थी। अतः सबसे पहले बी. डी. पाण्डे अस्पताल में दाँत निकलवाने डाक्टर के पास गया। तब एमबीबीएस डाक्टर ही दाँत निकाल देते थे,पाँच रुपये में। तब जीवन अधिक स्वभाविक था। तनाव दूर-दूर तक नहीं था। कक्षा में एक लड़का पत्र लिख कर लाया था-"तुम्हें मैं प्रतिदिन अपने छात्रावास आते-जाते देखता हूँ। जैसे अपने गाँव से हिमालय को देखता था। सुन्दर, स्वच्छ, चमकता, श्रृंगयुक्त,भव्य,दिव्य,सभ्य। विद्यालय के रास्ते में हम ठिठक कर, मुस्कुरा कर, सहपाठी होने की अनुभूति का आदान-प्रदान करते हैं। तुम्हें पता है या नहीं। सोचता हूँ पता होगा।


मेरे गाँव के पास घना जंगल है। एक बार दस साल के बच्चे को उसकी दादी के सामने से गुलदार(तेंदुआ) उठा के ले गया था। दादी ने हल्ला मचाया। गाँव वाले दौड़े आये। गुलदार बच्चे को लगभग दो सौ मीटर दूर छोड़कर भाग गया। बच्चे की माँ बिलखती रही। बच्चे के शान्त चेहरे पर हाथ फेरती रही। प्राण के बिना शरीर महत्वहीन होने लगता है। मैंने सोचा एक दिन उस गुलदार का सामना मेरे से हो और मैं कुल्हाड़ी से उसे मार दूँ।
गंगाराम खेत में हल चलाता है।गाँव के सीढ़ीनुमा खेत जीवन की तरह मुड़े होते हैं। गंगाराम की पत्नी खेत में ही चाय और नाश्ता लेकर आती है। बच्चे खेत की मिट्टी को महीन करते हैं। फसल अच्छी हो यही उनका सपना है। बारिश समय से न हो तो उनकी चिन्ता बढ़ने लगती है।

कभी-कभी खेत में गिल्ली- डंडा खेलते हैं बच्चे। गिल्ली को डंडे से मारकर दूर फेंका जाता है। वह एक कला है, गिल्ली उछालकर डंडे से मारना। फिर डंडे से दूरी नापी जाती है। गिल्ली यदि उछाल के समय पकड़ में आ जाय तो खिलाड़ी आउट हो जाता है।
पास के गाँव में केवल दो लोग रहते हैं। और सब पलायन कर शहर आ गये हैं। जो दो लोग हैं गाँव में, वे  बुजुर्ग हैं। शाम को साथ-साथ बैठ, गाँव की बीती चहल-पहल को याद करते हैं। शादियां, झोड़े,गपशप, कहानियों का रेला।   फिर आसमान को देख सो जाते हैं।
 मैं जब गाँव से आ रहा था तो एक बड़े पत्थर पर लिख आया था," मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ, लेकिन जाना पड़ रहा है। चलना ही जीवन है। लौटकर आऊँगा तो तुझे देखने आऊँगा।"  गहत के खेत में कुछ पत्थर दबा के आया हूँ। लौटने की आशा में। ममता मिट्टी से जुड़ी होती है।

वे दोस्त जो घराट पर मिलते थे, कुछ गरीब परिवारों के, कुछ सक्षम परिवारों के बारी-बारी से गेहूँ पीसकर घर चले जाते थे। खेल- खेल में समय बीत जाता था। 

गाँव का लड़का जब दिल्ली गया तो वहाँ से चिट्ठी लिखता है" घास के वन में घास लम्बी हो चुकी होगी। बिल्कुल हरीभरी। दूर-दूर तक हरियाली छा गयी होगी। हरी घास के बीच होना बहुत अच्छा लगता होगा।"

हमारे गाँव में एक महिला घास काटने गयी थी। प्यार का गीत गा रही थी। पैर फिसला और वह पहाड़ से नीचे गिर गयी। श्मशान पर भीड़ लगी थी। जिन्होंने उसका सामाजिक बहिष्कार कर रखा था वे भी उसकी प्रशंसा कर रहे थे। हर जीवन में कुछ सत्य छुपा रहता है,जिसकी अन्त में सराहना की जाती है।
ग्राम प्रधान के चुनाव में तीन उम्मीदवार थे। दो उम्मीदवारों ने शराब-मांस के भोज मतदाताओं को लुभाने के लिए दिये, रात के गहरे अँधेरे में।जिस उम्मीदवार ने भोज नहीं दिया, उसे सबसे कम मत मिले।

तुम्हारे कदम गिनता, मैं भूल जाता  अपना अस्तित्व। तुम पहले दिन नहीं आये। दूसरे दिन भी नहीं आये। तीसरे दिन भी नहीं आये। सोचा शायद बीमार होगे। मैं कक्षा में अनमना सा रहता। तुम्हारी उपस्थिति मुझमें अतिरिक्त उर्जा संचार करती थी। तुम्हारा रुमाल जो भौतिक विज्ञान प्रयोगशाला में छूटा था,वह मेरे पास अभी तक अनेक तहों में मुड़ा संभाल के रखा हुआ  है।
 एकदिन सुना तुम अमेरिका जाने वाले हो। सुनकर हताश हो गया था। पता नहीं इस पत्र को तुम्हें दे पाऊँगा या नहीं। एक बार तुम्हारी सामने वाली सीट पर कंपकंपाते हाथों से रख आया था स्नेहिल शब्द। लेकिन दोस्त विनोद ने बोला," नासमझ, ये क्या कर रहा है?" वह पत्र को तुम्हारे आने से पहले उठा लाया।