अगला दृश्य...
वेरेला विला का गार्डन। 🌸
युई हाथ में फलों की प्लेट लिए धीरे-धीरे बगीचे में टहल रही थी।
लेकिन पता नहीं क्यों...
आज उसका मन बिल्कुल शांत नहीं था।
उसके दिल में एक अजीब सी बेचैनी बार-बार उठ रही थी। 😟
"पता नहीं क्यों..."
"मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कुछ गलत होने वाला है।"
वह रुक गई।
उसकी नज़रें कहीं दूर खो गईं।
"पर क्या...?"
"कोई मुसीबत...?"
"या फिर डॉक्टर की रिपोर्ट में कुछ है...?"
फिर उसने खुद ही सिर हिलाया।
"नहीं..."
"डॉक्टर ने तो कहा था कि सब ठीक है।"
"फिर मुझे इतनी बेचैनी क्यों हो रही है...?"
कुछ पल बाद उसने गहरी सांस ली।
और धीरे से अपने पेट पर हाथ रख दिया। 🤍
"शायद प्रेग्नेंसी की वजह से मैं ज्यादा सोच रही हूँ।"
"मुझे खुद को तनाव नहीं देना चाहिए..."
"क्योंकि अब मैं अकेली नहीं हूँ।"
उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।
वह प्यार से अपना पेट सहलाने लगी।
"मेरा बच्चा..." 🥹
"तुम जल्दी आना..."
"मम्मा को अब और इंतज़ार नहीं होता।"
उसके होंठों पर एक प्यारी सी मुस्कान खिल उठी।
लेकिन...
उसे नहीं पता था कि उसकी बेचैनी यूँ ही नहीं थी।
◇◇◇
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वेरेला इंडस्ट्रीज़ – सीईओ कैबिन 🏢
समर सामने खड़ा था।
उसका चेहरा गंभीर था।
"बॉस..."
"जो जानकारी मुझे मिली है..."
"उसके हिसाब से हमारी कंपनी के अंदर ही कोई गद्दार मौजूद है।"
कमरे में सन्नाटा छा गया।
जुशेंग की आँखें धीरे से उठीं।
"हम्म..." 😐
समर ने आगे कहा,
"और मुझे लगता है..."
"आप जानते हैं वो कौन है।"
कुछ सेकंड की खामोशी।
फिर जुशेंग के होंठों पर हल्की सी ठंडी मुस्कान आई।
"उसे तो..."
वह बात अधूरी छोड़ गया।
समर सब समझ गया।
"समझ गया, बॉस।"
जुशेंग ने बस हाथ से जाने का इशारा किया।
"जाओ।"
"जी, बॉस।"
समर बाहर निकल गया।
◇◇◇
कुछ देर बाद...
पूरा कैबिन खाली था।
जुशेंग अपनी कुर्सी से उठा।
धीरे-धीरे चलते हुए कांच की बड़ी खिड़की के पास गया।
दोनों हाथ कांच पर टिकाकर नीचे शहर को देखने लगा।
उसकी आँखों में कोई भावना नहीं थी।
सिर्फ ठंडापन। ❄️
फिर अचानक वह धीमी आवाज़ में गुनगुनाने लगा।
"गलती की सज़ा तो मौत है..."
"मौत..."
"बहुत भयानक होती है..."
उसकी आवाज़ सुनकर जैसे कमरे का तापमान गिर गया हो।
उसकी आँखें लाल हो चुकी थीं।
चेहरा पूरी तरह भावहीन।
और उस पल...
वह इंसान नहीं, किसी तूफान से पहले की खामोशी लग रहा था। 😶
◇◇◇
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कॉलेज कैंपस 🎓
एक लड़की फोन पर बात कर रही थी।
"हे भगवान..."
"तुम ठीक हो ना?" 😟
दूसरी तरफ से आवाज़ आई,
"हाँ यार, मैं बिल्कुल ठीक हूँ।"
लड़की ने राहत की सांस ली।
"हम्म..."
"तो फिर इतनी खुश क्यों लग रही हो?"
"कोई गुड न्यूज़ है क्या?" 😏
दूसरी तरफ से हल्की हँसी सुनाई दी।
"कुछ ऐसा ही समझ लो।"
लड़की उछल पड़ी।
"अरे वाह!"
"अब जल्दी बताओ भी!"
"क्या बात है मेरी जान?" 😂
लेकिन जैसे ही सामने वाला कुछ कहने वाला था...
फोन अचानक बंद हो गया।
"ओह शिट!"
"फिर से बैटरी खत्म!" 😩
वह परेशान होकर फोन देखने लगी।
तभी पीछे से आवाज़ आई।
"अरे सिम्मी... सुनो!"
लड़की मुड़ी।
"क्या हुआ?" 🤨
◇◇◇
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एक विमान। ✈️
खिड़की वाली सीट पर एक युवक बैठा था।
तेज़ नैन-नक्श।
गंभीर व्यक्तित्व।
और आँखों में अजीब सा आत्मविश्वास।
तभी पीछे से एक कॉन्स्टेबल आया।
"सर, वहाँ सब तैयार है।"
युवक ने बिना ऊपर देखे जवाब दिया।
"हम्म।"
यही था...
रेहान ओबरॉय।
एक ईमानदार और सख्त पुलिस अधिकारी।
डीसीपी।
जिसके नाम से बड़े-बड़े अपराधी घबराते थे। ⚖️
काम के मामले में वह बिल्कुल समझौता नहीं करता था।
रेहान ने अपना लैपटॉप खोला।
और चुपचाप कुछ फाइलें देखने लगा।
उसकी आँखों में एक अजीब सी गंभीरता थी।
जैसे वह किसी बहुत बड़े मामले की ओर बढ़ रहा हो।
◇◇◇
अगला दृश्य...
अंधेरा कमरा। 🌑
"आहाहा..."
"क्या बात है..."
"क्या बात है..." 😂
पागलों जैसी हँसी पूरे कमरे में गूँज रही थी।
"हारना हो..."
"या जीतना..."
"मज़ा तो तभी आता है जब खेल बड़ा हो..." 😏
वह हँसता रहा।
और उसकी हँसी धीरे-धीरे और डरावनी होती गई।
"खेल शुरू हो चुका है..."
"अब देखते हैं..."
"आख़िर तक कौन बचता है..." 👀🔥
कमरे में फिर वही खामोशी लौट आई।
लेकिन उस खामोशी के पीछे...
एक तूफान जाग चुका था।
◇◇◇
अगला दृश्य...
वेरेला विला – रात 🌙
पूरा विला शांत था।
लेकिन युई का मन बिल्कुल शांत नहीं था।
वह कमरे में इधर-उधर टहल रही थी।
बार-बार घड़ी देख रही थी।
बार-बार फोन की स्क्रीन।
"अभी तक आए नहीं..." 😟
"क्या हुआ होगा...?"
"फोन भी नहीं उठा रहे..."
उसके चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी।
कुछ पल बाद उसने समय देखा।
"अरे...!"
"रात के ग्यारह बज गए?" 😳
वह बालकनी की तरफ चली गई।
ठंडी हवा उसके चेहरे को छू रही थी।
"रामू काका की वजह से मैंने तो खाना खा लिया..."
"लेकिन उन्होंने खाया भी होगा या नहीं...?" 😔
"इतना काम भी कोई करता है क्या..."
युई धीरे से बड़बड़ाई।
तभी...
बाहर से कार के हॉर्न की आवाज़ आई। 🚗
युई की आँखें चमक उठीं।
वह जल्दी से बालकनी की तरफ भागी।
नीचे ड्राइववे में एक परिचित कार रुक रही थी।
युई ने राहत की साँस ली।
"थैंक यू शिवजी..." 🥹🤍
"आ गए..."
उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।
◇◇◇
कुछ देर बाद...
कमरे का दरवाज़ा खुला।
जुशेंग अंदर आया।
लेकिन...
उसने युई की तरफ देखा तक नहीं।
वह सीधे अलमारी की तरफ गया।
एक फाइल निकाली।
और तुरंत वापस मुड़ गया।
"हबी..." 😟
युई ने पुकारा।
जुशेंग रुका भी नहीं।
"प्लीज़ बेबी..."
"कुछ बहुत अर्जेंट है।"
उसने जल्दी से कहा।
और बिना उसकी तरफ देखे कमरे से बाहर चला गया।
दरवाज़ा बंद हो गया।
कमरे में फिर सन्नाटा छा गया।
युई वहीं खड़ी रह गई।
कुछ सेकंड तक।
बस दरवाज़े को देखती हुई।
उसे बुरा लगा।
बहुत बुरा।
क्योंकि आज जुशेंग ने उसे देखा तक नहीं था। 😔
लेकिन फिर उसने खुद को समझाया।
"शायद सच में कोई ज़रूरी काम होगा..."
"मैं बेकार में सोच रही हूँ।"
तभी...
उसके फोन में एक नोटिफिकेशन आया। 📱
युई ने स्क्रीन देखी।
संदेश था—
"Baby, bahut raat ho gayi hai."
"Go to sleep."
"Apna dhyan rakho." ❤️
कुछ पल के लिए युई चुप रह गई।
फिर उसके होंठों पर मुस्कान आ गई।
लेकिन उसी मुस्कान के साथ...
आँखों के कोने में नमी भी उतर आई। 🥹
उसने जल्दी से आँसू पोंछ दिए।
"पागल..."
वह धीरे से बुदबुदाई।
और कपड़े बदलने चली गई।
◇◇◇
अगला दृश्य...
समर का घर 🏠
जुशेंग लैपटॉप के सामने बैठा था।
कमरे में कई फाइलें खुली हुई थीं।
"क्या हुआ उसका?" 😐
उसने भारी आवाज़ में पूछा।
समर ने उबासी लेते हुए जवाब दिया।
"हो गया दोस्त..."
"सब तैयार है।"
जुशेंग ने बस एक नज़र उसकी तरफ डाली।
"हम्म।"
"और मीटिंग?"
समर ने कुर्सी पर फैलते हुए कहा,
"वो भी तैयार है कल के लिए।"
जुशेंग ने फिर लैपटॉप की स्क्रीन की तरफ देखा।
"फिर भी एक बार चेक करते हैं।"
समर ने दोनों हाथ ऊपर कर दिए।
"जुशेंग, प्लीज़ यार..." 😩
"सोने दे मुझे।"
"वैसे भी मेरी ड्यूटी खत्म हो चुकी है..."
जुशेंग ने बिना ऊपर देखे कहा,
"तो सो जाओ।"
समर ने मुँह बना लिया।
"इतना बेरहम दोस्त भी कोई होता है क्या..." 😂
लेकिन जुशेंग अब पूरी तरह काम में डूब चुका था।
उसकी उंगलियाँ कीबोर्ड पर लगातार चल रही थीं।
जैसे उसे किसी चीज़ की बहुत जल्दी हो।
◇◇◇
अगला दृश्य...
एयरपोर्ट ✈️
विमान धीरे-धीरे रनवे पर उतर चुका था।
दरवाज़ा खुला।
और यात्रियों की भीड़ बाहर निकलने लगी।
उसी भीड़ के बीच...
रेहान ओबरॉय बाहर आया।
उसके कदम शांत थे।
लेकिन व्यक्तित्व ऐसा था कि लोग अनजाने में रास्ता छोड़ दें।
उसने एक गहरी साँस ली।
रात की हवा उसके चेहरे से टकराई।
उसके होंठों पर हल्की मुस्कान उभरी।
"ये शहर..." 😌
उसने आसमान की तरफ देखा।
"इसकी खुशबू भी बिल्कुल तुम्हारी तरह है..."
कुछ पल के लिए उसकी आँखों में एक अनजानी याद चमक उठी।
फिर वह मुस्कुराया।
"हाँ..."
"बिल्कुल कांची..." 🌙
और अगले ही पल...
उसकी नज़रें फिर से गंभीर हो गईं।
जैसे कोई पुरानी कहानी...
दोबारा शुरू होने वाली हो।
Countue......
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