Mafia saiya chapter 4 in Hindi Love Stories by Shilpi Mishra books and stories PDF | Mafia saiya chapter 4

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Mafia saiya chapter 4



अध्याय 4 : जबरदस्ती की शादी

"शादी? किसकी शादी?" नित्या बेड से उछल कर खड़ी हो गई।

रुद्र ने फोन काटा और उसकी तरफ मुड़ा। सिगरेट अभी भी उसके होंठों में थी।

"हमारी। तेरी और मेरी।" उसने बड़े ही आराम से कहा, जैसे वो सब्जी लाने की बात कर रहा हो।

"तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है! मैं तुमसे शादी क्यों करूँगी? मैं तुम्हें जानती भी नहीं हूँ!" नित्या चीखी।

रुद्र धीरे-धीरे उसके पास आया। उसने सिगरेट बुझाई और नित्या की ठुड्डी पकड़ कर ऊपर उठाया।

"जानती नहीं है तो जान जाएगी। पूरी जिंदगी पड़ी है जानने के लिए। पंडित सुबह 7 बजे आएगा।"

"मैं नहीं करूँगी! कभी नहीं!"

"करेगी।" रुद्र ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा। "वरना तेरी वो बूढ़ी माँ, जो हॉस्पिटल में अकेली है... उसका क्या होगा? सुना है रायपुर में एक्सीडेंट बहुत होते हैं।"

नित्या का चेहरा सफेद पड़ गया। "तुम... तुम मेरी माँ को कुछ नहीं करोगे! तुम इतने गिरे हुए हो!"

"मैं कुछ भी कर सकता हूँ, जंगली बिल्ली। तेरे लिए मैं भगवान बन भी सकता हूँ और शैतान भी। फैसला तेरा है।"

नित्या जमीन पर बैठ गई और रोने लगी। उसे समझ आ गया था, वो एक ऐसे जाल में फँस गई है जहाँ से निकलना नामुमकिन है।

सुबह के 7 बजे।

पूरा राजावत हवेली फूलों से सजा हुआ था। ढोल-नगाड़े बज रहे थे। नौकर भाग-दौड़ कर रहे थे।

और बीच आंगन में एक छोटा सा मंडप लगा था।

पंडित जी मंत्र पढ़ रहे थे।

रुद्र शेरवानी में तैयार था। काला कुर्ता नहीं, आज सुनहरी शेरवानी। लग रहा था जैसे कोई राजा अपनी रानी का इंतजार कर रहा हो।

पर उसकी रानी... दुल्हन के जोड़े में, आँखों में आँसुओं के साथ मंडप में लाई गई।

लाल जोड़ा, मांग में सिंदूर नहीं, हाथों में मेहंदी नहीं। सिर्फ आँखों में नफरत।

दो नौकरों ने उसे पकड़ रखा था।

"छोड़ो मुझे! मुझे नहीं करनी ये शादी!" नित्या चिल्ला रही थी।

रुद्र ने इशारे से नौकरों को हटाया और खुद नित्या का हाथ पकड़ा।

"श... इतना शोर मत मचा। देख, सब देख रहे हैं। राजावत खानदान की बहू ऐसे चिल्लाती हुई अच्छी नहीं लगती।"

उसने नित्या को मंडप में बिठाया।

पंडित जी ने कहा, "कन्यादान के लिए लड़की के पिता को बुलाइए।"

रुद्र ने कहा, "पिता नहीं है। आज से इसका बाप, भाई, सब मैं हूँ। आप मंत्र शुरू कीजिए।"

नित्या ने आखिरी कोशिश की, "पंडित जी, ये जबरदस्ती है! मुझे बचाइए!"

पंडित जी ने डरते हुए रुद्र की तरफ देखा। रुद्र ने अपनी जेब से एक बंदूक निकाल कर मंडप में ही रख दी।

पंडित जी समझ गए। उन्होंने मंत्र और तेज पढ़ने शुरू कर दिए।

"शादी सम्पन्न हुई! अब मंगलसूत्र पहनाइए!"

रुद्र ने एक काला धागा, जिसमें सोने का छोटा सा लॉकेट था, निकाला। ये कोई आम मंगलसूत्र नहीं था। इस पर R लिखा था।

उसने नित्या के करीब आकर, उसके बाल हटाए और उसकी गर्दन में वो मंगलसूत्र पहना दिया।

जैसे ही मंगलसूत्र ने नित्या की चमड़ी को छुआ, नित्या सिहर गई।

फिर रुद्र ने सिंदूर की डिब्बी ली।

"नहीं... प्लीज नहीं..." नित्या पीछे हटी।

रुद्र ने उसका चेहरा पकड़ा और उसकी मांग में सिंदूर भर दिया। भरपूर। गहरा लाल।

"आज से तू डॉ. नित्या नहीं..." रुद्र ने पूरी हवेली के सामने दहाड़ते हुए कहा, ताकि हर नौकर सुन ले, *"आज से तू श्रीमती नित्या रुद्र सिंह राजावत है। इस हवेली की मालकिन। अगर किसी ने इसकी तरफ आँख उठाकर भी देखा... तो उसकी आँखें निकाल लूंगा।"*

पूरी हवेली में तालियाँ बजने लगीं। नौकरों ने "राजावत भाभी की जय" के नारे लगाए।

नित्या बेहोश होकर मंडप में ही गिर गई।

जब उसकी आँख खुली तो वो रुद्र के कमरे में थी, उसी बेड पर। और रुद्र उसके पैरों के पास बैठा, उसके पैरों से बिछुए उतार रहा था और पायल पहना रहा था।

"ये क्या कर रहे हो?" नित्या ने पैर खींचे।

"शगुन है।" रुद्र ने प्यार से कहा, "राजावत खानदान की बहुएं नंगे पैर नहीं रहतीं।"

तभी बाहर से गोली चलने की आवाज आई - *धाँय!*

रुद्र एकदम से खड़ा हो गया। उसकी आँखें फिर से वैसी ही खतरनाक हो गईं।

खिड़की से देखा तो हवेली के बाहर पुलिस की 4 गाड़ियाँ खड़ी थीं।

अगले अध्याय में क्या होगा?

क्या नित्या की माँ पुलिस लेकर आ गई है रुद्र को गिरफ्तार करवाने? क्या रुद्र सच में गिरफ्तार हो जाएगा? और सुहागरात वाले दिन पुलिस के आने पर रुद्र क्या करेगा?

जानने के लिए पढ़िए - अध्याय 5 : सुहागरात और पुलिस का छापा*