Chapter 15—The Reason in Hindi Mythological Stories by Rudra Rudrani books and stories PDF | अध्याय 15 — वजह

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अध्याय 15 — वजह

ज्ञान को रोशनी पर पूरा सौ प्रतिशत भरोसा था। यह भरोसा आज का नहीं, बल्कि छह-सात साल पुराना था। ज्ञान के अनुसार, उसने बहुत पहले ही रोशनी के भीतर एक ऐसी दिव्य शक्ति को पहचान लिया था, जिसे वह उस समय भी पूरी तरह समझ नहीं पाया था। यही वजह थी कि इतने साल बीत जाने के बाद भी उसके मन में रोशनी को लेकर वह पुराना सवाल और उससे दोस्ती करने की इच्छा बनी हुई थी।

लेकिन इस बार ज्ञान सिर्फ़ दोस्ती का सवाल लेकर नहीं आया था। उसके मन में कुछ ऐसा था, जिसकी वजह वह रोशनी को बताना चाहता था। हालाँकि, उस वजह को जानने से पहले रोशनी को उसकी एक शर्त माननी थी।

ज्ञान ने रोशनी से कहा था कि वह उसकी बताई हुई बातों को पृथ्वी पर रहने वाले किसी भी जीवित प्राणी को नहीं बताएगी। न अपने माता-पिता को, न भाई-बहन को, न दोस्तों को और न ही किसी दूसरे व्यक्ति को। उसकी बात पृथ्वी से बाहर किसी को बताने की अनुमति थी, लेकिन पृथ्वी पर रहने वाले किसी भी जीवित प्राणी को नहीं।

यह शर्त अपने आप में अजीब थी। आखिर ऐसी कौन-सी बात हो सकती थी, जिसे जानने के बाद रोशनी को अपने ही संसार में किसी से कुछ कहने की अनुमति नहीं थी?

ज्ञान ने अभी तक इसका पूरा जवाब नहीं दिया था।

दूसरी तरफ़ रोशनी भी इस सवाल को लेकर उलझी हुई थी। उसने ज्ञान को तुरंत हाँ या ना नहीं कहा था। वह जानना चाहती थी कि आखिर ज्ञान उसी के पीछे क्यों पड़ा है। इतने साल बाद उसे ढूँढ़ने की क्या वजह थी? और अगर वह सिर्फ़ दोस्ती करना चाहता था, तो उस दोस्ती के पीछे इतनी बड़ी बात क्यों छिपी हुई थी?

रोशनी ने इस बारे में काफी सोचा। फिर एक रात उसे एक सपना आया। उस सपने में माँ जगदंबा, माँ दुर्गा या फिर कोई प्रकाश था—रोशनी के लिए उस अनुभव को पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं था। लेकिन उस अनुभव से उसे एक बात समझ में आई कि अंतिम फैसला उसे खुद करना है।

अगर उसके मन में ज्ञान को लेकर कोई गलत भावना नहीं है, अगर उसे लगता है कि ज्ञान गलत नहीं है और उसका अपना दिल भी इस दोस्ती के लिए तैयार है, तो उसे अपनी बात साफ़-साफ़ कह देनी चाहिए। बेवजह घुमाकर बात करने या अपने मन की बात छिपाने की जरूरत नहीं है।

ज्ञान को भी यही पसंद था। वह चाहता था कि कोई उससे बात करे, तो सीधे करे। अगर किसी बात से परेशानी है, तो साफ़ कह दे। अगर कोई बात अच्छी नहीं लगती, तो उसे भी बिना घुमाए बता दे। ज्ञान के भीतर शांति भी थी और क्रोध भी, लेकिन वह अपने क्रोध को अपने ऊपर हावी नहीं होने देता था।

उसकी सोच में वह केवल अपने जीवन तक सीमित नहीं था। वह खुद को जगत पिता के ज्ञान और अनंत ब्रह्मांड की शांति से जुड़ा हुआ मानता था। उसके लिए कुछ बातें ऐसी थीं, जिनका अर्थ सामान्य जीवन की घटनाओं से कहीं आगे तक जाता था।

अगले दिन रोशनी ने ज्ञान को फोन किया।

उसने कहा, “ज्ञान, मैंने अभी तक यह फैसला नहीं किया है कि मैं तुमसे दोस्ती करूँगी या नहीं। लेकिन मैं तुमसे एक बात जानना चाहती हूँ। आखिर तुम मेरे पीछे क्यों पड़े हो? तुम्हें मुझसे ही दोस्ती क्यों करनी है?”

ज्ञान ने उसकी बात सुनी और कहा, “रोशनी, इसकी वजह बहुत बड़ी है। मैं तुम्हें सब कुछ बताऊँगा, लेकिन फोन पर नहीं। कल सुबह तुम मेरे घर आ जाना। मैं तुम्हें अपने घर का पता भेज दूँगा। वहाँ आकर आराम से बात करेंगे।”

रोशनी ने पूछा, “लेकिन तुम मुझे अभी क्यों नहीं बता सकते?”

ज्ञान ने जवाब दिया, “क्योंकि कुछ बातें सामने बैठकर समझाना ज्यादा सही रहेगा। कल तुम आ जाना। उसके बाद हम अपनी यात्रा की शुरुआत करेंगे। फिर तुम्हारे मन में जो हिचकिचाहट है, वह तुम्हारे साथ रहेगी या खत्म हो जाएगी, यह तुम्हें खुद समझ आ जाएगा। अगर तुमने हाँ कह दिया, तो हो सकता है कि ऐसा कुछ देखने को मिले, जो इससे पहले कभी किसी ने न देखा हो।”

ज्ञान ने उसे यह भी याद दिलाया कि जो कुछ वह उसे बताने वाला है, उसे पृथ्वी पर रहने वाले किसी भी जीवित प्राणी को नहीं बताना है। यह कोई सामान्य बात नहीं थी, इसलिए वह चाहता था कि रोशनी इस शर्त को गंभीरता से ले।

रोशनी ने उसकी बात मान ली और अगले दिन उसके घर आने के लिए तैयार हो गई।अगली सुबह

अगली सुबह करीब साढ़े नौ बजे रोशनी ज्ञान के घर पहुँची।

ज्ञान का घर करीब एक करोड़ रुपये का था। घर अच्छा था, लेकिन रोशनी को इसे देखकर कोई बहुत बड़ा आश्चर्य नहीं हुआ। आखिर ज्ञान एक बड़ी कंपनी का मालिक था। उसके पास पैसा था और वह अपनी मेहनत से इस मुकाम तक पहुँचा था। इसलिए उसका एक अच्छा घर होना रोशनी को असामान्य नहीं लगा।

उस दिन ज्ञान ने काम से छुट्टी ले रखी थी। उसके माता-पिता घर पर ही थे और उसका भाई मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। उसकी पढ़ाई भी लगभग पूरी होने वाली थी।

रोशनी ने दरवाजे पर पहुँचकर घंटी बजाई।

दरवाजा ज्ञान की माँ ने खोला।

उन्होंने रोशनी को देखा और पूछा, “बेटा, किससे मिलना है?”

रोशनी ने विनम्रता से जवाब दिया, “आंटी, ज्ञान सर ने मुझे बुलाया था।”

यह सुनकर ज्ञान की माँ ने कहा, “अच्छा, तुम ज्ञान से मिलने आई हो? अंदर आ जाओ बेटा। और हाँ, घर में उसे सर मत कहना। यहाँ वह तुम्हारा बॉस नहीं है, यहाँ वह सिर्फ़ ज्ञान है।”

रोशनी अंदर आ गई।

ज्ञान की माँ उसे बैठाकर चाय-नाश्ता देने लगीं। उन्होंने बताया कि ज्ञान ने उनसे कहा था कि आज कोई आने वाला है, लेकिन उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि इतनी अच्छी लड़की उससे मिलने आएगी।

बातचीत के दौरान उन्होंने रोशनी के साँवले रंग का भी जिक्र किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उसमें कुछ खास है। उनके अनुसार, अगर ज्ञान ने खुद उसे घर बुलाया है, तो जरूर उसके भीतर कुछ ऐसी बात होगी, जिसे ज्ञान ने पहचाना है। आखिर ज्ञान यूँ ही किसी को अपने घर नहीं बुलाता था।

रोशनी उनके साथ बैठकर चाय-नाश्ता कर रही थी। इसी दौरान ज्ञान अपने कमरे से बाहर आया।

उसने देखा कि रोशनी उसके परिवार के साथ बैठी हुई है और चाय-नाश्ता कर रही है।

ज्ञान घर पर हमेशा की तरह साधारण कपड़ों में था। वह दिखावा करने वालों में से नहीं था। भले ही उसका घर एक करोड़ रुपये का हो और वह एक बड़ी कंपनी का मालिक हो, लेकिन घर पर उसका रहन-सहन बिल्कुल साधारण रहता था। वह घर में सूट पहनकर या अपनी हैसियत दिखाकर नहीं रहता था। ऑफिस में वह काम के अनुसार कपड़े पहनता था, लेकिन घर पर वही सामान्य ज्ञान था।

ज्ञान ने रोशनी को देखा और फिर उससे कहा कि वह उसके कमरे में आ जाए, ताकि दोनों आराम से बात कर सकें।ज्ञान के कमरे में

कमरे में पहुँचने के बाद ज्ञान ने रोशनी से कहा, “रोशनी, तुम मुझसे जो भी पूछना चाहती हो, पूछ सकती हो। मैं तुम्हारे सवालों का जवाब दूँगा, लेकिन सवाल सही दिशा में होने चाहिए। अगर तुम कुछ समझना चाहती हो, तो सीधे पूछना। अगर कोई बात अच्छी न लगे, तो वह भी साफ़ बता देना।”

फिर उसने उसे उसकी शर्त याद दिलाई। उसने कहा कि जो बातें वह बताने वाला है, उन्हें पृथ्वी पर रहने वाले किसी भी जीवित प्राणी को नहीं बताना है।

इसके बाद ज्ञान ने बताया कि आज वे पूरा दिन साथ बिताएँगे। पहले कुछ घंटों तक बैठकर बात करेंगे। वह रोशनी को अपनी वजह समझाएगा, आगे वे कहाँ जाने वाले हैं, उनकी यात्रा कैसी होगी और उससे जुड़ी बाकी बातें भी बताएगा। उसके बाद दोनों खाना खाएँगे और फिर वह उसे बाहर घुमाने ले जाएगा।

ज्ञान ने एक बार फिर कहा, “रोशनी, मेरे साथ कोई भी बात घुमाकर मत करना। अगर तुम्हें कुछ गलत लगे, तो सीधे बोल देना। मुझे साफ़-साफ़ बात करने वाले लोग पसंद हैं।”

यह सुनकर रोशनी को अपने उस सपने की बात याद आई। उस अनुभव में भी उसे यही समझाया गया था कि ज्ञान सीधे बात करता है और उसे भी साफ़ शब्दों में अपनी बात कहनी चाहिए।

अब रोशनी ने अपने मन का सबसे बड़ा सवाल पूछने का फैसला किया।

उसने कहा, “ज्ञान, तुम मुझे ही क्यों ढूँढ़ रहे थे? इतने साल बाद भी तुम्हें मुझसे दोस्ती करने की इच्छा क्यों है? आखिर इसकी वजह क्या है?”

ज्ञान ने उसकी तरफ़ देखा और अपनी बात शुरू की।छह-सात साल पुरानी बात

ज्ञान ने कहा, “रोशनी, हम दोनों एक बहुत छोटे स्कूल में पढ़ते थे। हमारा स्कूल इतना छोटा था कि एक ही कमरे में चार कक्षाओं के बच्चे बैठते थे। मैं तुम्हें रोज देखता था, लेकिन तुमने शायद कभी मुझे उस तरह ध्यान से नहीं देखा। तुम हमेशा मेरे सामने ही रहती थीं, लेकिन उस समय मेरे मन में ऐसा कुछ नहीं था कि मैं तुम्हारे बारे में बैठकर सोचूँ।

“फिर मैं वह स्कूल छोड़कर दूसरे स्कूल में चला गया, जो पहले वाले स्कूल से काफी दूर था। वहाँ जाने के बाद धीरे-धीरे मुझे तुम्हारी याद आने लगी। मुझे समझ में आया कि मैं तुम्हें याद कर रहा हूँ और तुमसे दोस्ती करना चाहता हूँ।”

ज्ञान ने कुछ देर रुककर अपनी बात स्पष्ट की।

“लेकिन एक बात समझ लो, रोशनी। मैं तुमसे प्यार करने के लिए नहीं आया हूँ। मेरे मन में तुम्हारे लिए हमेशा दोस्ती की भावना रही है। हमारी दोस्ती आज तक हुई ही नहीं, लेकिन मेरे मन में तुम्हें अपना दोस्त बनाने की इच्छा जरूर रही है। सच कहूँ तो आज तक मेरा कोई सच्चा दोस्त नहीं है।”

रोशनी उसकी बात सुन रही थी।

ज्ञान ने आगे कहा, “तुम्हें याद होगा कि मैंने एक बार टीचर के फोन से तुम्हें कॉल किया था। उस समय तुम दसवीं कक्षा में थीं। मैंने तुमसे पूछा था कि क्या हम दोस्त बन सकते हैं। तुमने जवाब दिया था—‘पागल हो क्या?’

“मैंने तुम्हारी बात का बुरा नहीं माना था। मुझे लगा कि तुम स्कूल में होगी और शायद उस समय तुम्हारे लिए इस तरह बात करना ठीक नहीं होगा। मैंने यह नहीं सोचा कि तुमने जानबूझकर मेरा अपमान किया। मैंने उस बात को वहीं छोड़ दिया।

“कभी-कभी जब मैं साइकिल से तुम्हारे घर के पास से निकलता था, तो मेरी नजर तुम्हारे घर की तरफ चली जाती थी। लेकिन मैं वहाँ रुककर तुम्हें देखने या तुम्हारे घर के आसपास रहने की कोशिश नहीं करता था। मैं अपनी राह चला जाता था।”

ज्ञान ने यह सब किसी शिकायत की तरह नहीं कहा। वह सिर्फ़ रोशनी को उस समय की अपनी सोच समझा रहा था। उसके मन में पुरानी बातों को लेकर कोई हिसाब माँगने की इच्छा नहीं थी। वह बस चाहता था कि रोशनी को पता चले कि इतने सालों तक उसके मन में क्या चलता रहा था।सपना, मेहनत और एक वादा

ज्ञान ने अपनी बात आगे बढ़ाई।

“दसवीं के समय ही मैंने तय कर लिया था कि मैं बारहवीं के बाद पढ़ाई नहीं करूँगा। उसके बाद मैंने बारहवीं की परीक्षा दी। मैंने उसकी तैयारी भी ठीक से नहीं की थी, फिर भी परीक्षा में अच्छा किया और पास हो गया।

“रिजल्ट आने के करीब एक हफ्ते बाद मैंने सौम्या सिंह का एक वीडियो देखा। उसी के बाद मेरी दिलचस्पी Python और कोडिंग में बढ़ने लगी। मुझे यह काम पसंद आया। फिर मैंने उसी दिशा में सीखना शुरू किया और अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए मेहनत करने लगा।”

ज्ञान के लिए यह उसके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। उसने तय कर लिया था कि अब उसे अपने लक्ष्य पर ध्यान देना है और अपनी जिंदगी को उस मुकाम तक पहुँचाना है, जहाँ पहुँचने का उसने सपना देखा था।

उसने रोशनी से कहा, “मुझे उस समय लगा कि अगर मैं एक साथ तुम्हारे बारे में भी सोचता रहूँ और अपने सपने पर भी पूरा ध्यान दूँ, तो मेरा ध्यान बँट जाएगा। मैं अपने लक्ष्य को लेकर गंभीर था। इसलिए मैंने माँ जगदंबा, माँ दुर्गा के सामने एक वादा किया कि जब तक मैं अपना सपना पूरा नहीं कर लेता, तब तक तुम्हारे बारे में नहीं सोचूँगा।

“लेकिन सच यह है कि मैं तुम्हें पूरी तरह कभी भूल नहीं पाया। कभी-कभी तुम्हारी याद आ जाती थी। ऐसा नहीं था कि हर समय तुम्हारे बारे में सोचता रहता था, लेकिन तुम्हारी याद मेरे मन में कहीं न कहीं बनी रही।”

फिर ज्ञान ने अपनी जिंदगी से जुड़ी एक और बात बताई।

उसने कहा कि वह अपने भविष्य की कहानी भी लिख रहा था। उस कहानी में उसके जीवन के आगे के सालों से लेकर उसकी मृत्यु तक की बातें थीं। वह कहानी कई हिस्सों में थी, उसमें बहुत-सा रहस्य था और उसे एक बार में पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं था। वह कहानी ऑनलाइन भी उपलब्ध थी और उसके अनुसार, उसमें अगले जन्म और इस जन्म के बीच भी संबंध था।

ज्ञान ने इस बारे में ज्यादा विस्तार से बताने के बजाय कहा, “उस कहानी की बातें अभी रहने दो। उसके बारे में आगे कभी समझाऊँगा। अभी हम उसी बात पर रहते हैं, जिसके लिए तुम यहाँ आई हो।”आखिर वजह क्या थी?

ज्ञान ने अपनी बात पूरी करते हुए कहा, “रोशनी, मैंने अपने लक्ष्य के लिए बहुत मेहनत की। धीरे-धीरे मैं वहाँ तक पहुँचा, जहाँ आज हूँ। मैंने अपनी कंपनी बनाई, अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश की और उस वादे को भी निभाया, जो मैंने खुद से किया था।

“अब जब मैं अपने जीवन में इस मुकाम तक पहुँच गया हूँ और विश्वयात्रा पर निकलना चाहता हूँ, तो उससे पहले मेरे मन में एक पुराना सवाल था, जिसका जवाब मैं जानना चाहता था।

“मैं जानना चाहता था कि क्या तुम आज भी मुझसे दोस्ती करना चाहोगी या नहीं। इसलिए मैं तुम्हें ढूँढ़ते हुए यहाँ तक आया हूँ। मैं नहीं चाहता था कि इतने सालों से मन में मौजूद यह सवाल बिना जवाब के ही रह जाए।”

ज्ञान की बात पूरी हुई।

रोशनी ने उसकी पूरी कहानी सुनी थी। उसे अब यह तो समझ में आ गया था कि ज्ञान उसे इतने सालों बाद क्यों ढूँढ़कर लाया था और उसके मन में दोस्ती को लेकर पुरानी इच्छा क्यों बनी हुई थी।

लेकिन क्या यही वह बहुत बड़ी वजह थी, जिसके बारे में ज्ञान ने फोन पर कहा था?

या फिर इस वजह के पीछे भी कोई ऐसी बात थी, जिसे जानना अभी बाकी था?

यह सवाल अभी खुला हुआ था।

ज्ञान ने घड़ी की तरफ़ देखा और कहा, “चलो, अब खाना खाने का समय हो गया है।”

इसके बाद ज्ञान और रोशनी दोनों उठे और खाना खाने चले गए।

जानो अगले अध्याय में क्या होगा ज्ञान क्या करने वाला है रोशनी का क्या फैसला होगा।