Neha ❤️‍? Sagar in Hindi Love Stories by Sagar Kumar books and stories PDF | Neha aur Sagar ki ek Adhuri Prem Kahani ❤️‍?

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Neha aur Sagar ki ek Adhuri Prem Kahani ❤️‍?

Part 1❤️‍


मेरा नाम सागर है। मैंने खुद की एक ऐसी कहानी बनाई है जिसे सुननान का हिंट बता देता हूं। कहानी में दो ऐसे लोग होते हैं जो बड़े होने पर अलग हो जाते हैं, लेकिन वो दोबारा मिलते हैं पर वो दोनों आपस में बात नहीं करते। अब हम कहानी को शुरू करने वाले हैं कि इस कहानी में कौन विलेन बनता है और कौन विलेन के बीच में आ जाता है। और हां दोस्तों, इस कहानी के लड़के का नाम मेरे नाम पर ही होने वाला है। चलिए शुरू करते हैं...
एक लड़का होता है, उसका नाम सागर है और दूसरी तरफ उसकी दोस्त जिसका नाम नेहा होता है। बचपन में हम दोनों साथ पढ़ते थे, साथ खेलते थे और बहुत ज्यादा खुश रहा करते थे। हम कंचे खेलते, कार्टून देखते और मैं कभी-कभी उसे चिढ़ाकर बुलाता जैसे नकटो, नकछड़ी, कमक्कल और नेहा भी मुझे पोपलू, भोंदू ऐसे ही कुछ नाम से बुलाती। पर मैं सागर, जहां उसके घर के पास रहता था वहां मेरा खुद का घर नहीं था, किराए का घर था। मकान मालिक ने घर का किराया ज्यादा मांगना शुरू कर दिया, तो उसी वजह से मुझे वहां से घर खाली करना पड़ा। और हां, जब मैं घर खाली कर रहा था नेहा उस दिन अपने स्कूल गई थी, उसे नहीं पता था कि मैं अपना घर खाली कर रहा हूं।
मैंने and मेरे परिवार ने मिलकर सारा सामान एक बड़े से ऑटो में सेट कर दिया। और जब मैं जा रहा था, तभी मैं अपनी नजर नेहा के घर पर टिकाता हूं। तभी पीछे नेहा के साथ बिताई मेरी सारी यादें मेरी आंखों के सामने घूमने लगती हैं। जाते-जाते मैं याद करता हूं वह पल जब मैं और वह साथ में पतंगबाजी करते थे, साथ में मस्ती और शैतानी किया करते थे। फिर मैं वह सारी यादें अपने दिल में समेटकर वहां से चला जाता हूं।
दूसरी तरफ नेहा आइसक्रीम खाते-खाते अपने घर की तरफ आ रही थी और वह बोलते हुए आ रही थी कि "मैं आज अपनी क्लास में पंजे में जीत गई, बड़ा मजा आया। सागर को बताऊंगी तो साला जल जाएगा"। और नेहा जब अपने घर की तरफ जा रही थी, तभी वह खुशी से चिल्लाते हुए कि "मैं जीत गई, मैं जीत गई!" सागर के घर की तरफ जाने लगती है। उसकी आवाज सुनकर नेहा की मम्मी बाहर आती हैं और कहती हैं, "सबसे पहले घर आ, नहाकर खानावाना खा ले"। वह अपना खाना फटाफट खत्म करके अपनी मम्मी से कहती है, "मम्मी मैं सागर के घर जा रही हूं"।
तभी नेहा की मम्मी नेहा को रोक कर बताती हैं कि "बेटा सागर घर पर नहीं है"। नेहा बोली, "क्या सागर घर पर नहीं है? वो साला किसके साथ खेलने गया है मम्मी? मुझे बस एक बार उसका नाम बता दो, मैं उस साले का पूरा खानदान उजाड़ के रख दूंगी"। उसकी मम्मी नेहा से कहती हैं, "नेहा, सागर अब हमारे साथ नहीं है। वो अपना घर का सारा सामान लेकर उस घर को छोड़ के चला गया"।
नेहा हैरान हो जाती है और रोते हुए सागर के घर के पास पहुंचकर देखती है, तो वहां सचमुच एक बड़ा ताला लगा हुआ था। नेहा उसी घर के सामने अपने घुटनों पर आकर फूट-फूट कर रोने लगती है। बहुत देर तक रोने के बाद वो अपने घर जाती है, मम्मी से बोलती है, "मम्मी सागर कहां गया है? क्या आपको पता है?" नेहा की मम्मी कहती हैं, "बेटा मैं तो शॉपिंग करने गई थी, मुझे नहीं पता कि सागर की फैमिली कहां गई और कब गई"।
नेहा बोली, "अच्छा ठीक है।" ऐसा कहकर वो अपने कमरे में जाकर रोने लगती है। रोते हुए कहती है, "सागर कहां हो तुम? मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती। तुम मुझे छोड़कर क्यों चले गए?" ऐसा कहकर नेहा और रोने लगी। उसने हंसना छोड़ दिया, ज्यादा खाना छोड़ दिया और ज्यादा बोलना भी छोड़ दिया। वो ना किसी से कुछ कहती ना बोलती और ना ही कुछ करती। वो अपने सागर की तस्वीर मन में बिठाकर, दिल में बसाकर बस अपनी जिंदगी गुमसुम जिए जा रही थी।तभी पलक झपकते ही बाकी साल बीत गए। नेहा बड़ी तो हो गई पर उसका दर्द अभी भी उसके साथ था। वह अभी भी वैसी ही थी जैसी वह तब थी, बस यह मान लो कि बस हाइट बड़ी है और सब कुछ सेम है। और वहीं दूसरी तरफ सागर एक ऐसा लड़का बन चुका था जैसा वो पहले नहीं था। एक हैंडसम चेहरा, मस्कुलर बॉडी और चेहरे पर गजब का एटीट्यूड, अकड़ और थोड़ा सख्त दिल।पर कहानी में मोड़ तब आता है जब सागर उस स्कूल में अपना एडमिशन करवाता है जिसमें नेहा पढ़ती है। सागर अपने चार दोस्तों के साथ पूरा स्कूल घूमने के बाद प्रिंसिपल्स ऑफिस जाता है। सागर और उसके दोस्त अपना एडमिशन करवाने के बाद घर चले जाते हैं, लेकिन उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि अगले ही दिन उनकी जिंदगी पूरी तरह बदलने वाली है। क्या सागर और नेहा इतने सालों बाद आमने-सामने आएंगे? क्या नेहा अपने बचपन के दोस्त को पहचान पाएगी? और आखिर इस कहानी का असली विलेन कौन होगा? इन सभी सवालों के जवाब मिलेंगे कहानी के अगले भाग में.